इन्‍दौर 60 फीट ऊंचाई पर 90 डिग्री घूम गई थी लिफ्ट, तिनकों की तरह बिखरा परिवार दादा और पोतो को एक ही चिता पर रखे दादा-पोते के शव, कारोबारी पुनीत अग्रवाल का परिवार


इंदौर/महू। नईदुनिया टीम। Indore Lift Accident मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के महू के समीप पर्यटन स्थल पातालपानी में बने अपने ही फार्म हाउस पर 31 दिसंबर की शाम हुए लिफ्ट हादसे से पाथ इंडिया ग्रुप के एमडी पुनीत अग्रवाल का परिवार तिनके की तरह बिखर गया। दूसरे दिन जब पुलिस व फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंची तो पाया कि लिफ्ट 60 फीट ऊंचाई पर 90 डिग्री घूम गई थी। इसी वजह से उसमें सवार पुनीत अग्रवाल, उनके पोते, बेटी-दामाद व दो अन्य रिश्तेदारों समेत छह लोग चंद सेकंड में फर्श पर आ गिरे और उनकी मृत्यु हो गई। एक अन्य परिजन घायल है।

सात लोगों की क्षमता नहीं थी

हादसे के दूसरे दिन बुधवार को पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम पातालपानी स्थित फार्म हाउस पर जांच के लिए पहुंची। जांच की सुई पूरी तरह लिफ्ट पर ही टिकी हुई है। प्रारंभिक जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि लिफ्ट की क्षमता सात लोगों का वजन सहने लायक नहीं थी।

सभी के सिर में चोट आई

ऊंचाई से गिरने से लिफ्ट में सवार सातों लोगों के सिर में गंभीर चोट आई। इनमें से पुनीत अग्रवाल, बेटी पलक, दामाद पलकेश, पोता नव, रिश्तेदार गौरव और आर्यवीर की मौत हो गई। जबकि गौरव की पत्नी निधि इंदौर के चोइथराम अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। उसकी हालत गंभीर है।

लिफ्ट के कांट्रेक्टर से नहीं हो सकी पूछताछ

महू तहसील के बड़गोंदा थाने के प्रभारी रॉबर्ट गिरवाल के साथ फॉरेंसिक विशेषज्ञ बीएल मंडलोई ने लिफ्ट का जायजा लिया। लिफ्ट के कांट्रेक्टर से संपर्क नहीं होने से उससे पूछताछ नहीं हो पाई। जानकारों का कहना है कि इतनी ऊंचाई पर चढ़ने-उतरने के लिए यह लिफ्ट सुरक्षित नहीं थी। बड़ा सवाल है कि कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र के जानकार होने के बावजूद पुनीत अग्रवाल को इस खतरे का आभास क्यों नहीं हुआ

शाम छह बजे पहुंचे थे

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पुनीत और उनके परिवार के सदस्य मंगलवार शाम छह बजे तीन गाड़ियों से फार्म हाउस पहुंचे थे। नए साल के मौके पर वे बेटी पलक, दामाद पलकेश, पलकेश के जीजा गौरव, उनकी पत्नी निधि और बेटे आर्यवीर को पहाड़ी पर बना फार्म हाउस घुमाने लाए थे। घटना के समय लिफ्ट को बाहर से एक कर्मचारी कैलाश रिमोट से ऑपरेट कर रहा था। लिफ्ट से नीचे आने के दौरान पुनीत के पुत्र निपुण ऊपर ही रह गए थे।

कांक्रीट के फर्श व अन्य निर्माणों से टकराकर लहूलुहान हो गए

परिवार के सवार होते ही लिफ्ट करीब 60 फीट की ऊंचाई से कुछ ही नीचे गई और असंतुलित होकर एक ओर झुकने लगी। सभी लोग घबराए और चिल्लाने लगे, पलभर में लिफ्ट 90 डिग्री घूम गई और सभी लोग नीचे गिरे। नीचे गिरते ही कांक्रीट के कठोर फर्श और आसपास के दूसरे निर्माणों से टकराए। इसके बाद वहां मौजूद लोग चिल्लाने लगे और लहूलुहान होकर बेसुध पड़े लोगों को तुरंत उठाकर गाड़ी में डालने लगे। सभी गाड़ियां सीधे अस्पताल पहुंचीं। तब तक कुछ लोगों की मौत हो चुकी थी।

पुलिस इन बिंदुओं की कर रही जांच

-क्या इस लिफ्ट को केवल सामान ले जाने के लिए ही लगवाया गया था अथवा इसे बाद में भी उपयोग किया जाना था?

-अगर इसका बाद में उपयोग होना था तो क्या इसके लिए मप्र एलिवेटर एक्ट के तहत अनुमति ली गई थी या ली जाने की तैयारी थी?

