विश्‍व की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत, यूके और फ्रांस को छोड़ा पीछे


भारतीय इकोनाॅमी

मुलतापी समाचार

नई दिल्ली। भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए मोदी सरकार लगातार प्रयास कर रही है वहीं इस दिशा में एक बड़ी और अच्छी खबर आई है। इसके अनुसार, भारत यूके और फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। यह दावा एक अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट में किया गया है। World Population Review नाम के इस थिंक टैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत एक ओपन मार्केट इकोनॉमी के रूप में विकसित हो रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2.94 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। पिछले साल इसने यूके और फ्रांस को इस मामले में पीछे छोड़ा है। इसने यूके जिसकी अर्थव्यवस्था 2.85 करोड़ है और फ्रांस जिसकी अर्थव्यवस्था 2.71 करोड़ है दोनों को पीछे छोड़ दिया है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पर्चेसिंग पावर पेरिटी के मामले में भारत की जीडीपी 10.51 ट्रिलियन डॉलर की हो गई है जो जर्मनी और जापान से ज्यादा है। हालांकि, आबादी के हिसाब से भारत की पर कैपीटा जीडीपी 2,179 डॉलर है वहीं अमेरिका कि इसके मुकाबले 62,794 डॉलर है। हालांकि, इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगातार तीसरे साल भारतीय अर्थव्यवस्था 7.5 से 5 प्रतिशत पर आ सकती है।

रिपोर्ट ने ऑब्जर्व किया है कि भारत का आर्थिक उदारीकरण 1990 के दशक में शुरू हुआ था। भारत का सर्विस सेक्टर सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेक्टर है जिसमें अर्थव्यवस्था का 60 प्रतिशत और रोजगार का 28 प्रतिशत है। बता दें कि यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर है और साथ ही मूडीज के अलावा अन्य एजेंसियों ने देश की जीडीपी रैंकिंग का अनुमान घटाया है। साथ ही केंद्र सरकार ने भी अपने जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6-6.5 के बीच रहने का अनुमान जताया है।

जन्म से लेकर मृत्यु तक का सफर : घट्टी गीत


वह जन्म से लेकर मृत्यु तक का सफर अपने गीतों के माध्यम से करती है और अपने अहंकार को प्रति दिन आटे की तरह झराती है

पवारन मां गांव में अपने घर पर घट्टटी का उपयोग करते गीत गाते हुए

मुलतापी समाचार, मनमोहन पंवार (संपादक)

घट्टी में अनाज पीसने वाली महिला घट्टी में केवल अनाज ही नहीं पीसती वह अपने दुःख दर्द भी पीस डालती है, अंधकार भी पीस डालती है ।
जिन घट्टी गीत को सुनकर घर के सदस्य सोकर उठते थे अब घट्टी के वे स्वर सुनाई नहीं देते। घट्टी दो पाटों का एक ऐसा अदभूत समन्वय है जिसमें एक पाट स्थिर और दूसरा चलायमान होता है। स्थिर पाट परंपरा का परिचायक होता है और चलायमान पाट गति या विकास का। विकास वही उपादेय माना जाता है जो परंपरा से जुड़ा हो। आदमी के दो पैर परंपरा और गति के परिचायक है। एक पैर स्थिर होता है या जमीं पर टिका होता है तभी दूसरा पैर आगे बढ़ने के लिए उठ पाता है। चलने या आगे बढ़ने का यही नियम है। केवल परंपरा ही परंपरा या केवल विकास ही विकास जीवन को गत और गति प्रदान नहीं कर पाते। घट्टी जीवन को गत और गति प्रदान करने का प्रतीक है। गांव के हर घर में घट्टी की व्यवस्था जीवन को गत और गति प्रदान करने की चाह का परिणाम है। घट्टी न केवल घर के सदस्यों को ताज़ा और स्वास्थय वर्धक आटा प्रदान करती है अपितु अनाज पीसने वाली के होठों को गीत भी प्रदान करती है। यही गीत उसके मीत बन जाते हैं।

