(बैतूल) उद्यानिकी विभाग के बहुप्रचार में से काला सच अब आ रहा है सामने – शेडनेट स्कीम अनुदान मामले में उद्यानिकी विभाग की झूठ की पोल खोलने भूख हड़ताल पर बैठ गए किसान


बैतूल) उद्यानिकी विभाग के बहुप्रचार में से काला सच अब आ रहा है सामने
– शेडनेट स्कीम अनुदान मामले में उद्यानिकी विभाग की झूठ की पोल खोलने भूख हड़ताल पर बैठ गए किसान
बैतूल । उद्यानिकी विभाग की शेडनेट स्कीम में हितग्राहियों की सब्सिडी का मामला अब तूल पकडऩे लगा है। प्रभावित किसान आर-पार की लड़ाई के मूड़ में आ गए है और उन्होंने शाहपुर पतौवापुरा में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। किसानों की इस हड़ताल के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे हैं और यह सवाल विभाग के अनुदान को लेकर किए गए अब तक के दावों को आइना दिखाते हैं। किसानों का इस तरह भूख हड़ताल पर बैठना दिखाता है कि विभाग और उसके जिम्मेदार अधिकारी इन किसानों को सही दिशा और सही तरीका बताने में नाकाम रहे और उन्हें गुमराह करने की कोशिश करते रहे। यह आरोप किसान भी लगा रहे हैं कि अधिकारी उनके साथ धोखा कर रहे हैं।

– जब कही सुनवाई नहीं तो किसान आमरण अनशन पर बैठे…
शाहपुर में इंट्रीग्रेटेड पैक हाउस पतौवापुरा में शेडनेट स्कीम के किसान सोमवार से आमरण-अनशन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इन किसानों का कहना है कि उनकी कहीं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वे हर स्तर पर आवेदन निवेदन कर चुके हैं मगर कोई भी उनकी समस्या की ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है। दूसरी तरफ कर्ज को लेकर बैंक लगातार नोटिस पर नोटिस दे रही है।

– कर्ज के तकाजे के लिए बैंक दे रही किसानों को नोटिस…
केन्द्र सरकार की बहुउपयोगी राष्ट्रीय किसान विकास योजना के तहत जिले के शाहपुर विकासखंड में शेडनेट का क्लस्टर बनाया गया। जिसमें किसानों को बैंक से जमीन गिरवी रखकर 22 लाख 10 हजार रूपये का कर्ज दिलवाया गया। 2017-18 की इस स्कीम में किसानों को 17 लाख रूपये सब्सिडी मिलना था और इस सब्सिडी से कर्ज की अदायगी होना था। लगातार दो वर्ष जब सब्सिडी नहीं हुई, अर्ज की अदायगी नहीं हुई तो किसानों पर उक्त कर्ज पर चक्रवृद्धि ब्याज लगने लगा। बैंक अपने कर्ज की वसूली के लिए किसानों को नोटिस थमाने लगा। तीन-तीन, चार-चार बार नोटिस दिए जा चुके हैं।

– कुछ 17 लाख तो कुछ को 14.20 लाख मिला है अनुदान…
जो किसानों द्वारा बताया गया उसके अनुसार 2017-18 में क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती में 25 किसानों को चयनित किया गया था। इन्हें जिला सहकारी बैंक शाहपुर से 500 रूपये के स्टाम्प पेपर पर जमीन बंधक रखकर 22.10 लाख रूपये का कर्ज दिया गया। इन किसानों ने बताया कि इसमें से 16 किसानों को पूरा 17 लाख रूपये का अनुदान मिला है। वहीं 8 किसानों को 14.20 लाख रूपये का अनुदान मिला है। इनको 2.80 लाख रूपये की अनुदान राशि अभी भी नहीं मिली है। बाकी किसान को कुछ भी नहीं मिला है। मलसिवनी निवासी संता बिहारी का कहना है कि उसे आज तक कोई अनुदान नहीं मिला है।

– यह सवाल और फैक्ट बहुत कुछ कहते है…
1 – विभाग का कहना है कि एक शेड नेट की लागत 28.40 लाख रूपये है। तो इसका आधा अनुदान 14.20 लाख रूपये उन्हें दिए गए है। जबकि किसानों का कहना है कि यह सच नहीं है।
2 – किसानों के अनुसार 28.40 लाख रूपये शेड नेट निर्माण की राशि थी, वहीं 5.60 लाख रूपये सब्जी उत्पादन के लिए थी जो कुल 34 लाख रूपये हो रही है। इसमें 5 लाख 60 हजार रूपये में किसान को खाद-बीज, सपोर्ट सिस्टम, दवाईयां खरीदनी थी।
3 – किसानों के अनुसार इसमें किसानों की मार्जिन मनी 11.90 लाख रूपये थे। वहीं बैंक से 22.10 लाख रूपये कर्ज था। इसमें 17 लाख रूपये किसानों को अनुदान मिलना था। 

– मैडम बोलती मीडिया भी हमसे मैनेज है…
भूख हड़ताल पर बैठे मलसिवनी के किसान दिनेश बारसे का कहना है कि मैडम भी कहती है कि मीडिया हमारे हिसाब से चलती है जो हम चाहेंगे वही छपेगा। जनसुनवाई में भी हमारी बात नहीं सुनी गई।

– ऊंगली दिखाकर बोलती है जो बनता है कर लो…
पाठई के किसान संदीप उईके का कहना कि उद्यानिकी विभाग की मैडम ऊंगली दिखाकर बात करती है और बोलती है जो बनता है कर लो। कहीं कुछ नहीं होना है। बैंक हमारी छाती छोल रही है।

– सीधे तौर पर पूरी स्कीम में कहीं न कहीं धोखा है…
किसानों का कहना है कि अनुदान को लेकर मेडम मीडिया में जो प्रचार करा रही है वह पूरा सच नहीं है। यदि होता तो हमें कोई शौक नहीं छूटा कि इस तरह भूख हड़ताल पर बैठते। दुष्प्रचार से हमारी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

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