-फार्म हाउस के आसपास की जमीन वन विभाग के आधिपत्य में आती है। ऐसे में फार्म हाउस की जमीन की जांच भी हो सकती है? (हालांकि बताया जाता है कि अग्रवाल ने यह जमीन कुछ वर्षों पहले खरीदी है।)

सैकड़ों लोगों ने दी नम आंखों से अंतिम बिदाई

पुनीत अग्रवाल और उनके पोते नव की शवयात्रा बुधवार महू से सुबह 11 बजे निकली। बेटी पलक और पलकेश को परिजन ने इंदौर के निपानिया स्थित घर से अंतिम विदाई दी।। सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी।

एक ही चिता पर रखे दादा-पोते के शव

महू के मुक्तिधाम पर उस समय माहौल और ज्यादा गमगीन हो गया जब एक ही चिता पर दादा-पोते (पुनीत व नव) दोनों के शव रखे गए और बेटे विपुल ने पिता व पुत्र को मुखाग्नि दी।

पुनीत अग्रवाल की शवयात्रा में हजारों लोगों के साथ एक श्वान भी दिखाई दिया। यह श्वान पुनीत के निवास परिसर में अकसर देखा जाता था। हालांकि यह उनका पालतू श्वान नहीं था। उनकी शवयात्रा में यह श्वान मुक्तिधाम तक गया। श्वान को उनके परिसर में रहने वाले लोग ही खाना देते हैं।

कोटा के जेके लोन अस्पताल में 34 दिन में 106 बच्चों की मौत हुई, शुक्रवार को 2 बच्चियों ने दम तोड़ा, मानवाधिकार आयोग ने सरकार से मांगी रिपोर्ट


Kota News : इस बीच केन्द्र सरकार की टीम भी राजस्थान पहुंच गई है और शनिवार को अस्पताल का दौरा कर स्थितियों का जायजा लेगी।
  • जिन मासूमों की मौत हुई, उनके परिजन बोले- जेके लोन अस्पताल में मंत्री के लिए ग्रीन कारपेट बिछाने से क्या बीत रही, हमसे पूछें
  • भास्कर ने राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा से पूछा था- जयपुर से कोटा 4 घंटे दूर, वहां अब तक क्यों नहीं गए; मंत्री बोले- जयपुर से ही सिस्टम सुधार रहा हूं

कोटा (राजस्थान). जेके लोन सरकारी अस्पताल में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। शुक्रवार सुबह यहां एक और नवजात ने दम तोड़ दिया। जिस बच्ची की मौत हुई, उसका 15 दिन पहले ही जन्म हुआ था। माता-पिता उसका नाम भी नहीं रख पाए थे। जयपुर से 4 घंटे की दूरी होने के बावजूद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने गुरुवार तक इस अस्पताल का दौरा नहीं किया था। शुक्रवार को वे अस्पताल पहुंचे तो प्रशासन ने रातों-रात अस्पताल का कायाकल्प कर दिया। सभी वार्ड में सफाई और पुताई हो गई। बेड पर नई चादरें बिछा दी गईं। मंत्री के स्वागत में ग्रीन कारपेट बिछा दिया गया। लेकिन जब किरकिरी हुई तो इसे हटा लिया। इस बीच, मंत्री के निरीक्षण के बाद अस्पताल में एक और बच्ची की मौत हो गई। इस तरह 34 दिन में 106 बच्चों की मौत हो चुकी है।

अस्पताल का कायाकल्प हुआ
अस्पताल में सुबह 8 बजे ही सभी डॉक्टर अपने कमरों में पहुंच गए थे। मरीजों और उनके परिजन से कहा गया कि वे स्वास्थ्य मंत्री के सामने सबकुछ अच्छा ही बताएं। मंत्री की आवभगत के लिए अस्पताल के मेन गेट पर बिछाए गए ग्रीन कारपेट पर मरीजों और उनके परिजन ने आपत्ति जताई। मरीजों का कहना था कि मंत्रीजी यहां किसी उद्घाटन समारोह में आ रहे हैं या अस्पताल की समस्याएं दूर करने? जिन मासूमों की मौत हुई, उनके परिजन बोले- जेके लोन अस्पताल में मंत्री के लिए ग्रीन कारपेट बिछाने से क्या बीत रही, हमसे पूछें। जेके लोन कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला इसी क्षेत्र से सांसद हैं। मंत्री रघु शर्मा के दौरे के चलते 10 भाजपा कार्यकर्ता विरोध के लिए अस्पताल पहुंचे थे, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया। वहां कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे। 

बच्ची की दादी ने कहा- डॉक्टर कहते रहे कि सही कर देंगे
शुक्रवार सुबह जिस बच्ची की मौत हुई, उसकी दादी अनारा देवी ने बताया, ”बेटे ओम प्रकाश और बहू रेखा के घर 15 दिन पहले बेटी हुई थी। बच्ची का जन्म पास के गांव रूपाहेड़ा में ही हुआ था। तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से उसे जेके लोन अस्पताल में रेफर किया गया था। बच्ची का ठीक से इलाज नहीं हुआ। इस अस्पताल में न जाने कितने ही बच्चे मर गए। डॉक्टर फिर भी कहते रहे कि सही कर देंगे। फिर भी सही नहीं हुई। बीमारी के बारे में हम तो जानते नहीं। डॉक्टर ही जानता है।” जब भास्कर ने डॉक्टरों से इस बारे में पूछा तो उनका कहना था कि बच्ची प्री-मैच्योर थी।