घट्टी के गोलाकार घूमते पाट के साथ अनाज पीसने वाली महिला अपने जीवन की पूरी परिक्रमा भी कर लेती है। जन्म से मृत्यु तक की पूरी यात्रा वह घट्टी के घूमते पाटों के साथ पूरा करती है। अनाज पीसते-पीसते वह अपने मायके,अपने गांव भी पहुँच जाती है। वह अपने भाई बहनों से भी मिल आती है और अपनों की मृत्यु से होने वाली पीड़ा भी वह स्वयं भोग लेती है। घट्टी में अनाज पीसने वाली महिला घट्टी में केवल अनाज ही नहीं पीसती वह अपने दुःख दर्द भी पीस डालती है, अंधकार भी पीस डालती है। और यह सब सफ़ेद झक आटे के लिए ही नहीं अपितु सफ़ेद झक दिन और सफ़ेद झक भाग्य की उम्मीद में करती है। घट्टी से झरता आटा और होठों से झरते गीत का ऐसा समन्वय स्थापित होता है कि सुनने वाला और सुनाने वाला दोनों ही भाव विभोर हो जाते है। पूरा घर सुर और संगीत से सराबोर हो उठता है। चलती घट्टी सुखद और उजले दिन की आराधना और आरती करती प्रतीत होती है और सूरज को गरमा गरम आटे का अर्ध्य चढाती प्रतीत होती है।

घट्टी सुर ताल और संगीत के साथ योग का अदभूत समन्वय प्रस्तुत करती है। घट्टी चलाते समय गाये जाने वाले गीत कर्म और करुणा के गीत होते हैं। तीन से लेकर दस पंक्ति तक गाये जाने वाले ये गीत से गाने वाली महिला इतना एकाकार हो जाती है कि दरना उसका दर्द नहीं अपितु दवा बन जाता है। इन गीतों में माँ अक्सर अपनी विवाहित बेटियों को गाती है और उनके मधुर स्मरण को गीत समर्पित करती है।
जैसे -पांच बोटी की चिमटिन,काशी का हिमतीन ,दरना दरय पस्या की लगय धारी ,पाज्यो काशी न दूध मरी। तात्पर्य यह है कि बेटी काशी को दरना दरते समय पसीने की धार लगी है और वह अपनी संतान को गोद में लिए दूध पिला रही है।

इन गीतों में बहनें अपने भाई बहन के नाम लेकर भी गीत गाती है ,जैसे -दूर को पल्ला पड़य ,बैनी साथी जानू पड़य ,बन्धुजी आला नेउ ,बंधू का भोजनी ,सासू कहा चा रान्धू वाडु ,मोती चूर का बांधू लाडू। इस गीत में दूर रह रही बहन को लेने भाई उसकी ससुराल जाता है तो बहन अपने भाई के भोजन के लिए अपनी सास से पूछती है क्या बनाऊं?, मोती चूर के लड्डू बाँधू? भाई के प्रति बहन का यह प्रेम बेजोड़ है।

पति पत्नी के मधुर संबंधों पर एक गीत देखिये -पति न हाका मारी ,कवाड़ा आड़ून ,सोन्या का सरोता न देली सुपारी फोडून। इस गीत में पति मर्यादा का पालन करते हुए दरवाजे की ओट से अपनी पत्नी को पुकार रहा है और पत्नी सोने के सरोते से सुपारी फोड़ कर अपने पति को देती है।

घट्टी गीत करुणा से ओतप्रोत होते है। इनमें मरण को लेकर भी गीतों की भरमार होती है। जैसे -मरा मरना ले जन बसले नयी थड़ी ,मरा सत्ता का मारय बूड़ी ,मरा मरना ख देवर भासरा एक गोत,मरा बंधुजी तिराहीत ,बसले आंगणीत। इसमें कहा गया है कि मेरे मरने पर लोग नदी किनारे बैठे है और मेरे घर वाले डुबकी लगा रहे हैं जबकि मेरे मायके से आये मेरे भाई बंधु किसी पराये व्यक्ति की तरह अलग थलग बैठे हुए है।

मरण गीत का एक और उदाहरण देखिये -अब पिता का मरना ले अब नयी का पयलि पार ,पिता की सरवन जलय ,अगासी धुँआ डाटय,बारा को हिरदा भरय ,नितरि पानी पड़य। गीत का भाव बड़ा कारुणिक है कि पिता के मरने पर पिता की चिता जल रही है और धुँआ आसमान में उठ रहा है। बेटे का दिल भर आया है और आँखों से आंसुओं की धार टपक रही है।

