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Betul News : मुंबई के गोताखोर भी नहीं सुधार सके रानीपुर डैम का गेट


रानीपुर

Betul News : एक पखवाड़ से अधिक समय से बैतूल जिले के रानीपुर डैम का गेट क्षतिग्रस्‍त है। अब तक इसकी मरक्‍मत नहीं हो सकी।

रानीपुर डैम का गेट सुधारने मुंबई से बुलाए गए गोताखोर भी उसे दुरुस्त नहीं कर पाए, बल्कि अब समस्या और बढ़ गई है। सुधारने की मशक्कत के दौरान गेट और उठ गया। संतुलन बनाने के लिए नदी वाला गेट भी खोलना पड़ा। अब दोनों गेटों से निकला पानी करीब 3 किलोमीटर क्षेत्र में किसानों की फसल बहा ले गया। डैम के पूरी तरह से खाली होने का खतरा भी उत्पन्न हो गया है।

दो बार गोताखोर बुलवाने पड़े

रानीपुर डैम का गेट पिछले 20-22 दिनों से खराब पड़ा है। पहले इसे सुधारने के लिए मुंबई से गोताखोर बुलाए गए थे। पहले तो चेन पुल्ली टूट गई तो फिर मजबूत चेन पुल्ली बुलवाई गई, लेकिन फिर भी गेट नहीं सुधर पाया। इसके बाद अब दोबारा गोताखोर बुलाए गए थे।

घंटों मशक्कत के बाद भी सुधार नहीं हुआ

जानकारी के अनुसार शनिवार को गोताखोरों और विभाग की टीम ने गेट को दुरुस्त करने की कोशिश की, लेकिन घंटों मशक्कत के बाद भी सुधार नहीं पाए। बल्कि गेट और ऊंचा हो गया। इस गेट से पानी का दबाव कम करने के लिए नदी वाला गेट भी खोलना पड़ा। इससे पानी तेज बहाव के साथ आसपास के खेतों में घुस गया, जिससे 12 से अधिक किसानों की फसलें बह गई।

इधर इस मामले में जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री एके डहेरिया का कहना है कि अब इलेक्ट्रिक और मैकेनिकल विंग से गेट सुधरवाया जाएगा। विंग को पत्र लिख दिया है, लेकिन जल्द काम हो सके, इसलिए सीधे मुख्य अभियंता से बात करके प्रयास किए जाएंगे।

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बैतूल के जंगल में महुआ पेड़ से चमत्कार की अफवाह, वन विभाग और पुलिस ने हटाई सामग्री


एक सप्ताह से चिचोली रेंज के संरिक्षत वन क्षेत्र में लग रही लोगों की भीड़ फोटो———–26 बीटीएल 36 बैतूल। महुआ के पेड़ के आसपास की गई सफाई और हो रहा पूजन। फोटो———–26 बीटीएल 35 बैतूल। महुआ पेड़ के पास लगी लोगों की भीड़। फोटो———–26 बीटीएल 34 बैतूल। वन विभाग और पुलिस ने महुआ पेड़ के आसपास से हटाई पूजन सामन्


– एक सप्ताह से चिचोली रेंज के संरिक्षत वन क्षेत्र में लग रही लोगों की भीड़

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बैतूल। महुआ के पेड़ के आसपास की गई सफाई और हो रहा पूजन।

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बैतूल। महुआ पेड़ के पास लगी लोगों की भीड़।

फोटो———–26 बीटीएल 34

बैतूल। वन विभाग और पुलिस ने महुआ पेड़ के आसपास से हटाई पूजन सामग्री।

बैतूल। नवदुनिया प्रतिनिधि

जिले के पश्चिम वन मंडल के अंतर्गत आने वाली चिचोली रेंज में पिछले एक सप्ताह से एक महुआ के पेड़ से चमत्कार होने की अफवाह के कारण लोगों की भारी भीड़ जुट रही है। हालांकि गुरुवार को वन विभाग ने पुलिस की मदद से महुआ पेड़ के पास पूजा अर्चना की सामग्री हटाने के साथ ही लोगों को ठीक करने का दावा करने वाली दो महिलाओं को पकड़कर चिचोली थाने ले आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पश्चिम वन मंडल की चिचोली रेंज की असाड़ी बीट के संरक्षित वन क्षेत्र क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 1443 लगे एक महुए के पेड़ को ग्राम बिघवा निवासी मालती पति लल्लन एवं एक अन्य महिला के द्वारा चमत्कारी बताते हुए स्वयं को भगवान बताना शुरू कर दिया। पेड़ के आसपास त्रिशूल लगा दिए साफ सफाई कर पूजा अर्चना की जाने लगी। इस अफवाह के फैलते ही अंधविश्वास का शिकार हुए लोग दूर-दूर से यहां पंहुचने लगे और महुए के पेड़ के पास बैठकर अपने दुख बीमारियों के ठीक होने की मन्नाते मांग रहे हैं। इस महुए के पेड़ के पास हर समय कथित देवी मालती मौजूद रहती है। यहां एक पंडा भी है, जो लाभ लेने के लिए लोगों को महुए के पेड़ की परिक्रमा करने के साथ ही देवी स्वरूपा मालती मर्सकोले के भी दर्शन करने पर लाभ होने का दावा करते हैं। पश्चिम वन मंडल के डीएफओ मयंक चांडिवाल का कहना है कि पिछले चार दिनों से इस तरह का कुछ मूवमेंट वहां चल रहा था। वन विभाग की टीम और पुलिस ने मिलकर सभी को वहां से हटा दिया है। हमने अपने कर्मचारियों को वहां तैनात कर दिया है और आगे भी इसका ध्यान रखा जाएगा कि वहां कोई नहीं पहुंचे। पूर्व में महिलाओं को वन क्षेत्र में ऐसी गतिविधि न करने के लिए समझाइश दी गई थी लेकिन उनके द्वारा अनसुना कर दिया। इस कारण से पुलिस के सहयोग से कार्रवाई कर दोनो महिलाओं को चिचोली थाने पहुंचाया गया है।

मनमोहन पवार ()

