जप – तप और यज्ञ से महामारी के प्रकोप से बचता रहा ताप्ती – नर्मदाचंल अवैध रेत कारोबार एवं नदियों की उपेक्षा के चलते कोरोना ने अपने पांव पसारे


Multapi Samachar


इस समय पवित्र पुण्य सलिलाओ एवं आस्था विश्वास के चर्तुभूज खम्बो पर धर्म संस्कृति की प्रताका फहराता भारत उप महाद्धीप का गांव – शहर विदेशी सर जमीन (चीन) से आई कोरोना नामक महामारी के दंश से चिकित्सालय में पड़ा दम तोडऩे लगा है. बड़ी संख्या में अपने – अपने घरों में कैद टोटल लॉक डाउन में जकड़ा भारत का यह हाल कैसे हुआ यह जानना जरूरी है. नदियों के रूप और स्वरूप में तेजी से आए परिवर्तन एवं लोगो का धर्म कर्म काण्ड से विमुख हो जाने से पर्यावरण प्रदुषित हुआ और महामारी ने पांव पसार लिए. मध्यप्रदेश के सीमावर्ती बैतूल जिले एवं होशंगाबाद जिले की सीमा आपस में एक दुसरे से काफी किलोमीटर तक जुड़ी हुई है. जिले की सीमाओं को पश्चिम मुख्यी दो पुण्य सलिला नर्मदा एवं ताप्ती का निर्मल जल मिलता चला आ रहा है. इस समय यदि आकड़ो की बाते करे तो पता चलता है कि इन दोनो जिले में नर्मदा एवं ताप्ती के तेज एवं वेग के चलते महामारी ने अपनी आगोश में उतनी संख्या में लोगो को नहीं निगला जितनी संख्या में अन्य जिलो एवं प्रदेशो की आबादी को वह निगल चुका थी. बैतूल जिले में आकड़ो पर नज़र दौड़ाए तो पता चलता है कि जिले में पहली बार 1864 – 65 में हैजा फैला था. 1877, 1889, 1892,1895,1897, 1900 तक लगातार छै वर्षो तक यह महामारी फैली रही. एक हजार से अधिक मौते हैजा के कारण हुई. हालांकि 1901 से 1905 तक पूरा जिला हैजा मुक्त रहा. 1900 में हुई प्रति हजार पर 12 मौतो का आकड़ा चौकान्ने वाला था क्योकि इस दौर में मौते 3 हजार 608 हुई थी. 1906 में एक बार फिर हैजा फैला जिसमें 166 मौते हुई. वर्ष 1912 में 919 एवं 1916 में 431 मौते हुई. 1929 में सबसे अधिक 2,609 मौते हुई. 1938 में 4767 1945 में 1,081 तथा आजादी के बाद 1953 में 1,212 मौते हुई. पानी के संक्रमण के कारण सर्वाधिक मौतो पर पोटाश परमेग्रेट डाल कर जिले के गांवो एवं शहरो का जलशुद्धि करण कर इस बीमारी पर नियंत्रण पाया गया. हालांकि इस दौरान बड़ी मात्रा में हैजा निरोधक टीके एवं दवाओ का वितरण किया गया. भारत से हैजा से होनी वाली मौते एक प्रकार से रूक गई और आजादी के 70 सालो में इस बीमारी से मौत का प्रतिशत शुन्य रहा.
1904 में फैली प्लेग की 1942 में बिदाई
चेचक ने पांव पसारे
इसे अपवाद कहे या कुछ और ही जिसके अनुसार भारत में 1896 में महामारी बने प्लेग की एक वर्ष बाद 1897 प्लेग का टीका बन चुका था. इस महामारी ने अखण्ड भारत के केन्द्र बिन्दू बेतूल में 1904 में दस्तक दी. अग्रेंजो द्वारा 1823 को बनाए गए बेतूल वर्तमान जिला मुख्यालय (बदनूर) में 1904 में प्लेग से 35 मौते हुई. इस वर्ष ही प्लेग ने बैतूल नगर से गांवो की ओर पांव पसारे. वर्ष 1908 में जिले में प्लेग पूरी तरह से फैल चुका था. इस वर्ष 534 मौते हुई. इसके बाद लगातार 2 वर्षो 1911 में 104 तथा 1912 में 308 मौते हुई. वर्ष 1913 में प्लेग अधिकारी एवं कर्मचारी की नियुक्ति के साथ पूरे जिले में इस महामारी से लडऩे का मास्टर प्लान तैयार किया गया. जिसके चलते 4 वर्षो तक न तो प्लेग फैल सका और न उससे किसी प्रकार की मौते हुई लेकिन1917, 1918,1919 में एक बार फिर प्लेग ने पंाव पसार लिए जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगो की मौते हुई.1920 में 227 लोगो की मौत ने पूरे जिले को चौका डाला.1942 को बैतूल जिले से पूरी तरह से बिदा हो चुकी प्लेग ने 1928 में 742 तथा 1929 में 556 लोगो को अपने काल के गाल में जकड़ लिया.
