हाइट कम लेकिन सोच कही ज्‍यादा, 3 फीट 3 इंच लेकिन कुर्सी है बहुत बड़ी, अपनी मेहनत और लगन से आरती बनी IAS अफ़सर

मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है,

पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है

यह कहावत सच साबीत कर के बतायी है आरती ने

Multapi Samachar

ईश्वर ने सभी को अलग अलग रंग रूप दिया है, इसी रंग रूप के साथ हम अपना जीवन जीते हैं. इंसानों में रंग, कद आदि का फर्क होता है. हालाँकि कई लोग अपने रंग रूप और कद काठी को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं. और उन्हें लगता है कि ज़िन्दगी में कुछ बनने के लिए अच्छा दिखना, अच्छी हाइट होना और साफ़ रंग होना बहुत ज़रूरी होता है, लेकिन ये बात जरा भी सही नहीं है. इंसान का कद काठी, रंग रूप चाहे कैसा भी हो, अगर कुछ कर दिखाने का जुनून मन में ठान लिया जाए तो हर लक्ष्य आसान हो जाता है. दरअसल, आज हम आपको ऐसी ही एक लड़की आरती डोगरा कि सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं. आरती का कद बहुत छोटा होने के बावजूद भी हौसले बहुत बुलंद थे, उसी हौसले से उन्होंने IAS अधिकारी का पद पाकर अपने छोटे कद से जुड़ी सभी भ्रांतियों के खिलाफ उदाहरण पेश किया है.

3 फुट 3 इंच की है इनकी हाइट

बता दें उत्तराखंड स्थित देहरादून शहर में आरती का जन्म हुआ था. इनके पिताजी का नाम राजेंद्र डोगरा है जो कि भारतीय सेना में कर्नल के पद पर कार्यरत हैं तथा माताजी का नाम श्रीमती कुमकुम डोगरा है और वे एक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका हैं. जब इनका जन्म हुआ था उसी वक़्त इनके माता पिता को डॉक्टर ने कहा था कि आरती को शारीरिक रूप से कमजोरी है. तब आरती के माता पिता ने निर्णय किया कि अब वे दूसरी संतान को जन्म नहीं देंगे और केवल आरती का ही ठीक प्रकार से ध्यान रखकर उसे हर सुख सुविधा और अच्छी शिक्षा प्रदान करेंगे.

ग्रेजुएशन के बाद UPSC की तैयारी शुरू की

आरती की शुरुआती शिक्षा उत्तराखंड में देहरादून के ही एक नामी विद्यालय वेल्हम गर्ल्स स्कूल से हुई थी. फिर इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्थित लेडी श्रीराम कॉलेज ऑम कामर्स में एडमिशन लेकर अर्थशास्त्र से ग्रेजुएशन पूरी की. इसके बाद इन्होंने UPSC की परीक्षा कि तैयारी शुरू कर दी. फिर साल 2006 में पहली ही बार में इन्होंने IAS की परीक्षा पास करके अपने सारे परिवारजनों का सर गर्व से ऊंचा कर दिया. इस पद को पा कर इन्होंने एक मिसाल प्रस्तुत की.

स्वच्छता के लिए चलाया ‘बंको बिकाणो’ अभियान

इनकी पोस्टिंग जब बीकानेर में हुई तब वहाँ की स्थिति सुधारने के लिए इन्होंने ‘बंको बिकाणो’ अभियान चलाया था. इसके अन्तर्गत इन्होंने वहाँ के निवासियों से स्वच्छता रखने का अनुरोध किया और खुली जगहों पर शौच ना जाने को भी कहा. उन्होंने इस अभियान के तहत ग्रामों में शौचालयों का निर्माण करवाया. इसमें करीब 195 ग्राम पंचायतों को कवर किया गया था. यह अभियान काफ़ी सफल रहा, जिसका अनुसरण अन्य जिलों द्वारा भी किया गया. देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी इस अभियान की बहुत सराहाना की थी.

सफलता के आड़े नहीं आने दिया कद

आईएएस आरती डोगरा कि हाइट कम है इसलिए वे जहाँ भी जाती थीं, उन्हें तरह-तरह की नेगेटिव बातें सुनने को मिलती थी, परन्तु उन्होंने इन सब पर ध्यान ना देकर अपने लक्ष्य को ही अपना मकसद बना लिया था और उसी के लिए मेहनत में लगी रहती थीं. उन्होंने ठान लिया था कि अब उन्हें अपने जीवन में कुछ बनकर दिखाना है ताकि ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोगों को सबक मिल सके, लोग जान पाएँ की हर मनुष्य अपनी काबिलियत के दम पर ऊंचे से ऊंचा मुकाम हासिल कर सकता है, चाहे उसकी शारीरिक संरचना या कद काठी कैसी भी क्यों ना हो. उन्होंने अपने लक्ष्य को ध्यान में रखा और सारी बातें भूल कर उसे पाने के लिए मेहनत की.

इनकी तरह कम हाइट वाले लाखों लोग देश में हैं, जो अपनी हाइट को लेकर परेशान रहते हैं और कई बार हीन भावना का शिकार हो जाते हैं. उन सब को आरती डोगरा से सीख लेनी चाहिए और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य को पाने के लिए कर्म करते रहना चाहिए. अपने लक्ष्य के प्रति हमेशा समर्पित और ईमानदार रहना चाहिए.

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