घट्टी के घूमने के साथ दरना दरने वाली महिला भी अपने जीवन चक्र का पूरा चक्कर लगा लेती है। वह जन्म से लेकर मृत्यु तक का सफर अपने गीतों के माध्यम से करती है और अपने अहंकार को प्रति दिन आटे की तरह झराती है ताकि उसका मरण सुखद हो सके। दरना दरने के बाद वह इतनी तरोताजा महसूस करती है कि अपना कठिन जीवन भी उसे मधुर और प्रिय लगने लगता है। वह घट्टी के माध्यम से सभी देवी देवताओं और अपने पूर्वजों को हर रोज ताजे आटे का अर्ध्य चढ़ाती है ताकि उसपर कोई ऋण शेष न रह जाए और उसका मरण उत्सव बन जाए।

जन्म और मृत्यु दोनों अवसर के लिए गीत रचना और लोक जीवन में उनका प्रयोग बोली की विविधता तो दर्शाती ही है यह भाषा बनने की अपनी क्षमता भी प्रदर्शित करती है।

टेकड़ी उप्पर बाजा बजय ——-
भाई घर भतीजा आयो ——-
मृत्यु के समय जिस बैलगाड़ी पर अंतिम संस्कार हेतु ईंधन ले जाया जाता है उन बैलों को भी भोजन कराया जाता है ताकि मृतक उनके ऋण से उऋण हो सके।लोक जीवन में मृत्यु के बाद के उत्तर कर्म की परम्परा ऋण से उऋण होने का महज उपक्रम माना है।
वल्लभ डोंगरे,सुखवाड़ा

बैतूल सुकन्या जिला बनने के लिए प्रयास


सुकन्‍या जिला बनाने हेतु बैठक बैतूल में

मुलतापी समाचार

बैतूल को सुकन्या जिला बनाये जाने हेतु शिक्षा विभाग द्वारा मंगलवार को जिला पंचायत के सभाकक्ष में उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्री बीएल विश्नोई, सहायक जिला परियोजना समन्वयक श्री संजीव श्रीवास्तव, सहायक सांख्किी अधिकारी श्री अशोक श्रीवास, डाक विभाग के उप संभागीय निरीक्षक डॉ. हेमराज धोटे, प्रोग्रामर श्री गजेन्द्र त्यागी, जिले के मास्टर टे्रनर, विकासखण्ड समन्वयक तथा जनशिक्षक उपस्थित रहे।

कार्यशाला में सहायक सांख्यिकी अधिकारी श्री अशोक श्रीवास एवं उप संभागीय निरीक्षक डाक विभाग डॉ. हेमराज धोटे ने सुकन्या समृद्धि योजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले के प्रत्येक माता-पिता की 0 से 10 वर्ष तक की प्रत्येक प्रथम दो बालिकाओं (जुड़वा अथवा तीन बालिका एक साथ जन्म लेने की स्थिति में तृतीय एवं चतुर्थ बालिका) को इस योजना का लाभ दिया जा सकता है। उन्होंने योजनांतर्गत खाता खोलने हेतु लगने वाले दस्तावेज तथा खाता खोलने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी।

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास ने बताया कि 26 नवंबर 2019 से बैतूल को सुकन्या जिला बनाये जाने की रणनीति तैयार कर विशेष अभियान चलाया गया, जिसके तहत प्रत्येक सेक्टर पर्यवेक्षकों को 1100-1100 सुकन्या समृद्धि के खाते खोले जाने का लक्ष्य दिया गया। इस प्रकार जिले में एक लाख खाते खोले जाने का लक्ष्य रखा गया। लक्ष्य पूर्ति हेतु डाक घर एवं महिला बाल विकास के क्षेत्रीय अमले का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसके माध्यम से प्रतिदिन खोले जाने वाले खातों की समीक्षा की जा रही है। साथ ही समय-समय पर परियोजना अधिकारी, डाक घर के पोस्ट मास्टर के साथ भी समन्वय बैठकें आयोजित की जा रही है। श्री विश्नोई ने बताया कि डाक घर से प्राप्त जानकारी के अनुसार सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत जिले में वर्तमान में कुल 53000 खाते खोले गये हैं। कार्यशाला में सुकन्या समृद्धि योजनांतर्गत खाते खोले जाने हेतु चलाए गए विशेष अभियान की समीक्षा भी की गई।

