Category Archives: धर्म

छत्रपति शिवाजी युवा संगठन जि बैतूल मुलताई के सदस्यों ने सांसद डी डी उइके जी को सौंपा ज्ञापन


मूलताई। (मुलतापी सामाचार)

छत्रपति शिवाजी युवा संगठन जि बैतूल मुलताई के सदस्यों ने आज बैतूल में मा.सांसद डी.डी.उईके जी, नरेश फाटे जी, भैय्या बबला शुक्ला जी, भैय्या कमलेश लोखंडे जी, भैय्या भवानी गांवडे जी, भैय्या कृष्णा गायकी जीभैय्या गोवर्धन राणे जी, राजेश हिंगवे जी से सप्रेम भेंट की व सांसद महोदय जी को छत्रपति शिवाजी महाराज जी का छायाचित्र भेंट किया. .

जिस दौरन संगठन की बैठकों के लिये सभाकक्ष व मुलताई में कई वर्षो सें लम्बवत् छत्रपति शिवाजी महाराज जी की मूर्ती स्थापित करने के लिये ज्ञापन दिया।।

NEWS EDITOR

RAHUL SARODE

भगवान राम ने क्यों दिया था अपने सबसे प्रिय भाई लक्ष्मण को मृत्युदंड, जानिए कारण


मूलतापी समाचार

राम और सीता की मृत्यु के बारे में तो जानते हैं हम, लेकिन क्या हम यह जानते हैं कि लक्ष्मण की मृत्यु कैसे हुई? लक्ष्मण, जो राम के अतिप्रिय थे, उनकी मृत्यु की उत्तरदायित्व राम का है, क्या हम ये जानते हैं? आज की कहानी में हम बताते हैं कि क्यों राम, लक्ष्मण की मृत्यु के लिए उत्तरदायी हैं?

रामायण की कथा के अनुसार श्रीराम को न चाहते हुए भी अपने प्रिय अनुज लक्ष्मण को मृत्युदंड देना पड़ता है। लंका विजय के बाद जब श्री राम अयोध्या लौट आते हैं और अयोध्या के राजा बन जाते हैं। लक्ष्मण के माध्यम से सीता को वन में भेज दिया जाता है और अयोध्या का राज-काज सहज गति से चलने लगता है। एक दिन यम देवता कोई महत्वपूर्ण चर्चा करने श्री राम के पास आते है। चर्चा प्रारम्भ करने से पूर्व वे भगवान राम से कहते हैं कि – ‘आप जो भी प्रतिज्ञा करते हो उसे पूर्ण करते हो। मैं भी आपसे एक वचन मांगता हूं कि जब तक मेरे और आपके बीच वार्तालाप चले तो हमारे बीच कोई नहीं आए और जो आए, उसको आपको मृत्युदंड देना पड़ेगा।’ भगवान राम, यम को वचन दे देते हैं। राम, लक्ष्मण को यह कहते हुए द्वारपाल नियुक्त कर देते हैं कि जब तक उनकी और यम की बात हो रही है वो किसी को भी अंदर न आने दें, अन्यथा उसे उन्हें मृत्युदंड देना पड़ेगा।

लक्ष्मण भाई की आज्ञा मानकर द्वारपाल बनकर खड़े हो जाते हैं। लक्ष्मण को द्वारपाल बने अभी कुछ ही समय बीतता है कि वहां पर ऋषि दुर्वासा का आगमन होता है। जब दुर्वासा लक्ष्मण को अपने आगमन के बारे में राम को सूचना देने के लिए कहते हैं तो लक्ष्मण विनम्रता से इंकार कर देते हैं। इस पर दुर्वासा क्रोधित हो जाते हैं और लक्ष्मण को चेतावनी देते हैं कि यदि तुमने राम को मेरे आगमन की सूचना नहीं दी तो मैं पूरी अयोध्या को श्राप दे दूंगा। लक्ष्मण समझ जाते हैं कि यह एक विकट स्थिति है जिसमें या तो उन्हें रामाज्ञा का उल्लंघन करना होगा या फिर पूरे नगर को ऋषि के श्राप की अग्नि में झोंकना होगा।