ताप्ती तट पर मशीन से आठ दिनों में बनेगी फूलों से खाद


Betul News – नगर के मंदिरों से रोज आठ से दस किलो फूल और बेल-पत्ती निकलती है। नगर पालिका ने फूल और पत्तियों का उपयोग खाद बनाने के…

Multai News - mp news machines will make manure from flowers on tapti coast in eight days

नगर के मंदिरों से रोज आठ से दस किलो फूल और बेल-पत्ती निकलती है। नगर पालिका ने फूल और पत्तियों का उपयोग खाद बनाने के रूप में करना शुरू कर दिया है। इसके लिए कम्पोस्टिंग मशीन लाई गई है। बुधवार को नगर पालिका अध्यक्ष हेमंत शर्मा ने मशीन का शुभारंभ किया। पहले ही दिन से मंदिरों से निकलने वाले फूलों से खाद बनाना भी शुरू हो है। फूलों से खाद बनाने की मशीन को ताप्ती सरोवर के किनारे रखा है। खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के दौरान नपा उपाध्यक्ष रेखा शिवहरे, पूर्व नपा अध्यक्ष डॉ. जीए बारस्कर, पार्षद अरुण साहू, राजू चोपड़े, बटनी बाई कड़वे, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष हनी भार्गव, जगदीश पीएल पवार, मनीष माथनकर, अजाबराव देशमुख, प्रहलाद साहू, जयदीप ठाकरे, रामदास साहू, पंजाब चिकाने सहित अन्य लोग उपस्थित थे। नपा अध्यक्ष शर्मा ने बताया मंदिरों से निकलने वाली पूजन सामग्री से खाद बनाने के लिए 4 लाख 80 हजार रुपए की कम्पोस्टिंग मशीन लाई गई है। पूर्व में फूलों से खाद बनाने की यूनिट नपा कार्यालय परिसर में बनाई गई थी। यूनिट में खाद बनाने में अधिक समय लगता था। अब मंदिरों से सीधे फूल लाकर मशीन के माध्यम से खाद बनेगा। फूल एकत्रित करने के लिए अलग से वाहन लगाया है। उन्होंने बताया वर्तमान में नपा घरों से निकलने वाले कचरे से भी खाद बनाकर बेच रही है।

ऐसे बनेगी खाद

नपा के उपयंत्री पवन धुर्वे ने बताया फूल, बेलपत्ती, नारियल की बूच में बायोकुलम एक्टिवेटर पाउडर मिलाकर मशीन में डाल देते हैं। मशीन सामग्री को बारीक कर देती है। मशीन से निकलने वाली सामग्री में बायोकुलम एक्टिवेटर मिला रहता है। जिससे सामग्री में खाद बनाने बेक्टीरिया रहता है। यह बेक्टीरिया आठ से दस दिन में खाद तैयार कर देता है।

मुलताई। फूलों से खाद बनाने वाली मशीन का शुभारंभ करते हुए।

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मुलताई में फोरलेन की जमीन पर तालाब निर्माण


20 दिसम्बर 2019 को जानकारी में आया कि, एक अज्ञात ठेकेदार केंद्र सरकार भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार की सुरक्षित अधिग्रहित भूमि पर मामनीय मंत्री सुखदेव पांसे म.प्र. शासन की अनुशंसा पर लम्बाई 300 मीटर चौड़ाई 40 मीटर गहराई 3.50 मीटर डाउन स्टीम 1.50 मीटर जिसकी लागत 44.75 लाख लगभग इस सरोवर की खुदाई से 38 हजार 440 घन मीटर जिसकी किमत 15 लाख जो पहले वर्धा डेम के ठेकेदार को देना प्रस्तावित था। बाद में उसको हटा करके हरदौली पेयजल के डेम निर्माण ठेकेदार को देना तय हुआ। जैसे ही उसने खुदाई लगाई मिट्टी जाना चालू हुआ। तत्काल नेशलन हाइवे विभाग ने थाना मुलताई में एफआईआर दर्ज की।

उक्त मामले में जानकारी निकाली तो मामला पूरा हवाहवाई निकला किसी ने भी सम्बन्धित विभाग से अनुमति नही ली। सड़क सुरक्षा की दृष्ट्री से मिल भी नही सकती है। मुलताई में मंत्रीजी की अनुशंसा पर जिलाधिकारी, मुलताई का राजस्व विभाग, नगरपालिका, सिचाई विभाग ,लोक स्वस्थ विभाग की संयुक टीम ने काम चालू कर दिया है। ठीक इसी प्रकार बैतूल के पूर्व विधायक हेमन्त खंडेलवाल ने भी परियोजना नियम विरुद्ध तैयार की थी। सड़क सुरक्षा के मध्यनजर अनुमति नही मिली थी।

उसी तर्ज पर सत्ता परिवर्तन के बाद मुलताई में चालू हुआ है। किसी प्रकार की कोई प्रशासनिक स्वीकृति नही है।उक्त रिक्त भूखण्ड पर नेशनल हाईवे काम करता है। उनकी परियोजना में शामिल है। नगर पालिका चुनाव की पूर्व संध्या पर इस प्रकार के काम होते है।

यूरिया खाद की वितरण व्यवस्था सुधारे शासन


26 दिसम्बर 2019 को मुलताई सोसायटी के सामने बड़ी संख्या में यूरिया खाद की खरीदी को लेकर परेशान है। जिसका एक मात्र कारण ये है कि, शासन से प्राप्त पूरा यूरिया समिति के डिफाल्टर किसानों के लिए गोदाम में भरा है। उनका अता-पता नही। जिनको आवश्यकता है उनको नही मिल रहा है।

