मंत्री पी सी शर्मा का बयान…


कोंग्रेस बहुमत में है।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर बोला हमला की चोर कह रहे है कि हम पर हमला हो जाएगा।

हॉर्स ट्रेडिंग कर रही है बी जे पी और राज्यपाल पर दबाब बना रही है।की जल्दी फ्लोर टेस्ट कराओ।

बंगलुरु मे विधायको की पत्रकार वार्ता पर बोले कि बंदूक की नोक पर उनसे बुलवाया जा रहा है। पत्रकार वार्ता करनी है तो भोपाल आकर करे।

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कहीं मास्क को गीले या सूखे कचरे में फेंक तो नही रहे ?


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कोरोना वायरस के चलतेे स्‍कूल कालेजों में शिक्षकों को भी माक्‍स पहन कर आने को कहा गया खास वे जिन्‍हे सरर्दी खासी है

कोरोना वायरस Corornavirus Disease (COVID-19) से मास्क पहन के बच रहे हैं? मास्क का क्या कर रहे हैं ?

रोजाना लाखों मास्क एकदम से इस्तेमाल में आने लगे हैं और कचरे में जाने भी लगें हैं। लोग इन्हें सामान्य गीले और सूखे कचरों में।मिलाकर फेक रहे हैं जो कि एक बड़ा खतरा है। जानिए विशेषज्ञ से कि कैसे इनका निस्तारण सही विधि से किया जाए।

जानिये ये महत्वपूर्ण बातें की किस तरह से मास्क को डिस्पोज़ या वेस्ट में फेंका जाए।

1) पहली बात ये कि ये न तो गीले कचरे में आते हैं न ही सूखे में , ये बायो मेडिकल वेस्ट में आते हैं इसलिए इन्हें घर या ऑफिस के कचरे में।फेकने की गलती या बोलें तो अपराध न कीजिए क्यूंकि यह प्रदूषण फैलाने के आरोप साथ आपको चालान भी बनवा देगा। और हां यह संक्रमण भी फैलाएगा।

2) मास्क यानी नीला या हरा वाला सर्जिकल मास्क 8 घंटे आए ज्यादा नही चलता । NS95 मास्क भी 2 या 3 दिन बस इन्हें एक पीले कलर की पॉलिथीन में अच्छे से टाइट करके रखिये और जो कचरा गाड़ी हमारे घरों में रोज़ आती है उसमें पिछले हिस्से में बायो मेडिकल वेस्ट का डब्बा होता है जहां डायपर/ सेनेटरी नैपकिन डालते हैं वहां डालिये।

3) यदि आपके शहर में बायो मेडिकल वेस्ट का डब्बा या सुविधा नही तो अपने आस पास के अस्पताल में जाकर उनके बायो मेडिकल कचरे के डब्बे में डालिये।

4) ये मास्क संक्रमण बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं यानी रोकने की बजाए आप कोरोना जैसी बीमारी को बढ़ाने में सहयोग कर देंगे यदि उन्हें साइंटिफिक तरीके से प्रोसेसिंग के लिए नही भेजा तो।

5) रोजाना मास्क बदलिए और घर / कॉलोनी के मास्क एक जगह इकट्ठा कर उसे डिस्पोज़ कीजिये।
निवेदन: शारदा राम मनमाेहन शैक्षणि‍क एवंं समाज सेवा समिति मुलताई

किसान के खेत में लगी आग


बड़ी घटना

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किसान की साल भर की आमदनी हुई जलकर खाक

रोते और चिल्लाते रहा किसान

गेहूं की रखी फसल दावन होने के लिए

रसलपुर कालापीपल के किसान के खेत में गेहूं की फसल खरय में आज दोपहर के समय अचानक आग लग गई जिससे पूरी फसल जलके खाक हो गई आग लगने का कारण अज्ञात हैं गांव वालों की मदद से आग को काबू करने की पुरी कोशिश की गई पर आग इतनी तेज थी कि कुछ बच नहीं पाया आग पर पानी डालते हुए गाव के किसान

