डीएसपी ने गाना गाकर नागरिकों का मन मोहा, अजय गुप्ता अपनी कला से कर रहे हैं लोगों को जागरूक


बैतूल। कोरोना संकट से निपटने के लिए पूरे देश में पुलिस का महत्वपूर्ण योगदान दिख रहा है। लॉक डाउन का पालन करवाने के लिए कभी पुलिस डंडा चलाती है तो कभी हाथ जोड़कर लोगों को समझाने की कोशिश करती है। बैतूल में भी लॉक डाउन का पालन कराने के लिए पुलिस ने कुछ नवाचार किए हैं।

इन्हीं नवाचारों में एक नवाचार ट्रेनी डीएसपी अजय गुप्ता का है। 2017 बैच के डीएसपी श्री गुप्ता को लॉक डाउन के दौरान जनरल सुपर विजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है जिसको लेकर शहर के सभी पाईंटों पर तैनात पुलिस बल की समस्याओ को लेकर उनसे चर्चा करना, शहर में घूमकर स्थिति का जायजा लेना, कहीं अनावश्यक भीड़ लगी हो तो उसको हटवाना ऐसे कई कार्य श्री गुप्ता कर रहे हैं। इन कार्यों के अलावा वे अपनी कला के माध्यम से लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। दरअसल अजय गुप्ता को गाने का शौक है और उन्होंने अपने शौक का सदुपयोग कोरोना संकट के लिए किया है।

सांध्य दैनिक खबरवाणी को श्री गुप्ता ने बताया कि उन्होंने कोरोना को लेकर जागरूक करने के लिए दो गाने तैयार किए हैं और शहर की कालोनियों में कोरोना के खतरे, उससे बचाव को लेकर गानों के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। नागरिक भी इस दौरान तालियां बजाकर पुलिस का उत्साहवद्र्धन कर रहे हैं। कई स्थानों पर तो लोग पुलिस पर फूल वर्षाकर उनका सम्मान करते हैं। श्री गुप्ता के जागरूक करने के तरीके ने लोगों का मन मोह लिया है। 

युवाओं द्वारा की जा रही है गरीबों की मदद


मुलतापी समाचार


बगडोना । कोरोनो वायरस के कारण पूरा देश लॉक डाउन है सरकार के तरफ से हर संभव मदद गरीब परिस्थितियों के लोगों के लिए की जा रही है मगर हर जगह मदद पहुचना संभव नही है । वेकोलि क्षेत्र पाथाखेड़ा , सारणी में दिहाड़ी मजदूर वाले कई परिवार निवास करते है जो प्रतिदिन काम करके अपना गुजर बसर करते है और परिवार चलाते है लॉक डाउन होने के कारण ऐसे लोगो के सामने संकट आ गया है कई लोगो के मुखिया प्रदेश से बाहर काम करने गए थे जो वहीँ रहे गए है ऐसे लोगो की मदद करने के लिए पाथाखेड़ा के युवा आगे आ रहे है युवाओं द्वारा ऐसे परिवार जो आर्थिक रूप से कमजोर है जिनके मुखिया घर में नही है विधवा महिलाएं को खाने का सामना का पैकिट जिसमें चावल ,दाल , तेल , मसाले है का वितरण युवाओं द्वारा निस्वार्थ भाव से किया जा रहा है युवा शिवा रघुवंशी ,दीपक रघुवंशी राकेश रघुवंशी , गजानंद रघुवंशी , नजब अली, , विक्रांत बड़गुजर ,विजय पोटफोड़े,,, रोहन रघुवंशी, हिमांशु चतुर्वेदी, यश साहू, राहुल पवार ने बताया कि उनके द्वारा आपस मे पैसे एकत्रित कर और अन्य मित्रों से फ़ोन पे , ऑनलाइन राशि के माध्यम से राशि एकत्रित कर लोगों की मदद करने का प्रयास किया जा रहा है युवाओं ने कहा कि जो भी परिवार को ऐसे समय मे मदद की जरूरत हो वे संपर्क कर सकते है ।

