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भारत में प्रदूषण की वजह से 5 साल तक कम हो रही है उम्र


Multapi Samachar

नई दिल्ली । भारत में प्रदूषण की स्थिति भयावह होती जा रही है। प्रदूषण की वजह से भारत में आदमी की औसत आयु में 5.2 वर्ष (डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुरूप) और राष्ट्रीय मानकों के अनुसार 2.3 वर्ष कम हो रही है। यह खुलासा शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 1.4 अरब की आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऐसी जगहों पर रहता है, जहां पर्टिकुलेट प्रदूषण का औसत स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों से अधिक है, जबकि 84 फीसदी लोग ऐसी जगहों पर रहते हैं, जहां प्रदूषण का स्तर भारत द्वारा तय मानकों से अधिक है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 1998 से 2018 तक भारत के प्रदूषण में 42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट में चेताया गया है कि प्रदूषण का स्तर अगर इसी तरह से बढ़ता रहा तो उत्तर भारत में रहने वाले लोगों की औसत आयु 8 साल तक कम हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की एक-चौथाई आबादी प्रदूषण के जिस स्तर का सामना कर रही है, वैसा कोई अन्य मुल्क नहीं कर रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक उम्र कम हो रही है। लखनऊ में प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों से 11.2 अधिक है। अगर प्रदूषण का यही स्तर जारी रहा तो लखनऊ में प्रदूषण के कारण 10.3 वर्ष आयु कम होगी। भारत की राजधानी दिल्ली में भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक है। ऐसे में अगर यही स्तर जारी रहा तो औसतन 9.4 साल आयु कम हो जाएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रदूषण के स्तर को डबल्यूएचओ के मानक के अनुसार, बिहार औऱ पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी आम जन के जीवन को सात साल तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं, हरियाणा के लोगों का जीवन आठ साल तक बढ़ाया जा सकता है।

मिल्टन फ्रीडमैन प्रोफेसर और एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन कहते हैं कि कोरोना वायरस का खतरा काफी है। इसपर गंभीरता से ध्यान देने आवश्यकता है, लेकिन कुछ जगहों पर इतनी ही गंभीरता से वायु प्रदूषण पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि करोड़ों-अरबों लोगों को अधिक समय तक स्वस्थ जीवन जीने का हक मिले। माइकल ग्रीनस्टोन ने ही शिकागो यूनिवर्सिटी में ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआईसी) में अपने सहकर्मियों के साथ मिलकर एक्यूएलआई की स्थापना भी की है।

भारत बना रहा है नीति

शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सालों में भारत के लोगों ने वायु प्रदूषण की समस्या को पहचाना है और सरकार ने भी इसे कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। 2019 में केंद्र सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ युद्ध छेड़ा था और नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया था। इस प्रोग्राम का मकसद पर्टिकुलेट प्रदूषण को आने वाले पांच सालों में 20 से 30 फीसदी कम करना था। रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर भारत अपने अभियान में कामयाब नहीं हो पाया तो इसके गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं। प्रदूषण का स्तर कम होने से देश के लोगों की औसत जीवन दर 1.6 साल (अगर 25 प्रतिशत कम होने पर) बढ़ जाएगी और दिल्ली के लोगों की 3.1 साल बढ़ जाएगी।

मिल्टन फ्रीडमैन प्रोफेसर और एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन कहते हैं कि वास्तविकता यह है कि फिलहाल जो उपाय और संसाधन भारत के पास हैं, उनमें वायु प्रदूषण के स्तर में खासा सुधार के लिए मजबूत पब्लिक पॉलिसी कारगर उपाय है। एक्यूएलआई रिपोर्ट के माध्यम से आम लोगों और नीति निर्धारकों को बताया जा रहा है कि कैसे वायु प्रदूषण उन्हें प्रभावित कर रहा है। साथ ही, प्रदूषण को कम करने के लिए इस रिपोर्ट का कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

