ब्रह्मकमल को देखने लगा तांता


बैतूल — बेहद खूबसूरत और पवित्र फूल माना जाने वाला ब्रह्मकमल वर्ष में एक बार खिलता है। यह जिसके घर में खिल जाए उस परिवार को बहुत भाग्यशाली और ब्रह्माजी का आशीर्वाद माना जाता है। इस बार यह सौभाग्य बैतूल जिले के समीपवर्ती ग्राम रोंढा में संजय ओमकार के घर प्राप्त हुआ है। रविवार रात्रि 9:30 के करीब ब्रह्मकमल खिला। इस दुधिया सफेदी लिए ब्रह्मकमल को देखने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ। रोंढा निवासी अशोक जग्गू बारंगे ने बताया कि जैसे ही ब्रह्मकमल खिलता हुआ दिखाई दिया। उसके बाद से ही विधिविधान से पूजा अर्चना कर सभी को ब्रह्मकमल की महत्ता के बारे में भी बताया।

इस ब्रह्मकमल की खास बात यह है कि इसमें एक साथ तीन फूलों के खिलने से इसकी महत्ता कई गुना बढ़ गई है। ब्रह्मकमल का फूल सूर्यास्त के बाद रात में ही खिलता है और सुबह तक मुर्झा भी जाता है। 
ब्रह्म कमल औषधीय गुणों से भी परिपूर्ण होता है। इसे सुखाकर कैंसर रोग की दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इससे निकलने वाले पानी को पीने से थकान मिट जाती है, साथ ही पुरानी खांसी भी काबू हो जाती है। इस फूल की विशेषता यह है कि जब यह खिलता है तो इसमें ब्रह्म देव तथा त्रिशूल की आकृति बन कर उभर आती है।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल 9584390839

जन्मदिन पर किया वृक्षारोपण


बैतूल — युवा कांग्रेसी नेता,समाजसेवी और प्रकृति प्रेमी निलेश कोड़ले ने आज अपने जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए अपने ईस्टमित्रों के साथ वृक्षारोपण किया और पर्यावरण को हरा-भरा रखने का वचन लिया। सभी ईस्टमित्रों, परिवारजनों, जनमानस को भी अपने जीवन के यादगार दिनों जैसे जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ, पर्यावरण दिवस सहित अन्य दिनों में भी वृक्षारोपण करने का आग्रह किया ताकि प्रकृति का सन्तुलन सदैव बना रहे।

जन्मदिन के इस अवसर पर सभी ईस्टमित्रों और परिवारजनों ने शुभकामनाएं और बधाई प्रेषित की है साथ ही उज्जवल भविष्य की कामना की है।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल 9584390839

ताप्ती के जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर मुलताई में खिला ब्रह्मकमल


पवार परिवार में खिला ब्रह्मकमल का फूल

मुलताई में खिला ब्रह्मकमल का फूल

रात में ही खिलता है ब्रह्म कमल

ब्रह्मकमल का फूल खिला मुलताई में

बेहद खूबसूरत और पवित्र फूल माना जाने वाला ब्रह्म कमल वर्ष में एक बार खिलता है। यह जिसके घर में खिल जाए उसे भाग्यशाली और ब्रह्माजी का आशीर्वाद माना जाता है।

मुलतापी समाचार

मुलताई@बैतूल.  बेहद खूबसूरत और पवित्र फूल माना जाने वाला ब्रह्म कमल वर्ष में एक बार खिलता है। यह जिसके घर में खिल जाए उसे भाग्यशाली और ब्रह्माजी का आशीर्वाद माना जाता है। यह सौभाग्य मिला मुलताई के ताप्ती वार्ड निवासी शिशिर बारंगे को वह भी गुरु पूर्णिमा की पूर्व रात्रि पर। यह एक अद्भुत अनुभव पवार भाई ने अपने परिवार, रिश्तेदारों के साथ इस दुर्लभ फूल को पल-पल बढ़ते और खिलते हुए देखा। यह एक अद्भुत अनुभव था। ताप्ती जन्मोत्सव के शुभ अवसर के समय शनिवार रात 9 बजे फूल की कली खिलना शुरू हुई जो रात 12 बजे तक ब्रह्म कमल बन गई। दूसरे दिन लोगों का इसे देखने के लिए तांता लगा रहा। फूल की खास बात यह है कि यह पौधा सूर्योदय की बजाय और सूर्यास्त के बाद रात में ही खिलता है और सुबह मुर्झा भी जाता है। 

the Brahma lotus blooms only at night

ब्रह्म कमल औषधीय गुणों से भी परिपूर्ण है। इसे सुखाकर कैंसर रोग की दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इससे निकलने वाले पानी को पीने से थकान मिट जाती है, साथ ही पुरानी खांसी भी काबू हो जाती है। इस फूल की विशेषता यह है कि जब यह खिलता है तो इसमें ब्रह्म देव तथा त्रिशूल की आकृति बन कर उभर आती है।