प्राइवेट लिमिटेड बनकर रह गई जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति: तरुण कालभोर


तरुण कालभोर अध्यक्ष ग्रामीण ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बैतूल

प्राइवेट लिमिटेड बनकर रह गई जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति।

जमीनी हकीकत जाने बिना कैसे होगा दूर अंचल की समस्याओं का समाधान।

बैतूल – कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न गंभीर परिस्थितियों के बीच जिला प्रशासन ने कोरोना संकट प्रबंधन समिति का गठन किया है। लेकिन जिस उद्देश्य से समिति गठित की गई है वह कारगर होती दिखाई नहीं दे रही है। समिति में आदिवासी वर्ग के किसी भी मुखिया को शामिल नहीं किया गया है। जिसके चलते संकट से उबारने के लिए बनाई गई समिति दूर अंचल की वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ है। समिति के गठन को लेकर ब्लॉक कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष तरुण कालभोर ने आरोप लगाते हुए कहा है कि इस समिति में आदिवासी और हरिजन वर्ग की उपेक्षा हुई है। श्री कालभोर का कहना है आदिवासी जिला होने के नाते समिति में आदिवासी वर्ग के व्यक्ति को शामिल किया जाना था क्योंकि आदिवासियों की समस्या को एक आदिवासी ही अच्छे से समझ सकते हैं। वहीं हरिजन वर्ग से भी किसी को शामिल नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई है। श्री कालभोर का कहना है धार से लेकर खोमी बैरियर, छिंदवाड़ा, हरदा और खंडवा बॉर्डर तक बैतूल जिले का क्षेत्रफल है। इसमें भी 45 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासियों की है। भीमपुर, भैंसदेही, आठनेर सहित 7 ब्लॉक ट्राईबल क्षेत्र है। अधिकांश ब्लॉक की जनसंख्या की 45 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है। इनके जीवन जीने की कला, महुआ गुल्ली की संस्कृति आदिवासी वर्ग का व्यक्ति ही अच्छे से जान सकता है। कोरोनावायरस के दौर में आदिवासी वर्ग कैसे सादगी से अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं इसकी सटीक राय भी आदिवासी वर्ग का व्यक्ति ही दे सकता है। इसके बावजूद जिला प्रशासन के नेतृत्व में गठित समिति में आदिवासी और हरिजन वर्ग को दरकिनार किया गया है। समस्या के समाधान के लिए बनाई गई यह समिति कोरोना प्राइवेट लिमिटेड समिति बनकर रह गई है। इस समिति में एक भी सदस्य ना तो आदिवासी है, ना ही आदिवासी क्षेत्र के हैं। समिति में अरुण गोठी, हेमंत खंडेलवाल, मोहन नागर, ब्रज आशीष पांडे, डॉ.राजेंद्र देशमुख सहित अन्य सदस्यों को शामिल किया गया है और यह सभी जिला मुख्यालय पर ही निवासरत है।

