Category Archives: किसान कृषि

जन आंदोलन मंच का धरना प्रारंभ, भाजपा नेताओं की सद्बुद्धि के लिए की प्रार्थना


✍️ राहुल सारोडे

मुलताई (मुलतापी न्यजू)। जन आंदोलन मंच ने पूर्व घोषणा के अनुसार शुक्रवार से शहीद स्तंभ परिसर बस स्टैंड पर ट्रेनों के स्टापेज को लेकर धरना प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया है।

उपजन मंच के सदस्यों ने शुक्रवार अटल जयंती होने से उनका धरना स्थल पर ही जन्मदिन मनाते हुए भाजपा नेताओं के लिए सद्बुद्धि की प्रार्थना भी की ताकि वे नगर की समस्याओं को समझकर उसके निराकरण का प्रयास कर सकें। प्रथम दिन धरने पर राजरानी परिहार, मोहनसिंह परिहार, अनिल सोनी, महेश शर्मा, टीकाराम मंडले, विनोद बेले, श्रवण वाघमारे, आनंद पांसे, संपतराव, सुदर्शन बर्डे, यादोराव निंबालकर, गुलाब राऊत, संतोष बंगाली, राजेश तायवाड़े, गुड्डु पंवार, अमन बोबड़े, हाजी शमीम खान, विजय पारधे, रजनीश गिरे तथा विजय बारंगे सहित बड़ी संख्या में लोग बैठे। जनमंच के अनिल सोनी सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि विगत वर्षों से मुलताई क्षेत्र की जनता भाजपा का सांसद चुन कर भेज रही है, लेकिन पूर्व एवं वर्तमान सांसदों द्वारा नगर की समस्याओं को नजर अंदाज किया गया है। पवित्र नगरी होने के बावजूद यहां प्रमुख ट्रेनों का स्टापेज कराने के लिए सांसदों द्वारा कोई प्रयास नहीं किए गए जिससे पूरे क्षेत्रवासियों को आवागमन के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

विरोध के बाद भी हल नहीं, मक्का के दामों में सुधार नहीं


✍️ राहुल सारोडे

बैतूल मुलताई (मूलतापी सामाचार)। सोयाबीन की जगह मक्का उत्पादन को फायदेमंद मान रहे किसान अब पछताने को मजबूर हैं। एक ओर जहां शासन द्वारा भावांतर या समर्थन मूल्य पर मक्का की खरीदी नहीं की जा रही है वहीं दूसरी ओर मंडी में इसके बेहद कम दाम मिल पा रहे हैं। सोमवार को विरोध जताने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। यही कारण है कि अब किसानों को उनका हक दिलाने भारतीय किसान संघ द्वारा मोर्चा संभाला जा रहा है। संघ की इसे लेकर बुधवार को महत्वपूर्ण बैठक रखी गई है।

बीते कई सालों से जिले के किसान सोयाबीन का उत्पादन कर रहे थे। इसके चलते जमीन की उर्वरा क्षमता खत्म होती जा रही थी और उत्पादन में भी कमी आ रही थी। इसे देखते हुए कृषि विज्ञानियों और कृषि विभाग ने किसानों को सोयाबीन की जगह मक्का का उत्पादन करने की सलाह दी थी। उनकी सलाह को सिर आंखों पर रखते हुए किसानों ने पिछले कुछ सालों में मक्का का रकबा काफी बढ़ा लिया है। यही कारण है कि सीजन आते ही मंडी में मक्का का अंबार लग जाता है। पहले शासन ने किसानों को उचित दाम दिलाने के लिए भावांतर भाव योजना के तहत मक्का की खरीदी की, लेकिन इस साल शासन की किसी योजना का अता-पता नहीं है। शासन ने मक्का का समर्थन मूल्य 1850 रुपये प्रति क्विंटल घोषित तो कर दिया पर समर्थन मूल्य किसानों को दिलवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यही कारण है कि किसानों को औने-पौने दामों पर मक्का बेचना पड़ रहा है। इसे लेकर सोमवार को किसानों ने जमकर विरोध जताया। हंगामे को देखते हुए एसडीएम सीएल चनाप को भी मंडी पहुंचना पड़ा। इसके बावजूद मंगलवार को स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। आज भी मक्का के दाम में कोई इजाफा नहीं हो सका।