लक्ष्मण ने शीघ्र ही यह निर्णय कर लिया कि उनको स्वयं का बलिदान देना होगा ताकि वे नगर वासियों को ऋषि के श्राप से बचा सकें। उन्होंने भीतर जाकर ऋषि दुर्वासा के आगमन की सूचना दी। राम भगवान ने शीघ्रता से यम के साथ अपनी बातचीत समपन्न कर ऋषि दुर्वासा की आवभगत की। परन्तु अब श्री राम दुविधा में पड़ गए क्योंकि उन्हें अपने वचन के अनुसार लक्ष्मण को मृत्यु दंड देना था। वे समझ नहीं पा रहे थे कि वे अपने प्रिय भाई को मृत्युदंड कैसे दें, लेकिन उन्होंने यम को वचन दिया था जिसे उन्हें निभाना ही था। इस दुविधा की स्थिति में श्री राम ने अपने गुरु का स्मरण किया और उनसे कोई रास्ता सुझाने की प्रार्थना की। गुरुदेव ने राम को कहा कि अपने किसी प्रिय का त्याग, उसकी मृत्यु के समान ही है। अतः तुम अपने वचन का पालन करने के लिए लक्ष्मण का त्याग कर दो। जैसे ही लक्ष्मण ने यह सुना उन्होंने राम से कहा कि ‘आप भूल कर भी मेरा त्याग नहीं कर सकते हैं, आप से दूर रहने से तो यह अच्छा है कि मैं आपके वचन का पालन करते हुए स्वयं मृत्यु का वरण कर लूं।’ ऐसा कहकर लक्ष्मण जल समाधि ले लेते हैं।

रामायण बंद करवाने मांग की थी, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी, ऐसे फसा विरोधी, समझें प्रशांत भूषण ने


Multapi Samachar

Prashant-Bhushan-Ramayana

Ramayan DD Prasharan

Delhi: भगवान राम के नाम से कई तरह के दानव भयभीत हो जाते है, परन्तु कांग्रेस, वामपंथी और कुछ अन्न लोग भी आजकल रामायण से परेशान है और जब से लोग रामायण सीरियल को टीवी पर उसी उत्साह से देख रहे है जैसे 1990 के ज़माने में देखा करते थे, तब से रामायण विरोधी तत्व भारी दिक्कत में आ गए है।

इसी सिलसिले में वकील प्रशांत भूषण टीवी पर रामायण सीरियल के खलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया, प्रशांत भूषण ने रामायण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई और रामायण को बंद करवाने की मांग की। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से प्रशांत भूषण को झटका मिला है, इसकी घटिया याचिका को कोर्ट ने ख़ारिज कर प्रशांत भूषण को ही फटकार दिया है।

प्रशांत भूषण की याचिका पर कोर्ट ने कहा है की टीवी पर कोई भी किसी भी कार्यक्रम को देखने के लिए स्वतंत्र है, चैनल अपने मन मुताबिक कार्यक्रम टेलीकास्ट करने के लिए स्वतंत्र है। इस से पहले लॉक डाउन के शुरुवात में दूरदर्शन ने रामायण को फिर से टेलीकास्ट करने का निर्णय लिया था और ये टेलीकास्ट इतना हिट रहा की अब रामायण ने वर्ल्ड रिकॉर्ड ही बना दिया, 16 अप्रैल को रामायण को 7 करोड़ 70 लाख लोग एक साथ देख रहे थे और ये नया वर्ल्ड रिकॉर्ड है।

Rebroadcast of Ramayana on Doordarshan smashes viewership records worldwide, the show becomes most watched entertainment show in the world with 7.7 crore viewers on 16th of April.

अब वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ गुजरात के राजकोट में दर्ज की गई एक FIR के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भूषण को किसी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई से राहत दी है। प्रशांत भूषण के खिलाफ यह एफआईआर कथित रूप से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दर्ज की गई है।

यह एफआईआर पूर्व सैन्य अधिकारी जयदेव रजनीकांत जोशी ने दर्ज कराई थी। जोशी ने आरोप लगाया है कि प्रशांत भूषण ने पूरे देश में कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत के दोबारा प्रसारण के खिलाफ ट्वीट कर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

जोशी ने अपनी इस शिकायत में प्रशांत भूषण पर आरोप लगाा कि उन्होंने 28 मार्च को एक ट्वीट में रामायण और महाभारत के लिए अफीम शब्द का इस्तेमाल करके हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। कोर्ट ने प्रशांत भूषण को किसी प्रकार की कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान करते हुए कहा, ‘कोई भी व्यक्ति टीवी पर कुछ भी देख सकता है।’ इसके साथ ही पीठ ने सवाल कि

आपको बता दे की दूरदर्शन पर दिखाए जा रहे रामायण सीरियल ने इतिहास रच दिया है। रामायण के 16 अप्रैल के एपिसोड को दुनियाभर में 7.7 करोड़ लोगों ने देखा। इस तरह वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम करते हुए Ramayan दुनिया में एक दिन में सबसे ज्यादा देखा जाने वाले मनोजन प्रोग्राम बन गया है। प्रसार भारती ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

जानकारी हो की कोरोना वायरस महामारी से कारण लॉकडाउन लगने के बाद मांग उठी थी कि रामायण और महाभारत का पुनः प्रसारण किया जाए। इसके बाद से करोड़ों लोग रामायण सीरियल देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस सीरियल और इससे जुड़े पात्रों की लगातार चर्चा है।

mh: ठाणे में मुसलमान के हाथों से सामान नहीं लेने पर व्यक्ति को किया गया गिरफ्तार बेल भी मिल


Multapi Samachar

महाराष्ट्र (Maharashtra) के एक इलाके में मुसलमान के हाथों से सामान न लेने पर मंगलवार को गजानन चतुर्वेदी (51) के खिलाफ भादंसं की धारा 295 ए तहत मामला दर्ज किया गया.

