MP महिला एवं बाल विकास मंत्री का विवादित बयान-जिस कलेक्टर को कहेंगे वह सीट जितवा देगा-इमरती देवी


महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी डबरा ग्‍वालियर के उपचुनाव प्रचार करती हुए विवादीत बयान दिया

मुलतापी समाचार

ग्वालियर (डबरा) मप्र में विधानसभा उपचुनाव नजदीक आते ही सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है ज्योतिरादित्य सिंधिया की सबसे नजदीकी और शिवराज सरकार में मंत्री इमरती देवी का वीडियों एक बार फिर से विवादों में आ गयाहै। चुनाव प्रचार के दौरान वह कह रही है कि हम जिस कलेक्टर को फोन करेंगे, वह सीट जिता देगा। ऐसा बताया जा रहा है कि वीडियो बुधवार का है। इमरती किसी प्रत्याशी के प्रचार में गयी थी। उधर, कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग से इमरती की शिकायत की जायेगी।

गुरूवार को इमरती देवी अपने बयान से पलट गयी है और इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर सवाल को टाल दिया गया। कहा कि अभी तक अचार संहिता नहीं लगी है। हम तो विकास के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं। जनता को भाजपा पर भरोसा है और वोट मिलेंगे। उन्होंने दावा किया है कि कांग्रेस छोड़कर आये हम सभी चुनाव जितेंगे।

पोषण महोत्सव अंतर्गत लाड़ली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजनाओं के हितग्राहियों का किया सम्‍मान


मुलतापी समाचार
आज परियोजना घोड़ाडोंगरी के अंतर्गत सेक्टर-जुवाड़ी की ग्राम पंचायतों में ग्राम सरपंच/सचिव की अध्यक्षता में मनाया गया एवं पोषण महोत्सव कार्यक्रम के दौरान लिया पोषण संकल्प l


सेक्टर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जुवाड़ी, मेहकार, रतनपुर, छुरी सिताकामथ,महेन्द्रवाड़ी में कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय ग्रामवासियों, लाड़ली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजनाओं के हितग्राहियों को भी आमंत्रित किया गया, सभी की उपस्थिति में एनीमिया की रोकथाम, टीकाकरण, भोजन विविधता, के बारे में उचित सलाह दी गई l


सरपंच महोदय द्वारा भी सुपोषित ग्राम पंचायत-पोषण संकल्प का वाचन कर स्थानीय ग्राम वासियों के साथ संकल्प लिया गया l एवं मेरा गाँव- सुपोषित गाँव के नारे स्थानीय परिजनों द्वारा लगाये गए l
इसी दौरान सेक्टर पर्यवेक्षक कांति गुलबासे ने भी
ग्राम पंचायत-रतनपुर में विजयलाल धुर्वे (सरपंच)
राजकुमार नागवंशी(सचिव) आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं,पंचायत प्रतिनिधियों सहित पोषण महोत्सव आयोजित किया l

बैतूल जिले के पंवारों का इतिहास


क्षत्र‍िय पवार समाज संगठन बैैैैैतूल द्वारा राजा भोज जयंती एंव बसंंत पंचमी का कार्यक्रम बैतूल में मनाया सभी सममान्‍नीय सामाजिक बंधु गंण उपस्‍थ‍ि‍त हुए

मनमोहन पंवार

मुलतापी समाचार

बैतूल जिले में भाट के मतानुसार पंवार समाज के पूर्वज लगभग विक्रय संवत 1141 में धारा नगरी धार से बैतूल आए थे। जिले में लगभग पंवारों के 200 गांव है। पंवारों की संख्या लाखों में है। बैतूल जिले के पंवार अग्निवंशी है, इनका गोत्र वशिष्ठ है, प्रशाखा प्रमर या प्रमार है। ये पूर्ण रूप से परमार (पंवार) राजपूत क्षत्रिय है। वेद में इन जातियों को राजन्य और मनोस्मृति में बाहुज, क्षत्रिय, राजपुत्र तथा राजपूत और ठाकुरों के नाम से संबोधित किया है। सभी लोग अपने भाट से अपने वास्तविक इतिहास की जानकारी अवश्य लें ताकि आने वाली पीढ़ी को भविष्य में यह पता रहे कि वे कौन से पंवार है उनका गोत्र क्या है? हमारे वंश के महापुरूष कौन है। जब मालवा धार से पंवार मुसलमानों से युद्ध करते हुए नर्मदा तट तक होशंगाबाद पहुंचे वहां उस समय कि परिस्थितियों के कारण सभी लोगों ने अपने जनेऊ उतारकार नर्मदा में डाल दिए थे।