ताप्ती जन्मोत्सव पर विशेष-वह शहर हमारा मुलताई है


Multani Samachar

कहते है इस शहर में कभी कोई भूखा नही सोता.. इस शहर में हर कोई सोने की तरह तपता है और निखरता है, इस शहर में कभी नारद की तपोभूमि थी आज यह अंचल जन-जन की तपोंभूमि है। यमराज को भी बहन ताप्ती के शहर में आना मना है, इस शहर में लोग ख़ुद से मोक्ष पाने चले आते है, कहते है यहाँ मरने पर स्वर्ग मिलता है।

इस शहर में लोग ३६५ दिन त्योहार मनाते है। यहाँ मेला तो कार्तिक पूर्णिमा से मात्र पंद्रह दिनों के लिए भरता है पर साल भर ख़त्म होने का नाम नहीं लेता। दुःख यहाँ दिखाई नही देता। ताप्ती अंचल के सीधे साधे लोगों के चेहरों पर खिली सरल, सरस और सहज मुस्कान मन को मोह लेती है और दुःख को सोख लेती है। इनसे मिलना प्रयाग में गंगा यमुना के मिलने की तरह असीम आनंददायी होता है। यहाँ समय ही नहीं चलता, यहाँ जीवन भी चलता है। सुख यहाँ किसी मेहमान की तरह टिकता नहीं, लेकिन यह शहर कभी रुकता नहीं। यहाँ मन्दिर हैं, मस्जिद है , गिरिजाघर है,गुरूद्वारे हैं। कहीं पंजाब, तो कहीं गुजरात, कहीं बंगाल तो कहीं महाराष्ट्र,कही राजस्थान तो कहीं मद्रास इस शहर में दिखता है। फैशन के दौर में भी एक धोती या गमछे में ही यह शहर जी लेता है। इतना ही नही, यह शहर श्री सुंदरलाल देशमुख और दादा धर्माधिकारी जैसे विद्वान् भी देता है। यह शहर श्री चंद्रकांत देवताले जैसे साहित्यकार और श्री आचार्य जैसे प्रशासनिक अधिकारी भी देता है। यहाँ का प्रकाश खातरकर अंटार्कटिक हो आता है तो श्री विजय देव और श्री राजुरकर राज राजधानी भोपाल में लोगों के दिलों पर राज करते हैं। सतपुड़ा संस्कृति संस्थान सतपुड़ा की संस्कृति से पुरे देश और दुनिया को परिचित कराता है तो सतपुड़ा आंचलिक साहित्य परिषद् यहाँ की धरोहरों से सम्बंधित जानकारी घर घर पहुंचाने में विश्वास करता है।

यहाँ फटी धोती और सफारी सूट एक ही दुकान पर चाय पीता है। यहाँ लुगड़ा और जीन्स पहनी महिलाएं ताप्ती में स्नान कर साथ साथ मंदिर में पूजा करती हैं। यहाँ पश्चिम और पूरब दोनों एक साथ दर्शन दे जाते हैं।

इस शहर का नाम पूछने पर कोई इसे मुलतापी और कोई मुलताई कहता है लेकिन अपने इस शहर की परिभाषा हर आदमी कुछ यू बताता है..

“माँ ताप्ती की दुहाई है वो शहर हमारा मुलताई है…”

कोरोना महामारी के बीच मध्य प्रदेश में किसानों के लिए यूरिया खाद का संकट


मालवा-निमाड़ (नईदुनिया टीम)। कोरोना महामारी के बीच प्रदेश में किसानों के लिए यूरिया खाद का संकट खड़ा हो गया है। मालवा-निमाड़ के कई जिलों में कपास, मक्का, केला, गन्ना और सब्जियों की फसल के लिए किसान यूरिया मांग रहे हैं, लेकिन आपूर्ति नहीं हो रही है। गांवों की कुछ सहकारी संस्थाओं में एक सप्ताह से खाद नहीं है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी कह रहे हैं कि रोज रैक लग रही है।

अकेले इंदौर संभाग में जून में ही लक्ष्य का आधे से अधिक यूरिया खत्म हो चुका है। 18 जून को शाजापुर के गांव बेहरावल में कृषि साख सहकारी संस्था में आए ट्रक से किसानों द्वारा डीएपी खाद उतार ले जाने का मामला सामने आया था। प्रबंधक ने कालापीपल थाने में 60 बोरी खाद चोरी होने का आवेदन दिया था।