आज यह रहे मक्का के दाम

मंगलवार को कृषि उपज मंडी में 7166 मक्का की आवक हुई जबकि सभी तरह की जिंसों की 15344 बोरे आवक हुई। मक्का के आज न्यूनतम दाम 1000 रुपये और उच्चतम दाम 1409 रुपये रहे वहीं प्रचलित मूल्य 1320 रुपये रहा। इससे पहले सोमवार को 14011 बोरे मक्का और सभी तरह की जिंसों की 30463 बोरे आवक हुई थी। मक्का का न्यूनतम मूल्य 1002 रुपये और उच्चतम मूल्य 1401 रुपये रहा वहीं प्रचलित मूल्य 1350 रुपये रहा। जाहिर है कि आज भी दाम में कोई सुधार नहीं हुआ और किसानों को समर्थन मूल्य से काफी कम दामों पर अपनी मक्का बेचना पड़ रहा है।

अब किसान संघ उठाएगा किसानों की मांग

मंडी में भी उपज के वाजिब दाम नहीं मिल पाने का देखते हुए अब भारतीय किसान संघ द्वारा इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। इस सिलसिले में संघ की महत्वपूर्ण बैठक 4 नवंबर को दोपहर 12.30 बजे से कृषि उपज मंडी बडोरा में रखी गई है। इसमें जिला एवं तहसील के सभी कार्यकर्ताओं को बुलाया गया है। संघ के जिला मंत्री मनोज नावंगे ने बताया कि मक्का के समर्थन मूल्य से कम दामों पर बिकने को लेकर पहले प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बावजूद यदि स्थिति नहीं सुधरती है तो फिर बैठक में जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसके अनुसार कदम उठाए जाएंगे। यदि जरुरत पड़ी तो आंदोलन भी किया जाएगा।

वे बोले…

मक्का के कम दाम मिलने और किसानों के विरोध को देखते हुए इस संबंध में वरिष्ठ कार्यालय और जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। व्यापारियों से भी चर्चा की गई है, लेकिन उनका कहना है कि अभी बाजार में मक्का के कम ही रेट चल रहे हैं। इसलिए वे अधिक दाम नहीं दे पा रहे हैं। इस संबंध में शासन स्तर से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी।

एसके भालेकर, सचिव, कृषि उपज मंडी, बडोरा, बैतूल

सभी कृषि उत्पादों की एमएसपी पर खरीद करने के लिए विशेष सत्र बुलाकर कानून बनाए सरकार