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बेटी की शादी कहीं भी कर देने पर वह कहीं की नहीं रह जाती


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बेटे-बेटी की शादी मुक्त होने के लिए नहीं,संयुक्त होने के लिए करें

विवाह और युद्ध में की गई गलती कभी ठीक नहीं होती
भोपाल। बेटी के विवाह योग्य होते ही उसके विवाह को लेकर माता-पिता का चिंतित होना स्वाभाविक है। चिंता के साथ साथ यह एक दायित्व और संस्कार भी है। बेटी की शादी कहीं भी कर देने पर वह कहीं की नहीं रह जाती है, अतः बेटी के विवाह में सावधानी गंभीरता और दायित्व बोध का होना जरूरी है। कहा भी जाता है विवाह और युद्ध में की गई गलती कभी ठीक नहीं होती।

सामान्यतः जो सावधानी, जो गंभीरता ,जो दायित्वबोध विवाह को लेकर माता-पिता के मन में होना चाहिए, सामान्यतः बेटी के विवाह के समय यह कम ही देखने को मिलता है। बेटी का विवाह जब मुक्त होने के लिए अधिक और संयुक्त होने के लिए कम किया जाता है तब सामान्यतः विवाह कम सफल होते पाए जाते हैं।
कुछ अपवादों को छोड़कर
आज भी समाज में बेटी को बोझ मानने वाले माता-पिताओं की कमी नहीं है। अपना राजपाट सौंपने की चाह में अपने उत्तराधिकारी के लिए बेटियों की लाइन लगाने वाले हों या बेटियों को बोझ समझने वाले माता-पिता हों बेटियों को बेटे की तरह समझने का प्रयास करेंगे और सम्मान देने का प्रयास करेंगे तो बेटियों के जीवन में जाने-अनजाने जो ग्रहण लग जाता है उससे कुछ हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।
कई माता-पिता झूठ बोलकर अपने बेटे -बेटियों का विवाह करने में भी संकोच नहीं करते। ऐसे माता-पिता अपने बच्चों के जीवन में स्वर्ग कम नर्क ज्यादा सृजित करते हैं। आज भी झूठ बोलकर शादी करने वाले एक दूसरे परिवार से संयुक्त होने की अपेक्षा कैसे भी विवाह करके अपने को मुक्त करने में ज्यादा रुचि लेते प्रतीत होते हैं।
बेटे वाले भी झूठ बोल कर शादी करने के मामले में पीछे नहीं होते। बेटी वाले संकोचवश अधिक जानकारी ले नहीं पाते और विवाह के बाद हकीकत सामने आने पर केवल पछतावा ही हाथ लगता है। समाज में विवाह के सफल होने का प्रतिशत कम होने में इस तरह की सोच का भी महत्वपूर्ण हाथ होता है।
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पैन आधार लिंक को लेकर आयकर विभाग ने जारी किया नया आदेश, नहीं माना तो होगा नुकसान


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

आयकर विभाग ने लोगों को आगाह किया है कि पैन कार्ड को आधार से जोड़ने की आखिरी तारीख 31 मार्च है और अगर आपने अपना पैन कार्ड और आधार कार्ड अब तक लिंक नहीं किया है तो यह 31 मार्च के बाद काम करना बंद कर देगा! अपने आदेश में आयकर विभाग ने लोगों को अपने पैन और आधार लिंक करने के लिए साफ तौर पर कहा है! इसमें कहा गया है पेन(PAN) को 31 मार्च 2020 से पहले आधार से जोड़ना अनिवार्य है! पिछले महीने ही आयकर विभाग ने चेतावनी दी थी कि आधार से पैन कार्ड लिंग ना करने वाले 17 करोड़ पैन कार्ड बेकार हो जाएंगे!

SMS के जरिए भी कर सकते हैं प्रक्रिया

पैन को आधार से लिंक करने की प्रक्रिया SMS. की मदद से भी की जा सकती है! आवेदक 567678 या 56161 पर अपने रजिस्टर्ड नंबर से मैसेज कर सकते हैं! इसे UIDPAN<12Digit Aadhar Number><10Digit PAN>इस फॉर्मेट में भेजना होगा!