मनमोहन पवार 9753903839

पूर्व प्रधान मंत्री अटलबिहारी बाजपेयी जी के जन्मदिवस पर मैराथन दौड़


ग्राम नरखेड़ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी कि जयंती के उपलक्ष्य में ग्राम के युवाओ द्वारा 5 किलोमीटर कि मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। जिसमें ग्राम नरखेड़ के एंव आसपास के ग्रामीण क्षेत्र शेरगढ़, भिलाई, ताईखेडा,पट्टन तथा मुलताई के युवाओ ने इस प्रतियोगिता में बढ़ चढ़कर के भाग लिया।  प्रतियोगिता में विजेताओं ने 17 मिनट 38 सेकंड में दौड़ को पूरा कर प्रथम स्थान ग्राम शेरगढ़ के अजय डोंगरदिए ने, नरखेड़ के करन खाड़े ने द्वितीय स्थान, एवं शेरगढ़ के शिवनाथ खवसे ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेताओं को शासकीय  खेल विभाग नेहरू युवा केंद्र के द्वारा मेडल एवं प्रमाण पत्र एवं आयोजन  समिति  के और से तीनों विजेताओं को प्रथम 1001, द्वितीय 501, तृतीय 101, रुपय  नगद पुरस्कार राशि दी गई, विजेताओं ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन से युवाओं को भर्ती स्पर्धा से रुबरु होने का अनुभव प्राप्त होता है और युवाओं में खेल  भावना बढ़ती है।साथ ही आयोजक समिति के सदस्य  गौरव खाड़े, चन्द्रशेखर खाड़े ,विजय माकोड़े, उपमन्यु बिझाडे़, अरविन्द पांसे,नविन साखरे, प्रशांत साहू, राकेश हिवशे , ओमकार बारस्कर, साहेबराव लोखंडे, ब्रजेश लोखंडे, संदीप लोखंडे, अमित देशमुख, मनिष खाड़े ने बताया कि आने वाले समय में बड़े स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन करेंगे नरखेड़ के युवाओं द्वारा समय समय पर नई पहल को लेकर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।कार्यक्रम में नितेश काले एवं नेहरू युवा केन्द्र के मिथलेश हारोड़े भी उपस्थित रहे।सभी ग्रामीणों तथा सरपंच आशा मानिकराव खाड़े, उप सरपंच वामनराव जी देशमुख ने इस पहल को अच्छा बताते हुए प्रतिभागियों का उत्साह वर्धन किया एवं आयोजकों की सराहना की तथा भविष्य के लिए भी ऐसी गतिविधियों के लिए शुभकामनाएं दी…!!

Manmohan Pawar

संकल्प : साहू समाज का हर सदस्य अब कपड़े का थैला लेकर जाएगा बाजार


Sarni ke Mathardev Baba Mandir Parisar

सारनी | शहर के छोटा मठारदेव परिसर में साहू समाज का मिलन समारोह आयोजित किया गया। इसमें समाज को विकास के पथ पर ले जाने…

सारनी | शहर के छोटा मठारदेव परिसर में साहू समाज का मिलन समारोह आयोजित किया गया। इसमें समाज को विकास के पथ पर ले जाने के लिए विचार, विमर्श किया गया। खास बात यह रही साहू समाज के हर परिवार ने व्यक्तिगत रूप से पॉलीथीन उपयोग को रोकने का संकल्प लिया। परिवार थैला लेकर बाजार जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत छोटा मठारदेव परिसर में पूजन के साथ हुई। इसमें समाज के सभी परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे। हर साल 25 दिसंबर को समाज मिलन समारोह रखता है। पिछले 40 सालों से यह कार्यक्रम करता आ रहा है। अध्यक्ष लखन साहू सनंद किशोर साहू, कन्हैया लाल साहू, पूनम चंद साहू, कैलाश साहू, रूपलाल साहू, देवमन साहू, भागचंद साहू, जगदीश साहू, मुन्ना लाल, रामदास साहू, घनश्याम साहू, गोपाल साहू समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

सारनी। बाबा मठारदेव का पूजन कर कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए।

Manmohan Pawar (Sampadak)

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पुराणों में ताप्ती जी की जन्मकथा