रिटायर्ड प्रोफेसर की अनूठी वसीयतः हवन सामग्री से करना अंतिम संस्कार


 मौत के बाद भी पर्यावरण प्रदूषित ना हो इसकी चिंता की, परिजनों ने किया इच्छा का पालन

बैतूल। डॉ. आरजी पांडेय

बैतूल। मुलतापी समाचार न्‍यूज नेटवर्क

सेवानिवृत्त प्राध्यापक और प्रख्यात इतिहासकार डॉ. आरजी पांडेय अपनी मृत्यु से 4 माह पूर्व ही एक अनूठी वसीयत लिख गए थे। यह वसीयत मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर है जिसमें हवन सामग्री का ही इस्तेमाल करने को कहा गया है। उन्होंने उनके अंतिम संस्कार में भी पर्यावरण प्रदूषित न हो, इसका ध्यान रखा। सोमवार को उनकी मृत्यु के बाद परिजनों ने उनकी इच्छा के अनुसार ही अंतिम संस्कार किया।

डॉ. पांडेय का सोमवार सुबह 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। निधन से 4 महीने पूर्व उन्होंने एक वसीयत लिखी थी। इस वसीयत को उनके बेटे सीमांत पांडेय ने गंज स्थित मोक्षधाम में पढ़कर सुनाया तो वहां उपस्थित लोग स्तब्ध रह गए। डेढ़ पन्नाों की उनकी वसीयत पूरे समाज के लिए एक मिसाल है। उनके द्वारा 7 अक्टूबर 2019 को लिखी गई वसीयत में लिखा है कि वे जीवन भर आर्य समाज और बौद्ध धर्म को मानते रहे। इसलिए कर्मकाण्ड, श्राद्ध, पिंडदान से सहमत नहीं हैं। इसलिए उनके मरणोपरांत उनका दाह संस्कार हवन के समान किया जाए। उन्होंने इस वसीयत में निर्देश दिए कि उनके दाह संस्कार में 90 फीसदी व्यय हवन सामग्री, नारियल गोला, शुद्ध घी में किया जाए। इससे शरीर से जो वातावरण प्रदूषित हुआ है उसका भी निराकरण हो जाए। मरणोपरांत परिवारजन कोई पूजा पाठ, श्राद्ध कर्म, गरुड़ पुराण, गया जी (पिंडदान) ना करें और उनकी अस्थियां नासिक में त्रयम्बकेशवर देवालय के पास गोदावरी नदी में विसर्जित की जाएं। उनकी इच्छा के अनुरूप ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। गौरतलब है कि डॉ. पांडेय का पूरा जीवन इतिहास और साहित्य के विषयों पर शोध करते हुए बीता। वे बैतूल के जेएच कॉलेज में बतौर प्राध्यापक रहे, लेकिन सेवानिवृत्ति के पश्चात भी भारतीय इतिहास और खास तौर पर मराठा इतिहास पर शोध करते रहे। मराठा इतिहास पर उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी। बैतूल के नेहरू उद्यान स्थित पुरातत्व संग्रहालय को स्थापित करने और वहां दुर्लभ पुरातात्विक वस्तुओं को संग्रहित करने में डॉ. पांडेय ने अतुलनीय योगदान दिया।

रबी उपार्जन व्यवस्था पर ऑब्जर्वर रखेंगे नजर


मुलतापी समाचार

कलेक्टर श्री तेजस्वी एस. नायक ने आगामी रबी सीजन में समर्थन मूल्य पर उपार्जन व्यवस्था की पुख्ता तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इस साल रबी फसलों के बम्पर उत्पादन को देखते हुए उपार्जन केन्द्रों पर किसानों से उनकी उपज खरीदने के व्यवस्थित प्रबंध किए जाएं, ताकि किसानों को कोई असुविधा न हो। इसके अलावा भण्डारण व्यवस्था भी दुरुस्त रखी जाए।