शिकागो यूनिवर्सिटी के साथ गुजरात में चल रहा है शोध

भारत में राज्य सरकारें वायु गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में पहले से ही प्रयासरत हैं। पार्टिकुलेट मैटर (कण प्रदूषण) के लिए दुनिया का पहला एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम (ईटीएस) शिकागो यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर गुजरात में चल रहा है, जहां शिकागो यूनिवर्सिटी और गुजरात प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के साथ अन्य लोग मिलकर काम कर रहे हैं। सूरत में चल रहे इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत औद्योगिक संयंत्रों से निकलने वाले कण प्रदूषण को कम करने पर शोध चल रहा है।

ग्रीनस्टोन कहते हैं कि इतिहास उदाहरणों से भरा है कि कैसे मजबूत नीतियां प्रदूषण को कम कर सकती हैं, लोगों के जीवन को लंबा कर सकती हैं। उनके मुताबिक, भारत और दक्षिण एशिया के नेताओं के लिए अगली सफलता की कहानी बुनने का एक बहुत ही शानदार अवसर है, क्योंकि वे आर्थिक विकास और पर्यावरण गुणवत्ता के दोहरे लक्ष्यों को संतुलित करने के लिए काम करते हैं। सूरत ईटीएस की सफलता बताती है कि बाजार-आधारित लचीला दृष्टिकोण से दोनों लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है।

पर्टिकुलेट मैटर

पर्टिकुलेट मैटर या कण प्रदूषण वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण है। हवा में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि आप नग्न आंखों से भी नहीं देख सकते हैं। कुछ कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके पता लगाया जा सकता है। कण प्रदूषण में पीएम 2.5 और पीएम 10 शामिल हैं, जो बहुत खतरनाक होते हैं। पर्टिकुलेट मैटर विभिन्न आकारों के होते हैं और ये मानव और प्राकृतिक दोनों स्रोतों के कारण से हो सकते हैं। स्रोत प्राइमरी और सेकेंडरी हो सकते हैं। प्राइमरी स्रोत में ऑटोमोबाइल उत्सर्जन, धूल और खाना पकाने का धुआं शामिल हैं। प्रदूषण का सेकेंडरी स्रोत सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायनों की जटिल प्रतिक्रिया हो सकता है। ये कण हवा में मिश्रित हो जाते हैं और इसको प्रदूषित करते हैं। इनके अलावा, जंगल की आग, लकड़ी के जलने वाले स्टोव, उद्योग का धुआं, निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल वायु प्रदूषण आदि और स्रोत हैं। ये कण आपके फेफड़ों में चले जाते हैं, जिनसे खांसी और अस्थमा के दौरे पड़ सकते हैं। उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक और भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है।  

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LOCK DOWN बीच 65 लाख पेंशनधारकों के खाते में पहुंचे 764 करोड़ रुपये! फटाफट अपने बैंक से करें पता


कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनज़र जारी लॉकडाउन (Lockdown) में पेंशन योजना के तहत अप्रैल में कुल 764 करोड़ रुपये जारी किए हैं. सरकार ने बताया इस रकम को एडवांस पेंशन के तौर पर दिया गया. 65 लाख पेंशनर को इसका फायदा मिला.

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नई दिल्ली. कोरोना (Coronavirus) के इस संकट में EPFO (Employees Provident Fund-Organisation) ने फिर से एक और बड़ा कदम उठाते हुए अप्रैल की पेंशन समय से पहले जारी कर दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल में कुल 764 करोड़ रुपये जारी किए हैं. इस रकम को एडवांस पेंशन के तौर पर दिया गया. 65 लाख पेंशनर को इसका फायदा मिला है. EPFO ने सभी बैंक ब्रांचों से सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि वे पेंशनरों के खाते में समय से पेंशन डाल दें. समय से पेंशन खातों में पहुंचाना अभी ईपीएफओ की सर्वोच्‍च प्राथमिकता है. इससे इस संकट के समय में पेंशनरों को थोड़ी राहत मिलेगी.

किसे मिलती है पेंशन
आपको बता दें कि ईपीएस (Employee Pension Scheme) यानी पेंशन स्कीम में कंपनी के 8.33 फीसदी योगदान को 15,000 रुपये की मंथली सैलरी के अनुसार बनाया गया है. उदाहरण के लिए अगर किसी व्‍यक्ति की मासिक सैलरी 25,000 रुपये है तो कंपनी का योगदान 15,000 रुपये के 8.33 फीसदी तक सीमित रहेगा. इसी तरह अगर किसी को 10,000 रुपये सैलरी मिलती है तो ईपीएस में कंपनी का कॉन्ट्रिब्‍यूशन 10,000 रुपये का 8.33 फीसदी होगा.