सूूूूर्य पुत्री माॅँँ ताप्‍ती जी मुलताई

श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष के बारे में रामायण में एक कथा पढऩे को मिलती है कि राजा दशरथ के शब्द भेदी से श्रवण कुमार की जल भरते समय अकाल मृत्यु हो गई थी. पुत्र की मौत से दुखी श्रवण कुमार के माता – पिता ने राजा दशरथ को श्राप दिया था कि उसकी भी मृत्यु पुत्र मोह में होगी. राम के वनवास के बाद राजा दशरथ भी पुत्र मोह में मृत्यु को प्राप्त कर गये लेकिन उन्हे जो हत्या का श्राप मिला था जिसके चलते उन्हे स्वर्ग की प्राप्ति नहीं हो सकी. एक अन्य कथा यह भी है कि ज्येष्ठ पुत्र के जीवित रहते अन्य पुत्र द्वारा किया अंतिम संस्कार एवं क्रियाक्रम भी शास्त्रो के अनुसार मान्य नहीं है. ऐसे में राजा दशरथ को मुक्ति नहीं प्राप्त हो सकी थी. राजा दशरथ द्वारा ताप्ती महात्म की बताई कथा का भगवान मर्यादा पुरूषोत्तम को ज्ञान था. इसलिए उन्होने सूर्यपुत्री देव कन्या मां आदिगंगा ताप्ती के तट पर अपने अनुज लक्ष्मण एवं माता सीता की उपस्थिति में अपने पितरो एवं अपने पिता का तर्पण कार्य ताप्ती नदी में किया था. भगवान श्री राम ने बारहलिंग नामक स्थान पर रूक कर यहां पर भगवान विश्वकर्मा की मदद से बारह लिंगो की आकृति ताप्ती के तट पर स्थित चटटनो पर ऊकेर कर उनकी प्राण प्रतिष्ठा की थी. बारहलिंग में आज भी ताप्ती स्नानगार जैसे कई ऐसे स्थान है जो कि भगवान श्री राम एवं माता सीता के यहां पर मौजूदगी के प्रमाण देते है. एक अन्य कथा के अनुसार दुर्वशा ऋषि ने देवलघाट नामक स्थान पर बीच ताप्ती नदी में स्थित एक चटटन के नीचे से बने सुरंग द्वार से स्वर्ग को प्रस्थान किया था. शास्त्रो में कहा गया है कि यदि भूलवश या अनजाने से किसी भी मृत देह की हडड्ी ताप्ती के जल में प्रवाहित हो जाती है तो उस मृत आत्मा को मुक्ति मिल जाती है. जिस प्रकार महाकाल के दर्शन करने से अकाल मौत नहीं होती ठीक उसी प्रकार किसी भी अकाल मौत के शिकार बनी देह की अस्थियां ताप्ती जल में प्रवाहित करने या उसका अनुसरण करके उसे ताप्ती जल में प्रवाहित किये जाने से अकाल मौत का शिकार बनी आत्मा को भी प्रेत योनी से मुक्ति मिल जाती है. ताप्ती नदी के बहते जल में बिना किसी विधि – विधान के यदि कोई भी व्यक्ति अतृप्त आत्मा को आमंत्रित करके उसे अपने दोनो हाथो में जल लेकर उसकी शांती एवं तृप्ति का संकल्प लेकर यदि उसे बहते जल में प्रवाहित कर देता है तो मृत व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति मिल जाती है. सबसे चमत्कारिक तथ्य यह है कि ताप्ती के पावन जल में बारह माह किसी भी मृत व्यक्ति का तर्पण कार्य संपादित किया जा सकता है. इस तर्पण कार्य को ताप्ती जन्मस्थली मुलताई में गायत्री परिवार द्वारा नि:शुल्क संपादित किया जाता है . ताप्ती नदी के जल में मुलताई से लेकर सूरत गुजरात तक कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म – जाति – सम्प्रदाय – वर्ग का अपने किसी भी परिजन या परिचित व्यक्ति की मृत आत्मा का तर्पण कार्य संपादित कर सकता है.
                सूर्यपुत्री मां ताप्ती भारत की पश्चिम दिशा में बहने वाली प्रमुख दो नदियो में से एक है. यह नाम ताप अर्थात उष्ण गर्मी से उत्पन्न हुआ है. वैसे भी ताप्ती ताप – पाप – श्राप और त्रास को हरने वाली आदीगंगा कही जाती है. स्वंय भगवान सू�����्यनारायण ने स्वंय के ताप को कम करने के लिए ताप्ती को धरती पर भेजा था. यह सतपुड़ा पठार पर स्थित मुलताई के तालाब से उत्पन्न हुई है लेकिन इसका मुख्य जलस्त्रोत मुलताई के उत्तर में 21 अंक्षाश 48 अक्षंाश पूर्व में 78 अंक्षाश एवं 48 अंक्षाश में स्थित 790 मीटर ऊँची पहाड़ी है जिसे प्राचिनकाल में ऋषिगिरी पर्वत कहा जाता था जो बाद में नारद टेकड़ी कहा जाने लगा . इस स्थान पर स्वंय ऋषि नारद ने घोर तपस्या की थी तभी तो उन्हे ताप्ती पुराण चोरी करने के बाद उत्पन्न कोढ़ से मुक्ति का मार्ग ताप्ती नदी नदी में स्नान का महत्व बताया गया था. मुलताई का नारद कुण्ड वही स्थान है जहाँ पर नारद को स्नान के बाद कोढ़ से मुक्ति मिली थी. ताप्ती नदी सतपुड़ा की पहाडिय़ो एवं चिखलदरा की घाटियो को चीरती हुई महाखडड में बहती है. 201 किलोमीटर अपने मुख्य जलस्त्रोत से बहने के बाद ताप्ती पूर्वी निमाड़ में पहँुचती है. पूर्वी निमाड़ में भी 48 किलोमीटर सकरी घाटियो का सीना चीरती ताप्ती 242 किलोमीटर का सकरा रास्ता खानदेश का तय करने के बाद 129 किलोमीटर पहाड़ी जंगली रास्तो से कच्छ क्षेत्र में प्रवेश करती है. लगभग 701 किलोमीटर लम्बी ताप्ती नदी में सैकड़ो  कुण्ड एवं जल प्रताप के साथ डोह है जिसकी लम्बी खाट में बुनी जाने वाली रस्सी को डालने के बाद भी नापी नही जा सकी है. इस नदी पर यूँ तो आज तक कोई भी बांध स्थाई रूप से टिक नही सका है मुलताई के पास बना चन्दोरा बांध इस बात का पर्याप्त आधार है कि कम जलधारा के बाद भी वह उसे दो बार तहस नहस कर चुकी है. सूरत को बदसूरत करने वाली ताप्ती वैसे तो मात्र स्मरण मात्र से ही अपने भक्त पर मेहरबान हो जाती है लेकिन  किसी ने उसके अस्तित्व को नकारने की कुचेष्टïा की तो वह फिर शनिदेव की बहन है कब किसकी साढ़े साती कर दे कहा नही जा सकता. ताप्ती नदी के किनारे अनेक सभ्यताओं ने जन्म लिया और वे विलुप्त हो गई .भले ही आज ताप्ती घाटी की सभ्यता के पर्याप्त सबूत न मिल पाये हो लेकिन ताप्ती के तपबल को आज भी कोई नकारने की हिम्मत नही कर सका है. पुराणो में लिखा है कि भगवान जटाशंकर भोलेनाथ की जटा से निकली भागीरथी गंगा मैया में सौ बार स्नान का , देवाधिदेव महादेव के नेत्रो से निकली एक बुन्द से जन्मी शिव पुत्री कही जाने वाली माँ नर्मदा के दर्शन का तथा माँ ताप्ती के नाम का एक समान पूण्य एवं लाभ है . वैसे तो जबसे से इस सृष्टिï का निमार्ण हुआ है तबसे मूर्ति पूजक हिन्दू समाज नदियों को देवियों के रूप में सदियों से पूजता चला आ रहा है . हमारे धार्मिक गंथो एवं वेद तथा पुराणो में भारत की पवित्र नदियों में ताप्ती एवं पूर्णा का भी उल्लेख मिलता है . सूर्य पुत्री ताप्ती अखंड भारत के केन्द्र बिन्दु कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के प्राचीन मुलतापी जो कि वर्तमान में मुलताई कहा जाता है . इस मुलताई नगर स्थित तालाब से निकल कर समीप के गौ मुख से एक सुक्ष्म धार के रूप में बहती हुई गुजरात राज्य के सूरत के पास अरब सागर में समाहित हो जाती है .  