Corona vividh 19 की लड़ाई में हेमंत आगे : कलेक्टर ने दिखाई दृढ़ता, संकट प्रबंध समिति में सांसद-विधायक सदस्य नहीं


बैतूल। देश-प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते केन्द्र से लेकर प्रदेश की सभी सरकारें अलर्ट पर है एवं इस महामारी के निदान के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। 

मध्यप्रदेश वर्तमान समय में देश में कोरोना पॉजीटिव मरीजों की संख्या के मामले में चौथे नंबर पर है। केन्द्र सरकार ने 25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन घोषित किया था। मप्र शासन ने लॉकडाउन के दौरान आने वाली समस्याओं और व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए हर जिले में जिला संकट प्रबंध समूह का गठन किया था। मप्र शासन गृह मंत्रालय के पत्र क्रमांक 43/2020 दिनांक 3 अप्रैल 2020 के अनुसार इस समिति का गठन हुआ और बाद में इसका पुनर्गठन हुआ। मप्र के लगभग सभी जिलों में इस समिति में स्थानीय सांसद एवं विधायकों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन बैतूल जिले की स्थिति अलग है। 

बैतूल जिले की संकट प्रबंध समिति में कलेक्टर राकेश सिंह अध्यक्ष एवं शासकीय अधिकारियों में सदस्य एसपी, सीएमओ, सिविल सर्जन, सीएमएचओ, जिपं सीईओ एवं होमगार्ड कमांडेंट तथा अशासकीय सदस्यों में शुरू में पूर्व विधायक हेमंत खंडेलवाल, पूर्व बैंक प्रशासक अरूण गोठी एवं भारतभारती शाला समिति के सचिव मोहन नागर को सदस्य बनाया गया था और बाद में डॉ. राजेन्द्र देशमुख एवं ब्रजआशीष पांडे को जोड़ा गया था।

बैतूल संसदीय क्षेत्र अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है, वहीं घोड़ाडोंगरी और भैंसदेही विधानसभा सीट भी इसी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए रिजर्व है। आमला विधानसभा सीट अनुसूचित जाति तथा बैतूल एवं मुलताई सीट अनारक्षित है। इस तरह से बैतूल जिले के जनप्रतिनिधियों में अनुसूचित जनजाति वर्ग से भाजपा सांसद डीडी उइके एवं इसी जनजाति से विधायकों में कांग्रेस के ब्रह्मा भलावी एवं धरमू सिंह है। अनुसूचित जाति वर्ग से आमला से भाजपा के डॉ. योगेश पंडाग्रे विधायक निर्वाचित हुए है तथा बैतूल और मुलताई विधानसभा सीट से कांग्रेस के ही निलय डागा और सुखदेव पांसे विधायक है। इस तरह से अनुसूचित जनजाति वर्ग से तीन एवं अनसूचित जाति वर्ग से एक जनप्रतिनिधि है। 

बैतूल जिला संकट प्रबंध समूह में किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि (सांसद एवं विधायकगण) को सदस्य ना बनाए जाने को लेकर राजनैतिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है और कई क्षेत्रों से विरोध के स्वर भी उठे है कि जब सभी जिलों में इस महत्वपूर्ण समिति में जिले के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शामिल किया गया है तो बैतूल समिति में शामिल नहीं किए जाने का क्या कारण है। जब समिति में चार अशासकीय सदस्य राजनैतिक दलों से है, तो इन राजनैतिक दलों की तरफ से निर्वाचित सांसद और विधायकों को शामिल क्यों नहीं किया गया। 