भाट लोगों के अनुसार ये सभी परमार शाकाहारी थे, मांस मदिरे का सेवन नहीं करते थे। वेदिक सोलह संस्कारों को अपनाते थे किंतु समय और विषम परिस्थितियों के कारण सेना के इस समूह की टुकडिय़ां क्रमश: बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, जबलपुर, रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, भिलाई, दुर्ग तथा महाराष्ट्र के नागपुर, भंडारा गोंदिया, तुमसर, वर्धा, यवतमाल, अमरावती, बुलढाना आदि जिलों में जाकर बस गए। बैतूल और छिंदवाड़ा के पंवारों को उस समय यहां रहने वाली जातियों के लोगों ने अपनी बोली से भुईहर कहा जो अपभ्रंस होकर भोयर कहलाये। उस समय की भोगौलिक परिस्थिति तथा आर्थिक मजबूरियों के कारण ये समस्त पंवार अपने परिवार का पालन पोषण करने के चक्कर में अपने मूल रीति रिवाज और मूल संस्कार भूलते चले गए। सभी ओर क्षेत्रीय भाषा का प्रभाव बढ़ गया इसलिए इन सभी क्षेत्रों में वहां की स्थानीय भाषा का अंश पंवारों की भाषा में देखने आता है

किंतु आज भी पंवार समाज की मातृभाषा याने बोली में मालवी भाषा और राजस्थानी भाषा के अधिकांश शब्द मिलते है। सैकड़ों वर्षो के अंतराल के कारण लोगों ने जो लोकल टाइटल (पहचान) बना ली थी वो कालांतर में गोत्र के रूप में स्थापित हो गई। आज प्रचलित सरनेम को ही लोग अपना गोत्र मानते है जबकि गोत्र का अभिप्राय उत्पत्ति से है और सभी वर्ण के लोगों की उपत्ति किसी न किसी ऋषि के माध्यम से ही हुई है। हमें गर्व है कि हमारी उत्पत्ति अग्निकुंड से हुई है। और हमारे उत्पत्ति कर्ता ऋषियों में श्रेष्ठ महर्षि वशिष्ठ है, इसलिए हमारा गोत्र वशिष्ठ है।

बैतूल जिले के पंवार मूलत: कृषक है। अब युवा पीढ़ी के लोग उद्योग धंधे में तथा नौकरियों में आ रहे है। शिक्षा के अभाव के कारण यहां के पंवार समाज के अधिकांश लोग आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए है। इस समाज में पहले महिलाएं शिक्षित नहीं थी किंतु अब महिला तथा पुरूष दोनों ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों पर आसीन है। समाज के उच्च शिक्षित लोग सभी क्षेत्र में बड़े-बड़े महत्वपूर्ण पदों पर और विदेशों में भी समाज का गौरव बढ़ा रहे है। कृषक भी आधुनिक विकसित संसाधनों से उन्नत कृषि व्यवसाय में लगे हुए है।