सबसे ज्यादा परेशानी में है आदिवासी समुदाय–
गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशानी में आदिवासी समुदाय के लोग हैं। इनमें से ज्यादातर कभी खेतों में तो कभी शहरों में मजदूरी करते हुए जीवनयापन करने वाले हैं। इनके पास न तो खेती वाली बड़ी जमीनें हैं और न ही रोजगार का कोई दूसरा साधन। इनमें से जो अभी भी शहरों में फंसे हैं, उनके सामने दो जून की रोटी का सवाल है और जो अपने गांव घर तक लौट आए हैं, उनमें से ज्यादातर के सामने भी रोजी-रोटी का संकट है। गांवों में, जंगलों में, अपने डेरों, कस्बों, ढानों, मजरे और टोलों में रहने वाले ये लोग इन दिनों भारी मुसीबत में जी रहे हैं। उनका वर्तमान तो जैसे-तैसे कट रहा है, लेकिन आने वाले बारिश के मौसम में और उसके साथ आर्थिक मंदी के दौर में उनका गुजर-बसर कैसे होगा? सरकारी मदद उन तक कब और कितनी पहुंचेगी और तब तक उनकी स्थिति-परिस्थितियां कैसी हो चुकी होंगी, इस पर विचार जरूरी है। संक्रमण, कोरोना, लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंस और क्वारंटाइन जैसी चीजों से बेखबर रहा आदिवासी समुदाय अपनी रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति तक नहीं कर पा रहा। आम दिनचर्या में लगने वाली चीजों के लिए साप्ताहिक बाजार, शहरों से आने वाले छोटे व्यवसायियों पर निर्भर रहने वाले जनजाति समुदाय के लोगों तक सरकारी मदद-राहत उतनी मात्रा में नहीं पहुंच पा रही है, जितना उसका प्रचार-प्रसार हो रहा है। यह तो भला हो कि इस समय गेहूं की कटाई में लगे कुछ मजदूरों को काम मिल गया है तो कुछ इस मौसम ने आम, महुआ जैसे फल आदिवासियों को दे दिए हैं। चिंता है कि आने वाले बारिश के दिनों में जब आदिवासी को कहीं काम नहीं मिल सकेगा तब संकटमोचन कौन होगा?

मालीखेड़ा का उदाहरण भी है सामने–
चिचोली विकासखंड के सुदूर आदिवासी अंचल टोकरा के ग्राम मालीखेड़ा में जब आदिवासियों के पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा, तो उन्होंने राशन के लिए गुहार लगाई। बमुश्किल उन तक कुछ सरकारी राशन पहुंचा। फोटो खिंचवाने और राशन देने की रस्मों के बाद वे अपने पेट की आग बुझा पाए। हालात फिर वही पुराने जैसे हैं। कमोबेश ऐसा ही हाल सभी आदिवासी क्षेत्रों का है। कुछ जगह वन विभाग, पुलिस विभाग या पंचायत विभाग के माध्यम से आदिवासियों तक राशन पहुंचाया जा रहा है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा जितना है।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल

दुनिया का सबसे बड़ा परिवार , कोरोना से महफूज


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में दुनिया का सबसे बड़ा परिवार रहता है! 74 साल के जियोना के परिवार में 39 पत्नियां और 94 बच्चे हैं! परिवार में कुल मिलाकर 181 लोग हैं! सभी एक विशालकाय मकान में रहते हुए कोरोना से महफूज हैं! वैसे तो मिजोरम में केवल एक ही शख्स कोरोना वायरस का पॉजिटिव पाया गया है!

यह दुनिया का सबसे बड़ा परिवार है! कोरोना वायरस का जरा सा भी असर इस परिवार पर नहीं पड़ा है! घर के मुखिया जिओना चाना की 39 बीवियां हैं और 94 बच्चे, इसके साथ ही 14 बहुओं और 33 पोते पोतिया भी हैं, और एक नन्ना प्रपुत्र भी है ! यह पूरा परिवार इसमें कुल मिलाकर 181 सदस्य हैं, जो 100 कमरों के मकान में एक साथ रहते हैं!

मुलतापी समाचार

मध्यप्रदेश के इंदौर में शुरू हुआ प्लाजमा थेरेपी से कोरोना का इलाज


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

इंदौर: इंदौर प्रदेश का ऐसा शहर बन गया है, जहां कोरोना के मरीजों का प्लाजमा थेरेपी की मदद से इलाज शुरू हो गया है! कोरोना के हॉटस्पॉट बने इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल में प्लाज्मा थेरेपी से मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है! इंदौर के दो मुस्लिम युवा डॉक्टरों ने सबसे पहले अपना प्लाज्मा कोरोना ग्रस्त  2 मरीजों को दान किया है! जिसको लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि इस थेरेपी की मदद से बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं!