Multapi Samachar

मुलताईं। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों के खेतों की सभी फसले खरीदी करने के लिए विशेष सत्र बुलाकर कानून बनाये जाने की मांग को लेकर बुधवार की किसान संघर्ष समिति द्वारा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा है । बुधवार को एमएसपी अधिकार दिवस पर किसंस के जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मण बोरबन,महामंत्री भागवत परिहार, जौलखेड़ा के पूर्व सरपंच किशोर बढ़िए, विनोदी महाजन,मनोज पंवार के नेतृत्व में मंडी पंहुचकर सौपे ज्ञापन में बताया कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की अपील पर देश के 250 किसान संगठनों के द्वारा आज 14 अक्टूबर 2020 को एमएसपी अधिकार दिवस देश भर में आयोजित किया गया है। किसान संगठनों को एमएसपी अधिकार दिवस आयोजित करने की आवश्यकता इसलिए पड़ी है क्योंकि जिन कृषि उत्पादों का एमएसपी सरकार द्वारा घोषित किया गया है उन कृषि उत्पादों की एमएसपी पर मंडी में खरीद नही होने के चलते किसानों को मजबूरी में बहुत कम दाम पर कृषि उत्पाद बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश में सोयाबीन और मक्का का सर्वाधिक उत्पादन होता है। सोयाबीन की एमएसपी 3880 रूपये होने के बावजूद व्यापारियों द्वारा 3000 से 3300 रूपये के रेट पर खरीदी की जा रही है। जिससे किसानों को 400 से 900 रूपये प्रति क्विंटल नुकसान हो रहा है। मध्य प्रदेश में सोयाबीन का कुल उत्पादन 115 लाख टन होता है, इसका अर्थ यह है कि किसानों को केवल सोयाबीन की फसल पर अरबों रूपये का नुकसान हो रहा है । इसी तरह मक्का की एमएसपी 1850 है लेकिन मक्का 700 रुपये क्विंटल के रेट पर बिक रही है| देश भर में 272 लाख टन मक्का उत्पादन करने वाले किसानों की लाखों करोड़ की लूट हो रही है।
इस समय गेहूं 1925 रुपये समर्थन मूल्य पर बिकने की जगह 1400 से 1500 रुपये क्विंटल बिक रहा है। मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 1200 रुपये तक गांव में व्यापारी खरीद रहे हैं।
धान की एमएसपी 1868 रू प्रति क्विंटल है लेकिन केरल ,छत्तीसगढ़ को छोड़ कर यह रेट भी किसानों को कही नहीं मिल रहा है। किसानों के लिए यह भयावह स्थिति है क्योंकि आपकी सरकार द्वारा डीजल के दाम बढ़ा दिए जाने, महंगाई बढ़ने तथा प्राकृतिक आपदा में खेती नष्ट होने के चलते किसानों की आर्थिक हालत चरमरा गई है।
आमदनी दुगनी होने की जगह आधी होने की स्थिति बन रही है । यह हालत उन कृषि उत्पादों की है जिनकी एमएसपी जारी की गई है।
किसान संघर्ष समिति, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति फल, सब्जी सहित सभी कृषि उत्पादों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने तथा एमएसपी के नीचे खरीद करने वाले व्यापारियों पर मुकदमा दर्ज कर जुर्माना लगाने एवं जेल भेजने की कार्यवाही की मांग करती रही है। सरकार द्वारा किसान ,किसानी और गांव खत्म करने एवं कृषि क्षेत्र को कारपोरेट के हवाले करने के लिए तीन किसान विरोधी बिल लाए गए हैं। जिसका अध्यादेश लाने के बाद से ही देश के अधिकांश किसान संगठन विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे न केवल मंडी और एम एस पी व्यवस्था को खत्म करने की मंशा से लागू किये है । इसके साथ साथ तीनों कानून भारत के संविधान की धारा 14 ,19 और 21 पर कुठाराघात करते हैं।
किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा विरोध स्वरूप 9 अगस्त से राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत की गई है जो निरंतर जारी है। आपकी सरकार के द्वारा बार-बार कहा जा रहा है कि मंडी कायम रहेगी तथा एमएसपी जारी रहेगी लेकिन एमएसपी संबंधित किसी कानून के अभाव में किसानों को एमएसपी नहीं मिल पा रही है। इस कारण आज एमएसपी अधिकार कार्यक्रम देशभर में आयोजित किया गया हैं। हम एक देश मे सभी कृषि उत्पादों की घोषित एमएसपी पर खरीद चाहते हैं।
ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से मांग की है कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के द्वारा संसद में प्रस्तुत लाभकारी मूल्य गारंटी बिल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर पारित करें ।जिससे कि न्यू इंडिया में किसानों की आत्महत्याओं एवं किसान,किसानी और गांव को नष्ट होने से रोका जा सके।