मंत्री के दौरे के बाद एक और बच्ची की मौत हुई
स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के बाद जिस एक और बच्ची की मौत हुई, वह दोसा की रहने वाली थी। उसका नाम टीना था और वह 5 महीने की थी। उसके पिता लालाराम ने बताया कि बच्ची को पहले बूंदी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां उपचार नहीं होने पर उसे कोटा रेफर कर दिया गया। जेके लोन अस्पताल में वे उसे सुबह 11 बजे लेकर आए थे। शाम 5:30 बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया। 

दौरे के बाद मंत्री ने राहुल-प्रियंका को टैग कर ट्वीट किए

Dr. Raghu Sharma‏Verified account @RaghusharmaINCFollowFollow @RaghusharmaINCMore

आज कोटा में जेकेलोन अस्पताल का दौरा किया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग कर पूरे मामले की विस्तार से जानकारी ली। दिसंबर माह में कुल 1438 बच्चे भर्ती हुए जिसमे से 100 बच्चों की मृत्यु हुई। @RahulGandhi @priyankagandhi @ashokgehlot51 @avinashpandeinc (1/4)

6:35 AM – 3 Jan 2020

22 replies43 retweets133 likesReply 22 Retweet 43 Like 133

  1. Dr. Raghu Sharma‏Verified account @RaghusharmaINC 1h1 hour agoMoreजिन बच्चों की मृत्यु हुई उनमे से 70 न्यू बोर्न इंटेंसिव केअर यूनिट(NICU) में भर्ती हुए इनमें से ज्यादातर बच्चों का वजन जन्म के समय 2.5 किलो से कम था, उनमें से 49 बच्चे अत्यंत गंभीर थे। एक भी बच्चे की मृत्यु होना हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इस पर राजनीति होना गलत है। (2/4)5 replies16 retweets30 likesReply 5 Retweet 16 Like 30
  2. Dr. Raghu Sharma‏Verified account @RaghusharmaINC 1h1 hour agoMore15 जनवरी तक सेंट्रलाइज्ड ऑक्सिजन लाइन लगाने के हमने निर्देश दे दिए हैं साथ ही अस्पताल प्रशासन के पास 6 करोड़ का पर्याप्त बजट उपलब्ध था अधिकांश इक्विपमेंट्स को सुधार दिया गया है और बाकी को तुरंत सुधरवाने या नए लेने के निर्देश दे दिए हैं।(3/4)4 replies24 retweets55 likesReply 4 Retweet 24 Like 55
  3. Dr. Raghu Sharma‏Verified account @RaghusharmaINC 1h1 hour agoMoreजिन भी लोगों ने लापरवाही बरती है उन पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। मौके पर प्रभारी मंत्री श्री प्रताप सिंह खाचरियावास जी और एमएलए श्री दानिश अबरार जी साथ में मौजूद रहे। (4/4)7 replies22 retweets58 likesReply 7 Retweet 22 Like 58

पिछले महीने जेके लोन अस्पताल में बच्चे लगातार दम तोड़ते रहे, लेकिन मंत्री रघु शर्मा खुद कोटा जाने की बजाए जयपुर में बयानबाजी कर पिछली भाजपा सरकार के वक्त बच्चों की मौतों का आंकड़ा बताते रहे। जब 25 दिसंबर के बाद आंकड़ा अचानक बढ़ने लगा तो उन्होंने सिर्फ एक जांच कमेटी को कोटा भेजकर इतिश्री कर ली। इसकी रिपोर्ट पर सिर्फ कुछ डॉक्टरों को इधर-उधर किया गया। गुरुवार को भास्कर ने जब रघु शर्मा से पूछा कि जयपुर से कोटा 4 घंटे की दूरी पर है, अब तक क्यों नहीं गए? तो जवाब था- जयपुर से ही सिस्टम में सुधार कर रहा हूं। कोटा तो कभी भी चला जाऊंगा।


भास्कर पड़ताल : जिन अस्पतालों में बच्चों का होता है इलाज, वहां 44 वेंटीलेटर, 1430 वार्मर खराब
प्रदेश में हर साल 28 दिन से कम उम्र में ही 34 हजार से ज्यादा बच्चे दम तोड़ देते हैं। यदि एक वर्ष तक की उम्र में जाएं तो यह आंकड़ा 41 हजार से अधिक तक चला जाता है। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के लिए काम आने वाले 230 में से 44 वेंटीलेटर तो खराब हैं। वहीं प्रदेश भर में 1430 वार्मर खराब हैं। नतीजतन हर उम्र के प्रति सप्ताह 490 से अधिक बच्चेदम तोड़ रहे हैं।

सरकारी अस्पतालकितने वेंटीलेटर खराब
बीकानेर6
अजमेर4
भरतपुर5
जयपुर6
जोधपुर7
उदयपुर5
काेटा11

(आंकड़ा 21 दिसंबर 19 तक)