ठाणे. महाराष्ट्र (Maharashtra) में ठाणे जिले के कशीमिरा इलाके में सामान पहुंचाने गये एक मुस्लिम व्यक्ति के हाथों से सामान न लेने पर एक स्थानीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस अधिकारी के अनुसार मंगलवार को गजानन चतुर्वेदी (51) के खिलाफ भादंसं की धारा 295 ए (धार्मिक भावना को आहत करने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण हरकत करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

कोरोना वायरस संकट के बीच किराना का सामान मुस्लिम डिलीवरी ब्वॉय (बॉय) से लेने से इनकार करने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। महाराष्ट्र में ठाणे जिले के कशीमिरा इलाके में सामान पहुंचाने गए मुस्लिम डिलीवरी ब्वॉय के हाथों से कथित रूप से उसे (सामान) नहीं लेने पर 51 साल के गजानंद चतुर्वेदी नामक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि इस शख्स ने किराने का सामान ऑनलाइन ऑर्डर किया था। 

वरिष्ठ निरीक्षक संजय हजारे ने बताया कि सामान पहुंचाने वाले ने शिकायत दर्ज करायी है कि मंगलवार सुबह को जब वह कुछ सामान पहुंचाने चतुर्वेदी के घर पहुंचा तब उन्होंने उससे नाम पूछा. जब उसने अपना नाम बताया तो चतुवेर्दी ने कहा कि वह मुसलमान के हाथों कोई सामान नहीं लेंगे. पुलिस अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है.

गिरफ्तारी हुई और बेल भी मिल गया

वरिष्ठ निरीक्षक संजय हजारे ने बताया कि सामान पहुंचाने वाले ने शिकायत दर्ज कराई है कि मंगलवार सुबह को जब वह कुछ सामान पहुंचाने चतुर्वेदी के घर पहुंचा तब उन्होंने उससे नाम पूछा। जब उसने अपना नाम बताया तो चतुवेर्दी ने कहा कि वह मुसलमान के हाथों कोई सामान नहीं लेंगे। बुधवार को उन्हें घर से गिरफ्तार किया गया है और ठाणे के सेशन कोर्ट में पेश किया गया, जिसे बाद में 15 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई। 

मास्क और ग्लव्स पहना था डिलीवरी बॉय

32 साल के डिलीवरी बॉय उस्मान बरकत पटेल मंगलवार सुबह करीब 9.40 बजे मीरा रोड स्थित सृष्टि कॉप्लेक्स सामान की डिलीवरी करने गए थे। इस दौरान उन्होंने मास्क और ग्लव्स भी पहन रखा था। जैसे ही चतुर्वेदी और उनकी पत्नी ने नाम जानने के बाद सामान लेने से इनकार कर दिया, उस्मान ने मोबाइल निकाला और घटना को रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया।  

डिलीवरी बॉय ने समझाया

चतुर्वेदी ने डिलीवरी बॉय उस्मान से कहा कि वह किसी भी मुस्लिम शख्स से ऑर्डर नहीं लेना चाहते। इसके बाद डिलीवरी बॉय ने कहा कि मैंने आपके फ्लैट तक सामान पहुंचाने के लिए अपनी जान को जोखिम में डाला और ऐसे संकट के वक्त में आपको लोगों के बारे में सोचना चाहिए तो आप धर्म के बारे में सोच रहे हैं? यह सच में हैरान और दुखी करने वाला है। 

Amarnath Yatra : नहीं होगी रद्द, राज्य सरकार ने पहले जारी किया प्रेस रिलीज वापस लिया


नई दिल्ली: 

जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार ने उस प्रेस रिलीज को वापस ले लिया है, जिसमें कहा गया था कि कोरोना वायरस की महामारी के कारण इस साल की अमरनाथ यात्रा को रद्द कर दिया गया है. इस प्रेस रिलीज ने देश को ‘हैरानी’ की स्थिति में ला दिया था. गौरतलब है कि इससे पहले पिछले साल, अमरनाथ यात्रियों की  जम्‍मू-कश्‍मीर में पवित्र गुफा तक की यात्रा की अवधि में कटौती की गई थी क्‍योंकि सरकार को इनपुट मिले थे कि अनुच्‍छेद 370 को हटाने के फैसले के खिलाफ आतंकी कोई बड़ी वारदात करने की योजना बना रहे हैं. बता दें कि शुरुआत में ऐसी खबरें आईं थी कि देश में जारी कोरोना संकट (Coronavirus) की वजह से इस साल होने वाली अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) को रद्द कर दिया गया है. इस साल अमरनाथ यात्रा 23 जून से तीन अगस्त तक होनी थी.

बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय (Home Ministry) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस संक्रमितों की संख्या 20,471 हो गई है. पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,486 नए मामले सामने आए हैं और 49 लोगों की मौत हुई है. वहीं, देश में कोरोना से अब तक 652 लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि राहत की बात यह है कि 3960 मरीज इस बीमारी को हराने में कामयाब भी हुए हैं.

देश में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है. हालांकि 20 अप्रैल से लॉकडाउन के दौरान उन इलाकों में कुछ छूट भी दी गई है, जहां कोरोना के मामले कम हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा की थी. बता दें कि पहले चरण का लॉकडाउन 14 अप्रैल को खत्म हो रहा था.

मुलताई के नरखेड़ में शिव, हनुमान मंदिर के ताले पर रखे पांच पांच सौ के नोट,पुलिस ने किये जब्त


मुलतापीसमाचार

नरखेड़ के  हनुमान मंदिर एवं शिव मंदिर के गेट पर लगे ताले के ऊपर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा पांच-पांच सौ रुपए के नोटों को रखा हुआ

मुलताई। मुलताई थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत नरखेड़ के  हनुमान मंदिर एवं शिव मंदिर के गेट पर लगे ताले के ऊपर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा पांच-पांच सौ रुपए के नोटों को रख दिया। सुबह जब मन्दिर से जुड़े लोग मन्दिर पहुचे तो ताले पर रखे नोट देखे। जिसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुचकर पांच सौ के दो नोटो को जब्त किया है। ऐसे समय में जब देश कोरोना वायरस की महामारी को झेल रहा और जगह-जगह थूक लगे नोटो के मिलने का सिलसिला जारी है।ऐसे में नरखेड़ में मन्दिरो के तालो पर नोट रखने की घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फेली हुई है। लोगो का कहना है कि पूरे मामले की जांच होना चाइये और जिनके द्वारा यह घटना को अंजाम दिया गया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होना चाइये।

जप – तप और यज्ञ से महामारी के प्रकोप से बचता रहा ताप्ती – नर्मदाचंल अवैध रेत कारोबार एवं नदियों की उपेक्षा के चलते कोरोना ने अपने पांव पसारे