बैतूल जिले में चेचक जैसी महामारी की 1977 में भारत से बिदाई
गुलाम एवं आजाद भारत के 59 सालो में 2 हजार से अधिक मौते
मध्यप्रांत के गठन के बाद 1896 से लेकर 1955 के बीच बैतूल जिले में चेचक (शीतला, बड़ी माता, स्मालपोक्स) से मरने वालो की संख्या 2,324 थी. चेचक एक विषाणु जनित रोग है. श्वासशोथ एक संक्रामक बीमारी थी, जो दो वायरस प्रकारों (व्हेरोला प्रमुख और व्हेरोला नाबालिग) के कारण होती है. इस रोग को लैटिन नाम व्हेरोला या व्हेरोला वेरा द्वारा भी जाना जाता है. बैतूल जिले से ही नहीं पूरें देश से 26 अक्टूबर 1977 को चेचक बड़ी माता की बिदाई हो गई. एक तथ्य यह भी है कि वर्ष 1796 में चेचक (बड़ी माता ) महामारी के रूप में सामने आई इस बीमारी का 1798 में एडवर्ड जेनर द्वारा चेचक के टीके की खोज की गई. 19वीं सदी के दौरान भारत में वायरस जनित रोगों से निपटने के कदम तेज हुए. इसके तहत वैक्सीनेशन को बढ़ावा दिया गया, कुछ वैक्सीन संस्थान खोले गए. कॉलरा वैक्सीन का परीक्षण हुआ और प्लेग के टीके की खोज हुई. बीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में चेचक के टीके को विस्तार देने, भारतीय सैन्य बलों में टायफाइड के टीके का परीक्षण और देश के कमोबेश सभी राज्यों में वैक्सीन संस्थान खोलने की चुनौती रही. आजादी के बाद बीसीजी वैक्सीन लैबोरेटरी के साथ अन्य राष्ट्रीय संस्थान स्थापित किए गए. 1977 में देश चेचक मुक्त हुआ. टीकाकरण का विस्तारित कार्यक्रम (ईपीआइ) का श्रीगणेश 1978 में हुआ.सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम 1985 में शुरू हुआ था. बैतूल जिले में 1956 से लेकर 1964 तक 9 वर्षो के प्रथम चरण में 2 लाख 1 हजार 414 लोगो को चेचक का टीका लगाया गया. द्धितीय चरण में इन 9 वर्षो में चेचक बड़ी माता के टीकाकरण के अभियान के तहत 6 लाख 33 हजार 673 लोगो को टीका लगवाया गया.
महामारी की रोकथाम के लिए
पंचामृत से बांधे गए गए गांव
बैतूल जिले के अधिकांश गांवो में चेचक,हैजा, प्लेग की महामारी के लिए ग्रामिणो द्वारा गांवो को पंचामृत से बांधा गया. बैतूल जिला मुख्यालय से लगे ग्राम रोंढ़ा के सेवानिवृत वनपाल श्री दयाराम पंवार के अनुसार गांव को दुध – दही – शहद – घी – गौमूत्र के मिश्रण की एक बहती धारा के साथ गांव की चर्तुभूज सीमाओ को बांधा गया. ग्रामिणो का विश्वास और आस्था ने अपना असर दिखाया और गांव पूरी तरह से महामारी के प्रकोप से मुक्त हो गया.
2012 में पूरी तरह से पोलियो मुक्त हुआ
मध्यप्रदेश का आदिवासी बैतूल जिला
महामारी के आते – जाते प्रभावो से बैतूल जिला पूरी तरह से प्र्रभावित रहा. जिले में यूं तो मलेरिया, क्षय रोग विषाक्त वायरस के चलते दस्तक दे चुके है. जिले ने वर्ष 2012 में पोलियो से जिले को मुक्ति मिल गई. बैतूल जिले में इस वर्ष मार्च में कोरोना जैसी महामारी की दस्तक ने सभी को चौका दिया. 21 दिन के लॉक डाउन के बाद जिला पूरी तरह से घर में कैद हो गया जिसके कारण जिले में मात्र एक व्यक्ति ही इस बीमारी से संक्रमित पाया गया. जिले में कोरोना की दस्तक ने एक बार फिर सवाल उठाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी.