कलेक्टर ने बताया कि जिले में नियुक्त 60 क्लस्टर अधिकारी उपार्जन व्यवस्था पर नजर रखने के लिए ऑब्जर्वर के रूप में कार्य करेंगे। यह अधिकारी अपने-अपने क्लस्टर क्षेत्रों में पहुंचकर वहां खरीदी केन्द्रों की व्यवस्था देखेंगे। इसके साथ ही भण्डारण व्यवस्था की स्थिति भी देखेंगे। इन स्थानों पर आवश्यक जरूरतों की पूर्ति हेतु कलेक्टर को प्रतिवेदन देंगे।

गो सेवकों ने पहचान कार्ड हेतु कलेक्‍टर सौंपा ज्ञापन


मुलतापी समाचार, मनमोहन पंवार

बैतूल। जिला गो सेवक संघ ने सोमवार को पशुपालन विभाग के उपसंचालक को ज्ञापन सौंपकर सभी गो सेवकों को पहचान पत्र दिए जाने की मांग की है। गो सेवक संघ के अध्यक्ष कुमान सिंह राजपूत ने बताया कि भारत सरकार की एनएडीसी योजना अंतर्गत टीकाकरण और टेगिंग का कार्य गो सेवक करते है, लेकिन स्थानीय क्षेत्र में इन कार्यों को करने में कई समस्याएं आती है। ज्ञापन के माध्यम से संघ ने सभी गो सेवकों को पहचान पत्र एवं कर्मचारियों की तरह सुविधा मुहैया कराने के साथ-साथ टीकाकरण शुल्क एवं टेग शुल्क बढ़ाने की मांग की है। इस दौरान उपसंचालक श्री देशमुख ने संघ की समस्याओं के निराकरण की बात कही। ज्ञापन देने वालों में भगवान सिंह परिहार, जुगल किशोर सूर्यवंशी, जयपाल हरसुले, राधेश्याम मालवीय, ज्ञानेश्वर धोटे, चुन्नाीलाल यादव, संतोष गाडग़े रमेश लोखंडे सहित अन्य गो सेवक उपस्थित थे।

बिगड़े वनों, पड़त भूमि एवं खेतों में बांस उत्पादन की कार्य-योजना बनाएं


मुख्यमंत्री कमल नाथ की अध्यक्षता में बांस मिशन की बैठक सम्पन्न

बांस (बांबू ) योजना जन हित हेतु मध्‍यप्रदेश सरकार कर रही विचार

मुलतापी समाचार


मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि बांस उद्योग को प्रोत्साहित कर इसके माध्यम से रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए बिगड़े वन क्षेत्र, पड़त भूमि तथा किसानों के खेतों में बांस उत्पादन के लिए समयबद्ध कार्य-योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में बांस मिशन की बैठक में यह निर्देश दिए। वन मंत्री श्री उमंग सिंघार बैठक में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि बिगड़े हुए वन क्षेत्रों में और राजस्व की पड़त भूमि पर बांस उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग निजी क्षेत्र में किसानों की सहभागिता से बांस उत्पादन के लिए प्रस्तावित कार्य क्षेत्र की योजना बनाएं और उसके क्रियान्वयन की समय सीमा तय की जाए।

कमल नाथ ने कहा कि बांस उद्योग में रोजगार की बड़ी संभावना है। इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा सकते हैं। कमल नाथ ने कहा कि किसानों को भी अपने खेतों में बांस उत्पादन के लिए प्रेरित करना चाहिए और उसके लिए उन्हें हर संभव सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने बांस उद्योगों की कठिनाईयों को दूर करने के लिए संबंधित विभागों में आपसी तालमेल बनाने को कहा।
बांस उद्योग से जुड़े उद्योगों के प्रतिनिधियों ने बैठक में बताया कि बांस उत्पादन से जहाँ एक ओर बांस आधारित उद्योगों को बल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंंगे। प्राकृतिक वनों पर पडऩे वाला दबाव कम होगा। जलवायु परिवर्तन की गति कम करने में सहायता मिलेगी। प्रदेश में बांस से निर्मित अगरबत्ती, चारकोल, पार्टीकल बोर्ड तथा बांस को कोयले के विकल्प के रूप में ईंधन की तरह उपयोग करने के क्षेत्र में उद्योगों के स्थापना की संभावना है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव वन श्री ए.पी. श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख डॉ. यू. प्रकाशम, मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश बांस मिशन डॉ. अभय कुमार पाटील एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय कुमार शुक्ला एवं बांस उद्योग से जुड़े डालमिया भारत ग्रुप के महेन्द्र सिंह, आर्टिशन एग्रोटेक के श्री देवोपम मुखर्जी, सुभाष भाटिया एवं अश्विनी पाहुजा उपस्थित थे।