बैतूल जिले के पंवारों के गांव की सूची

बैतूल क्षेत्र के गांव

1. बैतूल नगरीय क्षेत्र 2. बैतूलबाजार नगरीय क्षेत्र, 3. बडोरा 4. हमलापुर, 5. सोनाघाटी, 6. दनोरा, 7. भडूस, 8. परसोड़ा 9. ढोंडबाड़ा, डहरगांव, बाबर्ई, डोल, महदगांव, ऊंचागोहान, रातामाटी, खेड़ी सांवलीगढ़, सेलगांव, रोंढा, करजगांव, नयेगांव, सावंगा, कराड़ी, भोगीतेढ़ा, भवानीतेढ़ा, लोहारिया, सोहागपुर, बघोली, सापना, मलकापुर, बाजपुर, बुंडाला, खंडारा, बोड़ीबघवाड़, ठेसका, राठीपुर, खेड़ी भैंसदेही, शाहपुर, भौंरा, घोड़ाडोंगरी,सलैया, पाथाखेड़ा, शोभापुर, सारणी क्षेत्र, भारत भारती, जामठी, बगडोना, झगडिय़ा, कड़ाई, मंडई, गजपुर, बाजपुर, पतरापुर, सांपना, खेड़लाकिला, चिखल्या (रोंढा), कोरट, मौड़ी, कनाला, बयावाड़ी

https://www.facebook.com/Youth-PAWAR-in-MP-759383064192000

मुलताई क्षेत्र के गांव – मुलताई नगरीय क्षेत्र, थावर्या, कामथ, चंदोराखुर्द, करपा, परसठानी, देवरी, हरनया, मेलावाड़ी, बूकाखेड़ी, चौथिया, हरदौली, शेरगढ़, मालेगांव, कोल्हया, हथनापुर, सावंगा, डउआ, घाट बिरोली, बरखेड़, पिपरिया, डोब, सेमरिया, पांडरी सिलादेही, जाम, खेड़ी देवनाला, चिचंडा, निंबोरी चिल्हाटी, कुंडई, खंबारा, मल्हारा, कोंढर, जूनापानी, सेमझर, डहरगांव, चैनपुर, तुमड़ी, डोल, मल्हाराखापा, पिपरपानी, नीमदाना, व्हायानिडोरनी, छोटी अमरावती, छिंदखेड़ा, गाडरा, सोमगढ़, झिलपा, नंदबोही, दुनावा, दुनाई, गांगई, मूसाखापा, खल्ला, सोनेगांव, सिपावा, भैंसादंड, मलोलखापा, बालखापा, घाट पिपरिया, सरई, काठी, हरदौली, लालढाना, खामढाना, लीलाझर, बिसखान, मयावाड़ी, थारी, मुंडापार, चिखलीकला, कपासिया, लाखापुर, हिवरा, पारबिरोली, खैरवानी, सावंगी, लेंदागोंदी, मोरखा, तरूणाबुजुर्ग, डुडरिया, पिडरई, जौलखेड़ा, मोही, हेटीखापा, परमंडल, नगरकोट, दिवट्या, बुंडाला, हेटी, खतेड़ाकला, हरनाखेड़ी, अर्रा, बरई, जामुनझिरी, टेमझिरा, बाड़ेगांव, केकड्या, ऐनस, निर्गुण, सेमझिरा, पोहर, सांईखेड़ा, बोथया, ब्राम्हणवाड़ा, खेड़लीबाजार, बोरगांव, बाबरबोह, महतपुर, माथनी, छिंदी, खड़कवार, केहलपुर, तरोड़ा बुजुर्ग, सोड्ंया, रिधोरा, सोनोरी, सेमरया, जूनावानी, चिचंडा, हुमनपेट, बानूर, खेड़ी बुजुर्ग, उभारिया, खापा, नयेगांव, ससुंद्रा, पंखा, अंधारिया,

आमला नगरीय क्षेत्र – जंबाड़ा, बोडख़ी, नरेरा, छिपन्या, पिपरिया, महोली, उमरिया, सोनेगांव, बोरदेही, चिचोली, भैंसदेही, गुबरैल, डोलढाना आदि।

बैतूल जिले के वर्तमान में पंवारों के भिन्न-भिन्न सरनेम, उपनाम जिसे आज ये लोग गोत्र कहते है।

