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Real कोरोना योद्धा है पत्रकार,कोरोना योद्धाओं का सीएमओ ने किया सम्मान

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आमला. नगर पालिका सीएमओ एच. आर.खाड़े ने कोरोना योद्धा कलमकारों का सम्मान किया साथ ही सीएमओ ने तहसीलदार नीरज कालमेघ ओर जनपद सीईओ संस्कार बावरिया का भी सम्मान किया इस मौके पर नगरपालिका सीएमओ एच. आर.खाड़े ने कहा कि नगर के कलमकारों ने विषम परिस्थितियों में भी अपनी अहम भूमिका निभाई है सतत कोविड-19 में शहर के हित मे कार्य किया है कलमकारों ने अपनी कलम से रोजाना प्रशासन को अवगत कराया है हमारी कमिया और खामिया को भी उजागर किया है लेकिन कही ना कहीं शहर के हित मे ही कार्य किया है जिसके चलते आज पूरे जिले में कोरोना पाजिटिव मरीज की सख्या काफी कम है और जो कोरोना के मरीज पाए गए है वो भी बहार से आने वाले ही निकले और आमला शहर में निवासरत एक भी कोरोना के मरीज नही निकले कही ना कहीं कलमकारों के अवगत कराने से कोविड- 19 में कोरोना के मरीज कम निकले है इस लिए आज शहर के सभी कोरोना योद्धा कलमकार सम्मान के काबिल है इस लिए आज कोरोना योद्धाओं का सम्मान किया गया है इस मौके पर तहसीलदार नीरज कालमेघ ने कहा कि कोविड-19 शहर के हित के लिए कलमकारों ने सराहनीय कार्य किया है इसीलिए आज कलमकारों का सम्मान कर आभार व्यक्त किया गया है।

कोरोना की रोकथाम के लिए सजग रहे सीएमओ 

विगत तीन माह से कोरोना काल के चलते शासन प्रशासन काफी एक्टिव दिखाई दिया वही शहर में नगरपालिका सीएमओ भी काफी एक्टिव दिखाई दिए नपा सीएमओ एच आर खाड़े द्वारा लगातार शहर में सम्पर्क बनाया गया और सजगता से कोरोना की रोकथाम में अपनी भूमिका निभाई आज पत्रकार सम्मान समारोह और कोरोना को लेकर चर्चा में सीएमओ खाड़े ने कहा कि आगे भी कोरोना से लड़ने सभी का सहयोग जरूरी है सहयोग से ही कोरोना की रोकथाम की जा सकती है ।

हिंदी पत्रकारिता -तब में और अब में फर्क

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सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मिडिया के पत्रकार बंधुओं को हिंदी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं, पत्रकारिता का स्वरुप चाहे जैसा भी हो मसलन ख़बरें चाहे प्रिंट यानि कागजों पर प्रकाशित हो या ऑडियो यानी रेडियों पर या फिर ऑडियो-वीडियों यानी टेलीविजन पर  लेकिन होगा तो वह समाचार ही, समय के साथ – साथ जिस तरह सभ्यता, खानपान, मनोरंजन एवं रहनसहन में बदलाव हुआ है वैसे ही समाचारों के प्रस्तुति करण के स्वरुप में भी बदलाव हुआ है। समाचार कागज से निकल कर , तरंगो के माध्यम से रेडियों पर आये , फिर वही तरंगे रेडियों से निकल टेलीविजन पर और आज इंटरनेट माध्यम से मोबाईल पर।

आज की  विकसित तकनिकी की वजह से  प्रिंट  , ऑडियो, ऑडियो – वीडियों ये सभी का मिश्रित रूप से एक साथ “डिजिटल मिडिया” के स्वरुप में आपके सामने है। और ये सिर्फ इंटरनेट की गति की वजह से संभव हुआ है । लेकिन सभी माध्यमों का आधार भाषा है फिर वो चाहे क्षेत्रीय भाषा हो या हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी।

आज इंटरनेट माध्यम से विकसित पत्रकारिता पर कई लोग सवाल उठाते  है। जैसे प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मिडिया मान्य है। भारत सरकार द्वारा इसे कानूनी मान्यता दे दी गई है साथ ही इसे उद्योग के रूप में विकसित करने जा रही है । वेब आधारित पत्रकारिता पर भी वही नियम लागू होते है जो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मिडिया के लिए निर्धारित है।

