सभी कृषि उत्पादों की एमएसपी पर खरीद करने के लिए विशेष सत्र बुलाकर कानून बनाए सरकार


Multapi Samachar

मुलताईं। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों के खेतों की सभी फसले खरीदी करने के लिए विशेष सत्र बुलाकर कानून बनाये जाने की मांग को लेकर बुधवार की किसान संघर्ष समिति द्वारा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा है । बुधवार को एमएसपी अधिकार दिवस पर किसंस के जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मण बोरबन,महामंत्री भागवत परिहार, जौलखेड़ा के पूर्व सरपंच किशोर बढ़िए, विनोदी महाजन,मनोज पंवार के नेतृत्व में मंडी पंहुचकर सौपे ज्ञापन में बताया कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की अपील पर देश के 250 किसान संगठनों के द्वारा आज 14 अक्टूबर 2020 को एमएसपी अधिकार दिवस देश भर में आयोजित किया गया है। किसान संगठनों को एमएसपी अधिकार दिवस आयोजित करने की आवश्यकता इसलिए पड़ी है क्योंकि जिन कृषि उत्पादों का एमएसपी सरकार द्वारा घोषित किया गया है उन कृषि उत्पादों की एमएसपी पर मंडी में खरीद नही होने के चलते किसानों को मजबूरी में बहुत कम दाम पर कृषि उत्पाद बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश में सोयाबीन और मक्का का सर्वाधिक उत्पादन होता है। सोयाबीन की एमएसपी 3880 रूपये होने के बावजूद व्यापारियों द्वारा 3000 से 3300 रूपये के रेट पर खरीदी की जा रही है। जिससे किसानों को 400 से 900 रूपये प्रति क्विंटल नुकसान हो रहा है। मध्य प्रदेश में सोयाबीन का कुल उत्पादन 115 लाख टन होता है, इसका अर्थ यह है कि किसानों को केवल सोयाबीन की फसल पर अरबों रूपये का नुकसान हो रहा है । इसी तरह मक्का की एमएसपी 1850 है लेकिन मक्का 700 रुपये क्विंटल के रेट पर बिक रही है| देश भर में 272 लाख टन मक्का उत्पादन करने वाले किसानों की लाखों करोड़ की लूट हो रही है।
इस समय गेहूं 1925 रुपये समर्थन मूल्य पर बिकने की जगह 1400 से 1500 रुपये क्विंटल बिक रहा है। मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 1200 रुपये तक गांव में व्यापारी खरीद रहे हैं।
धान की एमएसपी 1868 रू प्रति क्विंटल है लेकिन केरल ,छत्तीसगढ़ को छोड़ कर यह रेट भी किसानों को कही नहीं मिल रहा है। किसानों के लिए यह भयावह स्थिति है क्योंकि आपकी सरकार द्वारा डीजल के दाम बढ़ा दिए जाने, महंगाई बढ़ने तथा प्राकृतिक आपदा में खेती नष्ट होने के चलते किसानों की आर्थिक हालत चरमरा गई है।
आमदनी दुगनी होने की जगह आधी होने की स्थिति बन रही है । यह हालत उन कृषि उत्पादों की है जिनकी एमएसपी जारी की गई है।
किसान संघर्ष समिति, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति फल, सब्जी सहित सभी कृषि उत्पादों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने तथा एमएसपी के नीचे खरीद करने वाले व्यापारियों पर मुकदमा दर्ज कर जुर्माना लगाने एवं जेल भेजने की कार्यवाही की मांग करती रही है। सरकार द्वारा किसान ,किसानी और गांव खत्म करने एवं कृषि क्षेत्र को कारपोरेट के हवाले करने के लिए तीन किसान विरोधी बिल लाए गए हैं। जिसका अध्यादेश लाने के बाद से ही देश के अधिकांश किसान संगठन विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे न केवल मंडी और एम एस पी व्यवस्था को खत्म करने की मंशा से लागू किये है । इसके साथ साथ तीनों कानून भारत के संविधान की धारा 14 ,19 और 21 पर कुठाराघात करते हैं।
किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा विरोध स्वरूप 9 अगस्त से राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत की गई है जो निरंतर जारी है। आपकी सरकार के द्वारा बार-बार कहा जा रहा है कि मंडी कायम रहेगी तथा एमएसपी जारी रहेगी लेकिन एमएसपी संबंधित किसी कानून के अभाव में किसानों को एमएसपी नहीं मिल पा रही है। इस कारण आज एमएसपी अधिकार कार्यक्रम देशभर में आयोजित किया गया हैं। हम एक देश मे सभी कृषि उत्पादों की घोषित एमएसपी पर खरीद चाहते हैं।
ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से मांग की है कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के द्वारा संसद में प्रस्तुत लाभकारी मूल्य गारंटी बिल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर पारित करें ।जिससे कि न्यू इंडिया में किसानों की आत्महत्याओं एवं किसान,किसानी और गांव को नष्ट होने से रोका जा सके।

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