परिहार या पराड़कर, पठाड़े, बारंगे, बारंगा, बुआड़े, देशमुख, खपरिए, पिंजारे, गिरहारे, चौधरी, चिकाने, माटे, ढोंडी, गाडरी, कसारे, कसाई, कसलिकर, सरोदे, ढोले, ढोल्या, बिरगड़े, उकड़ले, रोलक्या, किरणकार, किनकर, किरंजकार, घाघरे, रबड़े, रबड्या, भोभाट, दुखी, बारबुहारे, मुनी, बरखेड्या, बागवान, देवासे, देवास्या, फरकाड्या, फरकाड़े, नाडि़तोड़, भादे, भाद्या, कड़वे, कड़वा, कोडले, रमधम, राऊत, रावत, करदात्या, करदाते, हजारे, हजारी, गाड़क्या, गाकरे, खरफुस्या, खौसी, खवसे, कौशिक, पाठेकर, पाठा, मानमोड्या, मानमोड़े, हिंगवे, हिंगवा, डालू, ढालू, डहारे, डोंगरदिए, डोंगरे, डिगरसे, गोहिते, ओमकार, उकार, टोपल्या, टोपले, गोंदर्या, धोट्या, धोटे, ठावरी, ठूसी, लबाड़, ढूंढाड्या, ढोबारे, गोर्या, गोरे, काटोले, काटवाले, आगरे, डोबले, कोलया, हरने, ढंडारे, ढबरे, तागड़ी, सेंड्या, खसखुसे, गढढे, वाद्यमारे, सबाई।

सिवनी, बालाघाट, गोंदिया, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ में प्रचलित सरनेम – अम्बूल्या, आमूले, कटरे, कटरा, कोलहया, गौतम, चौहान, चौधरी, चैतवार, ठाकुर, टेम्भरे, टेम्भरया, डाला, तुरूस, तुरकर, पटले, पटलया, परिहार, पारधी, कुंड, फरीद, बघेला, बिसन, बिसेन, बोपच्या, बोपचे, भगत, भैरव, भैरम, भोयर, ऐड़ा, रंजाहार, रंजहास, रंदीपा, रहमत, राणा, राना, राउत, राहंगडाले, रिमहाईस, शरणागत, सहारत, सहारे, सोनवान्या, सोनवाने, हनवत, हिरणखेड्या, छिरसागर।

लेखक शंकर पवार पत्रकार

पंवारों का मूल गौत्र तो वशिष्ठ ही है ऊपर दिए गए सभी सरनेम या उपनाम है।

उपरोक्त जानकारी प्रकाशन दिनांक तक प्राप्त ग्रामों के नाम तथा सरनेम इस लेख में दिए गए है।

मनमोहन पंवार, मुलतापी समाचार, प्रधान संपादक

Mo. 9753903839

India news चीन LAC को नहीं मानता, संयम और शौर्य से जवाब दे रही हमारी सेना, राज्यसभा में बोले राजनाथ सिंह


Parliament LIVE Updates: राज्यसभा में बोले राजनाथ सिंह, चीन LAC को नहीं मानता, संयम और शौर्य से जवाब दे रही हमारी सेना
Parliament LIVE Updates: राजनाथ सिंह ने विस्तार से बताया कि चीन सीमा का सम्मान नहीं करता है, वह एलएसी को नहीं माना रहा है, लेकिन हमारी सेना पूरी तरह डटी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत चीन सीमा पर जारी तनाव को लेकर आज राज्यसभा में बयान दिया। राजनाथ सिंह ने विस्तार से बताया कि चीन सीमा का सम्मान नहीं करता है, वह एलएसी को नहीं माना रहा है, लेकिन हमारी सेना पूरी तरह डटी है। जहां संयम जरूरी होता है वहां संयम और जहां शौर्य जरूरी है वहां शौर्य से काम लिया जा रहा है। चीन की हर हरकत पर सरकार की नजर है। बॉर्डर पर भारत ने ज्यादा इन्फ्रास्ट्र्क्चर पहुंचाया है। रक्षा मंत्री ने का, भारत तथा चीन दोनों ने औपचारिक तौर पर यह माना है कि सीमा का प्रश्न एक जटिल मुद्दा है जिसके समाधान के लिए धैर्य की आवश्यकता है तथा इस मुद्दे का समाधान, शांतिपूर्ण बातचीत के द्वारा निकाला जाए।