ये लड़ाई तो हम 2005 से लड़ते आ रहे है ,लेकिन हम आज बात अपनी नहीं ,उनकी करेंगे जो  जिन्होंने आजादी के 100 सालों से भी पहले हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत की। और इतिहास रच गए।

हिंदी भाषा में ‘उदन्त मार्तण्ड’ के नाम से पहला समाचार पत्र 30 मई 1826 में निकाला गया था। इसलिए इस दिन को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने इसे कलकत्ता से एक साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर शुरू किया था। इसके प्रकाशक और संपादक भी वे खुद थे। इस तरह हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले पंडित जुगल किशोर शुक्ल का हिंदी पत्रकारिता की जगत में विशेष सम्मान है।

जुगल किशोर शुक्ल वकील भी थे और कानपुर के रहने वाले थे। लेकिन उस समय औपनिवेशिक ब्रिटिश भारत में उन्होंने कलकत्ता को अपनी कर्मस्थली बनाया। परतंत्र भारत में हिंदुस्तानियों के हक की बात करना बहुत बड़ी चुनौती बन चुका था। इसी के लिए उन्होंने कलकत्ता के बड़ा बाजार इलाके में अमर तल्ला लेन, कोलूटोला से साप्ताहिक ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन शुरू किया। यह साप्ताहिक अखबार हर हफ्ते मंगलवार को पाठकों तक पहुंचता था।

परतंत्र भारत की राजधानी कलकत्ता में अंग्रजी शासकों की भाषा अंग्रेजी के बाद बांग्ला और उर्दू का प्रभाव था। इसलिए उस समय अंग्रेजी, बांग्ला और फारसी में कई समाचार पत्र निकलते थे। हिंदी भाषा का एक भी समाचार पत्र मौजूद नहीं था। हां, यह जरूर है कि 1818-19 में कलकत्ता स्कूल बुक के बांग्ला समाचार पत्र ‘समाचार दर्पण’ में कुछ हिस्से हिंदी में भी होते थे।

हालांकि ‘उदन्त मार्तण्ड’ एक साहसिक प्रयोग था, लेकिन पैसों के अभाव में यह एक साल भी नहीं प्रकाशित हो पाया। इस साप्ताहिक समाचार पत्र के पहले अंक की 500 प्रतियां छपी। हिंदी भाषी पाठकों की कमी की वजह से उसे ज्यादा पाठक नहीं मिल सके। दूसरी बात की हिंदी भाषी राज्यों से दूर होने के कारण उन्हें समाचार पत्र डाक द्वारा भेजना पड़ता था। डाक दरें बहुत ज्यादा होने की वजह से इसे हिंदी भाषी राज्यों में भेजना भी आर्थिक रूप से महंगा सौदा हो गया था।

पंडित जुगल किशोर ने सरकार ने बहुत अनुरोध किया कि वे डाक दरों में कुछ रियायत दें जिससे हिंदी भाषी प्रदेशों में पाठकों तक समाचार पत्र भेजा जा सके, लेकिन ब्रिटिश सरकार इसके लिए राजी नहीं हुई। अलबत्ता, किसी भी सरकारी विभाग ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ की एक भी प्रति खरीदने पर भी रजामंदी नहीं दी।

पैसों की तंगी की वजह से ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन बहुत दिनों तक नहीं हो सका और आखिरकार 4 दिसम्बर 1826 को इसका प्रकाशन बंद कर दिया गया। तब में और अब में क्या फर्क है पत्रकारिता तो तब भी अपना अस्तित्व बचाने लड़ रही थी। और आज भी वही हाल है। तो बदला क्या….?