कोरोना की बीमारी का कारण क्या !
जल – थल – वायु सभी पूरी तरह से प्रदुषित
बैतूल जिले में कोरोना की दस्तक का कारण भले ही तबलीगी जमात से जुड़े लोग रहे हो लेकिन सवाल यह उठता है कि जिले में इस महामारी संक्रामण फैला कैसे और क्यों ! अकसर कहा जाता है कि बीमारी को फैलाने में हवा और पानी का सबसे अधिक जवाबदेह होते है. जिले के गांव – गांव तक इस बीमारी के फैलने के प्रमुख कारणो पर यदि गौर किया जाए तो पता चलता है कि बीते 3 दशको में ताप्ती एवं नर्मदाचंल में वायु प्रदुषण बढऩे से यहां का पर्यावरण प्रदुषित है. बैतूल – होशंगाबाद जिले की दो प्रमुख नदियों सहित जिले की नदियो एवं नालो में बड़े पैमाने पर रेत के लिए अवैध उत्खनन ने जिले की नदियो से लेकर नालो तक को प्रदुषित किया है. बैतूल या होशंगाबाद जिले में बड़े पैमाने पर नदियों से ही जल आपूर्ति की जाती है. ऐसे में कोरोना के वायरस का गांव – गांव तक या घर – घर तक प्रवेश का एक माध्यम प्रदुषित जलआपूर्ति भी हो सकती है. इस समय जानकार लोग इन जिलो में संक्रामक बीमारो से अन्य प्रदेश एवं जिलो में होने वाली मौतो के अनुपात में कम मौतो के लिए जिले की पवित्र पुण्य सलिलाओ को मानते है. भले ही बीते एक दशक में नदियों के किनारे धार्मिक आयोजन यज्ञ एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम जिसमें बड़े पैमाने पर डाली जाने वाली आहूति से वायु प्रदुषण की रोकथाम होती है. शुद्ध हवा के लिए यज्ञ संस्कार जरूरी है
ताप्ती – पूर्णा – नर्मदा की उपेक्षा ने
कोरोना जैसी महामारी को दिया संरक्षण
बैतूल जिले मे एक मात्र संक्रामक रोगी भैसदेही का व्यक्ति मिला. भैसदेही पुण्य सलिला चन्द्रपुत्री पूर्णा का जन्म स्थान है. आज प्रदेश की नदियों की तरह पूर्णा भी उपेक्षित एवं प्रदुषित है. पूर्णा घाटी को लेकर बना गए पूर्णा पुर्न:जीवन प्रकल्प के दम तोडऩे के बाद नर्मदा एवं ताप्ती को प्रदुषण मुक्त करने की कोई ठोस नीति या रीति सामने नहीं आई. नदियो की उपेक्षा एवं उनके किनारो के रख रखाव तथा घाटो के बड़े पैमाने पर निमार्ण न होने के कारण नदियों ने अपना स्वरूप विकृत कर लिया. बीते एक दशक से नदियों के किनारे धार्मिक यज्ञ संस्कार कम अवैध रेत का कारोबार फल – फूल रहा है. जिसके कारण इन दोनो जिले की हवा और पानी दोनो ही प्रदुषण की मार के शिकार हो चुके है. जमीनी प्रदुषण का प्रमुख कारण गगन चुम्बती इमारतो एवं अवैध अतिक्रमण के साथ जिले में बड़े पैमाने पर नगरीय निकायो एवं ग्राम पंचायतो द्वारा बनवाए गए कचरा घरो से है जो हजारो टन कचरा एकत्र कर जिले में ऐसे स्थानो की संख्या में बढ़ोतरी लाए हुए जिन्हे सरकारी भाषा में प्रेचिंग गाऊण्ड कहा जाता है जहां पर पूरे शहर का पन्नी प्लास्टीक सड़ता या फिर जलता हुआ प्रदुषण का जनक बना हुआ है. आज जरूरत है कि महामारी से बचने के लिए हम बड़े पैमाने पर अपने जल – थल – नभ को प्रदुषण मुक्त रखे ताकि इन तीनो के माध्यम से कोई जानलेवा महामारी अपने पांव पसार न सके.
इति