सूर्य देव की लाड़ली बेटी एवं शनिदेव की प्यारी बहना ताप्ती जो कि आदिगंगा के नाम से भी प्रख्यात है वह आदिकाल से लेकर अनंत काल तक मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि महाराष्टï्र एवं गुजरात के विभिन्न जिलों की पूज्य नदियों की तरह पूजी जाती रहेगी . जिसका एक कारण यह भी है कि सूर्यपुत्री ताप्ती मुक्ति का सबसे अच्छा माध्यम है . सबसे आश्चर्य जनक तथ्य यह है कि सूर्य पुत्री ताप्ती की सखी सहेली कोई और न होकर चन्द्रदेव की पुत्री पूर्णा है जो की उसकी सहायक नदी के रूप में जानी – पहचानी जाती है . पूर्णा नदी भैंसदेही नगर के पश्चिम दिशा में स्थित काशी तालाब से निकलती हैं. प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्घालु लोग अमावस्या और पूर्णिमा के समय इन नदियों में नहा कर पूर्ण लाभ कमाते हैं . ए��� ��िवदंती  कथाओं के अनुसार सूर्य और चन्द्र दोनों ही आपस में एक दूसरे के विरोधी रहे हैं , तथा दोनों एक दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते हैं. ऐसे में दोनों की पुत्रियों का अनोखा मिलन बैतूल जिले में आज भी लोगों की श्रद्घा का केन्द्र बना हुआ हैं .
                        धरती पर ताप्ती के अवतरण की कथा
            पौराणिक कथाओं में उल्लेखित वर्णन के अनुसार एक समय वह था जब कपिल मुनि से शापित जलकर नष्टï हो पाषाण बने अपने पूर्वजों का उद्धार करने इस पृथ्वी लोक पर, गंगा जी को लाने भागीरथ ने हजारों वर्ष घोर तपस्या की थी. उसके फलस्वरूप गंगा ने ब्रम्ह कमण्डल (ब्रम्हलोक से) धरती पर, भागीरथ के पूर्वजों का उद्धार करने आने का प्रयत्न तो किया परंतु वसुन्धरा पर उस सदी में मात्र ताप्ती नदी की ही सर्वत्र महिमा फैली हुई थी. ताप्ती नदी का महत्व समझकर श्री गंगा पृथ्वी लोक पर आने में संकुचित होने लगी, तदोउपरांत प्रजापिता ब्रम्हा विष्णु तथा कैलाश पति शंकर भगवान की सूझ से देवर्षिक नारद ने ताप्ती महिमा के सारे ग्रंथ लुप्त करवा दिये, तब ही गंगा धारा पर सूक्ष्म धारा में हिमालय से प्रगट हुई, ठीक उस समय से सूर्य पुत्री कहलाने वाली ताप्ती नदी का महत्व कुछ कम हो गया, कुछ ऐसी ही गाथाये मुनि ऋषियों से अक्सर सुनी जाती रही है, आज भी ताप्ती जल में एक विशेष प्रकार का वैज्ञानिक असर पड़ा है, जिसे प्रत्यक्ष रूप से स्वयं भी आजमाईश कर सकते है. ताप्ती जल में मनुष्य की अस्थियां एक सप्ताह के भीतर घुल जाती है. इस नदी में प्रतिदिन ब्रम्हामुहुर्त में स्नान करने में समस्त रोग एवं पापो का नाश होता है. तभी तो राजा रघु ने इस जल के प्रताप से कोढ़ जैसे चर्म रोग से मुक्ति पाई थी.
                            ताप्ती का पूर्णा से मिलन
पश्चिम दिशा की ओर तेज प्रभाव से बहने वाली ताप्ती नदी मध्यप्रदेश महाराष्टï्र व गुजरात में करीब 470 मील (सात सौ बावन किलोमीटर) बहती हुई अरब सागर में मिलती हैं. ताप्ती नदी बैतूल जिले में सतपुड़ा की पहाडिय़ों के बीच से निकलती हुई महाराष्टï्र के खान देश में 96 मील समतल तथा उपजाऊ भूमि के क्षेत्र से गुजरती हैं . खान देश में ताप्ती की चौड़ाई 250 से 400 गज तथा ऊंचाई 60 फीट है. इसी तरह गुजरात में 90 मील के बहाव में यह नदी अरब सागर में मिलती हैं . ताप्ती की सहायक नदी कहलाने वाली पूर्णा नदी भैंसदेही के काशी तालाब से निकलती हुई आगे चलकर महाराष्टï्र के भुसावल नगर के पास ताप्ती में मिल जाती हैं.
    पुराणों में ताप्ती जी की जन्मकथा
इतिहास के पन्नों पर छपी कहानियों को पढऩे से पता चलता है कि बैतूल जिले की मुलताई तहसील मुख्यालय के पास स्थित ताप्ती तालाब से निकलने वाली सूर्य पुत्री ताप्ती की जन्मकथा महाभारत में आदि पर्व पर उल्लेखित है. पुराणों में सूर्य भगवान की पुत्री तापी जो ताप्ती कहलाई सूर्य भगवान के द्वारा उत्पन्न की गई. ऐसा कहा जाता है कि भगवान सूर्य ने स्वयं की गर्मी या ताप से अपनी रक्षा करने के लिए ताप्ती को धरती पर अवतरित किया था. भविष्य पुराणों में ताप्ती महिमा के बारे में लिखा है कि सूर्य ने विश्वकर्मा की पुत्री संजना से विवाह किया था. संजना से उनकी दो संताने हुई- कालिन्दनी और यम. उस समय सूर्य अपने वर्तमान रूप में नहीं वरन अण्डाकार रूप में थे. संजना को सूर्य का ताप सहन नहीं हुआ . अत: अपने पति की परिचर्चा अपनी दासी छाया को सौंपकर वह एक घोड़ी का रूप धारण कर मंदिर में तपस्र ने चली गई . छाया ने संजना का रूप धारण कर काफी समय तक सूर्य की सेवा की . सूर्य से छाया को शनिचर और ताप्ती नामक दो संतान हुई . इसके अलावा सूर्य की एक और पुत्री सावित्री भी थी . सूर्य ने अपनी पुत्री को यह आशीर्वाद दिया था कि वह विनय पर्वत से पश्चिम दिशा की ओर बहेगी.
यम चतुर्थी के दिन ताप्ती भाई-बहन के स्नान का महत्व
पुराणों में ताप्ती के विवाह की जानकारी पढऩे को मिलती है. वायु पुराण में लिखा है कि कृत युग में चन्द्रवंश में ऋष्य नामक एक प्रताप राजा राज्य करते थे . उनके एक सवरण को गुरू वशिष्ठï ने वेदों की शिक्षा दी. एक समय की बात है सवरण राजपाट का दायित्व गुरू वशिष्ठï के हाथों सौंपकर जंगल में तपस्या करने के लिए निकल गये . वैभराज जंगल में सवरण ने एक सरोवर में कुछ अप्सराओं को स्नाने करते हुए देखा जिनमें से एक ताप्ती भी थी. ताप्ती को देखकर सवरण मोहित हो गया और सवरण ने आगे चलकर ताप्ती से विवाह कर लिया . सूर्य पुत्री ताप्ती को उसके भाई शनिचर (शनिदेव) ने यह आशीर्वाद दिया कि जो भी भाई-बहन यम चतुर्थी के दिन ताप्ती और यमुना जी में स्नान करेगा उन्हें कभी भी अकाल मौत नहीं होगी. प्रतिवर्ष कार्तिक माह में सूर्य पुत्री ताप्ती के किनारे बसे धार्मिक स्थलों पर मेला लगता है जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्घालु नर नारी कार्तिक अमावस्या पर स्नान करने के लिये आते हैं .       