Multapi Samachar


इस समय पवित्र पुण्य सलिलाओ एवं आस्था विश्वास के चर्तुभूज खम्बो पर धर्म संस्कृति की प्रताका फहराता भारत उप महाद्धीप का गांव – शहर विदेशी सर जमीन (चीन) से आई कोरोना नामक महामारी के दंश से चिकित्सालय में पड़ा दम तोडऩे लगा है. बड़ी संख्या में अपने – अपने घरों में कैद टोटल लॉक डाउन में जकड़ा भारत का यह हाल कैसे हुआ यह जानना जरूरी है. नदियों के रूप और स्वरूप में तेजी से आए परिवर्तन एवं लोगो का धर्म कर्म काण्ड से विमुख हो जाने से पर्यावरण प्रदुषित हुआ और महामारी ने पांव पसार लिए. मध्यप्रदेश के सीमावर्ती बैतूल जिले एवं होशंगाबाद जिले की सीमा आपस में एक दुसरे से काफी किलोमीटर तक जुड़ी हुई है. जिले की सीमाओं को पश्चिम मुख्यी दो पुण्य सलिला नर्मदा एवं ताप्ती का निर्मल जल मिलता चला आ रहा है. इस समय यदि आकड़ो की बाते करे तो पता चलता है कि इन दोनो जिले में नर्मदा एवं ताप्ती के तेज एवं वेग के चलते महामारी ने अपनी आगोश में उतनी संख्या में लोगो को नहीं निगला जितनी संख्या में अन्य जिलो एवं प्रदेशो की आबादी को वह निगल चुका थी. बैतूल जिले में आकड़ो पर नज़र दौड़ाए तो पता चलता है कि जिले में पहली बार 1864 – 65 में हैजा फैला था. 1877, 1889, 1892,1895,1897, 1900 तक लगातार छै वर्षो तक यह महामारी फैली रही. एक हजार से अधिक मौते हैजा के कारण हुई. हालांकि 1901 से 1905 तक पूरा जिला हैजा मुक्त रहा. 1900 में हुई प्रति हजार पर 12 मौतो का आकड़ा चौकान्ने वाला था क्योकि इस दौर में मौते 3 हजार 608 हुई थी. 1906 में एक बार फिर हैजा फैला जिसमें 166 मौते हुई. वर्ष 1912 में 919 एवं 1916 में 431 मौते हुई. 1929 में सबसे अधिक 2,609 मौते हुई. 1938 में 4767 1945 में 1,081 तथा आजादी के बाद 1953 में 1,212 मौते हुई. पानी के संक्रमण के कारण सर्वाधिक मौतो पर पोटाश परमेग्रेट डाल कर जिले के गांवो एवं शहरो का जलशुद्धि करण कर इस बीमारी पर नियंत्रण पाया गया. हालांकि इस दौरान बड़ी मात्रा में हैजा निरोधक टीके एवं दवाओ का वितरण किया गया. भारत से हैजा से होनी वाली मौते एक प्रकार से रूक गई और आजादी के 70 सालो में इस बीमारी से मौत का प्रतिशत शुन्य रहा.
1904 में फैली प्लेग की 1942 में बिदाई
चेचक ने पांव पसारे
इसे अपवाद कहे या कुछ और ही जिसके अनुसार भारत में 1896 में महामारी बने प्लेग की एक वर्ष बाद 1897 प्लेग का टीका बन चुका था. इस महामारी ने अखण्ड भारत के केन्द्र बिन्दू बेतूल में 1904 में दस्तक दी. अग्रेंजो द्वारा 1823 को बनाए गए बेतूल वर्तमान जिला मुख्यालय (बदनूर) में 1904 में प्लेग से 35 मौते हुई. इस वर्ष ही प्लेग ने बैतूल नगर से गांवो की ओर पांव पसारे. वर्ष 1908 में जिले में प्लेग पूरी तरह से फैल चुका था. इस वर्ष 534 मौते हुई. इसके बाद लगातार 2 वर्षो 1911 में 104 तथा 1912 में 308 मौते हुई. वर्ष 1913 में प्लेग अधिकारी एवं कर्मचारी की नियुक्ति के साथ पूरे जिले में इस महामारी से लडऩे का मास्टर प्लान तैयार किया गया. जिसके चलते 4 वर्षो तक न तो प्लेग फैल सका और न उससे किसी प्रकार की मौते हुई लेकिन1917, 1918,1919 में एक बार फिर प्लेग ने पंाव पसार लिए जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगो की मौते हुई.1920 में 227 लोगो की मौत ने पूरे जिले को चौका डाला.1942 को बैतूल जिले से पूरी तरह से बिदा हो चुकी प्लेग ने 1928 में 742 तथा 1929 में 556 लोगो को अपने काल के गाल में जकड़ लिया.
बैतूल जिले में चेचक जैसी महामारी की 1977 में भारत से बिदाई
गुलाम एवं आजाद भारत के 59 सालो में 2 हजार से अधिक मौते
मध्यप्रांत के गठन के बाद 1896 से लेकर 1955 के बीच बैतूल जिले में चेचक (शीतला, बड़ी माता, स्मालपोक्स) से मरने वालो की संख्या 2,324 थी. चेचक एक विषाणु जनित रोग है. श्वासशोथ एक संक्रामक बीमारी थी, जो दो वायरस प्रकारों (व्हेरोला प्रमुख और व्हेरोला नाबालिग) के कारण होती है. इस रोग को लैटिन नाम व्हेरोला या व्हेरोला वेरा द्वारा भी जाना जाता है. बैतूल जिले से ही नहीं पूरें देश से 26 अक्टूबर 1977 को चेचक बड़ी माता की बिदाई हो गई. एक तथ्य यह भी है कि वर्ष 1796 में चेचक (बड़ी माता ) महामारी के रूप में सामने आई इस बीमारी का 1798 में एडवर्ड जेनर द्वारा चेचक के टीके की खोज की गई. 19वीं सदी के दौरान भारत में वायरस जनित रोगों से निपटने के कदम तेज हुए. इसके तहत वैक्सीनेशन को बढ़ावा दिया गया, कुछ वैक्सीन संस्थान खोले गए. कॉलरा वैक्सीन का परीक्षण हुआ और प्लेग के टीके की खोज हुई. बीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में चेचक के टीके को विस्तार देने, भारतीय सैन्य बलों में टायफाइड के टीके का परीक्षण और देश के कमोबेश सभी राज्यों में वैक्सीन संस्थान खोलने की चुनौती रही. आजादी के बाद बीसीजी वैक्सीन लैबोरेटरी के साथ अन्य राष्ट्रीय संस्थान स्थापित किए गए. 1977 में देश चेचक मुक्त हुआ. टीकाकरण का विस्तारित कार्यक्रम (ईपीआइ) का श्रीगणेश 1978 में हुआ.सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम 1985 में शुरू हुआ था. बैतूल जिले में 1956 से लेकर 1964 तक 9 वर्षो के प्रथम चरण में 2 लाख 1 हजार 414 लोगो को चेचक का टीका लगाया गया. द्धितीय चरण में इन 9 वर्षो में चेचक बड़ी माता के टीकाकरण के अभियान के तहत 6 लाख 33 हजार 673 लोगो को टीका लगवाया गया.