धान एवं मोटा अनाज उपार्जन के लिए 15 अक्टूबर तक होगा पंजीयन


बैतूल। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान एवं मोटा अनाज (ज्वार व बाजरा) का उपार्जन किया जाना है। इन फसलों के उपार्जन के लिए इस वर्ष समस्त इच्छुक कृषकों के नवीन पंजीयन 15 अक्टूबर तक किए जा रहे हैं। जिले के कृषक एमपी किसान एप, ई-उपार्जन मोबाइल एप, ई-उपार्जन कियोस्क कॉमन सर्विस सेंटर/लोक सेवा केंद्र एवं निर्धारित प्राथमिक कृषि साख संस्थाओं में पंजीयन करवा सकते हैं। पंजीयन हेतु जिले में समिति स्तर पर 15 पंजीयन केंद्र बनाए गए है। इनमें आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बैतूल, पापुलर विपणन संस्था बैतूल, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति शाहपुर, भौंरा, घोड़ाडोंगरी, रानीपुर एवं सीताकामथ, सारनी, चोपना, पाढर, रतनपुर, चिल्लौर, मुलताई, दुनावा, सेवा सहकारी समिति चोपना एवं महतपुर शामिल हैं। जिला आपूर्ति अधिकारी ने किसानों से पंजीयन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर के पहले अपनी उपज का अनिवार्य रूप से पंजीयन करवाने की अपेक्षा की है।

NEWS EDITOR

RAHUL SARODE

कृषि विज्ञान केंद्र पर बकरियों की उन्नत नस्ल सिरोही होंगी उपलब्ध


बकरियों की उन्नत नस्ल की कृषि विज्ञान केन्द्र पर उपलब्धता

बैतूल,  

मुलतापी समाचार

कृषि विज्ञान केन्द्र में इन  दिनों बकरियों की उन्नत नस्ल ‘‘सिरोही’’ जिले में बकरियों की नस्ल सुधार कार्यक्रम हेतु लाई गई है। इस नस्ल की विशेषता यह है कि यह द्विउद्देश्यीय नस्ल है। इसकी नस्ल की  बकरियां 1-1.5 लीटर दूध प्रतिदिन तो देती ही है, साथ ही इसका वजन काफी होता है। अत: यह नस्ल दूध एवं मांस दोनों के लिए उपयोगी है। यह नस्ल राजस्थान सिरोही जिले की होने की वजह से यह नाम रखा गया है। यह नस्ल दिखने में काफी सुंदर होती है। मुख्यत: यह हिरण के समान चितकबरी होती है। दूसरा यह कि इस  नस्ल का एक वर्ष में ही 100 किलो से अधिक वजन का हो जाता है। इस नस्ल की बकरियां साल में दो से तीन बच्चें जनती हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक  डॉ विजय वर्मा ने बताया कि पूर्व में जिले के किसानों को इस नस्ल की बकरियों को लेने के लिए कीरतपुर जाना पड़ता था, लेकिन अब कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूल में अगले वर्ष तक यहां के किसानों को उपलब्धता आरंभ हो जाएगी। साथ ही नस्ल सुधार हेतु जो किसान अपनी बकरियों को सिरोही नस्ल के बकरे से क्रास (प्रजनन) करवाना चाहते हैं, यह सुविधा भी केन्द्र आने वाले समय में आरंभ कर देगा।

दुर्घटना- ट्रेक्टर अनियंत्रि‍त होकर खंती में गिरा, एक युवक की मौत


मुलतापी समााचार

कृषी कार्य के जाते हुए ट्रैक्टर कल्टीवेटर खंती में गिर, जिसमें एक युवक की मौत हो गई

आठनेर। बुधवार को सड़क हादसे में ट्रैक्टर में सवार एक युवक की मौत हो गई । भैंसदेही मार्ग पर स्थित ज्वाला पेट्रोल पंप के समीप स्थित ट्रैक्टर कल्टीवेटर खंती में गिर गया, जिसमें चालक मौके से फरार हो गया। ट्रैक्टर में सवार अन्य एक व्यक्ति की मौत हुई है । प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कृषि कार्य हेतु अपने खेत जा रहा था। तभी पेट्रोल पंप से डीजल लेकर जा रहा था। तभी अचानक अनियंत्रित होकर ट्रैक्टर कल्टीवेटर पलट गया। मृत युवक विकेश 25 वर्षीय निवासी धामोरी के रूप में पहचान हुई है।