मुलतापी समाचार – रामकिशोर दयाराम पंवार

कोरोना संकट से हो रहे बेहाल कुम्हार, न तो मटके – सुराही बिके और न ही ईंटें, गर्मी में होता है लगभग करोड़ाेे का कारोबार


फाइल फोटो

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Betul/ Multai News: कोराना वायरस के संक्रमण से देश-विदेश  की जनता  के साथ  व्यापार जगत को भी बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है  बड़े उद्योग और उद्योगपतियों को शायद इस कोरोना संक्रमण  से भले ही बहुत ज्यादा फर्क न पड़ता हो लेकिन देश में कई ऐसे उद्योग है जो कि मौसम  के साथ फलते और फुलते हैं परिवार गर्मी के मौसम में अगले साल भर की कमाई को लगाकर कुछ आर्थिक लाभ पाने के उद्देश्य से व्यवसाय में लगाते हैं हम बात करें उस कुम्हार प्रजापति समाज की जो गर्मियों के मौसम में मटके , सुराही जैसे कृत्रिम  लघु उद्योग  चलाकर  अपने और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं हाल ही में ईंट निर्माण पर भी कोहरे के साथ ओलों की मार पड़ी है। अभी 700 करोड़ का नुकसान कोरोना के चलते होना प्रजापति समाज के लोगो का मानना है ।

समाज के पदाधिकारियों के अनुसार सांध्य दैनिक खबरवाणी को दी गयी जानकारी में प्रदेश के लगभग चार लाख कुम्हार परिवार ईंट निर्माण,मटके सुराही बनाने का काम करते है। कोरोना के कारण निर्माण उद्योग बंद होने से नुकसान हो रहा है । कोराना का सबसे ज्यादा  असर ईंट भट्टे पर पड़ा जो पूरी तरह से बंद हो गए हैं , वहीं रही कसर मटके – सुराही के कारोबार  ने पूरी कर दी ।  मार बारिश के कारण अधिकांश जिलों में लगे मटके – सुराही और पक्षियों के लिए  बनाये मिट्टी के बर्तन पड़े हुए है । ईंट भट्टे भी पानी की वजह से बुझ गए , जिससे ईट पक नही पाई । और बिक्री भी बंद है । इसका सबसे ज्यादा असर कुम्हार समाज के लोगों पर पड़ा है ।इस समाज ने मांग की है कि इस संकट के दौर से उबरने के लिए उचित मुआवजा प्रदान किया जाए ।

Corona Bhopal News पैदा हुआ अजीब संकट, CORONA के आधे मरीज हेल्थ डिपार्टमेंट के, IAS अफसर भी चपेट में


मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अब तक कुल 142 लोग कोरोनावायरस (Coronavirus) से संक्रमित हो चुके हैं. इनमें से आधे से ज्यादा स्वाथ्य विभाग के कर्मचारी हैं.

