सोयाबीन की फसल के खराब होने पर 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन


नष्ट हुई फसलों का 40हजार रूपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने की मांग की।
किसान संघर्ष समिति द्वारा मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन।

आज मुलताई सहित टीकमगढ़,हरदा, उज्जैन, झाबुआ, सिवनी ,कटनी, नीमच, रायसेन, रीवा, इंदौर, देवास,ग्वालियर, सिंगरौली, दमोह, विदिशा, मंदसौर, पन्ना, छिंदवाड़ा,बालाघाट जिले में किसान संघर्ष समिति द्वारा अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों के सर्वे कराने तथा मुआवजा दिलाने को लेकर मुख्यमंत्री के नाम स्थानीय अधिकारी को ज्ञापन सौपें गए। यह जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने बताया कि किसान संघर्ष समिति की मांगे स्वीकार न किए जाने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। डॉ सुनीलम ने बताया कि आज अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की वर्किंग ग्रुप की बैठक आयोजित की गई है जिसमें संसद सत्र शुरू होने के पहले दिन 14 सितंबर को किए जाने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। ज्ञापन में कहा गया है कि पूरे प्रदेश में सोयाबीन ,मक्का ,उड़द,मुंग तथा सब्जियों की फसल अतिवृष्टि ,पीला मोजैक तथा अफलन से खराब हो गई है। खेतों में जलभराव से सोयाबीन की फसल तथा मक्का की फसल गिरकर खराब हो गई है। जिसका अभी तक कृषि विभाग द्वारा कोई सर्वे की कार्यवाही नहीं की गई है। ज्ञापन देकर सरकार से मांग की गई कि अतिवृष्टि से खराब हुई फसलों का तुरंत सर्वे कराने का निर्देश जारी करें। सर्वे के दौरान किसान की उपस्थिति अनिवार्य की जाए तथा ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों की जानकारी में हो । मुआवजा क्रॉप कटिंग सर्वे के बाद ही दिया जाता है लेकिन क्रॉप कटिंग सर्वे हर गांव में सिर्फ 2 किसानों का ही किया जाता है। इस व्यवस्था को सुधारने की आवश्यकता है क्योंकि इससे सही आकलन नहीं हो पाता तथा किसानों को न्यूनतम मुआवजा देने का तरीका है। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री को स्मरण कराते हुए मांग की है कि पिछले वर्ष जब आप विपक्ष में थे तब आपने कमलनाथ सरकार से अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसल का 40 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजा की मांग की थी। अब राज्य में आपकी सरकार है इसलिए आप अपनी मांग पर अमल करते हुए किसानों को 40 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिलाया जाए। अनावारी मापने की इकाई किसान का खेत हो, यह मांग लंबे समय से किसान संघर्ष समिति द्वारा की जा रही है। इसके बावजूद भी पटवारी हल्के को ही माना जा रहा है जो सरासर नाइंसाफी है तथा किसानों को न्यूनतम मुआवजा देने का एक तरीका है। फसल बीमा कंपनियों के पास समय से कृषि विभाग और राजस्व विभाग द्वारा रिपोर्ट ना भेजे जाने के कारण किसानों को फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाता है। सरकार यह सुनिश्चित करें कि क्रॉप कटिंग के एक सप्ताह के भीतर फसल बीमा कंपनियों के पास हर किसान का प्रकरण पहुंच जाए । कृषि विभाग और राजस्व विभाग द्वारा सर्वे का कार्य लापरवाही पूर्ण , भेदभाव पूर्ण और भाई भतीजावाद पर आधारित होता है । यह आरोप लगातार किसानों द्वारा लगाए जाते रहे हैं इसीलिए पारदर्शी तरीके से सर्वे का कार्य किया जाना चाहिए। कृष्णा ठाकरे, जगदीश दोड़के,भागवत परिहार, रग्घू कोड़ले ,सीताराम नरवरे, डखरू महाजन, कृपाल सिंह सिसोदिया,तिरथसिंह बलिहार , अरूण सिवारे , लखन सूर्यवंशी,उमेश झोड़,हरि महाजन,किशोर सिंह, वासुदेव आदि ने मुलताई एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

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