आज का दौर बिलकुल बदल चुका है। पत्रकारिता में बहुत ज्यादा आर्थिक निवेश हुआ है और इसे उद्योग का दर्जा हासिल हो चुका है। हिंदी के युवा पाठकों की संख्या बढ़ी है और इसमें लगातार इजाफा हो रहा है।  इंटरनेट ने इसे और भी आसान बना दिया है। ख़बरें आज भी वही है सिर्फ पाठकों तक पंहुचने का माध्यम बदला है।

मध्यप्रदेश सीएम शिवराज की सभी पत्रकारों को ‘विश्‍व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ पर हार्दिक बधाई

भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे’ के अवसर पर सभी मीडिया से जुड़े पत्रकारों को हार्दिक बधाई दी है। चौहान ने अपने ट्वीट के माध्यम से कहा कि ”मीडिया के मित्रों को वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे की हार्दिक बधाई।

उन्‍होंने आगे लिखा, आप अपनी इस शक्ति का उपयोग सदैव अन्याय के विरुद्ध और कमज़ोरों एवं असहायों के हितों की रक्षा के लिए करें। समाज एवं राष्ट्र की उन्नति में ऐसे ही योगदान देते रहें, शुभकामनाएं।

उल्‍लेखनीय है कि आज रविवार को वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे है। दुनियाभर में मनाए जानेवाले इस दिन को मनाने का मकसद प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा तय कराना है। फिलहाल, प्रेस स्वतंत्रता के मामले में भारत का स्‍थान बहुत नीचे हैं। यह वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 142वें नंबर पर है, जबकि सूची में 180 देशों सम्‍म‍ि‍लित हैं ।

इस मामले में भारत अपने पड़ोसी देश भूटान, नेपाल, श्री लंका, और म्यांमार से भी पीछे है। हां हम इस बात पर जरूर संतुष्‍ट हो सकते हैं कि इस इंडेक्‍स में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश से भारत बहुत बेहतर स्‍थ‍िति में है। लेकिन इसी के साथ हमें नहीं भूलना चाहिए कि गत पांच वर्षों में यहां 198 पत्रकारों पर हमले हुए हैं। जिनमें से 40 हमलों में पत्रकार की हत्या कर दी गई। इन हमलों की मुख्‍य वजह खबर छापना ही सामने आया है। इसमें भी दुख इस बात का है कि कुल हमलों के एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। सिर्फ एक तिहाई मामलों में प्राथमिक रिपोर्ट यानी कि फर्स्ट इनफॉरमेशन रिपोर्ट दर्ज हो सकी है।

मुलतापी समाचार की ओर से सभी पत्रकारों को ‘विश्‍व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ पर हार्दिक बधाई एवं सभी मेंरा सलामख्, जो इस समय कोरोना वैश्‍यविक महामारी के होते हुए भी स्‍वतंत्र पत्रकारिता का कार्य नि‍रंतर कर रहे है

फर्ज़ी पत्रकारों के खिलाफ पूरे देश में होगी एफआईआर..

सूचना प्रसारण मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा फर्जी पत्रकारों एवं चैनल पर शिकंजा कसा जाएगा

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नई दिल्ली : मुलतापी समाचार । भारत में सूचना प्रसारण मंत्रालय जाली पत्रकारों एवं फर्ज़ी चैनलों पर शिकंजा कसने को तैयार है जो लोग बगैर आर.एन.आई के अखबार या चैनल चला रहे हैं उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। सूचना एवं प्रसारणमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि देश भर में जितने भी लोग प्रेस

आई○डी○कार्ड लेकर घुम रहे हैं या फर्ज़ी चैनल चला रहे हैं ऐसे लोगों की तत्काल जांच शुरू होगी

इस मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया जाएग।

आगे मंत्री जी ने कहा कि कुछ दोषी लोगों के कारण अच्छे, सच्चे एवं ईमानदार पत्रकारों के छवि खराब हो रही है, एवं उनके कार्य करने में बाधा उत्पन्न हो रही है

आगे जानकारी देते हुए मंत्री जी ने कहा कि पूरे देश में कुछ पैसा लेकर जाली प्रेस आई○डी○ बांटने एवं जाली पत्रकार नियुक्ति करने तथा प्रेस के नाम पर ब्लैकमेलिंग करने का धंधा चल रहा है।

जिसपर अंकुश लगाना अति आवश्यक है। इस संबंध में सभी राज्यों के प्रेस सूचना मंत्रालय को निर्देश जारी कर दिया गया है

आगे मंत्री जी ने बताया कि जो अखबार/पत्रिका भारत सरकार के आर○एन○आई○ द्वारा रजिस्टर्ड हो या जो टीवी/रेडियो सूचना प्रसारण मंत्रालय से रजिस्टर्ड हो उसी के द्वारा पत्रकार/संवाददाता की नियुक्ति हो सकती है व केवल उसका सम्पादक ही प्रेस कार्ड जारी कर सकता है