आइए जानें  ईपीएस (Employee Pension Scheme)  से जुड़ी सभी बातें…

ईपीएफओ ने यह जानकारी दी है. संगठन कर्मचारी पेंशन स्‍कीम के तहत लाभार्थियों को पेंशन देता है. उसने कोरोना महामारी को देखते हुए एडवांस में पेंशन जारी करने का फैसला लिया.

श्रम मंत्रालय ने इस बारे में के बयान जारी किया.

>> बयान के अनुसार, ईपीएफओ के अधिकारियों और स्‍टाफ के लिए यह काम इतना आसान नहीं था. लेकिन, तमाम अड़चनों के बावजूद उन्‍होंने देशभर में पेंशन बांटने वाले सभी बैंकों की नोडल ब्रांचों में 764 करोड़ रुपये भेजे.

>> कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए देशभर में लॉकडाउन के दौरान कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सभी 135 क्षेत्रीय कार्यालयों ने पेशनभोगियों को असुविधा से बचाने के लिए अप्रैल 2020 की पेंशन समय से पहले जारी कर दी.

>> बयान में कहा गया कि ईपीएफओ ने मुश्किल हालात के बावजूद अपनी पेंशन योजना के तहत आने वाले 65 लाख पेंशनभोगियों के खातों में समय से धनराशि उपलब्ध कराई.

ईपीएस नियमों के अनुसार, किसी सदस्‍य ने नौकरी छोड़ने से पहले 10 साल से कम सेवा की है या 58 साल का हो गया है (जो भी जल्‍दी हो) तो वह ईपीएस अकाउंट से एकमुश्‍त पैसा निकालने का हकदार है.

>> अगर ऐसे व्‍यक्ति की उम्र 58 साल से कम है तो वह एकमुश्‍त पैसा निकालने के बजाय ईपीएस के तहत स्‍कीम सर्टिफिकेट का विकल्‍प ले सकता है. ऐसा स्‍कीम सर्टिफिकेट तब लिया जा सकता है जब व्‍यक्ति ने किसी और संस्‍थान में नौकरी की योजना बनाई हो.

>> अगर सेवा के वर्ष 10 साल को पार कर गए है तो स्‍कीम सर्टिफिकेट व्‍यक्ति को जारी कर दिया जाता है. ईपीएफओ साल की गिनती तब से करता है जिस दिन से आप ईपीएफ स्‍कीम से जुड़ते हैं. हालांकि, जरूरी नहीं है कि सेवा के वर्ष लगातार रहे हों.

>> मान लीजिए कि आपने साल 2010 नौकरी शुरू की और ईपीएफ स्‍कीम से जुड़े. यहां तीन साल काम करने के बाद आपने दूसरी कंपनी में नौकरी शुरू कर दी है. लेकिन ये कंपनी आपको ईपीएफ बेनिफिट ऑफर नहीं करती है क्‍योंकि वह ईपीएफ के दायरे में नहीं आती है.

>> इस ‘बी’ कंपनी में आप 4 साल काम करते हैं. साल 2017 में आप तीसरी कंपनी में नौकरी शुरू करते है.  जहां आपको ईपीएफ स्‍कीम का फायदा मिलता है. मौजूदा समय में 2020 तक ईपीएस रकम का कैलकुलेशन ए और सी में काम किए गए साल के आधार पर किया जाएगा जो छह साल बनते हैं. ऐसे में आप एकमुश्‍त निकासी कर सकते हैं.

>> 10 साल के पहले सेवा के साल जितने कम होंगे उतनी कम राशि को आप एकमुश्‍त निकाल पाएंगे.  ईपीएस स्‍कीम से एकमुश्‍त निकासी की अनुमति तभी मिलती है अगर सेवा के वर्ष 10 साल से कम हैं. आपको वापस की जाने वाली रकम ईपीएस स्‍कीम 1995 में दी गई टेबल डी पर आधारित होगी.