जय किसान फसल ऋण माफी किसान सम्मेलन गुदगांव में आयोजित


Multapi Samachar मनमोहन पंवार (संपाद‍क)

बैतूल। जय किसान फसल ऋण माफी योजनांतर्गत किसानों को कृषि ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र एवं किसान सम्मान पत्र वितरण किए जाने हेतु 18 फरवरी मंगलवार को गुदगांव भैंसदेही में किसान सम्मेलन आयोजित किया गया। किसान सम्मेलन में विधायक भैंसदेही श्री धरमू सिंह सिरसाम, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित के प्रशासक श्री अरूण गोठी, जिला योजना समिति के सदस्य एवं जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री सुनील शर्मा द्वारा पात्र किसानों को कृषि ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र एवं किसान सम्मान पत्र वितरित किए गए। इस दौरान अपर कलेक्टर श्री साकेत मालवीय भी मौजूद थे।

सम्मेलन में अतिथियों द्वारा श्री जितेन्द्र पिता श्री रामनारायण पोखरनी को 94920 रूपए, श्री पंचफूल पिता श्री हरेसिंह खोमई को 57031 रूपए, श्री सूर्या पिता श्री गोमाजी खामला को 99035 रूपए, श्री गोलमन पिता श्री गोण्डू सांवलमेंढा को 94899 रूपए, श्री देवेन्द्र पिता श्री महादेव चिल्कापुर को 97809 रूपए, श्रीराम पिता श्री मन्या झल्लार को 93149 रूपए, श्रीमती इन्द्रा प्रेमलाल गोरेगांव को 90984 रूपए, श्री पीखा पिता श्री चिन्धू बासनेरकलां को 37354 रूपए, श्री मोन्दी पिता श्री सालकराम बासनेरखुर्द को 131267 रूपए एवं श्री वामनराव पिता श्री मारोती धामनगांव को 171365 रूपए राशि के कृषि ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र एवं किसान सम्मान पत्र वितरित किए गए।

उप संचालक कृषि श्री केपी भगत ने बताया कि जय किसान फसल ऋण माफी योजनांतर्गत भैंसदेही तहसील के 1717 पात्र किसानों की 11 करोड़ 67 लाख 93 हजार बीस रूपए की ऋण राशि माफ की जा रही है।
कार्यक्रम में जिला योजना समिति सदस्य श्री पंजाबराव कावडक़र, जनपद पंचायत भैंसदेही के अध्यक्ष श्री संजय मावसकर, नगर पंचायत भैंसदेही के प्रशासक श्री विनय शंकर पाठक सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहेे।

प्रदेश में ग्रामीण अंचल में 1176 करोड़ से बनेंगे 27 पुल और 108 डामरीकृत सडक़ें


Multapi Samachar

प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के तृतीय चरण में 1176.11 करोड़ रूपये लागत के 1444 किलोमीटर के 108 सडक़ मार्ग बनाए जाएंगे। इनमें 27 पुलों का निर्माण भी कराया जाएगा। इन कार्यो के लिए मध्यप्रदेश सरकार 495.41 करोड़ रूपये की राशि अपने बजट से देगी।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी म.प्र. प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ विकास प्राधिकरण (एम.पी.आर.आर.डी.ए.) उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तृतीय चरण में बनाई जाने वाली 1444 किलोमीटर सडक़ों के निर्माण पर कुल 1142 करोड़ 85 लाख रुपये की राशि व्यय की जायेगी। इसमें 482 करोड़ 10 लाख रुपये की राशि राज्य सरकार अपने बजट से देगी। इसी प्रकार 14 जिलों में बनाये जाने वाले 27 पुलों के निर्माण पर कुल 33 करोड़ 26 लाख रुपये की राशि व्यय होगी। इसमें 13 करोड़ 30 लाख रुपये की हिस्सेदारी राज्य सरकार की होगी।