हर दिन 180 बच्चे रेफर हो रहे
जिला अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में सुविधाएं नहीं होने की वजह से मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों (जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर) में हर दिन औसतन 180 बच्चे रेफर होकर आते हैं। प्रदेश के एक करोड़ 72 लाख बच्चों के लिए 124 डॉक्टर्स की सख्त जरूरत है। सरकारी अस्पताल संचालक मशीनों के खराब होने की जानकारी ई-उपकरण पोर्टल पर नहीं देते। वजह यह कि निजी लैब संचालकों से उनकी सांठगांठ होती है। कई सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी का एक भी डॉक्टर नहीं है। किसी बच्चे को कार्डियो, न्यूरो और नेफ्रो सम्बन्धी बीमारी होती है तो उसके लिए इलाज संभव नहीं है।

मध्य प्रदेश के मेडिकल टीचर्स 9 जनवरी से करेंगे काम बंद आंदोलन


मेडिकल टीचर्स (medical teachers association) 1 जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान और एमसीआई के हिसाब से प्रमोशन पॉलिसी बनाने की मांग कर रहे हैं.

भोपाल. मध्य प्रदेश (madhya pradesh) के मेडिकल टीचर्स (medical teachers association) 9 जनवरी से काम बंद कर आंदोलन करेंगे. तमाम मंत्रियों से बातचीत बेनतीजा रहने के बाद ऐसोसिएशन ने ये फैसला किया. इससे पहले प्रदेश के 13 मेडिकल कॉलेजों (medical colleges) के 7 टीचर्स अपने इस्तीफे डीन को सौंप चुके हैं. मेडिकल टीचर्स (medical teachers association) 1 जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान और एमसीआई के हिसाब से प्रमोशन पॉलिसी बनाने की मांग कर रहे हैं.

अपनी मांगों पर अड़े मेडिकल टीचर्स एसोसिशन की जनसंपर्क मंत्री पी सी शर्मा से गुरुवार को हुई मुलाकात बेनजीता रही थी. उसके बाद इन टीचर्स की चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ औऱ प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला से चर्चा हुई थी.लेकिन चर्चा में मांगों पर कोई सहमित नहीं बन पायी थी. कोई रास्ता ना निकलते देख अब मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने 9 जनवरी से काम बंद करने का फैसला लिया है. इस बीच प्रदेश भर के 13 मेडिकल कॉलेजों के सात टीचर्स ने अपने इस्तीफे डीन को सौंप दिए हैं.

सातवां वेतनमान और प्रमोशन
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.सुनील अग्रवाल का कहना है कि सातवां वेतनमान एक जनवरी 2018 से देने की बात हो रही है, जबकि ये वेतन 1 जनवरी 2016 से दिया जाना चाहिए.समयवद्ध पदोन्नति को लेकर भी अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है. मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात के लिए भी अब तक समय नहीं मिला है. इसलिए अब 9 जनवरी से काम बंद कर आंदोलन किया जाएगा

मंत्री से मुलाक़ात
प्रदेश भर के मेडिकल टीचर्स अपनी मांगों को लगातार इस्तीफे दे रहे है.गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन को भी इस्तीफे सौंपे भी गए हैं.मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर गुरुवार को कमलनाथ सरकार के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा से मुलाकात की थी. इन लोगों ने सातवां वेतनमान और समयबद्ध प्रमोशन देने की दो लंबित मांगें रखी थीं.चिकित्सा शिक्षकों ने सरकार पर भेदभाव करने का आरोप भी लगाया है.जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन को सीएम कमलनाथ से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया था.

दो प्रमुख मांग और सामूहिक इस्तीफेमेडिकल टीचर्स एसोसिशन के अध्यक्ष का कहना है लंबे समय से हम लोग मांगें पूरी करने के लिए गुहार लगा रहे हैं.लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई है.हमारी सिर्फ दो प्रमुख मांगें हैं. पहली तो एमसीआई के हिसाब से प्रमोशन पॉलिसी बनाई जाए.दूसरा सांतवा वेतमान लागू किया जाए.सातवां वेतनमान 1 जनवरी 2016से अटका हुआ है.सभी विभागों को सातवां वेतमनाम का लाभ मिल चुका है.केवल चिकित्सा शिक्षक संवर्ग ही रह गया है.

17 सितंबर को दिया था धरना
प्रदेश भर के मेडिकल टीचर्स ने बीते साल 17 सितंबर 2019 को धरना दिया था.प्रदेश भर में के मेडिकल टीचर्स राजधानी भोपाल में जुटे थे.लेकिन सरकार ने उन्हें पैदल मार्च करने की अनुमति भी नहीं दी थी. मार्च करने से पहले ही सरकार ने जीएमसी के आसपास धारा-144लगा दी थी.कलेक्टर,डीआईजी से लेकर तमाम अधिकारियों ने मेडिकल टीचर्स से चर्चा की थी. उस वक़्त आंदोलन स्थगित हो गया था.लेकिन अब साल 2020 शुरू होते ही मेडिकल टीचर्स ने हल्ला बोल दिया है.