रक्षा मंत्री ने सदन को बताया कि हमने चीन को diplomatic तथा military channels के माध्यम से यह अवगत करा दिया, कि इस प्रकार की गतिविधियां, स्थिति को यानी status quo को एक तरफा बदलने का प्रयास है। यह भी साफ कर दिया गया कि ये प्रयास हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।

चीन लद्दाख में भारत की लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर अनाधिकृत कब्जा किए हुए है। इसके अलावा 1963 में एक तथाकथित boundary agreement के तहत पाकिस्तान ने PoK की 5880 वर्ग किमी भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन को सौंप दी है।

सदन इस बात से अवगत है कि भारत और चीन सीमा का प्रश्न अभी तक अनसुलझा है। भारत और चीन की बाउंड्री का कस्टमरी और ट्रेडिशनल अलाइनमेंट चीन नहीं मानता है। यह सीमा रेखा अच्छे से स्थापित भौगोलिक सिद्धांतों पर आधारित है।

राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में अपने वक्तव्य में कहा कि स्वतंत्र भारत में हमारी सेनाओं ने देश के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर करने में कभी भी कोताही नहीं बरती है। यह सीमारेखा well established भौगोलिक सिद्धांतों पर आधारित है, इसकी पुष्‍टि न केवल treaties, agreements द्वारा बल्कि historic usage, practices द्वारा भी हुई है। इससे दोनों देश सदियों से अवगत हैं। चीन यह मानता है कि बाउंड्री अभी भी औप‍चारिक रूप से निर्धारित नहीं हैं।

चीन यह मानता है कि historical jurisdiction के आधार पर जो traditional customary line है उसके बारे में दोनों देशों की अलग-अलग व्‍याख्‍या है। दोनों देश 1950 और 1960 के दशक में इस पर बातचीत कर रहे थे, लेकिन पारस्‍परिक रूप से समाधान नहीं निकला।

इससे पहले राजनाथ सिंह ने लोकसभा को बताया था कि एलएसी पर शांति रखते हुए चीन के साथ वार्ता जारी है। चीन के साथ सीमा विवाद काफी जटिल मुद्दा है। एलएसी पर दोनों देशों की अलग-अलग राय है। हमारी सेनाओं ने मई-जून में चीन के सीमा बदलने के प्रयास का मुंहतोड़ जवाब दिया। हमारी सेना ने चीन की इस मंशा को पहले ही भांप लिया था। चीन की तरफ से इस मुद्दे पर गंभीरता की साथ डील किया जाना चाहिए। चीन ने गलवान के बाद पैंगोग में भी सीमा को बदलने का प्रयास किया था, लेकिन हमारी सेना ने इस प्रयास को भी विफल कर दिया था।

MP News नवजात को जन्म देने के बाद अस्पताल के पीछे फेंका, फिर महिला सफाई कर्मी ने किया ये…जानकर आप चौक जायेंगे