अगर आपकी नौकरी 9 साल 6 महीने से ज्यादा की हो चुकी है तो आप अपने PF के साथ पेंशन की रकम नहीं निकाल पाएंगे. क्योंकि, 9 साल 6 महीने की सर्विस को 10 साल के बराबर माना जाता है.

>> EPFO के नियम बताते हैं कि अगर आपकी नौकरी 10 साल की हो जाती है तो आप पेंशन के लिए हकदार बन जाते हैं. इसके बाद आपको 58 साल की उम्र में मासिक पेंशन का लाभ मिलना शुरू होगा. मतलब यह कि आपको आजीवन पेंशन तो मिलेगी, लेकिन पेंशन का हिस्सा रिटायरमेंट से पहले नहीं निकाल पाएंगे.

>> 10 साल पूरे होने पर व्‍यक्ति को पेंशन सर्टिफिकेट मिल जाता है. इस सर्टिफिकेट में पेंशन योग्‍य सेवा, सैलरी और नौकरी छोड़ने पर देय पेंशन की रकम की जानकारी होती है. अगर किसी व्‍यक्ति के पास 10 साल या इससे अधिक की सेवा का स्‍कीम सर्टिफिकेट है तो वह ईपीएस के तहत 58 साल की उम्र से मासिक पेंशन का हकदार बन जाता है. हालांकि, उसे 50 साल की उम्र से पहले पेंशन के लिए आवेदन करने का भी हक होता है.

रामायण बंद करवाने मांग की थी, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी, ऐसे फसा विरोधी, समझें प्रशांत भूषण ने


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Prashant-Bhushan-Ramayana

Ramayan DD Prasharan

Delhi: भगवान राम के नाम से कई तरह के दानव भयभीत हो जाते है, परन्तु कांग्रेस, वामपंथी और कुछ अन्न लोग भी आजकल रामायण से परेशान है और जब से लोग रामायण सीरियल को टीवी पर उसी उत्साह से देख रहे है जैसे 1990 के ज़माने में देखा करते थे, तब से रामायण विरोधी तत्व भारी दिक्कत में आ गए है।

इसी सिलसिले में वकील प्रशांत भूषण टीवी पर रामायण सीरियल के खलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया, प्रशांत भूषण ने रामायण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई और रामायण को बंद करवाने की मांग की। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से प्रशांत भूषण को झटका मिला है, इसकी घटिया याचिका को कोर्ट ने ख़ारिज कर प्रशांत भूषण को ही फटकार दिया है।

प्रशांत भूषण की याचिका पर कोर्ट ने कहा है की टीवी पर कोई भी किसी भी कार्यक्रम को देखने के लिए स्वतंत्र है, चैनल अपने मन मुताबिक कार्यक्रम टेलीकास्ट करने के लिए स्वतंत्र है। इस से पहले लॉक डाउन के शुरुवात में दूरदर्शन ने रामायण को फिर से टेलीकास्ट करने का निर्णय लिया था और ये टेलीकास्ट इतना हिट रहा की अब रामायण ने वर्ल्ड रिकॉर्ड ही बना दिया, 16 अप्रैल को रामायण को 7 करोड़ 70 लाख लोग एक साथ देख रहे थे और ये नया वर्ल्ड रिकॉर्ड है।

Rebroadcast of Ramayana on Doordarshan smashes viewership records worldwide, the show becomes most watched entertainment show in the world with 7.7 crore viewers on 16th of April.

अब वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ गुजरात के राजकोट में दर्ज की गई एक FIR के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भूषण को किसी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई से राहत दी है। प्रशांत भूषण के खिलाफ यह एफआईआर कथित रूप से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दर्ज की गई है।

यह एफआईआर पूर्व सैन्य अधिकारी जयदेव रजनीकांत जोशी ने दर्ज कराई थी। जोशी ने आरोप लगाया है कि प्रशांत भूषण ने पूरे देश में कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत के दोबारा प्रसारण के खिलाफ ट्वीट कर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