कश्‍मीर में सेना के जवान की मौत के बाद पार्थिव शरीर घर आया तो पत्नी ने कुएं में कूदकर जान दी; दोनों का अंतिम संस्‍कार एक साथ एक ही चिता पर किया


अधिकारियों ने बताया- 29 दिसंबर की रात सोने के दौरान जवान की गिरने के मौत हुई थी। जनवरी को पार्थिव शरीर जम्मू से गांव भेजा गया, अंतिम संस्कार से पहले पत्नी ने खुदकुशी की

मुलतापी समाचार

रांची (झारखंड). जम्मू में तैनात सेना के 29 वर्षीय जवान बजरंग भगत का पार्थिव शरीर 1 जनवरी को झारखंड में अपने गांव बहेराटोली पहुंचा। लेकिन उसके अंतिम संस्कार से पहले ही पत्नी मनीत उरांव ने कुएं में कूदकर जान दे दी। इसके बाद पति-पत्नी की एक साथ अर्थी उठी और अंतिम संस्कार हुआ। दोनों की शादी 2 साल पहले ही हुई थी। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, बजरंग की मौत 29 दिसंबर की रात बिस्तर से गिरने के कारण हुई थी।

शहिद की पत्नि को कुए से ि‍निकलते हुए

मनीता की मौत के बाद उसके परिजन ने बजरंग की बहन और जीजा पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि संतान नहीं होने पर ननद (बजरंग की बहन) मनीता को ताना देते रहती थी, जिससे तंग आकर उसने जान दी है। बजरंग के पिता का निधन पहले ही हो चुका है। पांच बहनों की शादी हो चुकी है। अब घर में उनकी बूढी मां है।

जम्मू में बिस्तर से गिरकर हुई थी बजरंग की मौत

बजरंग 2012 में सेना में भर्ती हुए थे। इसके बाद रेजिमेंटल सेंटर नागपुर की यूनिट 17 में गार्ड के पद पर तैनात थे। करीब 3 माह पहले उनकी पोस्टिंग जम्मू में हुई थी। यूनिट के सीओ कर्नल विजय सिंह ने फोन पर बताया कि सोने के दौरान बिस्तर से गिरने के कारण जवान की जान गई है। हालांकि, परिजन ने बताया कि 29 दिसंबर की रात 10 बजे बजरंग के मोबाइल पर बात हुई थी और सुबह 8 बजे अचानक फोन पर सूचना मिली कि बजरंग अब दुनिया में नहीं है।

मुलतापी समाचार

न्‍युज नेटवर्क

खंडवा मे भी मुसद्दी लाल, बारह साल से इंसाफ के लिए सरकारी दफतरों के काट रहे हैं चक्‍कर


अपनी समस्याओं के लेकर परेशान मुसद्दी लाल को ऑफिस-ऑफिस के चक्कर काटते हुए छोटे पर्दे पर जरूर देखा होगा. लेकिन रियल लाइफ में खंडवा (Khandwa) के ओंकारेश्वर के किसान मौजीलाल भी कुछ ऐसी ही परेशानी से जूझ रहे हैं. हैरानी की बात है कि उन्‍हें 12 साल से न्‍याय नहीं मिला है.

खंडवा. अपनी समस्याओं से परेशान मुसद्दी लाल (Mussaddi Lal) को ऑफिस-ऑफिस (Office-office) के चक्कर काटते हुए छोटे पर्दे पर जरूर देखा होगा. लेकिन हम आपको आज मिलवाते हैं खंडवा के एक मुसद्दी लाल से जो पिछले 12 वर्षों से न्याय के लिए ऑफिस-ऑफिस चक्कर लगा रहे हैं. हैरानी की बात ये है कि अब तक उन्‍हें इंसाफ नहीं मिल पाया है. ये मामला खंडवा (Khandwa) के ओंकारेश्वर के किसान मौजीलाल (Moujilal) से जुड़ा हुआ है. यह किसान इंदिरा सागर बांध (Indira Sagar Dam) की वजह से बर्बाद हो गया है.

इंदिरा सागर बांध की वजह से हुए बर्बाद
ये तकदीर भी न जाने कब और किसे क्या-क्या रंग दिखाती है. रंक को राजा तो राजा को रंक बनाती है. ऐसा ही एक मामला खंडवा के ओंकारेश्वर के किसान मौजीलाल (Moujilal) से जुड़ा हुआ है. इंदिरा सागर बांध बनने से पहले तक वह एक सम्पन्न किसान हुआ करते थे, लेकिन बांध का रिसाव उनके खेत में इस कदर हो रहा है कि आज जमीन होने के बावजूद वह अपनी गीली खेत में कुछ भी उपजाने में नाकाम हो गए हैं. सरकार और प्रशासन से कई बार मिन्नतें की, ऑफिसों के चक्कर लगाए, लेकिन 12 वर्षों में भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, लिहाजा अब 14 नवम्बर तक प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है. अगर मौजीलाल की मांग पूरी नहीं हुई तो वह अपनी जान दे देगा.