महामारी की रोकथाम के लिए
पंचामृत से बांधे गए गए गांव
बैतूल जिले के अधिकांश गांवो में चेचक,हैजा, प्लेग की महामारी के लिए ग्रामिणो द्वारा गांवो को पंचामृत से बांधा गया. बैतूल जिला मुख्यालय से लगे ग्राम रोंढ़ा के सेवानिवृत वनपाल श्री दयाराम पंवार के अनुसार गांव को दुध – दही – शहद – घी – गौमूत्र के मिश्रण की एक बहती धारा के साथ गांव की चर्तुभूज सीमाओ को बांधा गया. ग्रामिणो का विश्वास और आस्था ने अपना असर दिखाया और गांव पूरी तरह से महामारी के प्रकोप से मुक्त हो गया.
2012 में पूरी तरह से पोलियो मुक्त हुआ
मध्यप्रदेश का आदिवासी बैतूल जिला
महामारी के आते – जाते प्रभावो से बैतूल जिला पूरी तरह से प्र्रभावित रहा. जिले में यूं तो मलेरिया, क्षय रोग विषाक्त वायरस के चलते दस्तक दे चुके है. जिले ने वर्ष 2012 में पोलियो से जिले को मुक्ति मिल गई. बैतूल जिले में इस वर्ष मार्च में कोरोना जैसी महामारी की दस्तक ने सभी को चौका दिया. 21 दिन के लॉक डाउन के बाद जिला पूरी तरह से घर में कैद हो गया जिसके कारण जिले में मात्र एक व्यक्ति ही इस बीमारी से संक्रमित पाया गया. जिले में कोरोना की दस्तक ने एक बार फिर सवाल उठाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी.
कोरोना की बीमारी का कारण क्या !
जल – थल – वायु सभी पूरी तरह से प्रदुषित
बैतूल जिले में कोरोना की दस्तक का कारण भले ही तबलीगी जमात से जुड़े लोग रहे हो लेकिन सवाल यह उठता है कि जिले में इस महामारी संक्रामण फैला कैसे और क्यों ! अकसर कहा जाता है कि बीमारी को फैलाने में हवा और पानी का सबसे अधिक जवाबदेह होते है. जिले के गांव – गांव तक इस बीमारी के फैलने के प्रमुख कारणो पर यदि गौर किया जाए तो पता चलता है कि बीते 3 दशको में ताप्ती एवं नर्मदाचंल में वायु प्रदुषण बढऩे से यहां का पर्यावरण प्रदुषित है. बैतूल – होशंगाबाद जिले की दो प्रमुख नदियों सहित जिले की नदियो एवं नालो में बड़े पैमाने पर रेत के लिए अवैध उत्खनन ने जिले की नदियो से लेकर नालो तक को प्रदुषित किया है. बैतूल या होशंगाबाद जिले में बड़े पैमाने पर नदियों से ही जल आपूर्ति की जाती है. ऐसे में कोरोना के वायरस का गांव – गांव तक या घर – घर तक प्रवेश का एक माध्यम प्रदुषित जलआपूर्ति भी हो सकती है. इस समय जानकार लोग इन जिलो में संक्रामक बीमारो से अन्य प्रदेश एवं जिलो में होने वाली मौतो के अनुपात में कम मौतो के लिए जिले की पवित्र पुण्य सलिलाओ को मानते है. भले ही बीते एक दशक में नदियों के किनारे धार्मिक आयोजन यज्ञ एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम जिसमें बड़े पैमाने पर डाली जाने वाली आहूति से वायु प्रदुषण की रोकथाम होती है. शुद्ध हवा के लिए यज्ञ संस्कार जरूरी है
ताप्ती – पूर्णा – नर्मदा की उपेक्षा ने
कोरोना जैसी महामारी को दिया संरक्षण
बैतूल जिले मे एक मात्र संक्रामक रोगी भैसदेही का व्यक्ति मिला. भैसदेही पुण्य सलिला चन्द्रपुत्री पूर्णा का जन्म स्थान है. आज प्रदेश की नदियों की तरह पूर्णा भी उपेक्षित एवं प्रदुषित है. पूर्णा घाटी को लेकर बना गए पूर्णा पुर्न:जीवन प्रकल्प के दम तोडऩे के बाद नर्मदा एवं ताप्ती को प्रदुषण मुक्त करने की कोई ठोस नीति या रीति सामने नहीं आई. नदियो की उपेक्षा एवं उनके किनारो के रख रखाव तथा घाटो के बड़े पैमाने पर निमार्ण न होने के कारण नदियों ने अपना स्वरूप विकृत कर लिया. बीते एक दशक से नदियों के किनारे धार्मिक यज्ञ संस्कार कम अवैध रेत का कारोबार फल – फूल रहा है. जिसके कारण इन दोनो जिले की हवा और पानी दोनो ही प्रदुषण की मार के शिकार हो चुके है. जमीनी प्रदुषण का प्रमुख कारण गगन चुम्बती इमारतो एवं अवैध अतिक्रमण के साथ जिले में बड़े पैमाने पर नगरीय निकायो एवं ग्राम पंचायतो द्वारा बनवाए गए कचरा घरो से है जो हजारो टन कचरा एकत्र कर जिले में ऐसे स्थानो की संख्या में बढ़ोतरी लाए हुए जिन्हे सरकारी भाषा में प्रेचिंग गाऊण्ड कहा जाता है जहां पर पूरे शहर का पन्नी प्लास्टीक सड़ता या फिर जलता हुआ प्रदुषण का जनक बना हुआ है. आज जरूरत है कि महामारी से बचने के लिए हम बड़े पैमाने पर अपने जल – थल – नभ को प्रदुषण मुक्त रखे ताकि इन तीनो के माध्यम से कोई जानलेवा महामारी अपने पांव पसार न सके.
इति