कोरोना के इलाज में कारगर बताई जाने वाली प्लाज्मा थेरेपी उन मरीजों को दी जाएगी, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है! क्योंकि ऐसे कई मरीज हैं जिनका लंबे समय से इलाज चल रहा है लेकिन वह ठीक नहीं हो पा रहे हैं! अब तक जितने भी मरीज इस संक्रमण से ठीक हो चुके हैं, उनके शरीर में अब ऐसी एंटीबॉडीज बन गई हैं, जिसकी सहायता से उनका शरीर इस महामारी से लड़ने में कारगर साबित हो रहा है! ऐसे में में स्वस्थ हो चुका मरीज अपना प्लाज्मा गंभीर रूप से संक्रमित मरीज को देगा, तो उसके शरीर में भी वह एंटीबॉडीज पहुंचकर कोरोना से लड़ेगी!

इंदौर के दो मुस्लिम डॉक्टरों डॉ इजहार मोहम्मद मुंशी और डॉ इकबाल कुरैशी ने सबसे पहले अरविंदो हॉस्पिटल में अपना प्लाज्मा डोनेट किया! इन दोनों डॉक्टरों ने कोरोना से मुकाबले के लिए 500 -500 ml ब्लड प्लाजमा लगभग मौत के मुंह में जा चुके 2 कोरोना संक्रमित मरीजों को दान किया है! प्लाज्मा थेरेपी अभी इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल से ही शुरू हुई है! अगर परिणाम बेहतर आते हैं तो इसे अन्य शहरों में भी शुरू किया जाएगा!

अरविंदो हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ विनोद भंडारी ने बताया कि स्वस्थ हुए और भी मरीज प्लाज्मा डोनेट कर मानवता का काम कर रहे हैं! सेंट पॉल स्कूल के पूर्व छात्र मुकेश कोठारी का कहना है कि डॉ इजहार मोहम्मद मुंशी ने कोरोना के इलाज के लिए प्लाज्मा देकर इंदौर में मिसाल पेश की है! यह प्लाज्मा कोरोना महामारी से संक्रमित लोगों के लिए अमृत का काम करेगा!

मुलतापी समाचार

PM मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग


पीएम मोदी  3 मई को खत्म हो रहे लॉकडाउन के आगे की रणनीति को लेकर सभी मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर रहे हैं.

कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ देश में महाजंग जारी है. देश में लागू लॉकडाउन की अवधि भी 3 मई को खत्म हो रही है, ऐसे में आगे की क्या रणनीति होगी. इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री मोदी की ये मुख्यमंत्रियों के साथ चौथी बैठक है, जिसमें देश के मौजूदा हालात पर चर्चा होगी.

Bhopal Warriyars : लोगों ने सफाई कर्मियों पर बरसाए फूल, उतारी आरती, कपड़े और राशन देकर किया सम्मान


कमला नगर कोटरा सुल्तानाबाद के रहवासियों द्वारा सफाई कर्मचारियों की आरती उतारते हुए

भोपाल में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में लोग घरों में रहकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, तो कुछ ऐसे लोग हैं, जो बाहर रहकर एक योद्धा की तरह वैश्विक महामारी के खात्मे के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। इनमें सफाईकर्मी भी शामिल हैं। यह दूसरों की अच्छी सेहत के लिए सफाई कार्यों में लगे हैं। इन कर्मवीरों को लोग सलाम कर रहे हैं।

सोमवार सुबह कमला नगर कोटरा सुल्तानाबाद के रहवासियों ने मोहल्लों में सफाई करने पहुंचे कर्मचारियों का शानदार तरीके से सम्मान किया गया। कहीं फूल बरसाए गए तो कहीं आरती उतारी गई। लोगों ने ताली बजाकर सफाई कर्मचारियों का हौसला भी बढ़ाया। 

कमला नगर कोटरा सुल्तानाबाद के रहवासियों द्वारा सफाई कर्मचारियों को भोजन सामग्री भेट करते हुए

रहवासियों द्वारा सफाई कर्मचारियों को कपड़े, गेहूं, चावल, दाल आदि राशन सामग्री की बोरी भेट की गई।

कमला नगर कोटरा सुल्तानाबाद के रहवासियों की टीम