कोरोना का कहर : खेतों से घरों तक पहुंच गई फसलें, कब खुलेंंगी मंडी और कब से होंंगा गेंहू का उपार्जन ?

अब खर्च के लिए रुपए तक नहीं कि सानों के पास, कि सान बोले-मंडी खुलने से ही खत्म होगी परेशानी

अनाज से भरे कि सानों के घर, जेब में रुपए नहीं, बढ़ रही परेशानियां

जिलेभर के कि सानों की एक सी स्थिति, कोरोना से बचाव के बीच परेशानी में गुजर रहे दिन, समर्थन मूल्य पर 15 अप्रैल से शुरू होगी खरीदी

के प्शन- घरों में जगह नहीं होने के कारण कि सानों ने घरों के बाहर ही लगा रखे हैं उपज के ढेर। नईदुनिया।

केप्शन- ग्राम कु चड़ौद में खेत-खलिहान में रखी लहसुन फसल, मंडी खुलने का इंतजार कर रहे कि सान। .

मुलतापी समाचार

बैैैैैैैैतूल। रबी सीजन की फसलों की कटाई के बाद उपज कि सानों के घरों में पहुंच गई है। लेकि न मंडियां बंद होने के कारण कि सानों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। घर उपज से भरे हैं पर जेबों में रुपए नहीं हैं। फसल की बोवनी से अब तक कि सान ने खर्च ही कि ए हैं, अब फसल विक्रय के बाद ही सभी खर्च निकलेंगे। फसल नहीं बेच पाने के कारण कई कि सान अपने खेतों में काम करने वाले मजदूरों को रुपए भी नहीं दे पा रहे हैं। कि सानों का कहना है कि खर्च के लिए रुपए भी नहीं हैं। एक-एक दिन बहुत दिक्कतों के साथ निकल रहा है। खेतों से सीधे मंडी में उपज पहुंचाने वाले कि सानों को दोहरी परेशानियां हो रही हैं, घरों में उपज रखने की जगह भी नहीं और मंडी खुलने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं। इसके कारण कई कि सानों ने घरों के बाहर ही उपज के ढेर लगा रखे हैं। गेहूं के कि सानों के लिए राहत की बात यह है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी 15 अप्रैल से शुरू हो रही है।

कुओं में पर्याप्त पानी एवं मौसम भी अनुकूल बना रहने से इस साल रबी सीजन में गेहूं, मेथी, लहसुन सहित सभी फसलों का बंपर उत्पादन हुआ है। बोवनी से लेकर फसल कटाई और उपज को घर व खलिहानों तक पहुंचाने के लिए कि सानों ने अब तक खर्च ही कि या है। सभी खर्च उपज विक्रय से ही निकलता है। लेकि न कोरोना से बचाव के लिए लगाए गए लॉक डाउन के कारण मंडियां बंद हैं। इसके कारण कि सानों की परेशानियां दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। कई कि सानों ने मजदूरों से फसल कटवाई है, अभी उनके पास मजदूरों को देने के लिए रुपए भी नहीं हैं। इसके अलावा खर्च तक के रुपए नहीं बचे हैं। सब कु छ फसल विक्रय पर ही निर्भर है। एक तरफ कि सानों के घर अनाज से भरे पड़े हैं लेकि न जेब खाली है, जिससे कारण दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। कि सानों का कहना है कि प्रशासन मंडी को चालू करे और जिले के बाहर से आने वाली उपज पर रोक लगाई जाए।

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