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4 साल बाद मिले बेटे को देखकर मां के छलक पड़े आंसू


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

मढ़ियादो: जब कोई बेटा अपनी मां से दूर हो जाता है और पूरा परिवार अपने बच्चे की खोजबीन में लगा रहे! और बरसों बीतने के बाद जब बच्चे की कुशलता का समाचार मिले तो यह खुशी वह मां ही समझ सकती है जिसकी आंखें अपने बेटे के घर आने की राह देखते देखते पथरा गई हो! 4 साल पहले हरपालपुर गांव से ओंकार काछी लापता हो गया था जो भारत पाकिस्तान की बॉर्डर राजस्थान के श्रीगंगानगर में राजेंद्र पाल शर्मा को मिला! लगभग 1000 किलोमीटर का सफर तय कर ओंकार के परिजन उसे लेने सोमवार सुबह राजस्थान पहुंच गए! वहां पहुंचते ही जैसे ही ओंकार की मां की नजर अपने बेटे पर पड़ी तो वह रोने लगी और गले से लगा लिया! यह उसकी खुशी के आंसू थे! ओंकार जिस घर में रुका था उनके परिजनों को धन्यवाद देकर और उनका उपकार जीवन भर न भूलने की बात कही! यह सुनते ही बिछड़े बेटे को अपनी मां और बच्चों से मिलाने वाले राजेंद्र पाल शर्मा ने कहा कि वह भी उसके बेटे ही हैं! उन्होंने तो सिर्फ अपना इंसानियत और मानवीय धर्म निभाया है! अपने परिवार को पाकर ओंकार काछी बहुत खुश है और आज अपने गृह ग्राम पहुंच जाएगा! ओंकार राजस्थान कैसे पहुंचा इस बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है!वह जब अपने घर आएगा और परिवार के बीच रहेगा तभी इसका खुलासा हो सकेगा!

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माँ बम्लेश्वरी मंदिर परिसर डोंगरगढ़ में 3498 वर्गफीट भूखंड पर राजा भोज पवार क्षत्रिय धर्मशाला निर्माण कार्य गति पर


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वर्ष 2012-2017 के दौरान महासभा के अध्यक्ष डाॅ बी.एम.शरणागत एवं सदस्यों द्वारा की गई पहल

बेसमेंट एवं भूतल पर ढ़ांचा निर्मित, प्रथम एवं द्वितीय तल पर भव्य हाल एवं कमरें प्रस्तावित

समाज सदस्यों द्वारा निर्माण कार्य हेतु सहयोग अपेक्षित
डोंगरगढ़। माँ बम्लेश्वरी मंदिर परिसर डोंगरगढ़ में 3498 वर्गफीट भूखंड पर राजा भोज पवार क्षत्रिय धर्मशाला निर्माण कार्य प्रगति पर है।बेसमेंट एवं भूतल पर ढ़ांचा निर्मित हो गया है।प्रथम एवं द्वितीय तल पर भव्य हाल एवं कमरें प्रस्तावित हैं।

उल्लेखनीय है वर्ष 2012-2017 के दौरान मां बम्लेश्वरी मंदिर परिसर डोंगरगढ़ में राजा भोज पवार क्षत्रिय धर्मशाला निर्माण का संकल्प महासभा के अध्यक्ष डाॅ बी.एम.शरणागत एवं सदस्यों द्वारा लिया गया था।

धर्मशाला की अनुमानित लागत रूपये एक करोड़ है। निर्माण कार्य राजनांदगांव समिति द्वारा गठित निर्माण समिति की देख-रेख में किया जा रहा है। कक्ष निर्माण की राशि रूपये 3.50 लाख किसी दानदाता द्वारा दान देने पर संबंधित का नाम शिलालेख पर अंकित किए जाने का निर्णय लिया गया है।