जोशी ने अपनी इस शिकायत में प्रशांत भूषण पर आरोप लगाा कि उन्होंने 28 मार्च को एक ट्वीट में रामायण और महाभारत के लिए अफीम शब्द का इस्तेमाल करके हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। कोर्ट ने प्रशांत भूषण को किसी प्रकार की कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान करते हुए कहा, ‘कोई भी व्यक्ति टीवी पर कुछ भी देख सकता है।’ इसके साथ ही पीठ ने सवाल कि

आपको बता दे की दूरदर्शन पर दिखाए जा रहे रामायण सीरियल ने इतिहास रच दिया है। रामायण के 16 अप्रैल के एपिसोड को दुनियाभर में 7.7 करोड़ लोगों ने देखा। इस तरह वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम करते हुए Ramayan दुनिया में एक दिन में सबसे ज्यादा देखा जाने वाले मनोजन प्रोग्राम बन गया है। प्रसार भारती ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

जानकारी हो की कोरोना वायरस महामारी से कारण लॉकडाउन लगने के बाद मांग उठी थी कि रामायण और महाभारत का पुनः प्रसारण किया जाए। इसके बाद से करोड़ों लोग रामायण सीरियल देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस सीरियल और इससे जुड़े पात्रों की लगातार चर्चा है।

लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों और छात्रों को लाने के लिए चलाई ट्रेन, राज्यों से किराया वसूलेगी रेलवे, देखे वीडियों


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रेलवे (Railway) ने कहा कि ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेन के किराए में नियमित स्लीपर क्लास के टिकटों की कीमत के अलावा 30 रुपये सुपरफास्ट चार्ज और खाने व पानी के लिए 20 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा.

नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) को रोकने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की घर वापसी के लिए सरकार ने बड़ा फैसला किया है. गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने रेलवे को प्रवासी मजदूरों और छात्रों को लाने के लिए स्पेशल ट्रेन (Train) चलाने की मंजूरी दे दी है. इसके बाद रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों के टिकटों का किराया वसूलने का फैसला किया है. रेलवे एक अधिकारी ने कहा कि लॉकडाउन में फंसे प्रवासी कामगारों को लाने के लिए वह राज्यों से किराया वसूला जाएगा.

रेलवे ने कहा कि ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेन के किराए में नियमित स्लीपर क्लास के टिकटों की कीमत के अलावा 30 रुपये सुपरफास्ट चार्ज और खाने व पानी के लिए 20 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा. इसमें लंबी दूरी की ट्रेनों में भोजन और पीने का पानी शामिल होगा.

विशेष ट्रेन चलाने की अनमित

बता दें कि लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए लाखों प्रवासी मजदूरों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों को बुधवार को कुछ शर्तों के साथ उनके गंतव्यों तक जाने की अनुमति दी है. आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि प्रवासी मजदूरों, तीर्थयात्रियों, छात्रों और विभिन्न स्थानों पर फंसे अन्य लोगों के आवागमन को रेल मंत्रालय द्वारा चलाई जाने वाली विशेष ट्रेनों के माध्यम से अनुमति है. उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय आवागमन को लेकर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नामित करेगा.

तेलंगाना से झारखंड के लिए चली पहली ट्रेन
प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए तेलंगाना में लिंगमपल्ली (Lingampalli (Hyderabad) से झारखंड के हटिया तक (Hatia (Jharkhand) 1200 प्रवासियों को ले जाने वाली पहली ट्रेन शुक्रवार सुबह 4:50 बजे चली. 24 कोच की ट्रेन आज रात 11 बजे झारखंड के हटिया पहुंचेगी. दिशानिर्देशों के अनुसार क्वारंटीन आदि सहित सभी उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा. लिंगमपल्ली (हैदराबाद) से हटिया (झारखंड) तक जो विशेष ट्रेन चलाई गई वो तेलंगाना सरकार के अनुरोध पर और रेल मंत्रालय के निर्देशानुसार चलाई गई है.

covid 19 – रघुराम राजन ने Rahul Gandhi से कहा, गरीबों की मदद के लिए 65 हजार करोड़ की जरुरत