 थाना प्रभारी डीएस टेकाम ने बताया की धामोरी निवासी जयपाल माटे का ट्रेक्टर किराये पर मृतक के खेत जा रहा था तभी अचानक ट्रेक्टर रोड से खंती में जा गिरा जिसमें सवार की मौत हो गई । मृतक को आठनेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन लाया गया जहां डाक्टरों ने मृत घोषित किया पुलिस मामले की जांच कर रही है।

MP सकल अनाज दलहन तिलहन व्या पारी महासंघ समिति का अनिश्चित काल तक मंडी बंद


मध्य प्रदेश अनाज एवम् तिलहन व्यापारी संघ द्वारा पूरे प्रदेश में सरकार के कृषि नीतियों के विरोध में मंडी बंद रखने का ऐलान किया है जिसके समर्थन में बैतूल अनाज व्यापारी संघ द्वारा मंडी को अनिश्चित काल तक बंद रखने का फैसला किया है।

प्रदेश सरकार मंडी बोर्ड के हठधरमी रवैये के खिलाफ एवं प्रदेश के किसानों की सुरक्षा देने वाली मंडियों को सुरक्षित करने के लिए 50 पैसे मंडी शुल्‍क के लिये 24 सितम्‍बर  गुरूवार से म.प्र. कि सम्‍स्‍त मंडियों में अनिश्चितकाल के लिये पूर्ण रूप से बंद रहेंगी।

इंदौर म.प्र. सकल अनाज दलहन तिलहन व्‍यापारी महासंघ समिति के अध्‍यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश सरकार से जून से लगातार पत्राचार व सम्‍पर्क का प्रयास किया गया प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एवं कृषिमंत्री व्‍यापारी महासंघ को आश्‍वासन देते रहे। महासंघ सरकार व कृषि विभाग पर विश्‍वास  करता रहा अब सबर का बांध टूट चुका क्‍योंकि ऐसा लगने लगा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों खासकर मंडी बोर्ड के अधिकारियों के दबाव में कार्य करते हुए प्रदेश के किसानों के हितों का ध्‍यान न रखकर मंडियों को बर्बाद करना चाहती है। यदि मंडियों में व्‍यापार नहीं होगा तो मंडी शुल्‍क कहा से आयेगा। व्‍यापारियों में व्‍यापार व्‍यवसाय व मंडी किसान को सुरक्षित करे के लिए मंडी शुल्‍क 50 पैसे करने का प्रस्‍ताव सरकार को दिया है। उसी प्रकार निराश्रित शुल्‍कव अनुज्ञा पत्र की आवश्‍यकता को भी समाप्‍त करने कि बात रखी है। परन्‍तु म.प्र. कृषि उपज मंडी बोर्ड के कर्मचारियों की मांग के लिये तुरन्‍त बोर्ड मिटिंग कर निर्णय लिया परन्‍तु व्‍यापारियों कि मांग 50 पैसे मंडी शुल्‍क पर जो कि किसानों के हित सुरक्षा को ध्‍यान में रखकर की गई है उस पर निर्णय नहीं किया गया। इसलिये 24 सितम्‍बर  से प्रदेश कि मंडियॉ पूर्ण रूप से अनिश्चित काल के लिये बंद रहेगी। इसके लिये प्रदेश सरकार जवाब देह होगी।                           

झाबुआ के किसानों ने फसल पर ओढ़ा दी 400 साड़‍ियां, किस कारण


मौसम की मार और कीट, मच्छर आदि का प्रकोप अब फसलों पर नहीं होगा। किसानों को फसलों में रोग लगने की चिंता नहीं सताएगी। अपने खेत में नए सिरे से लगाई गई मिर्ची के पौधे को देशी क्रॉप कवर ओढ़ाकर न केवल बचाया जा सकता है, बल्कि विपरीत मौसम में भी परंपरागत तरीके से लगाए गए पौधे की तुलना में सौ प्रतिशत पौधे सुरक्षित रहेंगे, वो भी कम खर्च और अधिक गुणवत्ता के साथ।