धर्मशाला निर्माण हेतु समाज सदस्य द्वारा आर्थिक सहयोग अपेक्षित है। इच्छुक समाज सदस्य श्री लक्ष्मण सिंह हरिणखेड़े के मोबाइल नंबर 9329101311 पर संपर्क कर सकते हैं।

सहयोग राशि निम्नलिखित खाते में सीधी हस्तांतरित की जा सकती है-
पवार क्षत्रिय समिति राजनांदगांव
बैंक का नाम- बैंक ऑफ महाराष्ट्र
खाता क्र-60209579888
IFSC-MAHB0000063
स्रोत-श्री डी एन रहांगडाले जी
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युद्ध से भी ज्यादा जीवन में साहस की जरुरत


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भंडारे ,लंगर लगाना उतने साहस का काम नहीं, जितना बूढ़े माता-पिता को भोजन कराना

धार्मिक स्थानों पर सफाई करना उतने साहस का काम नहीं, जितना घर की साफ सफाई करना और बर्तन मांजना

उपदेश देना उतने साहस का काम नहीं जितना उसे आचरण में उतारना
भोपाल। परिस्थितियों के साथ साहस की परिभाषा भी बदलती रहती है। भीड़ में सबके साथ जूठी पत्तल उठाना और जूठे बर्तन साफ करने से ज्यादा साहस का काम घर में माता-पिता के बर्तन साफ करना होता है। पटृपूर्ति, हरिद्वार या धार्मिक- सार्वजनिक स्थानों पर सेवाएं देना साहस का काम नहीं, सास द्वारा बहू की घर में थाली धो देना उससे भी बड़ा साहस का काम है

गुरुद्वारे और धार्मिक स्थानों पर जूते -चप्पल साफ करना उतना साहस का काम नहीं है जितना कि अपने घर के सदस्यों के जूते चप्पल साफ कर देना।

बाहर झाड़ू लगाते हुए फोटो खिंचवा कर डीपी पर डालना उतना साहस का काम नहीं है जितना घर में झाड़ू लगाना।

धार्मिक और सार्वजनिक स्थानों पर सफाई करना उतना साहस का काम नहीं है जितना घर में छोटे बच्चे द्वारा की गई गंदगी को साफ करना।

मृत्यु भोज को बंद करने पर भाषण देना उतने साहस का काम नहीं है जितना मृत्युभोज में भोजन न करना।

अस्वस्थ्य पत्नी को अस्पताल में भर्ती कर देना और हाटेल का भोजन करा देना उतने साहस का काम नहीं जितना कि स्वयं उसकी सेवा करना और स्वयं भोजन पका कर खिलाना । पति पत्नी दोनों सेवारत होने पर घर के काम भी पत्नी द्वारा ही कराना उतने साहस का काम नहीं जितना कि पति द्वारा उसे काम में सहयोग करना।

दहेज प्रथा पर निबंध लिखना या भाषण देना उतने साहस का काम नहीं है जितना कि दहेज न लेना।

पिछले दिनों एक अमीर व्यक्ति द्वारा गुरुद्वारे में जूते चप्पल साफ करते हुए वीडियो वायरल हुआ था जिसमें महंगी गाड़ी में उसे आते हुए दिखाया जाता है। गुरुद्वारे में उसे अपने बॉडीगार्ड के जूते चप्पल साफ करते हुए वीडियो वायरल हुआ है। गुरुद्वारे में जूते चप्पल साफ करना इतना साहस का काम नहीं है जितना कि उसका अपनी फैक्ट्री के मजदूरों के जूते चप्पल साफ करना। यदि वह अमीर जिस दिन अपनी फैक्ट्री के मजदूरों के जूते चप्पल साफ करने लगेगा उस दिन धार्मिक स्थल और गुरुद्वारे में जूते- चप्पल साफ करना उसके लिए अर्थहीन हो जाएगा।

इस तरह का साहस दिखाने पर जो अहंकार गलता है और जो विनम्रता ह्रदय में घर करती है उससे मिलने वाली खुशी, संतोष और आनंद किसी मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे और चर्च में मिलने वाली खुशी, संतोष और आनंद से भी बड़ा होता है।