                        भगवान श्री राम द्घारा निर्मित बारह शिवलिंग
ऐसी पुरानी मान्यता है कि भगवान श्री राम, लखन, सीता समेत वन गमन के उपरांत इस स्थान पर ठहरे हुए थे. ठीक उसी समय स्वयं श्री राम के हाथों द्घारा निर्मित यह बारह शिवलिंग तथा सीता स्नानागार शुशुप्त रूप से आज भी विद्यमान है, जो पाषाण शिला पर अंकित पुराना इतिहास के गवाह है. ग्राम खेड़ी सांवलीगढ़ से ग्यारह किलोमीटर दूर त्रिवेणी भारती बाबा की तपोभूमि ताप्ती घाट जो इस क्षेत्र में तो क्या संपूर्ण बैतूल जिले में बहुधा जानी पहचानी जगह है.  बारहलिंग नामक स्थान पर जो ताप्ती नदी के तट पर स्थित है, यहां कि प्राकृतिक छठा सुन्दर मनमोहक दृश्य आने-जाने वाले यात्रियों का मन मोह लेते है. घने हरियाले जंगलो से आच्छादित प्रकृति की अनुपम छटा बिखरेती हुई ताप्ती नदी शांत स्वरों में पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहती है. यहां पर नदी के दूसरे तट पर ताप्ती माई का एक विशाल मंदिर दत्तात्रेय, रामलखन सीता तथा गैबीदास महाराज की समाधी स्थल मुख्य आकर्षण का केंद्र है. प्रतिवर्ष यहां कार्तिक पूर्णिमा को तीन दित तक चलने वाला मेला लगता है. यहां समूचे क्षेत्र की जनता अटूट श्रद्धा भक्ति के साथ मेले में तीन दिवस के विधिविधान के साथ भगवान सूर्य को अर्ध देकर स्नान कर पूजा अर्चना करते है और फिर मेले में खरीद फरोख्त करते है. रात्रि में आदिवासियों द्वारा डंडार, नौटंकी आदि कई प्रकार के आयोजन किए जाते है. किंतु विड़म्बना है कि प्रशासन की नाक के नीचे ऐसे प्राकृतिक स्थल कि ओर उनका जरा भी ध्यान नहीं है और आज यह स्थल दुव्र्यवस्थाओं का शिकार हो रहा है .
                            नदियों के आसपास सर्वाधिक शिवलिंग
बैतूल जिलेे मे सूर्य पुत्री और चन्द्रपुत्री में आज भी दर्जनों की संख्या में मिलने वाले पुराने मंदिरों के अवशेषों में शिवलिंगों की संख्या अधिक है. कहा तो यहां तक जाता है कि ताप्ती नदी के किनारे बसे 12 लिंग स्थान पर नदी में आज भी प्रकृति द्वारा बनाये गये 12 लिंग लोगो की शरद्घा का केन्द्र बने हुये हैं. बैतूल जिले की ये दोनों नदियां अपने अंचल में अनेकों शिवलिंगों को समाये हुये हैं. लाखों की संख्या में पहुंचाने वाले शिव भक्तों की श्रद्घा का केन्द्र बनी हुई सूर्य पुत्री ताप्ती और चन्द्रपुत्री पूर्णा बैतूल जैसे पिछड़े जिले का इतिहास के अनेक अनसुलझे रहस्यों को छुपाये हुयी है.
                    सदियो से बनता चला आ रहा है पत्थरो से बना रामसेतू
भगवान मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम द्घारा बनाये गये रामसेतू को लेकर भले ही विवाद छीड़ा हो लेकिन मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में तो सदियो से भगवान श्री राम द्घारा स्थापित बारह शिवलिंगो की पूजा करने के लिए आसपास की जनजाति के लोग ताप्ती नदी के इस छोर से उस छोर पर जाने के लिए पत्थरो का पूल ठीक उसी तरह बनाते चले आ रहे है जैसा कि रामसेतू बना था. पूर्व से पश्चिम की ओर तेज प्रवाह से बहने वाली सूर्यपुत्री आदि गंगा कही जाने वाली ताप्ती नदी के एक छोर से दुसरे छोर कार्तिक माह की पूर्णिमा को लगने वाले बारहलिंग के मेले के लिए आने वाली हजारो श्रद्घालु जनता को आने – जाने के लिए इसी पत्थरो से बने अस्थायी पूल से आना – जाना करना पड़ता हैै.अपने पिता राजा दशरथ एवं माता कैकेई के आदेश का पालन करते हुये अपनी पत्नि सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास काटते हुये चित्रकुट से दण्डकारण क्षेत्र में प्रवेश करते समय भगवान मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम जिस पथ से रावण की लंका की ओर चले गये थे उस पथ में शामिल बैतूल जिले का पौराणिक इतिहास कई अनसुलझे रहस्यो को अपने आँचल में छुपाये हुये है . ऐसी पौराणिक कथाओ से जुड़ी एक कथा अनुसार राम से जुड़ी दंत एवं प्रचलित तथा पौराणिक कथाओं के अनुसार कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन भगवान श्रीराम ने ताप्ती नदी के  किनारे बारह शिव लिंगो की स्थापना कर उनका पूजन किया था तथा इसी स्थान पर रात्री विश्राम करने की व$जह से आसपास की जनजाति के लोगा यहाँ पर तीन दिन की तीरथ यात्रा क लिए आकर रात्री मुकाम करते हैै. कथाओ एवं पुराणो के अनुसार श्री राम ने वनो में उगने वाले फलो में से एक को जब माता सीता को दिया तो उन्होने इसका नाम जानना चाहा तब भगवान श्री राम ने कहा कि हे सीते अगर तुम्हे यह फल यदि अति प्रिय है तो आज से यह सीताफल कहलायेगा. आज बैतूल जिले के जंगलो एवं आसपास की आबादी वाले क्षेत्रो में सर्वाधिक संख्या में सीताफल पाया जाता है.  बारहलिंग नामक स्थान पर आज भी सीता स्नानागार एवं विलुप्त अवस्था में भगवान श्री राम द्घारा पत्थरो पर ऊकेरे गये बारह शिवलिंग स्प्ष्टï दिखाई पड़ते हैै.