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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते पूरी की दुनिया की अर्थव्यवस्था चौपट होने लगी है। भारत की इकोनॉमी भी बेपटरी हो रही है। इसी बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर गुरुवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से चर्चा की। इस दौरान जाने माने अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियों को जल्द खोले जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण से निपटने के साथ ही लोगों के रोजगार की सुरक्षा भी करनी होगी। राहुल गांधी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पू्र्व गवर्नर से संवाद स्थापित किया था।

राहुल, राजन के बीच हुई ये चर्चा

राहुल गांधी के साथ हुई चर्चा के दौरान रघुराम राजन ने यह भी कहा कि लॉकडाउन ने देश के निम्न तबके की हालत खराब कर दी है। देश के गरीबों, मजदूरों और किसानों को वित्तीय मदद करनी होगी जिसमें 65 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था 200 लाख करोड़ से ज्यादा की है ऐसे में हम 65 हजार करोड़ का भार उठा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मुश्किल समय में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में ही भलाई है। हम एक दूसरे से अलग रहकर इस मुश्किल स्थिति का सामना नहीं कर सकते हैं।

कोरोना की ज्यादा जांचें हों

चर्चा के दौरान कोरोना मरीजों की पहचान के लिए की जा रही जांचों की संख्या को कम बताते हुए रघुराम राजन ने कहा कि अमेरिका में जहां रोजाना लाखों लोगों की कोरोना जांच हो रही है वहीं भारत में यह आंकड़ा 20 से 30 हजार से बीच सीमित है। जितनी ज्यादा जांचें होंगी उतना जल्द ही देश कोरोना संक्रमण से मुक्त होने की ओर कदम आगे बढ़ाएगा। हमें बड़े पैमाने पर जांच करना होगी।

हमारी एक हो प्राथमिकता

राहुल गांधी से संवाद के दौरान रघुराम राजन ने कहा कि हमारे देश की क्षमताएं सीमित हैं। ऐसे में हमारी एक प्राथमिकता होना चाहिए। हमें यह तय करने की जरूरत है कि हम अर्थव्यवस्था को एक साथ कैसे रखें कि जब लॉकडाउन से बाहर निकलें तो हम वापस अपने आप चलने में सक्षम हों और उस वक्त हम कमजोर नहीं पड़े।

Amarnath Yatra : नहीं होगी रद्द, राज्य सरकार ने पहले जारी किया प्रेस रिलीज वापस लिया


नई दिल्ली: 

जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार ने उस प्रेस रिलीज को वापस ले लिया है, जिसमें कहा गया था कि कोरोना वायरस की महामारी के कारण इस साल की अमरनाथ यात्रा को रद्द कर दिया गया है. इस प्रेस रिलीज ने देश को ‘हैरानी’ की स्थिति में ला दिया था. गौरतलब है कि इससे पहले पिछले साल, अमरनाथ यात्रियों की  जम्‍मू-कश्‍मीर में पवित्र गुफा तक की यात्रा की अवधि में कटौती की गई थी क्‍योंकि सरकार को इनपुट मिले थे कि अनुच्‍छेद 370 को हटाने के फैसले के खिलाफ आतंकी कोई बड़ी वारदात करने की योजना बना रहे हैं. बता दें कि शुरुआत में ऐसी खबरें आईं थी कि देश में जारी कोरोना संकट (Coronavirus) की वजह से इस साल होने वाली अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) को रद्द कर दिया गया है. इस साल अमरनाथ यात्रा 23 जून से तीन अगस्त तक होनी थी.

बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय (Home Ministry) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस संक्रमितों की संख्या 20,471 हो गई है. पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,486 नए मामले सामने आए हैं और 49 लोगों की मौत हुई है. वहीं, देश में कोरोना से अब तक 652 लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि राहत की बात यह है कि 3960 मरीज इस बीमारी को हराने में कामयाब भी हुए हैं.

देश में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है. हालांकि 20 अप्रैल से लॉकडाउन के दौरान उन इलाकों में कुछ छूट भी दी गई है, जहां कोरोना के मामले कम हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा की थी. बता दें कि पहले चरण का लॉकडाउन 14 अप्रैल को खत्म हो रहा था.