खाद के मामले में प्रशासन ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो अन्य जिलों में भी ऐसी घटनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता।

मध्यप्रदेश सहकारी विपणन संघ के मुताबिक इंदौर संभाग के आठ जिलों के लिए 1 लाख 47 हजार 474 टन यूरिया का लक्ष्य तय किया गया था, पर जून अंत तक 73 हजार टन से अधिक यूरिया किसानों तक पहुंच चुका है। मार्कफेड के अधिकारी बताते हैं कि अधिकांश खाद निमाड़ के खरगोन-बड़वानी जिलों में लग रहा है। इंदौर जिले की कुछ संस्थाओं में भी यूरिया नहीं है, लेकिन यहां हालात नियंत्रण में हैं। किसी जिले में लक्ष्य का आधा तो कहीं इससे भी कम यूरिया उपलब्ध है।

खंडवा : दो हजार टन ही उपलब्ध खंडवा जिले में सोसायटियों में यूरिया उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। जिले में करीब दो हजार टन यूरिया ही उपलब्ध है, जबकि एक महीने में करीब दस हजार टन यूरिया की आवश्यकता पड़ेगी। कृषि उपसंचालक आरएस गुप्ता ने बताया कि दस हजार टन यूरिया की डिमांड शासन को भेज दी है।

झाबुआ : 45 हजार टन की जरूरत झाबुआ जिले में 45 हजार टन खाद की आवश्यकता है। फिलहाल 27 हजार टन ही उपलब्ध है। रविवार को जिले के मुख्य रेलवे स्टेशन मेघनगर पर खाद की रैक लगने का इंतजार किया जा रहा है।

खरगोन लक्ष्य : 63 हजार टन अब तक प्राप्त : 29 हजार टन इस सप्ताह की मांग : 10 हजार टन रकबा : 2 लाख 15 हजार हेक्टेयर (90 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है) नीमच लक्ष्य : 17 हजार 400 टन अब तक प्राप्त : 7 हजार 255 टन रकबा : 1 लाख 77 हजार हेक्टेयर (50 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है)

मंदसौर लक्ष्य : 25 हजार टन अब तक प्राप्त : 12 हजार 145 टन इस सप्ताह की मांग : 5 हजार टन रकबा : 3 लाख 29 हजार हेक्टेयर (लगभग 50 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है)

धार लक्ष्य : 62 हजार टन अब तक प्राप्त : 33 हजार टन इस सप्ताह की मांग : 7 हजार टन रकबा : 5 लाख 14 हजार हेक्टेयर (92 प्रतिशत बोवनी हुई)

बड़वानी यूरिया की कुल मांग : 40 हजार टन भंडारण : 11 हजार 466 टन वितरण : 10 हजार 107 टन मांग : 10 हजार टन कुल रकबा : 2 लाख 38 हजार 250 हेक्टेयर

रतलाम जरूरत : 25 हजार टन अब तक प्राप्त : 17 हजार 996 टन इस सप्ताह की मांग : 7 हजार 855 टन रकबा : 3 लाख 16 हजार हेक्टेयर (50 प्रतिशत बोवनी हुई)

आलीराजपुर जरूरत : 17 हजार टन अब तक प्राप्त : 6265 टन बोवनी का लक्ष्य : 1.82 लाख हेक्टेयर (अब तक 60 प्रतिशत बोवनी हुई)

बुरहानपुर यूरिया की कुल मांग : 5000 टन भंडारण : 4700 टन जिले में कुल रकबा : 93 हजार हेक्टेयर (अब तक 75 प्रतिशत बोवनी हुई)

शाजापुर लक्ष्य : 12,500 टन वर्तमान में उपलब्ध : 9398 टन शनिवार को रैक से एक हजार टन यूरिया और मिला जिले में कुल रकबा : 2 लाख 82 हजार हेक्टेयर

इनका कहना है

लक्ष्य और जरूरत के हिसाब से हर जिले और हर केंद्र पर यूरिया का इंतजाम किया जा रहा है। खरीफ के लक्ष्य का आधे से अधिक खाद तो हम दे चुके हैं, लेकिन इस बार कुछ अधिक मांग आ रही है। खंडवा में यूरिया की लगातार रैक लग रही है। इंदौर में भी दो रैक लगने वाले हैं। यहां से अधिक जरूरत वाले जिलों और क्षेत्र में खाद भेजा रहा है।

-महेश त्रिवेदी, संभागीय प्रबंधक, मार्कफेड