किसान की धमकी के बाद…
इधर किसान की धमकी के बाद जिला प्रशासन ने अब कार्रवाई तेज कर दी है. खंडवा कलेक्टर तन्वी सुन्द्रियाल ने कहा कि पानी की वजह से भले ही वह खेती नहीं कर पा रहा है, लेकिन उसके खेत में अगर मछली पालन की व्यवस्था की जाए तो उसे इसका लाभ मिल सकता है.

बहरहाल, 12 साल से मौजीलाल जिस तरह से इंसाफ के लिए चक्कर काट रहा है वह वाकई लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है. अब देखना यह है कि कलेक्टर के इस प्रयास से आखिर उसे इंसाफ कब तक मिलेगा

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न्‍युज नेटवर्क

MP सरकार आर्थिक तंगी से जूझ रही फिर लेंगी एक हजार करोड़ का कर्ज


कमलनाथ फाइल फोटो

भोपाल । आर्थिक तंगी से जूझ रही सरकार फिर लेगी एक हजार करोड़ का कभोपाल। आर्थिक तंगी से जूझ रही प्रदेश की कमलनाथ कमलनाथ सरकार एक बार फिर एक हजार करोड़ का कर्जा लेने जा रही है। प्रदेश सरकार अभी तक बाजार से 17 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज ले चुकी है। सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपए का कर्जा दस साल के लिए लेगी। इस राशि से सभी जरूरी काम पूरे किए जाएंगे।

जानकारी के अनुसार मध्‍य प्रदेश के ऊपर एक लाख 86 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। सत्ता में आने के बाद से ही नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय स्तिथि रही है| खाली खजाने को लेकर पिछली सरकार पर ठीकरा फोड़ा गया| वहीं विकास कार्यों और चुनावी वादों को पूरा करने सरकार को हर महीने कर्ज लेना पड़ रहा है| अभी तक बाजार से 17 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज सरकार ले चुकी है|

वित्त विभाग के अनुसार बेहतर वित्तीय प्रबंधन के चलते मप्र को राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के 3.5 प्रतिशत तक कर्ज लेने का अधिकार है। इस हिसाब से मध्य प्रदेश राज्य 28 हजार करोड़ रुपए तक का कर्ज ले सकता है। प्रदेश सरकार अभी तक साढ़े 17 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। तीन माह अभी बाकी हैं। यदि जरूरत पड़ी तो और कर्ज भी लिया जा सकता है।

सरकार ने दिया ये तर्क
सरकार का तर्क है कि कर्ज विकास कार्यों और जनहित के कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए लिया जा रहा है. जबकि विपक्ष कर्ज लेने को सरकार की फिजूलखर्ची बताता रहा है. आपको बता दें कि एमपी सरकार पर करीब पौने दो लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और शराब पर 5 फीसदी वैट भी बढ़ाया था, लेकिन किसान कर्जमाफी, किसानों को गेहूं का बोनस और खराब सड़कों को सुधारना सरकार के लिए बजट के लिहाज से बड़ी चुनौती बने हुए हैं. यही वजह है कि सरकार को एक बार फिर बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है.

कमलनाथ सरकार ने जिस दिन से कुर्सी संभाली है उस दिन से अब तक अक्टूबर को छोड़कर लगभग हर महीने में बाजार से कर्ज लिया गया है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर मध्य प्रदेश सरकार ने कब कब और कितना कर्ज लिया.

ये हैं कर्ज लेने के आंकड़े
>> 11 जनवरी- 1000 करोड़.

>> 1 फरवरी- 1000 करोड़.
>> 8 फरवरी- 1000 करोड़.
>> 22 फरवरी- 1000 करोड़.
>> 28 फरवरी- 1000 करोड़.
>> 8 मार्च- 1000 करोड़.
>>25 मार्च – 600 करोड़.
>>5 अप्रैल – 500 करोड़.
>>30 अप्रैल – 500 करोड़.
>>3 मई – 1000 करोड़.
>>30 मई – 1000 करोड़.
>>7 जून – 1000 करोड़.
>>5 जुलाई – 1000 करोड़.
>>6 अगस्त – 1000 करोड़.
>>4 सितम्बर – 2000 करोड़.

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न्‍युज नेटवर्क

बांग्लादेश ने ब्रेस्ट मिल्क बैंक बंद किया, मौलवियों ने विरोध में कहा था शरिया के खिलाफ है यह


ढाका। बांग्लादेश के एक अस्पताल ने दान में मिले ब्रेस्ट मिल्क को अनाथ बच्चों को पिलाने की योजना को बंद कर दिया है। इस योजना को इसी महीने शुरू किया गया था, जिसका मकसद कमजोर और बिन मां के अनाथ बच्चों को मां का दूध मुहैया कराना था। मगर, कट्टरवादी मौलवियों की धमकी के बाद इस बैंक को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है।

दरअसल, मौलवियों ने इस योजना का विरोध करते हुए कहा था कि इसकी वजह से इस्लामिक कानूनों का उल्लंघन होता है। इस कार्यक्रम के तहत 500 अनाथ बच्चों और कामकाजी महिलओं के नवजात बच्चों को दूध पिलाया जाना था। ढाका में मिल्क बैंक की शुरुआत इस महीने की गई थी। मगर, परियोजना के सह-संयोजक मुजीबुर रहमान ने कहा कि व्यापक आलोचना के कारण इस परियोजना को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है।

