चंबल के खूंखार आत्मसमर्पित डाकू का निधन

मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

भिंड: पूर्व दस्यु सरदार मोहर सिंह गुर्जर का 92 साल की उम्र में आज सुबह निधन हो गया। साठ के दशक के इस दस्यु सरदार के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में 315 अपराध दर्ज थे। गिरफ्तारी पर उस वक्त 2 लाख रुपए का इनाम घोषित था। अपराध की दुनिया छोड़ने के बाद वह गरीबों की मदद और गरीब कन्याओं की शादी कराने के लिए फेमस हुए थे।

चंबल के बीहड़ों ने ना जाने कितने डाकुओं को पनाह दी। लेकिन चंबल के बीहड़ में सबसे खतरनाक डकैत जिसके नाम से बीहड़ भी कहां पर थे, उसका नाम था मोहर सिंह। मानसिंह के बाद चंबल घाटी का सबसे बड़ा डाकू मोहर सिंह ही था। जिसके पास डेढ़ सौ से ज्यादा डाकू थे। चंबल घाटी में उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश और राजस्थान की पुलिस फाइलों में उसका नाम दुश्मन नंबर एक के तौर पर दर्ज था। साठ के दशक में उसका ऐसा आतंक फैल चुका था कि लोग कहने लगे थे कि चंबल में मोहर सिंह की बंदूक ही फैसला करेगी और उसकी आवाज ही चंबल का कानून।

चंबल में पुलिस रिकॉर्ड की बात करें तो 1960 में अपराध की शुरुआत करने वाले मोहर सिंह ने इतना आतंक मचा दिया था कि सब खौफ खाने लगे थे । एनकाउंटर में मोहर सिंह के साथी आसानी से पुलिस को चकमा देकर निकल जाते थे । उसका नेटवर्क इतना बड़ा था कि पुलिस के चंबल में पैर रखते ही उसको खबर हो जाती थी और मोहर सिंह अपनी रणनीति बदल देता था।

1958 में पहला अपराध कर पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज होने वाले मोहर सिंह ने जब अपने कंधे से बंदूक उतारी तब तक वह ऑफीशियली रिकार्ड में 2 लाख रुपए का इनामी डकैत हो चुका था और उसके गैंग पर 12 लाख रुपए का इनाम था। पुलिस फाइल में 315 मामले मोहर सिंह के नाम थे और 85 कत्ल का जिम्मेदार मोहर सिंह था। उसके अपराधियों का एक लंबा सफर था। लेकिन अचानक ही इस खूंखार डाकू ने बंदूक रखने का फैसला कर लिया।

मुलतापी समाचार

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