उमराव ने बताया कि 37 जिलो में जिन 108 मार्गों का निर्माण कराया जाना है उनमें अलीराजपुर जिले में 667 लाख रूपये की लागत से 10.20 किलोमीटर लम्बाई का एक सडक़ मार्ग बनाया जाएगा। इसी प्रकार अनूपपुर में 3367 लाख रूपये की लागत से 42.48 किलोमीटर लम्बाई वाले 3 सडक़ मार्ग, अशोकनगर जिले में 3598 लाख रूपये की लागत से 41.20 किलोमीटर लम्बाई 3 सडक़ मार्ग, बालाघाट जिले में 3519 लाख रूपये की लागत से 50.30 किलोमीटर 3 सडक़ मार्ग, बैतूल जिले में 3097 लाख रूपये लागत से 34.44 किलोमीटर लम्बाई के 2 सडक़ मार्ग बनाये जायेंगे।

इसी क्रम में भोपाल जिले में 3942 लाख रूपये लागत से 51.65 किलोमीटर वाले 4 सडक़ मार्ग, छतरपुर जिले में 1931 लाख रूपये की लागत के 30.70 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग, छिन्दवाड़ा जिले में 6616 करोड़ रूपये की लागत के 85.77 किलोमीटर लम्बाई वाले 4 सडक़ मार्ग, दतिया जिले में 932 लाख रूपये की लागत के 5.10 किलोमीटर लम्बाई वाला एक सडक़ मार्ग, धार जिले में 6143 लाख रूपये की लागत के 71.75 किलोमीटर लम्बाई वाले 5 सडक़ मार्ग,डिडोंरी जिले में 1621 लाख रूपये की लागत के 19.97 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग,गुना जिले में 5242 लाख रूपये की लागत के 57.86 किलोमीटर लम्बाई वाले 4 सडक़ मार्ग, हरदा जिले में 685 लाख रूपये की लागत के 8.70 किलोमीटर लम्बाई वाले एक सडक़ मार्ग, होशंगाबाद जिले में 1256 लाख रूपये की लागत के 13.65 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग, जबलपुर जिले में 113 लाख रूपये की लागत के 46.36 किलोमीटर लम्बाई वाले 5 सडक़ मार्ग, झाबुआ जिले में 1689 लाख रूपये की लागत के 20.21 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग बनाये जायेंगे।

इसी प्रकार कटनी जिले में 1520 लाख रूपये की लागत के 19.65 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग, खरगौन जिले में 3471 लाख रूपये की लागत के 41.78 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग, मंडला जिले में 1217 लाख रूपये की लागत का 15.23 किलोमीटर लम्बाई वाला एक सडक़ मार्ग, मन्दसौर जिले में 5718 लाख रूपये की लागत के 27.37 किलोमीटर लम्बाई वाले 4 सडक़ मार्ग, नरसिंहपुर जिले में 1027 लाख रूपये की लागत के 15.14 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग,रायसेन जिले में 3620 लाख रूपये की लागत के 39.68 किलोमीटर लम्बाई वाले 4 सडक़ मार्ग, राजगढ़ जिले में 2540 लाख रूपये की लागत के 32 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग, रतलाम जिले में 4693 लाख रूपये की लागत के 56.98 किलोमीटर लम्बाई वाले 6 सडक़ मार्ग, रीवा जिले में 6251 लाख रूपये की लागत के 83.65 किलोमीटर लम्बाई वाले 8 सडक़ मार्ग, सागर जिले में 1808 लाख रूपये की लागत के 21.07 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग, सीहोर जिले में 5776 लाख रूपये की लागत के 75.41 किलोमीटर लम्बाई वाले 5 सडक़ मार्ग, सिवनी जिले में 1526 लाख रूपये की लागत का 21.95 किलोमीटर लम्बाई वाला एक सडक़ मार्ग, श्योपुर जिले में 4261 लाख रूपये की लागत के 54.34 किलोमीटर लम्बाई वाले 4 सडक़ मार्ग, शिवपुरी जिले में 6689 लाख रूपये की लागत के 91.21 किलोमीटर लम्बाई वाले 6 सडक़ मार्ग, सीधी जिले में 1327 लाख रूपये की लागत के 22 किलोमीटर लम्बाई वाले 2 सडक़ मार्ग, सिंगरौली जिले में 776 लाख रूपये की लागत का 12.05 किलोमीटर लम्बाई वाला एक सडक़ मार्ग, टीकमगढ़ जिले में 3872 लाख रूपये की लागत के 49.75 किलोमीटर लम्बाई वाले 4 सडक़ मार्ग, उज्जैन जिले में 5437 लाख रूपये की लागत के 64.63 किलोमीटर लम्बाई वाले 3 सडक़ मार्ग तथा उमरिया जिले में 1873 लाख रूपये के 22.80 किलोमीटर लम्बाई वाले सडक़ मार्गों का निर्माण कराया जाएगा।