मुलतापी समाचार – रामकिशोर दयाराम पंवार

रामायन की सीता के लिए कई ऑडिशन्स के बाद मिला था रोल -Deepika Chikhaliya


Ramayan me Sheeta ji Rol Play -Deepika Chikhaliya

Multapi Samachar

इन दिनों दूरदर्शन पर Ramayan का प्रसारण सुबह और रात को रोजाना हो रहा है। लॉकडाउन के बीच लोग इस पौराणिक सीरियल का लुत्फ ले रहे हैं। सीरियल में निभाया गया हर किरदार उसे निभाने वाली की जिंदगी से जुड़ गया और आज भी उन्हें देखकर लगता है सच में वो किरदार जिंदा है। फिर से टेलिकास्ट हो रहे इस सीरियल ने टीआरपी के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ऐसा ही एक किरदार है माता Sita का। रामायण में यह किरदार Deepika Chikhaliya ने निभाया था। हालांकि, इसके बाद दीपिका ने जैसे छोटे पर्दे को अलविदा ही कह दिया।

हालांकि, रामायण में काम के पहले दीपिका ने कई टीवी शो में काम किया था। दीपिका ने रामानंद सागर के ही सीरियस ‘विक्रम बेताल’ में कई कहानियों में रानी का रोल किया है। हालांकि, इसके बावजूद उन्हें रामायण में सीता का रोल पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। हालांकि, उन्हें वो पहचान मिल चुकी थी जिसकी वजह से उन्हें काफी काम मिलने लगा था लेकिन इसके बावजूद उन्हें ऐसा रोल नहीं मिला था जो उनकी तकदीर बदल दे।

एक इंटरव्यू में में दीपिका ने कहा था ”जब उन्हें स्क्रीनप्ले राइटर ने बताया कि रामानंद सागर ‘रामायण’ बना रहे हैं और मुझे इसके लिए स्क्रीन टेस्ट देना चाहिए। यह जानकर मैंने सागर साहब से बात की। रामानंद सागर मुझसे बोले कि आपने पहले कहा था सीता के लिए लेकिन तब रामायण नहीं बन रही थी लेकिन अब काम चल रहा है तो आकर स्क्रीन टेस्ट दे दो। इसके साथ ही सागर जी ने कहा कि वो तब तक सीता का कैरेक्टर तय नहीं करेंगे जब तक मैं उस हिसाब से ड्रेस और डायलॉग फ्रीज नहीं कर देती।”

बता दें कि दीपिका के अलावा 20-25 लड़कियों ने उस समय सीता के किरदार के लिए स्क्रीन टेस्ट दिया था। इसके लिए सभी को 4-4 पेज दिए गए थे जिसमें डायलॉग्स थे। दीपिका ने बताया ”रामानंद सागर डायलॉग बोल रहे थे और हमें चलकर सामने से आना था। उन्होंने कहा कि अब ऐसे आओ जैसे राम वनवास को जा रहे हैं। इसी वक्त वो हर चीज का मॉक टेस्ट भी ले रहे थे। इतने सब के बाद जब रामानंद सागर ने सब खत्म किया तब अंत में कहा कि यही हमारे सीरियल के लिए सीता होगी।”

Ramayan में हनुमान जयंती के दिन बना ऐसा खास संयोग, बंजरंगबली निकले सीता की खोज में