जब न्यूज पोर्टल के बारे में पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन्टरनेट पर चल रहे न्यूज पोर्टल के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान सूचना प्रसारण मंत्रालय में नहीं है एवं कोई भी न्यूज पोर्टल एवं केबल (डिस ) टीवी पर चल रहे समाचार चैनल किसी भी तरह के पत्रकार की नियुक्ति नहीं कर सकता है। और न ही प्रेस आई○डी○ जारी कर सकता है।

यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह अवैध है एवं उसके विरुद्ध कार्रवाई होनी सुनिश्चित है

_”अगर कोई बगैर RNI के पोर्टल या अखबार चलाते मिला तो उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी और ऐसे व्यक्ति को हरगिज़ माफ नहीं किया जायेगा।”

सूचना एवं प्रसारणमंत्री भारत सरकार_

देश के सबसे बड़े पत्रकार संगठन ने पत्रकारो को राहत पैकेज देन की मांग की

प्रदेश सरकार आसन्न आपदा राहत प्रबंधन में जमा राशी पत्रकारो के खाते में डाले


बैतूल, देश के सबसे बड़े पत्रकार संगठन इंडियन फेडरेशन आफ वर्कींग जर्नलिस्ट (आई एफ डब्लयू जे) की प्रदेश इकाई के सचिव रामकिशोर पंवार ने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की है कि प्रदेश सरकार जिला स्तर पर गठित आसन्न आपदा राहत प्रंबधन में जमा राशी में से कुछ सहयोग राशी जिले के उन पत्रकारो को भी दे जिनका काम – काज बंद पड़ा है. प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम पर भेजे एक मांग पत्र में प्रदेश सचिव रामकिशोर पंवार ने यह मांग उठाते हुए कहा कि जिला स्तर पर जिला सरकार के पास लाखो रूपैया गरीबो एवं जरूरत मंदो के जन सहयोग से जमा हुआ है.

जब जिला सरकार जिले के लोगो के घरो तक राशन सामग्री से लेकर राहत पैकेज तक उपलब्ध करवा रही है ऐसे में जिले में के उन पत्रकारो का क्या होगा जो इस आपदा से प्रभावित हुए है. श्री पंवार ने कहा कि पूरे प्रदेश में 2 प्रतिशत ऐसे पत्रकार या अखबार मालिक होगें जो करोड़पति या लखपति है लेकिन बाकी अन्य जो आज भी अपनी जरूरतो के लिए आर्थिक रूप मोहताज बन गए है. अपनी जान को जोखिम में डाल कर जिला सरकार की प्रेस विज्ञिप्तो से लेकर जिले में जनसहयोग के लिए लोगो को प्रेरित करने वालो की यदि जरूरतो की पूर्ति जन सहयोग से जमा राशी से नहीं हो सकती तो ऐसे जन सहयोग का क्या औचित्य है. श्री पंवार ने कहा कि जिला सरकार (कलैक्टर) जब रेडक्रास सोसायटी से बहुरंगी कलैण्डर छपवा सकती है तो उसी रेडक्रास सोसायटी या किसी अन्य मदो से जिले के पत्रकारो को राहत पैकेज दिये जा सकते है. श्री पंवार के अनुसार जिला सरकार चाहे तो जिले के चिन्हीत प्रेट्रोल पम्पो में चिन्हीत पत्रकारो के वाहनो की सूचि उपलब्ध करवा कर उन्हे उनके कार्य में सहयोग प्रदान करते हुए यदि स्थानीय स्तर पर २० – २० लीटर प्रति सप्ताह प्रेटोल पम्प से प्रेट्रोल उपलब्ध करवा सकती है.

वर्तमान समय में बैतूल जिले में सौ सवा सौ के लगभग छोटे बड़े पम्प कार्यरत है. इसी तरह अन्य लोगो से प्रेस के नाम पर जन सहयोग पैकेज दिलवा सकती है. जिले में खनिज विभाग से लेकर परिवहन विभाग के साथ – साथ स्थानीय निकायों एवं जनपदो से भी पत्रकारो को राहत पैकेज दिलवाने का काम कर सकती है. संकट के समय पत्रकारो के साथ यदि जिला सरकार सहयोग नहीं कर सकती है तब पत्रकारो को भी जिला सरकार को सहयोग करने या न करने के फैसले पर विचार करना चाहिए.