उमराव ने बताया कि 14 जिलों अलीराजपुर, अनूपपुर, भोपाल, धार, हरदा, मुरैना, राजगढ़, रीवा, सागर, सीहोर, श्योपुर, शिवपुरी, सीधी और उमरिया में 27 पुलों का निर्माण भी कराया जायेगा, जिनके निर्माण पर 33 करोड़ 26 लाख रूपये की राशि व्यय की जायेगी। इसमें 13 करोड़ 30 लाख रूपये की राशि राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जायेगी।

Multapi Samachar News Network

Manmohan Pawar (Sampadak)

महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया गया


डिगरसे परिवार सैकड़ों वर्षों से एक साथ मनाता आ रहा है महाशिवरात्रि का त्यौहार

हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है “महाशिवरात्रि” । महाशिवरात्रि का पावन त्यौहार हिन्दू धर्म के सभी परिवारों द्वारा मनाया जाता है परन्तु रोंढा में बसे डिगरसे, अपने आधा सैकड़ा परिवार के साथ महाशिवरात्रि के त्यौहार को मनाने में अपनी अलग ही पहचान बनाए है। महाशिवरात्रि के इस पावन त्यौहार को सैकड़ों वर्षों पहले बनाई गई पुरानी रितिवाज के अनुसार आज भी मनाई जा रही है।

इस त्यौहार को मनाने के लिए पूरे गांव से डिगरसे परिवार का प्रत्येक सदस्य चाहे वह बच्चे, महिला, पुरुष हो चाहे वह बुजुर्ग हो सभी इस त्यौहार को मनाने के लिए रोंढा में स्व. श्री गोविन्दराव डिगरसे के अनुज पुत्र जशवंत डिगरसे के निवास पर एकत्रित होते है। सभी सदस्यों द्वारा भगवान भोलेनाथ और पित्र देव को साक्ष्य मानकर पूजन किया जाता है, और ” हर बोला हर-हर महादेव ” के स्वरों से आसपास का वातावरण प्रफुल्लित हो जाता है।

इसी त्यौहार पर एक वर्ष के भीतर जन्में बच्चों की चोटी उतारने का कार्य भी समपन्न कराया जाता है। इस कार्य को डिगरसे परिवार के पुजारी जशवंत डिगरसे और उनकी धर्मपत्नी शिवकली बाई डिगरसे द्वारा कराया जाता है।

इसके बाद पूजन अंतिम चरण में होता है और सभी परिवार के छोटे सदस्यों द्वारा बड़ें सदस्यों का आशिर्वाद प्राप्त करते है अंत में नारियल, गुड और मिठाई का प्रसाद बाटँकर सभी परिवार के सदस्य अपने घर के लिए चले जाते है।

यह पावन त्यौहार अपनी तिथि के दो दिन पूर्व मनाने का कारण भी प्राचीन है क्योंकि प्राचीन समय में भगवान भोलेनाथ के दरबार यानी छोटा महादेव भोपाली या बड़े महादेव पचमढ़ी जाने के लिए बैलगाड़ी का प्रयोग किया जाता था। जहाँ पर पहुँचने के लिए लगभग एक-दो दिन का ही समय लगता था, और ऐसे में परिवार के साथ महाशिवरात्रि का त्यौहार नही मना सकते थे इसी कारण इस त्यौहार को दो दिन पहले ही मना लिया जाता है ताकि छोटा महादेव भोपाली या बड़े महादेव पचमढ़ी सही समय पर पहुँचा जा सके।

मुलतापी समाचार