DD National

मुलतापी समाचार ।

Hanuman Jayanti Parv 2020

देश में जहां हर व्यक्ति बजरंग बली की पूजा में लगा है वहीं आज ही के खास दिन भगवान श्री राम के काम को सफल बनाने के लिए Hanuman और अन्य वानर निकल चुके हैं। हम बात कर रहे हैं DD National पर प्रसारित हो रही Ramayan की जिसमें बुधवार को प्रसारित हुए एपिसोड में वानर सेना ने चारों दिशाओं में माता सीता की खोज शुरू कर दी है।

किशकिंधा के राजा सुग्रीव ने अपनी वानर सेना को माता सीता की खोज में रवाना कर दिया है। हालांकि, वानर सेना निकल तो गई लेकिन दक्षिण दिशा में समुद्र किनारे आकर हताश होकर बैठ गई। इस दल का नेतृत्व बाली के पुत्र अंगद कर रहे हैं। जब सारे वानर निराश होकर समुद्र किनारे बैठ जाते हैं तो उन्हें राह दिखाने के लिए पक्षी राज संपाति आते हैं जो बताते हैं कि सीता को रावण सौ योजन दूर लंका में ले गया है।

हालांकि, संपाति तो इस वानर सेना को अपना खाना समझकर आते हैं लेकिन अपने भाई जटायू का जिक्र सुनते हैं तो फिर वानर सेना के सामने अपनी शक्ति की कथा सुनाते हैं और बताते हैं कि रावण ने सीता को लंका की अशोक वाटिका में रखा है। इसके बाद वानर सेना खुशी से झूम उठती है।

इसके बाद जब यह सवाल उठता है कि सौ योजन का समुद्र पार कर कौन सीता की खोज में जाएगा तब जामवंत हनुमान को उनकी शक्तियां याद दिलाते हैं। इससे पहले जब सीता की खोज के लिए जाने के पहले हनुमान ने भगवान राम के चरण स्पर्श किए तो भगवान राम ने उन्हें कहा कि मुझे यकीन है तुम मेरे सारे काम पूरे करोगे।

Hanuman ने जब भगवान राम से उनकी भक्ति का आशीर्वाद मांगा तो भगवान राम ने कहा कि वो भक्त नहीं बल्कि भाई के समान हैं।

भगवान महावीर स्वामी ने 12 वर्षों तक की थी कठोर तपस्या


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

महावीर जयंती 2020; राज परिवार में जन्म लेकर राजकुमार से सन्यासी बने महावीर स्वामी को छोटी सी उम्र में ही भोग विलास से विरक्ति हो गई थी! उनके पिता महाराज सिद्धार्थ ने उनको राजसी जीवन जीने के लिए सभी तरह की सुख सुविधाएं और ऐश्वर्य उनको प्रदान किए, लेकिन इसके बावजूद उनका मन सांसारिक सुखों में नहीं लगा, और विवाह के पश्चात उन्होंने सब कुछ त्याग कर संन्यास ले लिया! कठोर तपस्या के बाद जब उनको ज्ञान की प्राप्ति हुई तो उनके अनमोल वचनों से दुनिया बड़ी प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में लोगों ने जैन धर्म को अंगीकार किया! भगवान महावीर स्वामी के अनमोल वचन

महावीर स्वामी ने संसार को अहिंसा, त्याग और संयम का संदेश दिया! उन्होंने यज्ञ में दी जाने वाली बली का विरोध किया और जाति के भेद को मिटाने की दशा में बड़ा काम किया! जैन धर्म को मानने वालों के लिए उन्होंने पांच व्रत दिए, जो अहिंसा, सत्य, अस्तेय ,ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह है! महावीर स्वामी ने हर तरह की हिंसा का विरोध करते हुए’ जियो और जीने दो’का सिद्धांत दिया! उन्होंने अपने तप से सभी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी इसलिए उनको “जितेंद्रय ‘कहा गया!

जैन धर्म के गुरुओं ने भगवान महावीर के कुल 11 गणधर बताए थे! जिनमें गौतम स्वामी पहले गणधर थे! महावीर जी की मृत्यु के 200 वर्षों के पश्चात जैन धर्म श्वेतांबर और दिगंबर दो संप्रदायों में विभक्त हो गया! दिगंबर संप्रदाय को मानने वाले अनुयाई या संत अपने वस्त्रों का त्याग कर देते हैं, जबकि श्वेतांबर संप्रदाय को मानने वाले संत श्वेत वस्त्र धारण करते हैं! उन्होंने बिहार के पावापुरी में देह त्याग किया था इसलिए इस स्थान को जैन धर्मावलंबी पावन स्थली मानते हैं! भगवान महावीर स्वामी ने 12 साल तक निर्वस्त्र रहकर और मौन व्रत धारण कर कठोर तपस्या की थी उसके बाद उनको ज्ञान की प्राप्ति हुई थी!

मुलतापी समाचार