भागवत कथा के समापन पर बांटे पौधे एवम साथ ही गीता पुराण का किया वितरण- मुलतापी



मुलताई। नगर के पारेगाव रोड स्थित मुलताई मे अजय भोयरे के निवास स्थान पर चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए पंडित घनश्याम बन गोस्वामी ( काजली ) ने राधा कृष्ण की करूणामई और रमनिय कथा का वर्णन करते हुए कथा का समापन किया और समापन अवसर पर आये अतिथियो को नगर के अनुसया सेवा संगठन द्वारा पौधे वितरण किये गये जिसमे विभिन्न गावो से आये अतिथि को संगठन द्वारा पौधे भेट किये गये साथ हि भागवताचर्य द्वारा सभी को अधिक से अधिक हर शुभ कार्य पर पौधा लगाने का संकल्प दिलाया व पौधे से होने वाले अनेको लाभ बताए व सभी के द्वारा पौधे को रोपित कर पालने का संकल्प लिया कृष्णा साहू ने बताया कि पौधारोपण बहुत ज़रूरी है, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो हम भी सुरक्षित रहेंगे
जब से दुनिया शुरू हुई है, तभी से इंसान और क़ुदरत के बीच गहरा रिश्ता रहा है। पेड़ों से पेट भरने के लिए फल-सब्ज़ियां और अनाज मिला। तन ढकने के लिए कपड़ा मिला। घर के लिए लकड़ी मिली। इनसे जीवनदायिनी ऑक्सीज़न भी मिलती है, जिसके बिना कोई एक पल भी ज़िन्दा नहीं रह सकता। इनसे औषधियां मिलती हैं। पेड़ इंसान की ज़रूरत हैं, उसके जीवन का आधार हैं। अमूमन सभी मज़हबों में पर्यावरण संरक्षण पर ज़ोर दिया गया है। भारतीय समाज में आदिकाल से ही पर्यावरण संरक्षण को महत्व दिया गया है। भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को पूजा जाता है। विभिन्न वृक्षों में विभिन्न देवताओं का वास माना जाता है। पीपल, विष्णु और कृष्ण का, वट का वृक्ष ब्रह्मा, विष्णु और कुबेर का माना जाता है, जबकि तुलसी का पौधा लक्ष्मी और विष्णु, सोम चंद्रमा का, बेल शिव का, अशोक इंद्र का, आम लक्ष्मी का, कदंब कृष्ण का, नीम शीतला और मंसा का, पलाश ब्रह्मा और गंधर्व का, गूलर विष्णू रूद्र का और तमाल कृष्ण का माना जाता है। इसके अलावा अनेक पौधे ऐसे हैं, जो पूजा-पाठ में काम आते हैं, जिनमें महुआ और सेमल आदि शामिल हैं। वराह पुराण में वृक्षों का महत्व बताते हुए कहा गया है- जो व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, एक बड़, दस फूल वाले पौधे या बेलें, दो अनार दो नारंगी और पांच आम के वृक्ष लगाता है, वह नरक में नहीं जाएगा।
कार्यक्रम मे अनुसया सेवा संगठन अध्यक्ष कृष्णा साहू, सदस्य दुर्गेश भोयरे, राजेश साहु, गुलसन वाघमारे, गगन चन्द्र जायसवाल, प्रकाश साहु अजय साहु, मोरेश्वर साहु अभिषेक साहू ,ने शामिल होकर कार्यक्रम मे योगदान दिया और भोयरे परिवार द्वारा पाच भगवत गीता पुराण का भी वितरण किया गया ।

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