बैतूल जिले के पत्रकारो को राहत पैकेज दिलवाने की मांग करने वाले जिले के वरिष्ठ पत्रकार रामकिशोर पंवार के अनुसार बैतूल जिले में राज्य सरकार से अधिमान्य एवं प्रेस द्वारा अधिकृत पत्रकारो की संख्या सौ सवा से अधिक नहीं है. ऐसे में जो 3 प्रतिशत आर्थिक रूप से सम्पन्न पत्रकारो को दर किनार कर शेष अन्य जरूरत मंद पत्रकारो के लिए आने वाले 12 दिनो के अंदर राहत पैकेज एवं राहत सामग्री उनके बैंको खातो में डालने का काम जिला सरकार को जन संपर्क विभाग बैतूल के माध्यम से करना चाहिए. श्री पंवार ने जिला सरकार से यह निवेदन किया है कि पत्रकारो के संग – संग बैतूल जिला सरकार को जिले के विधायको एवं सासंद से भी प्रेस को राहत पैकेज दिलवाने की पहल करनी चाहिए. श्री पंवार ने कहा कि संकट पत्रकारो पर यदि आया है तो यह नहीं भूलना चाहिए कि पत्रकार संकट मोचक का भी काम करते है और पत्रकार स्वंय एक प्रकार से संकट है ऐसे में लोग शनि के नाम पर श्ािनदेव को तेल चढ़ाया करते है तब पत्रकारो को जनप्रतिनिधियों के द्वारा कुछ तो चढ़ावा देना चाहिए. आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे पत्रकारो के लिए यदि समय रहते राहत सामग्री या राहत राशी उपलब्ध नहीं करवाई गई तो कई पत्रकारो के घरो के चुल्हे नहीं जल सकेगें. श्री पंवार के अनुसार

जिले में मात्र पांच – दस ऐसे पत्रकार है जो वेतनभोगी मानदेय या वेतन पाते है या देते है. जिले के 90 प्रतिशत पत्रकारो की रोजी – रोटी विज्ञापनो से चलती है. जिले में वर्तमान समय में विज्ञापन बंद होने से जिले के पत्रकारो एवं समाचार पत्रो के सामने सबसे बड़ा आर्थिक संकट आ गया है.

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रामकिशोर पवार पत्रकार बैतूल

पत्रकारों को कोविड-19 कव्हरेज में सहयोग के लिये कलेक्टरों को निर्देश – प्रसचिव जनसंपर्क

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Bhopal  सचिव जनसंपर्क ने पत्रकारों को कोविड-19 कव्हरेज में सहयोग के लिये कलेक्टरों को दिये निर्देश
भोपाल (हेडलाईन)।  सचिव जनसम्पर्क पी. नरहरि ने पत्रकारों को कोविड-19 संक्रमण के दौरान समाचार कव्हरेज में सहयोग के लिये जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किये हैं। कलेक्टरों से कहा गया है कि राज्य शासन द्वारा पत्रकारों को जारी अधिमान्यता कार्ड को प्राथमिकता दी जाये।

मीडिया संस्थानों अथवा समाचार पत्र कार्यालयों में कार्यरत ऐसे कर्मचारी, जो कोरोना कव्हरेज में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, उनके संस्थान द्वारा जारी फोटोयुक्त परिचय-पत्र को मान्यता दी जाये।

यदि किसी पत्रकार के पास ये दोनों दस्तावेज नहीं हैं, तो जिले के जनसम्पर्क अधिकारी से प्रमाणित कराकर कलेक्टर स्वयं फोटोयुक्त परिचय-पत्र जारी करें।
सचिव पी. नरहरि ने कलेक्टरों से कहा है कि इन तीनों दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज रखने वाले पत्रकारों को सोशल डिस्टेंसिंग बनाते हुए समाचार संकलन की अनुमति दी जाये।

उन्होंने कहा कि यह भी उचित होगा कि ऐसे पत्रकारों से उनके वाहन के लिये अलग से अनुमति पत्र की मांग न की जाये।