बरवेट के माध्यम वर्गीय युवा किसान मनीष सुंदरलाल पाटीदार ने नई तकनीकी का प्रयोग कर रिसर्च किया है। वे हाईब्रिड मिर्च के पौधे को बीमारियों से बचाने ले लिए नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे लो टनल पद्धति और देशी भाषा में फसल बचाव तकनीक कहते है। इसका प्रयोग कर बरवेट के युवा किसान मिर्च की फसल पर आजमा रहे है। मनीष बताते है कि मौसम की मार और कीट, वायरस के प्रकोप से चार बीघे में लगी हाईब्रिड टमाटर मिर्च बिना उत्पादन के नष्ट हो गई। इस समय उन्होंने नए तरीके से एक बीघे में मिर्च के पौधे लगाए है। उन्होंने देशी तकनीक का इस्तेमाल किया है। सबसे पहले खेत की हकाई-जुताई के बाद मल्चिंग ड्रिप का सिस्टम लगाया। इसके बाद मिर्ची के पौधे के लगाए है। फिर तार बांधकर साड़ियों की लंबी पट्टी से पौधों को ढंक दिया है। इससे अनुकूल वातावरण मिलेगा तथा मौसम की मार और कीट, वायरस आदि के प्रकोप से सुरक्षा मिलेगी।

पौधे खराब नहीं होते

मनीष ने यह भी बताया कि इस विधि का प्रयोग पहली बार कर रहा हूं। जहां तक मुझे विश्वास है, इस तकनीक को अपनाने से पौधे में कोई भी बीमारी नहीं लगेगी। पौधों में बढ़वार एक समान होगी। ड्रिप द्वारा खाद दवाई फिर से दी जाएगी। दो माह तक पौधों को कवर से ढंककर रखेंगे। जब इसमें फूल आना प्रारम्भ होंगे, तब जाकर कवर को हटाएंगे।

एक बीघे में 25 से तीस हजार का खर्चा

मनीष के अनुसार एक बीघे में हकाई-जुताई से लगाकर कम से कम 25 हजार तक का खर्च आता है। इसमें पुरानी साड़ी 8 हजार, मिर्च के पौधे 6 हजार, हकाई- जुताई- मल्चिंग, ड्रिप 12 हजार रुपये, कुल 26 हजार रुपये का खर्च किया है जबकि बाजार में रेडिमेड क्रॉप कवर का खर्च प्रति बीघा डबल हो जाता है। इसका भार आम किसान नहीं उठा सकता।

मौसम अनुकूल रहेगा, खर्च लागत होगी कम

किसान मित्र उज्ज्वल त्रिवेदी और कमलेशलाल चौधरी के अनुसार हाईब्रिड फसलों में सबसे ज्यादा बीमारी मौसम की मार, मच्छर कीट और वायरस के प्रकोप से होती है। कीट मच्छर आदि को मारने के लिए महंगी से महंगी दवाई का छिड़काव करते है, लेकिन उन पर कुछ भी असर नहीं होता, क्योंकि मौसम का अनुकूल रहना भी जरूरी है। कीटनाशक छिड़काव के साथ मौसम अगर अनुकूल नहीं रहता तो बीमारी बढ़ने की आशंकी रहती है। इससे पूरा प्लाट नष्ट हो जाता है।

इस विधि से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी

उद्यानिकी विभाग के एसडीओ सुरेश इनवाती ने बताया कि बड़े किसान बाजार से क्रॉप कवर लगाकर खेती करते है। इससे पौधे को लगने वाली बीमारी जैसे कीट थ्रिप्स, माइटस, मच्छर आदि का प्रकोप नहीं होता। इससे फसल में कोई बीमारी नहीं लगती। इस प्रकार का देशी कॉप कवर साड़ियों का बनाकर जो छोटा किसान प्रयोग कर रहा है, इससे गर्मी, ठंड और बारिश का एक निश्चित तापमान बना रहेगा।