केन्‍द्र:स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ हुई हिंसा पर केंद्र सरकार लाई अध्यादेश, 6 महीने से 7 साल तक की सजा का प्रावधान


स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाया है. अगर इस मामले में किसी को दोषी पाया गया तो 6 महीने से लेकर 7 साल तक की कैद की सजा हो सकती है.

नई दिल्ली: स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाया है. अगर इस मामले में किसी को दोषी पाया गया तो 6 महीने से लेकर 7 साल तक की कैद की सजा हो सकती है.

भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या पहुंची 19 हजार के करीब, 24 घंटे में 44 की मौत-1329 नए मामले आए सामने


Coronavirus India Cases:

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भारत में कोरोनावायरस से संक्रमितों की संख्या 18985 हो गई है. पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1329 नए मामले सामने आए हैं और 44 लोगों की मौत हुई है.

नई दिल्ली: 

भारत में कोरोनावायरस (Coronavirus) का कहर तेजी से बढ़ता जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस से संक्रमितों की संख्या 18985 हो गई है. पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1329 नए मामले सामने आए हैं और 44 लोगों की मौत हुई है. देश में कोरोना से अब तक 603 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि 3260 मरीज इस बीमारी को हराने में कामयाब भी हुए हैं. बता दें कि देश में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है. हालांकि 20 अप्रैल से लॉकडाउन के दौरान उन इलाकों में कुछ छूट दी गई है, जहां कोरोना के मामले कम हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा की थी. बता दें कि पहले चरण का लॉकडाउन 14 अप्रैल को खत्म हो रहा था.

राष्ट्रपति भवन पहुंची कोरोना की आंच
कोरोना का कहर राष्ट्रपति भवन परिसर तक पहुंच गया है. सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन का एक सफाई कर्मचारी कोरोना संक्रमित (Corona Positive) पाया गया है. सफाई कर्मचारी के पॉजिटिव आने पर करीब 100 लोगों को क्वारंटाइन किया गया. इसमें कर्मचारी से लेकर सेक्रेटरी स्तर तक के कर्मचारी और उनके शामिल हैं. कर्मचारियों को बाहर जबकि अधिकारियों को होम क्वारंटाइन किया गया है. यह मामला 4 दिन पहले का है. फिलहाल सफाई कर्मचारी के अलावा सभी रिपोर्ट निगेटिव है. 

राहुल गांधी का हमला
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एनडीटीवी की खबर को शेयर करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. कोरोना संकट के बीच सरकार के एक फैसले से विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उसने गोदामों में मौजूद अतिरिक्त चावल का उपयोग हैंड सैनिटाइजरों की आपूर्ति के लिए जरूरी इथेनॉल बनाने में करने का फैसला किया है. इस पर राहुल गांधी सरकार पर हमला करते हुए कहा ट्वीट किया और लिखा, ”आख़िर हिंदुस्तान का ग़रीब कब जागेगा? आप भूखे मर रहे हैं और वो आपके हिस्से के चावल से सैनीटाईज़र बनाकर अमीरों के हाथ की सफ़ाई में लगे हैं.”

https://www.covid19india.org/

फर्ज़ी पत्रकारों के खिलाफ पूरे देश में होगी एफआईआर..


सूचना प्रसारण मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा फर्जी पत्रकारों एवं चैनल पर शिकंजा कसा जाएगा

Multapi Samachar

नई दिल्ली : मुलतापी समाचार । भारत में सूचना प्रसारण मंत्रालय जाली पत्रकारों एवं फर्ज़ी चैनलों पर शिकंजा कसने को तैयार है जो लोग बगैर आर.एन.आई के अखबार या चैनल चला रहे हैं उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। सूचना एवं प्रसारणमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि देश भर में जितने भी लोग प्रेस

आई○डी○कार्ड लेकर घुम रहे हैं या फर्ज़ी चैनल चला रहे हैं ऐसे लोगों की तत्काल जांच शुरू होगी

इस मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया जाएग।

आगे मंत्री जी ने कहा कि कुछ दोषी लोगों के कारण अच्छे, सच्चे एवं ईमानदार पत्रकारों के छवि खराब हो रही है, एवं उनके कार्य करने में बाधा उत्पन्न हो रही है