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नई दिल्ली: कोरोनावायरस (Coronavirus) यूं तो सारे देश में ही कहर मचा रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश में अलग तरह की परेशानी पैदा हो गई है. राजधानी भोपाल (Bhopal) में अब तक कुल 142 लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. इनमें से आधे से ज्यादा स्वाथ्य विभाग के कर्मचारी हैं. इस बीच, रविवार को शहर में एक आईएएस अफसर और 12 साल की किशोरी सहित 9 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यरत यह अफसर 2013 बैच का आईएएस है. इसके अलावा कोरोना से एक मौत की पुष्टि भी हुई है.
भोपाल में रविवार को कोरोना पॉजिटिव मरीजों की लिस्ट में 9 और लोग जुड़ गए. शहर में अब कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 133 से बढ़कर 142 हो गई है. इनमें स्वास्थ्य विभाग के 75 कर्मचारी शामिल हैं. उधर, इंदौर में भी दो लोगों की मौत हुई है. आठ नए मरीज भी मिले हैं. खरगोन में एक व्यक्ति की मौत हो गई है.
दैनिक भास्कर के मुताबिक भोपाल में शनिवार को 49 साल के इमरान खान की मौत हुई थी. रविवार को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. इमरान को एक साल से मुंह का कैंसर भी था. वे घर पर ही रहते थे. यह पता नहीं चल पाया है कि उन्हें संक्रमण कैसे हुआ. उनके भाई राशिद ने बताया कि इमरान को हर 15 दिन में कीमोथैरेपी के लिए भर्ती किया जाता था. कीमो के बाद उन्हें उल्टी-दस्त और बुखार आ जाता था. शनिवार को अचानक तबीयत खराब होने पर एम्स ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. रविवार को ही इटारसी में 5 नए मरीज मिले हैं. उज्जैन में सात साल का एक बच्चा भी संक्रमित मिला है.

इधर, प्रदेश सरकार ने भोपाल, इंदौर और उज्जैन के बिगड़ते हालात को देखते हुए रविवार को कोरोना संदिग्ध व्यक्तियों के 1200 सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजे. सरकार ने दिल्ली से दवाएं भी मंगाई है. इसमें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन टैबलेट भी शामिल हैं, जो गले में इंफेक्शन के दौरान दी जाती है.

उज्जैन में 1 दिन में सर्वाधिक 7 नए केस, एक और मौत


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

उज्जैन: शहर में सोमवार को कोरोना संक्रमण के 7 नए मामले सामने आए है! इनमें से 75 वर्षीय बुजुर्ग की इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई थी! वहीं छह अन्य लोगों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है! रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कुछ और क्षेत्र कंटेनमेंट एरिया में तब्दील कर दिए गए! कई लोगों को होम क्वॉरेंटाइन कर कुछ संक्रमित को अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया है!

उज्जैन जिले में अभी तक 25 मामले सामने आ चुके है! इनमें से 6 की मौत हो गई है, वही चार ठीक भी हुए हैं! ऐसा पहली बार हुआ है कि जिले में 1 दिन में 7 नए संक्रमित मरीज मिले हो!