                    सूरजमुखी – सूर्यमुखी ताप्ती
        यँू तो भारत की पवित्र नदियो में उल्लेखीत माँ नर्मदा एवं माँ ताप्ती ही पश्चिम मुखी नदियाँ है . ताप्ती और नर्मदा ही एक स्थान पर पूर्व की ओर बही है . गंगा सागर को पवित्र स्थान इसलिए कहा जाता है कि उस स्थान पर गंगा जी पूर्व की ओर बहती है. ताप्ती जिस स्थान पर पूर्व की ओर बही है उस स्थान को सूर्यमुखी , सूरज मुखी , गंगा सागर  जैसे कई नामो से पुकारा जाता है . अग्रितोड़ा नामक गांव के पास सूर्यपुत्री ताप्ती ने पश्चिम से पूर्व की ओर अपनी जलधारा को बदल दिया है इसलिए प्रतिवर्ष मकर संक्राति के दिन हजारो की संख्या में दूर – दराज और अन्य जिलो एवं प्रदेशो से श्रद्घालु भक्त माँ ताप्ती के जल में स्नान कर उस जल से उसके पिता सूर्यनारायण एवं भाई शनिदेव को जल अपर्ण कर उनकी पूजा अराधना करते है. मकर संक्राति के अवसर पर ताप्ती में स्नान और ध्यन को जयोतिषी शास्त्र एवं पंडित तथा जानकार लोग सबसे शुभ अवसर मानते है क्योकि इस दिन आपस में एक दुसरे के घोर विरोधी पिता एवं पुत्र दोनो मां ताप्ती के जल में स्नान और ध्यान से प्रसन्नचित होकर इच्छानुसार मनोकामना पूर्ण करते है. इस स्थान पर रामकुण्ड है जिसके बारे में कहा जाता है कि इस कुण्ड में भगवान श्री राम ने स्नान ध्यान किया था.
                जब मेघनाथ ने ताप्ती और नर्मदा की धारा उल्टी बहा दी
            यूं तो यह आम धारणा है कि बैतूल जिला सदियों पहले रावण के अधीन राज्य का एक अंग था. इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी इसी कारण सदियों से होलिका दहन के दूसरे दिन रावण के बलशाली पुत्र मेघनाथ की पूजा करते चले आ रहे है. जिले के हर गांव में जहां पर आदिवासी परिवार रहता है उस गांव में एक स्थान पर जैरी का खंबा गाड़ा होता है और इसी जैरी के खंबे पर चढ़कर पूजा अर्चना की जाती है. रावण संहिता में उल्लेखित कहानी के अनुसार नर्मदा और ताप्ती नदी के किनारे जब रावण और उसके पुत्र मेघनाथ ने अपने तप बल के बल पर नर्मदा और ताप्ती की धाराओं को उल्टी बहा दिया तो उसे देखकर आदिवासी लोग डर गए . उस समय से लेकर आज तक उक्त सभी डरे सहमे आदिवासियों के वंशज पीढ़ी दर पीढ़ी से रावण और उसके बलशाली पुत्र मेघनाथ को ही अपना राजा मानकर उसकी पूजा अर्चना करते चले आ रहे है. रावण संहिता में मेघनाथ को लेकर कई किवदंत कहानियां लिखी हुई है जिसके अनुसार भवगान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पुत्री कही जाने वाली माँ नर्मदा एवं सूर्य पुत्री माँ ताप्ती नदी के किनारे रावण और उसके पुत्र मेघनाथ ने काफी समय तक जटिल एवं कठिन तपस्याएं करके अपने तपबल के बल पर बहुत सारी सिद्घियां प्राप्त की थी.
                                धरातल के गर्त में छुपी हुई कहानियाँ
                 भारत की पवित्र नदियो में उल्लेखीत माँ नर्मदा एवं माँ ताप्ती ही पश्चिम मुखी नदियाँ है . गंगा जी इलाहबाद में जिस दिशा से आती है वापस उसी दिशा में लौटती है. ठीक इसी प्रकार बैतूल जिला मुख्यालाय से मात्र छै किलो मीटर की दूरी पर स्थित बैतूल बाजार नामक शहर के किनारे से बहती सापना नदी जिस दिशा में आती है उसी दिशा में वापस बहती है . ऐसा उन्हीं स्थानों पर होता है जो धार्मिक दृष्टिï से लोगों की श्रद्घा का केन्द्र बने हुये है . नदियों और इंसानों का रिश्ता शायद सबसे पुराना रिश्ता है तभी तो नदियों के किनारे अनेक सभ्यताओं ने समय-समय पर जन्म लिया है . आज आवश्यकता है पुरातत्व विभाग की जो इन नदियों के आगोश में छुपे रहस्यों को खोज निकाले ताकि यह पता चल सके कि आज के बैतूल और भूतकाल के इस धार्मिक क्षेत्र का इतिहास क्या था? यहां यह उल्लेखनीय है कि बैतूल जिले में ही जैनियों की पवित्र मुक्तागिरी नामक तीर्थ स्थली हैं जहां पर आज भी केसर की वर्षा होती है . जिला मुख्यालय से लगे एक प्राचीन गांव बैतूल बाजार नामक पूरे देश दुनिया में एक मात्र मंदिरों का गाँव है, जहां पर बहुसंख्या में शिवमंदिर देखने को मिलते हैं. हिन्दू वेद एवं पुराणों तथा ग्रंथों में अनेक नामों से उल्लेखित इस गांव का इतिहास आज तक पता नही चल सका है . आज इस जिले की धरातल के गर्त में अनकोनेक छुपी हुई कहानियों और किस्सो को ढूंढ निकालने की आवश्यकता है .मास अषाढ़ शुक्ल की सप्तमी को भगवान सूर्य नारायण की एवं माता छाया की पुत्री तथा न्याय के देवता भगवान शनिदेव की छोटी बहन ताप्ती – तपती – तापती – आदिगंगा जैसे अनेको नाम से पुकारी ��ाने वाली पुण्य सलिला का जन्म मुलतापी वर्तमान मुलताई जिला बैतूल में हुआ था। मुलताई बैतूल जिले में नागपुर – भोपाल रेल एवं सड़क मार्ग पर स्थित है।