आगे जानकारी देते हुए मंत्री जी ने कहा कि पूरे देश में कुछ पैसा लेकर जाली प्रेस आई○डी○ बांटने एवं जाली पत्रकार नियुक्ति करने तथा प्रेस के नाम पर ब्लैकमेलिंग करने का धंधा चल रहा है।

जिसपर अंकुश लगाना अति आवश्यक है। इस संबंध में सभी राज्यों के प्रेस सूचना मंत्रालय को निर्देश जारी कर दिया गया है

आगे मंत्री जी ने बताया कि जो अखबार/पत्रिका भारत सरकार के आर○एन○आई○ द्वारा रजिस्टर्ड हो या जो टीवी/रेडियो सूचना प्रसारण मंत्रालय से रजिस्टर्ड हो उसी के द्वारा पत्रकार/संवाददाता की नियुक्ति हो सकती है व केवल उसका सम्पादक ही प्रेस कार्ड जारी कर सकता है

जब न्यूज पोर्टल के बारे में पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन्टरनेट पर चल रहे न्यूज पोर्टल के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान सूचना प्रसारण मंत्रालय में नहीं है एवं कोई भी न्यूज पोर्टल एवं केबल (डिस ) टीवी पर चल रहे समाचार चैनल किसी भी तरह के पत्रकार की नियुक्ति नहीं कर सकता है। और न ही प्रेस आई○डी○ जारी कर सकता है।

यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह अवैध है एवं उसके विरुद्ध कार्रवाई होनी सुनिश्चित है

_”अगर कोई बगैर RNI के पोर्टल या अखबार चलाते मिला तो उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी और ऐसे व्यक्ति को हरगिज़ माफ नहीं किया जायेगा।”

सूचना एवं प्रसारणमंत्री भारत सरकार_

3 मई के बाद काफी कुछ बदल जाएगा, नए कानून बनेंगे, लाइफ पहले जैसी नहीं रहेगी


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने lockdown की तारीख बढ़ाकर 3 मई कर दी है! लेकिन 3 मई के बाद भी life पहले जैसी नहीं रहेगी! भारत के नागरिकों में कुछ नई आदतें डालने के लिए कुछ नए कानून बनाने पड़ेंगे!

भारत के नागरिकों की लाइफ स्टाइल बदल जाएगी! क्योंकि वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए 2022 तक सोशल distancing का पालन करना होगा! इसके लिए संसद को एक नया कानून बनाना पड़ेगा! ऑफिस में, माल में, मंदिर में, और पब्लिक प्लेस पर डिस्टेंस मेंटेन करने के लिए धारा 144 से काम नहीं चलेगा, काफी कुछ बदलना पड़ेगा!

नई स्टडी में शोधकर्ताओं ने बताया है कि आने वाले सालों में कोरोना वायरस फिर से तबाही मचा सकता है! सिर्फ एक बार lockdown करने से महामारी पर नियंत्रण पाना मुश्किल है! रोकथाम के उपायों के बिना कोरोना वायरस की दूसरी लहर ज्यादा भयावह हो सकती है!

हावर्ड यूनिवर्सिटी में महामारी विशेषज्ञ और स्टडी के लेखक मार्क लिपचिस के अनुसार वैक्सीन या इलाज ना खोजें जा पाने की स्थिति में 2025 में कोरोना वायरस फिर से पूरी दुनिया को अपनी जद में ले सकता है! जब तक कि दुनिया की ज्यादातर आबादी में वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो जाती है, तब तक बड़ी आबादी के इसकी चपेट में आने की संभावना बनी रहेगी! इसका मतलब हुआ लोगों के खान-पान का तरीका बदलना होगा! इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ सस्ते करने होंगे, उत्पादन बढ़ाना होगा! इम्यूनिटी को कमजोर करने वाले खाद्य पदार्थों को प्रतिबंधित करना होगा! इसके लिए भी नया कानून बनाना पड़ेगा!

यदि इन वैज्ञानिकों की बात सही साबित हुई तो परिवहन के सभी साधन बदल जाएंगे! ऑटो रिक्शा से लेकर फ्लाइट तक यात्रियों के बैठने का इंतजाम सोशल डिस्टेंस को ध्यान में रखकर करना होगा!

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