मुलतापी समाचार

दिल दहला देने वाली घटना- अपहरण के दिन ही मासूम के साथ दुराचार कर की थी हत्या


बैतूल – मासूम बच्ची का अपहरण करने वाले दरिंदे ने अपहरण के दिन ही मासूम को जंगल लेकर गया उसके साथ दुराचार कर गाला घोटकर हत्या कर दी है।दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को झकझोर दिया है।घटना का खुलासा करते हुए शाहपुर  एसडीओपी महेंद्र सिंह मीणा ने बताया कि 15 मार्च को चिचोली थाना क्षेत्र के सेधुरजना निवासी 3 वर्षीय मासूम बच्ची का दिनदहाड़े अपहरण हो गया था।  अपहरण करने वाले युवक की पहचान दभेरी निवासी आरोपी विनोद उर्फ टिंकू साबले 33 वर्ष के रूप में की गई। घटना के दिन से पुलिस आरोपी और बच्ची की तलाश कर रही थी।एसपी बैतूल  ने आरोपी पर 10 हजार और  होशंगाबाद आईजी ने 30 हजार  का इनाम रखा था। दो दिन पहले आरोपी को झल्लार पुलिस ने पकड़ा। जिससे पूछताछ की तो सनसनीखेज मामला सामने आया। आरोपी ने बताया की अपहरण के घटना के दिन ही वह बच्ची को चिचोली  नांदा के जंगल ले गया और उसके साथ दुराचार किया  इसके बाद बच्ची की गला घोंटकर हत्या कर दी और शव को जंगल में ही फेंक दिया। पुलिस ने घटना  स्थल पर पहुंचकर जयजा लिया  जंगल से बच्ची का कंकाल मिला है कंकाल के पास मिले कपड़ों की आधार पर बच्ची की शिनाख्त की गई। पुलिस ने बताया कि आरोपी घटना के बाद जंगल जंगल घूमता और किसी भी होटल में भोजन कर जंगल मे ही सो जाता था। जिले में लॉक डाउन हुआ तो सारी होटल, ढाबे बंद हो गये तो आरोपी भोजन के लिए परेशान होने लगा। एक दिन आरोपी झल्लार क्षेत्र में राशन की तलाश करने आया  जिसकी  जानकारी पुलिस को मिली वैसे ही पुलिस ने घेराबंदी करते हुये आरोपी को दबोच लिया। 

Corona संकट में जन-अभियान परिषद, NCCऔर nss का सहयोग लें CM चौहान


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वी.सी. के माध्यम से दिए निर्देश

मुलतापी समाचार

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जन-अभियान परिषद, एनसीसी तथा एनएसएस का समाज सेवा में बहुमूल्य योगदान रहा है। मौजूदा कोरोना संकट में जनता को सहायता पहुँचाने के कार्य में इनका सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से जन-अभियान परिषद, एन.सी.सी. एवं एन.एस.एस के अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। 

प्रदेश में जन-अभियान परिषद के 416 व्यक्ति जिला एवं ब्लॉक स्तर पर कार्य कर रहे हैं, जिनका लगभग 27 हजार संस्थाओं से ग्रामीण स्तर तक सम्पर्क है। गत डेढ़ वर्षों में गतिविधियाँ नहीं हुई हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परिषद सक्रिय रूप से कोरोना संकट में लोगों को मदद पहुँचाने का कार्य करे। परिषद का अमला अपने क्षेत्रों में कार्य कर रहे गैर-सामाजिक संगठनों की सूची बनाए तथा उनका भी मौजूदा कोरोना संकट में सहयोग लिया जाए। 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जन-अभियान परिषद के कार्यकर्ता स्थानीय प्रशासन की मदद से जरूरतमंदों को भोजन एवं खाद्यान्न पहुंचाने का कार्य करें। इसी के साथ, ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी दवाओं के वितरण कार्य में भी सहयोग करें। ये दवाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर होती हैं। वे कोरोना वायरस के संबंध में ग्रामीणजनों को तथ्यात्मक जानकारी भी दें। 

प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री नीरज मंडलोई ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रदेश में एन.एस.एस. की 735 इकाईयां कार्य कर रही हैं, जिनमें कुल डेढ़ लाख विद्यार्थी हैं। इनमें से एक लाख विद्यार्थी कॉलेज के हैं, जिनका सहयोग कोरोना संकट के दौरान लिया जा सकता है। कोरोना संकट के दौरान कार्य करने के लिए 10 हजार विद्यार्थियों ने अपनी सहमति दी है। 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि इन संस्थाओं का सहयोग सोशल मीडिया के माध्यम से उपयोगी संदेशों के प्रसारण, सूचना केन्द्र, कॉल सेंटर, खाद्य एवं अन्य सामग्री वितरण आदि के लिए किया जा सकता है। विद्यार्थियों को ऐसा काम दिया जाना चाहिए, जिसमें उन्हें कोई खतरा नहीं हो। 