मनमोहन पंवार
संस्थापक
शारदा राम मनमोनह शैैैैैैक्षणिक एवं समाज सेवा समिति

एवं संपादक, मुलतापी समाचार

मुलताई को मुलतापी जिला बनाने धार्मिक-सामाजिक संगठन करेंगे आंदोलन


मुलताई| तहसील को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इसके बाद भी अभी तक मुलताई को मुलतापी जिला बनाने को लेकर कोई कार्रवाई…

मुलताई| नगर को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इसके बाद भी अभी तक मुलताई को जिला बनाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे नगर के धार्मिक और सामाजिक संगठनों के सदस्यों में आक्रोश है। रविवार रात को जिला बनाओ मुलतापी संघर्ष समिति के तत्वाधान में दत्त मंदिर में सभी संगठनों की बैठक हुई। बैठक में मुलताई को जिला बनाने के लिए 18 सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन करने का निर्णय लिया। बैठक में गणेश साहू, राजेश कडुकर, सौरभ जोशी, अनीष नायर, विशाल सोनी, शैलेंद्र वानखेड़े, कृष्णा साहू, डीके कालभोर, राजू चौबे आदि ने मुलताई को जिला बनाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया। गणेश साहू ने बताया नगर के साथ ग्रामीण क्षेत्र में जिला बनाने को लेकर अभियान चलाया जाएगा।

मनमोहन पंवार

संपादक, मुलतापी समाचार multapisamachar@gmail.com

अस्पताल में बनेगा हर्बल गार्डन, 1200 पौधे लगाएंगे


Betul News – जिला अस्पताल में जल्द की हर्बल गार्डन विकसित होगा। हर्बल गार्डन में सभी बीमारियों के इलाज के लिए औषधीय पौधे लगाए..

Betul News – mp news herbal garden to be built in hospital to plant 1200 saplings

जिला अस्पताल में जल्द की हर्बल गार्डन विकसित होगा। हर्बल गार्डन में सभी बीमारियों के इलाज के लिए औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इस हर्बल गार्डन की शुरुआत बुधवार को 50 औषधीय पौधे लगाकर की।

हर्बल गार्डन में लगने वाले औषधीय पौधे बीमारियों की रोकथाम करने में मददगार साबित होंगे। पुराने जिला अस्पताल के सामने हर्बल गार्डन विकसित किया जाएगा। इसका जिम्मा सोसाइटी फार इम्प्लीमेंट विलेज एरिया सेवा प्रोजेक्ट को दिया है। प्रोजेक्ट के माध्यम से हर्बल गार्डन में औषधीय पौधे लगाकर उसकी देखभाल की जाएगी। अस्पताल परिसर में काया कल्प प्रभारी डॉ. सुनील डागा, सीएमएचओ डॉ. जीसी चौरसिया, डॉ. सोनल डागा ने 50 औषधीय पौधे लगाकर हर्बल गार्डन को विकसित करने की शुरुआत की। डॉ. डागा ने बताया इनका सेवन करने वालों को कभी किसी प्रकार की बीमारी नहीं होती है। ये औषधीय पौधे अमृत के समान हैं। औषधीय पाैधाें का लाभ लेकर बड़े निजी अस्पतालों के महंगे इलाज खर्च से बच सकते हैं।

यह औषधीय पौधे रोपेंगे : हर्बल गार्डन में अश्वगंधा, आगरू, ब्राह्मी, शुगर प्लांट, गिलोव, कचनार, पीपली, सहजन शतावर, शीशम, पारिजात, लेमन ग्रास, सर्पगंधा, सिताप सहित 15 से अधिक किस्मों के पौधे लगाए जाएंगे। अस्पताल परिसर में इसके अलावा फल और फूलों का बगीचा भी लगाया जा रहा है।

बैतूल। अस्पताल परिसर में हर्बल गार्डन में पौधे रोपते हुए डॉक्टर व अन्य।

2600 वर्गफीट में लगेंगे 1200 पौधे

सेवा सोसाइटी के नरेश टंडन ने बताया अस्पताल परिसर में 2600 वर्गफीट में हर्बल गार्डन को विकसित किया जा रहा है। इस क्षेत्र में 1200 पौधे लगाएं जाएंगे। औषधीय महत्व वाले पौधा किस बीमारी के काम आता है। इसके लिए बाकायदा तख्ती लगाई जाएंगी ताकि मरीज भी बीमारी के बचाव के लिए इसका उपयोग कर सकें।

मनमोहन पंवार

संपादक मुलतापी समाचार वहाटसप करेें खबरें भेजन हेतु संंपर्क करेें 09753903839