डॉक्टर अंबेडकर जयंती पर उनके यह अनमोल वचन, 32 डिग्रियों के साथ 9 भाषाओं के जानकार थे डॉक्टर अंबेडकर

मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

नई दिल्ली: भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की आज जयंती है! इस खास मौके पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है! हालांकि लॉक डाउन और कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से वैसे तो कोई बड़ा आयोजन नहीं किया जा रहा है, लेकिन हर कोई उन्हें याद कर उनकी जयंती की शुभकामनाएं दे रहा है! बाबा साहेब का जीवन देश में जात पात को दूर करने और सभी को सम्मान दिलाने की कोशिश में व्यतीत हुआ! उन्होंने देश के संविधान में भी सभी को सक्षम बनाने के लिए प्रावधान किए थे! 31 मार्च 1990 को उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था!

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था! उनके पिता का नाम रामजी मालो जी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था! वह अपने माता-पिता की 14 संतानों में से अंतिम संतान थे! बाबासाहेब आंबेडकर 32 डिग्रियों के साथ 9 भाषाओं के जानकार थे! लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में मात्र 2 साल 3 महीने में उन्होंने 8 साल की पढ़ाई पूरी की! वह लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से से ‘डॉक्टर ऑल साइंस’नामक एक दुर्लभ डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाले दुनिया के पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं! प्रथम विश्व युद्ध की वजह से उनको भारत वापस लौटना पड़ा! कुछ समय बाद उन्होंने बड़ौदा राज्य के सेना सचिव के रूप में नौकरी प्रारंभ की! बाद में उनको सिडनेम कॉलेज आफ कॉमर्स and इकोनॉमिक्स में राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर के रूप में नौकरी मिल गई! कोल्हापुर के शाहू महाराज की मदद से एक बार फिर वह शिक्षा के लिए लंदन गए!

अपने जीवन को बाबासाहेब ने अन्य लोगों के लिए पाठशाला बना दिया! उनका जीवन एक ऐसी किताब है जिससे हर व्यक्ति सीख सकता है! उनके संघर्ष से लेकर संविधान निर्माण तक के सफर में उन्होंने कई ऐसे अनमोल वचन कहे हैं, जो आज भी लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं! हम आज आपके लिए वही अनमोल वचन लेकर आए हैं जिनकी मदद से आप भी जीवन में सफलता की तरफ बढ़ सकते हैं-

आदि से अंत तक हम सिर्फ एक भारतीय हैं

जीवन लंबा होने की बजाय महान होना चाहिए

यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए!

जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता हासिल नहीं कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है, वह आपके किसी काम की नहीं!

बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए!

मुलतापी समाचार

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