नवजात शिशु को सास लेने में परेशानी जिला अस्पताल भेजा 108 जननी सुरक्षा वाहन से

Multai थाना क्षेत्र के एक ग्राम की 19 वर्षीय युवती पेट दर्द की शिकायत लेकर अपनी मां के साथ  बुधवार सुबह सरकारी अस्पताल पहुंची थी अस्पताल परिसर में युवती बाथरूम में गई उसी दौरान उसका प्रसव हो गया प्रसव के बाद युवती ने नवजात को अस्पताल की सुरक्षा दीवार के किनारे झाड़ियों में फेंक दिया और अस्पताल में आ गई सुबह 10 बजे के दरमियान अस्पताल में पदस्थ महिला सफाई कर्मी चंपा बाई सुरक्षा दीवार के पास अस्पताल की चादर धो रही थी नवजात की रोने की आवाज आई तो महिला सफाई कर्मी में झाड़ियों के पास जाकर देखा तो वहां नवजात बालिका रोती हुई दिखी सफाई कर्मी महिला ने तत्काल नवजात  को उठाकर अस्पताल के एनबी एस यू वार्ड में लाकर भर्ती कराया जहां नवजात को तत्काल उपचार दिया गया सफाई कर्मी चंपा बाई को युवती बाथरूम में जाती हुई दिखी थी सफाई कर्मी ने घटना की जानकारी बीएमओ डॉक्टर पल्लव अमृतफले को दी डॉक्टर पल्लव ने पुलिस थाने के साथ सीएमएचओ कार्यालय और महिला एवं बाल विकास विभाग बैतूल को सूचना दी


         सूचना पर पुलिस थाने से पहुंची उप निरीक्षक तरूणा भारद्वाज और  महिला एवं बाल विकास विभाग की काउंसलर ने युवती से पूछताछ की  है  प्रेम प्रसंग के चलते युवती के गर्भवती होने का खुलासा होने की जानकारी मिली है नवजात बालिका का सरकारी अस्पताल में उपचार करने के बाद बालिका को सांस लेने में दिक्कत होने के चलते डॉक्टर पल्लव अमृत फले ने बालिका को उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया है।

मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ बैतूल की जिला एवं विकास खंड स्तरीय की बैठक संपन्न


जिला समिति की बैठक में उपस्थित सदस्य गण

मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ बैतूल की जिला तहसील एवं विकास खंड स्तरीय की बैठक का आयोजन इंडियन कॉफी हाउस बैतूल में कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए सोशल डिस्टेंस के पालन के साथ सभी सदस्यों द्वारा मास्क लगाकर बैठक में उपस्थित हुए
बैठक में जिला अध्यक्ष श्री मनोज राय सचिव सदस्य श्री केके बारंगे
कोषाध्यक्ष श्री संजय व्यास तहसील अध्यक्ष श्री अशोक श्रीवास विकासखंड अध्यक्ष श्री मुरली पाल तहसील कोषाध्यक्ष श्री के पी कौशिक विशेष रूप से उपस्थित हुए
बैठक में बैतूल तहसील एवं विकास खंड इकाई की कार्यकारिणी के विस्तार,
दिनांक 17 सितंबर 2020 को भगवान विश्वकर्मा जयंती के आयोजन पर चर्चा की गई बैठक में विशेष रुप से अधिकारी एवं कर्मचारियों की सदस्यता तथा उनकी समस्याओं के निराकरण हेतुरूप रेखा तैयार की गई
बैठक के अंत में श्री केके बारंगे जी व्दारा उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त किया जाकर बैठक समाप्त की गई

सर्प दंश से महिला की मौत


कोबरा सर्प से महिला की मौत

बैतूल। घोड़ाडोंगरी तहसील के सलैया गांव में घर में सो रही एक महिला को सांप ने डस लिया. जिससे महिला की मौत हो गई. महिला को डसने के बाद सांप घर में ही बैठा रहा. सर्प मित्र मोनू जेम्स ने सांप को पकड़ कर जंगल में छोड़ दिया. वहीं घोड़ाडोंगरी अस्पताल में पोस्टमार्टम कराकर महिला का शव परिजनों को सौंप दिया गया.

जानकारी के मुताबिक मृतिका की पहचान सलैया गांव निवासी चंद्रकला देशमुख के रूप में हुई है. महिला घर में सो रही थी. इसी दौरान भोजन की तलाश में सांप घर के अंदर घुस आया और महिला को डस लिया. आनन-फानन में परिजन उसे घोड़ाडोंगरी अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

सर्प मित्र मोनू जेम्स ने बताया कि सांप कोबरा प्रजाति का था. जो बहुत ही जहरीला होता है. इसलिए महिला को डसने के बाद उसकी मौत हो गई. हालांकि सांप का रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया गया.