एन.सी.सी. के ए.डी.जी. मेजर जनरल श्री संजय शर्मा ने मुख्यमंत्री को बताया कि कोरोना संकट में एन.सी.सी सीनियर डिवीजन के ऐसे विद्यार्थियों की सेवाएं ली जा सकती हैं, जो 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं। ऐसे 700 बच्चों को चिन्हित किया गया है, जिनके परिवारों ने सहमति दी है। इनका उपयोग हैल्पलाईन, कॉल सेंटर, सामग्री आपूर्ति प्रबंधन तथा राहत सामग्री वितरण आदि में लिया जा सकता है। इन्हें आवश्यक प्रशिक्षण देकर कार्य में लगाया जा सकता है। 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन्हें समुचित प्रशिक्षण दिलवाए जाकर इनकी सेवाएं कोरोना संकट के दौरान नियमानुसार ली जाएं। इन्हें पूरी सुरक्षा और सावधानी के साथ कार्य पर लगाया जाए, जो बच्चे जिस शहर/गाँव के हों, वहीं उनकी सेवाएं ली जाएं। 

किसानों को नहीं मिल रहा फसल का उचित दाम,20 हजार रुपए एकड़ की मदद दे सरकार


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री ने कहा है कि केंद्र सरकार किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं दे रही है! स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को उसकी मूल भावना के साथ लागू नहीं किया गया है!

योजना आयोग के पूर्व सदस्य रहे शास्त्री का कहना है कि 2017 में उन्होंने स्विट्जरलैंड जाकर वहां की खेती मॉडल का अध्ययन किया था! तब वहां सरकार किसानों को सालाना प्रति हेक्टेयर 2993 Euro यानी करीब ढाई लाख रुपए खेती करने के लिए वजीफा के तौर पर देती थी! इसके साथ ही किसान अपना उत्पाद कहीं भी किसी भी रेट पर बेचने के लिए आजाद होता था! मैं भारत में भी इसी मॉडल पर किसानों को सालाना एक निश्चित रकम देने की मांग कर रहा हूं! देश में 86 फ़ीसदी लघु एवं सीमांत किसान है! उन्हें 20 हजार रुपए प्रति एकड़ सरकारी मदद दी जाए! इसके साथ ही बाकी सब्सिडी खत्म कर दी जाए! इससे किसानों की स्थिति में सुधार आ सकता है! मुलतापी समाचार

आज युद्ध, युद्धभूमि और सैनिक भी बदल गए हैं


युद्धभूमि में सैनिकों से लड़ा जाने वाला युद्ध घर के सदस्यों द्वारा घर में लड़ा जा रहा है।

बटोरने वाले हाथ भी अब बांटने के लिए उठने लगे हैं। जो सबक कृष्ण के माखन बांटने वाले हाथ न सिखा सकें वह सबक कोरोना के कातिल हाथों ने सिखा दिया
आज युद्ध, युद्धभूमि और सैनिक भी बदल गए हैं। युद्ध का सारा साजो-सामान, समस्त सैनिक शक्ति सब अप्रासंगिक से हो गए है। युद्ध भूमि पर लड़ा जाने वाला युद्ध अब घर में रहकर अकेले लड़ा जाने लगा है।

घर से लड़ा जाने वाला यह युद्ध विश्व का पहला युद्ध कहलाएगा।
कोरोना ने सारे लोगों की ग्रह राशि ही एक नहीं कर दी अपितु हिंदू-मुसलमान-सिख-ईसाई -यहूदी, बौद्ध से सभी को मनुष्य बना दिया है ।

बटोरने वाले हाथ भी अब बांटने के लिए उठने लगे हैं। जो सबक कृष्ण के माखन बांटने वाले हाथ न सिखा सकें वह सबक कोरोना के कातिल हाथों ने सिखा दिया है।