आलोचकों का कहना है कि यदि दो बच्चों ने एक ही मां का दूध पिया है, तो शरिया कानून के अनुसार, वे बाद में कभी शादी नहीं कर सकते हैं। प्रभावशाली इस्लामिक अंदोलन बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टी के प्रवक्ता गाजी अताउर रहमान ने कहा कि उनका विवाह और वंश अवैध हो जाएगा। 16.8 करोड़ की आबादी वाले इस देश में मुस्लिम की आबादी 90 फीसद है, जहां बच्चों के कुपोषण की दर सर्वाधिक है। हालांकि, बांग्लादेश के शीर्ष इस्लामिक नेतृत्व ने अभी तक मिल्क बैंक को लेकर कोई फैसला नहीं किया है। मगर, मौलवियों के विरोध के बाद अस्पताल में इस योजना को बंद कर दिया गया है।

एक अन्य इस्लामवादी अहमद अब्दुल कय्यूम ने कहा कि शरिया कानून में मिल्क बैंक को इजाजत नहीं दी है। यह इस्लाम के खिलाफ है। उन्होंने अधिकारियों को सुझाव दिया है कि उन्हें मौलवियों के साथ इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए। हालांकि, प्रमुख इस्लामिक धर्मगुरु फरीदउद्दीन मसूद ने इस विवादास्पद विषय में सुलह करने के लिए एक रास्ता दिखाया है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह पता करना चाहिए कि पाकिस्तान, ईरान, इराक और मलेशिया जैसे मुस्लिम बहुसंख्यक देशों ने मिल्क बैंक स्थापित किए हैं या नहीं। हमें देखना चाहिए कि उन्होंने इस मसले का क्या हल निकाला है। हमें भी इसके हल के लिए एक साथ बैठना चाहिए।

मुजीबुर ने कहा कि हम अलग से और कठोरता से मिल्क डोनर का रिकॉर्ड रखते हैं। प्रमुख बाल विशेषज्ञों ने मिल्क बैंक का समर्थन करते हुए कहा है कि बच्चे के जीवन को बचाने में मदद करने के साथ-साथ उनकी वृद्धि में सहायता करना जरूरी है। ढाका के मुख्य बच्चों के अस्पताल में एक शीर्ष डॉक्टर महबूबुल हक ने कहा कि मिल्क बैंक अनाथ बच्चों और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए जरूरी है। खासतौर पर उन बच्चों की जिंदगी को बचाने के लिए, जो अस्पताल के आईसीयू में हैं और जिनकी मां नहीं हैं।

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बुजुर्गों को कड़कड़ाती सर्दी से बचने दिए गर्म कपड़े


अनुसया सेवा संगठन की अनुकरणीय पहल, बुजुर्गों ने दिया आशीर्वाद

मुलताई। बुजुर्गो को बांटे गरम कपड़े।

मुलताई। नगर सहित पूरे क्षेत्र में इन दिनों शीतलहर का कहर जारी है। ऐसे में बुजुर्गों को सर्दी से बचाना जरूरी होता है, अन्यथा सर्दी के कारण कई बार बुजुर्ग बीमार हो जाते हैं। कई बार अत्याधिक सर्दी सहन नही कर पाने के कारण बुजुर्गों की मौत भी हो जाती है। विशेष रूप से जब बुजुर्ग बेसहारा हो तो यह सभी का दायित्व होता है कि उनकी देखभाल करें उन्हें सर्दी से बचाएं। इसी तारतम्य में नगर के सेवाभावी अनुसया सेवा संगठन ने वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को गर्म कपड़े वितरित कर अनुकरणीय पहल की गई है। गुरूवार सर्दी के प्रकोप को देखते हुए संगठन के कृष्णा साहू, दिनेश हरफोड़े, संदीप तारे, प्रकाश भोजेकर राहुल साहू, अभिषेक बचले, मोहन सिंह देशमुख, राकेश नरवरे, सुभाष पंवार, गौरव साबले, मनमोहन पंवार एवं मनोज साहू अमरावती रोड स्थित वृद्धाश्रम पहुंचे जहां उपस्थित बुजुर्गों को गर्म कपड़े दिए। कड़कड़ाती सर्दी में गर्म कपड़े पाकर बुजुर्गों ने सेवाभावी युवकों को आर्शिवाद दिया। इस संबन्ध में अनुसया सेवा संगठन के कृष्णा साहू ने बताया कि मानव सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है इसलिए जब भी मौका मिले मानव सेवा अवश्य करना चाहिए। उन्होने बताया कि गर्म कपड़े पाकर संगठन के लोगों को बुजुर्गों का जो आर्शिवाद प्राप्त हुआ है उससे बड़ा संतोष जीवन में कोई नही है इसलिए अन्य लोगों को भी मानव सेवा के लिए प्रेरित होना चाहिए।

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मंत्री से चर्चा- मुलताई को जिला बनाने की मांग, अधिवक्ता संघ


