प्राइवेट लिमिटेड बनकर रह गई जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति: तरुण कालभोर


तरुण कालभोर अध्यक्ष ग्रामीण ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बैतूल

प्राइवेट लिमिटेड बनकर रह गई जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति।

जमीनी हकीकत जाने बिना कैसे होगा दूर अंचल की समस्याओं का समाधान।

बैतूल – कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न गंभीर परिस्थितियों के बीच जिला प्रशासन ने कोरोना संकट प्रबंधन समिति का गठन किया है। लेकिन जिस उद्देश्य से समिति गठित की गई है वह कारगर होती दिखाई नहीं दे रही है। समिति में आदिवासी वर्ग के किसी भी मुखिया को शामिल नहीं किया गया है। जिसके चलते संकट से उबारने के लिए बनाई गई समिति दूर अंचल की वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ है। समिति के गठन को लेकर ब्लॉक कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष तरुण कालभोर ने आरोप लगाते हुए कहा है कि इस समिति में आदिवासी और हरिजन वर्ग की उपेक्षा हुई है। श्री कालभोर का कहना है आदिवासी जिला होने के नाते समिति में आदिवासी वर्ग के व्यक्ति को शामिल किया जाना था क्योंकि आदिवासियों की समस्या को एक आदिवासी ही अच्छे से समझ सकते हैं। वहीं हरिजन वर्ग से भी किसी को शामिल नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई है। श्री कालभोर का कहना है धार से लेकर खोमी बैरियर, छिंदवाड़ा, हरदा और खंडवा बॉर्डर तक बैतूल जिले का क्षेत्रफल है। इसमें भी 45 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासियों की है। भीमपुर, भैंसदेही, आठनेर सहित 7 ब्लॉक ट्राईबल क्षेत्र है। अधिकांश ब्लॉक की जनसंख्या की 45 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है। इनके जीवन जीने की कला, महुआ गुल्ली की संस्कृति आदिवासी वर्ग का व्यक्ति ही अच्छे से जान सकता है। कोरोनावायरस के दौर में आदिवासी वर्ग कैसे सादगी से अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं इसकी सटीक राय भी आदिवासी वर्ग का व्यक्ति ही दे सकता है। इसके बावजूद जिला प्रशासन के नेतृत्व में गठित समिति में आदिवासी और हरिजन वर्ग को दरकिनार किया गया है। समस्या के समाधान के लिए बनाई गई यह समिति कोरोना प्राइवेट लिमिटेड समिति बनकर रह गई है। इस समिति में एक भी सदस्य ना तो आदिवासी है, ना ही आदिवासी क्षेत्र के हैं। समिति में अरुण गोठी, हेमंत खंडेलवाल, मोहन नागर, ब्रज आशीष पांडे, डॉ.राजेंद्र देशमुख सहित अन्य सदस्यों को शामिल किया गया है और यह सभी जिला मुख्यालय पर ही निवासरत है।

सबसे ज्यादा परेशानी में है आदिवासी समुदाय–
गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशानी में आदिवासी समुदाय के लोग हैं। इनमें से ज्यादातर कभी खेतों में तो कभी शहरों में मजदूरी करते हुए जीवनयापन करने वाले हैं। इनके पास न तो खेती वाली बड़ी जमीनें हैं और न ही रोजगार का कोई दूसरा साधन। इनमें से जो अभी भी शहरों में फंसे हैं, उनके सामने दो जून की रोटी का सवाल है और जो अपने गांव घर तक लौट आए हैं, उनमें से ज्यादातर के सामने भी रोजी-रोटी का संकट है। गांवों में, जंगलों में, अपने डेरों, कस्बों, ढानों, मजरे और टोलों में रहने वाले ये लोग इन दिनों भारी मुसीबत में जी रहे हैं। उनका वर्तमान तो जैसे-तैसे कट रहा है, लेकिन आने वाले बारिश के मौसम में और उसके साथ आर्थिक मंदी के दौर में उनका गुजर-बसर कैसे होगा? सरकारी मदद उन तक कब और कितनी पहुंचेगी और तब तक उनकी स्थिति-परिस्थितियां कैसी हो चुकी होंगी, इस पर विचार जरूरी है। संक्रमण, कोरोना, लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंस और क्वारंटाइन जैसी चीजों से बेखबर रहा आदिवासी समुदाय अपनी रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति तक नहीं कर पा रहा। आम दिनचर्या में लगने वाली चीजों के लिए साप्ताहिक बाजार, शहरों से आने वाले छोटे व्यवसायियों पर निर्भर रहने वाले जनजाति समुदाय के लोगों तक सरकारी मदद-राहत उतनी मात्रा में नहीं पहुंच पा रही है, जितना उसका प्रचार-प्रसार हो रहा है। यह तो भला हो कि इस समय गेहूं की कटाई में लगे कुछ मजदूरों को काम मिल गया है तो कुछ इस मौसम ने आम, महुआ जैसे फल आदिवासियों को दे दिए हैं। चिंता है कि आने वाले बारिश के दिनों में जब आदिवासी को कहीं काम नहीं मिल सकेगा तब संकटमोचन कौन होगा?

मालीखेड़ा का उदाहरण भी है सामने–
चिचोली विकासखंड के सुदूर आदिवासी अंचल टोकरा के ग्राम मालीखेड़ा में जब आदिवासियों के पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा, तो उन्होंने राशन के लिए गुहार लगाई। बमुश्किल उन तक कुछ सरकारी राशन पहुंचा। फोटो खिंचवाने और राशन देने की रस्मों के बाद वे अपने पेट की आग बुझा पाए। हालात फिर वही पुराने जैसे हैं। कमोबेश ऐसा ही हाल सभी आदिवासी क्षेत्रों का है। कुछ जगह वन विभाग, पुलिस विभाग या पंचायत विभाग के माध्यम से आदिवासियों तक राशन पहुंचाया जा रहा है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा जितना है।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s