इस युद्ध ने देश की सरहदों को अप्रासंगिक कर दिया है। इस समय दुनिया की किसी सरहद पर युद्ध नहीं है। युद्ध घरों में लड़े जा रहे हैं। युद्धभूमि में सैनिकों की सहायता से आमने-सामने लड़ा जाने वाला युद्ध घर के सदस्यों द्वारा घर में छिपकर लड़ा जा रहा है। दुश्मन को छिपकर मारा जा रहा है। भगवान राम ने बालि को छिपकर मारा था। आज हर व्यक्ति राम की तरह अपने शत्रु को छिपकर मारने हेतु विवश हैं। इतिहास इतनी जल्दी दोहराया जाएगा इसकी कल्पना भी नहीं थी।

कोरोना ने धर्म-जाति का भेद मिटा दिया है। सभी पर उसकी नजरें गड़ी हुई है। ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य शूद्र सभी उसके शिकार हो रहे हैं। समदर्शी बने कोरोना की नजरों में सभी समान है। संभव है, कोरोना के यह कातिल हाथ विश्व को मानवता की नई परिभाषा सिखा दे।

दिल्ली में 24 घंटे में दूसरी बार आए भूकंप के झटके


मुलतापी समाचार

नई दिल्ली: दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सोमवार को फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए! रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 2.17 आंकी गई! राजधानी की धरती 24 घंटों के भीतर दूसरी बार भूकंप के झटकों से हिल उठी है जिससे लोग दहशत में है! राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप की मध्यम तीव्रता के झटके दोपहर 1:30 बजे महसूस किए गए! रविवार शाम को भी दिल्ली में भूकंप आया था!

उल्लेखनीय है कि भूकंप की अधिक तीव्रता के लिहाज से देश को पांच जोन में बांटा गया है! केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक जीएल गौतम के अनुसार भूकंप का केंद्र उत्तर पूर्व दिल्ली के वजीराबाद क्षेत्र में जमीन से 8 किलोमीटर गहराई में केंद्रित था!

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी रविवार को ट्वीट कर कहा था कि दिल्ली में भूकंप के झटके महसूस किए गए! आशा है सभी लोग सुरक्षित होंगे! मैं आप सभी में से हर एक के सुरक्षित होने की दुआ करता हूं! सोमवार को आए भूकंप के कारण भयभीत लोग अपने घरों से बाहर आ गए! स्थानीय प्रशासन ने अब तक जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिलने की जानकारी दी है!

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हेल्पलाइन no. को save करे पायें कोरोना सम्बंधित जानकारी 1 click में


माँ ताप्ती ब्रिगेड मुलतापी द्वारा

मुलतापी समाचार

मुलताई। माँ ताप्ती ब्रिगेड मुलतापी द्वारा पूर्व केबिनेट मंत्री सुखदेव पांसे द्वारा कोरोना के प्रति लोगो को जागरूक करने व अफवाहों से बचाने के लिए whatsapp हेल्पलाइन no. 9399051560 जारी किया ।
ब्रिगेड के ओम बावने द्वारा बनाये इस हेल्पलाइन no. को save करने पर Hii भेजने से कोरोना सम्बंधित सारी जानकारी 1 click पर उपलब्ध होगी ।।
जिसमे जिले , प्रदेश व देश के कोरोना मरीजो की संख्या , बचाव के तरीके आसानी से उपलब्ध होंगे ।

सुखदेव पांसे ने कहा कि युवाओं का ये प्रयास अफवाह रोकने में सहायता करेगा और अधिक से अधिक लोग इसका लाभ ले व सुलभता से सारी जानकारी प्राप्त करे ।
इस अवसर पर माँ ताप्ती ब्रिगेड के पवन पाठेकर , ऋषभ पाटनकर , अनीस साहू , सौरभ कड़वे , सोनू धनराज , कुणाल बावने व लोकेश डोंगरे उपलब्ध थे ।।