अधिवक्ताओं ने नववर्ष के अवसर पर आयोजित किया कार्यक्रम

मुलताई। कार्यक्रम का किया आयोजन।

मुलताई। अधिवक्ता संघ के नवीन पक्षकार भवन में नव वर्ष मिलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष गिरधर यादव ने की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से न्यायाधीश कृष्णदास महार, हरप्रसाद वंशकार , सुशील जोशी, रंजीत सोलंकी, कमला गौतम भी उपस्थित थे। न्यायाधीश कृष्णदास महार ने सभी अधिवक्ताओं को नूतन वर्ष की शुभकामना दी। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष गिरधर यादव अधिवक्ता ने बताया कि कैबिनेट मंत्री सुखदेव पांसे का अधिवक्ता संघ द्वारा 11 जनवरी को स्वागत किया जाएगा। मंत्री के हस्ते महिला कक्ष का उद्घाटन भी करवाया जाएगा। वहीं इसी अवसर पर मंत्री से मुलताई को जिला बनाने की मांग भी की जाएगी। आयोजन में नवीन बिहारिया द्वारा सभी का आभार माना गया। कार्यक्रम में अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता एल के श्रीवास्तव, बलराम सिंह वर्मा, रमेश सूर्यवंशी, रेखा शिवहरे, बसंत पूरी, विनोद सिंह ठाकुर,जी.जी.घोड़े, सुभाष लोखंडे, सी.एस. चंदेल ,पंकज यादव अधिवक्ता उपस्तिथ रहे।

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मुलताई नपा करेगी सवा करोड़ से ज्यादा का भुगतान करने की तैयारी – ठेकेदार ब्लैक लिस्टेड


प्रमुख अभियंता ने नपा को दिए आदेश, नपा के नेताओं ने ठेकेदार से करवाया था हरदौली बांध का काम

मुलताई। हरदौली बांध का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

मुलताई। नगर पालिका के नेताओं द्वारा हरदौली जल आवर्धन योजना में बांध बनवाने सहित पाइप लाइन बिछाने एवं पानी की टंकिया बनवाने का काम ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार से करवाया जा रहा था। जब काम घटिया हुआ और मामला उठने लगा तो नपा के नेताओं ने अपनी लुटिया बचाने के लिए इस ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को टर्मिनेट कर काम का ठेका दूसरे ठेकेदार को दे दिया था। अब इस ठेकेदार को लगभग सवा करोड़ रुपए से ज्यादा के भुगतान के आदेश संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास मध्यप्रदेश के प्रमुख अभियंता एनपी मालवीय द्वारा दिए गए हैं। ठेकेदार ने यहां अपील कर भुगतान की मांग की थी, जिसके एवज में उक्त आदेश पारित किया गया है।

मुलताई के लोगों की प्यास बुझाने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए लागत की हरदौली जल आवर्धन योजना का पलीता मचाने में नपा के नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी। पहले ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार एसके लोखंडे से इस बांध का काम करवाया और अब इस ठेकेदार को 1 करोड़ 30 लाख का भुगतान करने की भी तैयारी है। बताया जा रहा है कि बांध के भूमिपूजन के दिन से ही ठेकेदार के ब्लैक लिस्टेड होने का मामला पूरे जिले में गूंजा था, लेकिन नपा ने नेताओं ने बांध पर जा-जाकर इस काम को अच्छी क्वालिटी का सिद्ध करने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन जब काम बहुत ही घटिया होने लगा और विरोध बढ़ने लगा तो मजबूरी में नपा के नेताओं ने इस ठेकेदार को हटाकर उक्त काम अन्य ठेकेदार को दिया था। एसके लोखंडे ठेकेदार को नपा द्वारा 41 लाख रुपए का भुगतान किया गया था, लेकिन अन्य काम के बदले भुगतान नहीं किया गया। जिसके बाद एसके लोखंडे द्वारा संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास मध्यप्रदेश के प्रमुख अभियंता एनपी मालवीय के समक्ष साढ़े सात करोड़ रुपए का भुगतान करने की मांग की गई। जिसके बाद दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रमुख अभियंता एनपी मालवीय द्वारा नपा को आदेशित किया गया है कि वह ठेकेदार को एक करोड़ 30 लाख का भुगतान करें।

काम पूरा होने पर बंटना थे एक ट्राली लड्डू : हरदौली जल आवर्धन योजना में बांध के भूमिपूजन के दिन लोगों ने ठेकेदार का विरोध किया था, लेकिन नपा के नेताओं ने ठेकेदार का बचाव करते हुए कहा था कि ठेकेदार अच्छा काम करेगा। इस विरोध में नपा के नेता कूद गए थे और कहा था कि एक साल के भीतर बांध का काम पूरा हो जाएगा और वह एक ट्राली लड्डू बंटवाएंगे, लेकिन ना तो बांध का काम पूरा हुआ और ना ही लड्डू बांटे गए।

वे बोले…

भुगतान के लिए आदेश हुआ है। हमारे द्वारा विधिक सलाहकार से सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राहुल शर्मा सीएमओ नपा मुलताई।

mutlpaisamachar@gmail.com

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