कृषक पुरस्कार एवं कृषक समूह- आत्मा अंतर्गत सर्वोत्तम पुरस्कार


मुलतापी समाचार

सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा) अंतर्गत सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार हेतु वर्ष 2019-20 में कृषकों द्वारा अपनाई गई कृषि तकनीकी, उपज एवं उत्पादकता के आधार पर प्रत्येक विकासखण्ड से कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं कृषि यंत्रों का उपयोग करने वाले कृषकों का चयन किया जाना है। प्रत्येक विकासखण्ड से सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले कृषक का चयन जिला कलेक्टर सह अध्यक्ष आत्मा गवर्निंग बोर्ड की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा।

इच्छुक कृषक, पुरस्कार हेतु प्रविष्टियां निर्धारित प्रपत्र में मय संलग्न दस्तावेजों के साथ बंद लिफाफे में 25 सितंबर 2020 तक संबंधित विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी/ब्लॉक टेक्नॉलॉजी मैनेजर आत्मा को कार्यालय में प्रस्तुत करेंगे।इच्छुक कृषक, सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार एवं जिला स्तरीय सर्वोत्तम कृषक समूह पुरस्कार के आवेदन पत्र विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय/ब्लॉक टेक्नॉलॉजी मैनेजर आत्मा से प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन पत्र भरने हेतु संबंधित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं ब्लॉक टेक्नॉलॉजी मैनेजर आत्मा आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे।

bETUL NEWS -किसानों के हित में प्रदर्शन पर कांग्रेस का प्रदर्शन ज्ञापन, खराब फसलों की जलाई होली


Multapi Samachar

बैतूल। अति बारिश के चलते जिले के सभी ब्लॉकों में सोयाबीन और मक्के की फसल खराब होने के बाद किसानों को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी तेज हो गई है। आज जिले के कांग्रेसजनों ने कलेक्टरेट कार्यालय के सामने एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और 40 हजार रूपए प्रति हेक्टेयर का मुआवजा किसानों को दिए जाने के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।

इस प्रदर्शन में खासतौर से देखने में आया कि फसलें खराब होने के बाद चिंतित किसान जैसे ही प्रशासन को ज्ञापन सौंपने जिला मुख्यालय पहुंचे, वैसे ही इस मुद्दे को हथियाने के उद्देश्य से कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता आगे-आगे होने लगे और देखते ही देखते किसानों की दुखती रग को राजनीति का हथियार बनाते हुए कांग्रेसजनों ने इस प्रदर्शन को हथिया लिया और बेचारे पीडि़त किसान अधिकारियों को अपनी व्यथा ढंग से सुना भी नहीं सके। कलेक्टरेट कार्यालय में भी बेचारे किसान चुपचाप पीछे खड़े रहकर तमाशा देखते रहे और फोटो खिंचाने की होड़ में कांग्रेसी ही अधिकारियों को इन किसानों की व्यथा सुनाते नजर आए। खासबात यह है कि ज्ञापन सौंपने के तत्काल बाद कांग्रेस के नेता मौके से चलते बने।

जानकारी कें मुताबिक सैकड़ों की संख्या में हाथों में खराब हुई फसल लेकर किसान कलेक्टरेट कार्यालय में एकत्रित हुए, जहां ज्ञापन के दौरान किसानों का नेतृत्व कर रहे कांगे्रसजनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बताया कि अतिबारिश के चलते जिले के अधिकांश क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल पीला मोजेक नामक बीमारी के चलते नष्ट हो गई है। हालात यह है कि अब यह फसल किसानों के कोई काम की नहीं रह गई। प्रदर्शन को उग्र करने के उद्देश्य से कांग्रेसजनों ने खराब फसल को आग भी लगा दी, ताकि मीडिया में इस मामले को अच्छे से अच्छा कवरेज मिल सके।