खबरवाणी को मिली जानकारी के अनुसार इस संबंध में बैतूल के जुझारू कांग्रेस विधायक निलय डागा प्रशासन के सामने अपना विरोध दर्ज करा चुके है। इसके अलावा भाजपा के कई सदस्यों ने भी मीडिया के माध्यम से यह बात उठाई है। संकट प्रबंध समिति में सांसद-विधायकों को तो शामिल नहीं किया गया, लेकिन इन्हें लॉकडाउन की अवधि 25 मार्च से आज दिनांक तक मात्र दो बार प्रशासन द्वारा बैठक बुलाकर असंतोष कम करने का प्रयास जरूर किया गया, जिसमें पहले बैठक 10 अप्रैल को और दूसरी बैठक कल 27 अप्रैल को बुलाई गई थी। पहली बैठक में सांसद और चार विधायक उपस्थित रहे। सिर्फ भैंसदेही के विधायक धरमूसिंह अनुपस्थित रहे। कल की बैठक में मुलताई विधायक सुखदेव पांसे अनुपस्थित रहे। खबरवाणी को मिली जानकारी के अनुसार कल की बैठक में बैतूल के विधायक निलय डागा ने कहा कि मै विपक्षी दल का विधायक हूं, इसलिए भले ही मुझे समिति का सदस्य ना बनाया जाए, लेकिन कम से कम सत्तारूढ़ भाजपा के सांसद और विधायक को तो समिति में शामिल करें। 

वहीं जिला संकट प्रबंध समूह की लॉकडाउन के बाद से अभी तक 12 से 15 अधिकृत बैठके हो चुकी है, जिसमें हर बैठक में अशासकीय सदस्य हेमंत खंडेलवाल, अरूण गोठी और मोहन नागर उपस्थित रहे और इन बैठकों में ही यह निर्णय लिए गए कि किस तरह से लॉकडाउन की अवधि के दौरान विभिन्न सामग्रियों की दुकाने खोलने और उसके लिए समयावधि तय की जाए और इन बैठकों का जनसंपर्क विभाग के माध्यम से अधिकृत समाचार भी समय-समय पर जारी हुआ। 

इस तरह से कई बार यह मामला उठने के बावजूद संकट प्रबंध समिति में सांसद, विधायकों को सदस्य नहीं बनाए जाने को लेकर राजनैतिक क्षेत्र में यह चर्चा हो रही है कि पूर्व विधायक हेमंत खंडेलवाल एक बार फिर भाजपा के प्रदेश में सत्ता संभालने के बाद जिले में सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में सामने आए है और प्रशासन भी उनकी बात को नजरअंदाज नहीं कर पा रहा है, क्योंकि जब भाजपा के वर्तमान जनप्रतिनिधि और पूर्व जनप्रतिनिधि एक साथ उपस्थित रहकर प्रशासन के सामने कोई बात रखते है, तो उस समय अधिकांश बात सिर्फ पूर्व विधायक हेमंत खंडेलवाल ही तथ्यों के साथ पक्ष रखते है और बाकी जनप्रतिनिधि और प्रशासन उनकी बात ध्यान से सुनते है।

इसलिए माना जा रहा है कि संकट प्रबंध समिति के गठन में भी हेमंत खंडेलवाल के अनुसार ही सदस्यों का चयन किया गया है, क्योंकि जिस तरह से समिति में कांग्रेस नेता अरूण गोठी को शामिल किया गया है, उसके लिए जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा से सलाह लेने की जगह पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे से राय ली गई थी। ऐसी जानकारी सूत्रों के माध्यम से प्राप्त हुई है और इसीलिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को समिति का सदस्य नहीं बनाया गया है और ऐसा लगता है कि अब इन जनप्रतिनिधियों को सदस्य बनाया भी नहीं जाएगा। 

प्रशासनिक हल्कों में इसे संवेदनशील कलेक्टर एवं प्रशासनिक क्षमता के धनी राकेश सिंह की दृढ़ इच्छाशक्ति निरूपित की जा रही है, जिन्होंने विरोधों और दबावों के बावजूद इस समिति में जनप्रतिनिधियों को शामिल करना उचित नहीं समझा। इस संबंध में बताया जा रहा है कि कलेक्टर राकेश सिंह ने एक जनप्रतिनिधि को कहा कि मै आप लोगों से मिलने वाले सुझावों का दिन-प्रतिदिन पालन करवा रहा हूं। 

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