Category Archives: सांस्कृतिक

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल के अनूपपुर अल्पप्रवास का कार्यक्रम…


भारत सरकार पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रह्लाद सिंह पटेल के अनूपपुर अल्पप्रवास का कार्यक्रम (4-6 जून 2020)

Multapi samachar

अनूपपुर/ भारत सरकार पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रह्लाद सिंह पटेल 4 से 6 जून तक अनूपपुर के अल्पप्रवास में आएँगे जारी कार्यक्रम के अनुसार 4 जून शाम 6:45 पर श्री पटेल का अमरकंटक (अनूपपुर) आगमन एवं सर्किट हाउस अमरकंटक में रात्रि विश्राम होगा 5 जून प्रातः 7 से 8 बजे तक आप पुष्कर सरोवर रामघाट में श्रमदान अभियान में शामिल होंगे प्रातः 9:30 से 10 बजे धार्मिक आध्यात्मिक गुरुओं से चर्चा करेंगे प्रातः 10 से 11:30 बजे तक स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा करेंगे इसके पश्चात् 11:30 बजे से स्मार्ट सिटी, सिंचाई एवं जल संसाधन पर्यटन आदि विषयों पर ज़िला प्रशासन एवं सम्बंधित अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे बैठक उपरांत श्री पटेल अन्य स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे रात्रि विश्राम अमरकंटक में रहेगा 6 जून को प्रातः 10 बजे आप अमरकंटक से जबलपुर के लिए प्रस्थान करेंगे…

रामनवमी एवं चैत्र नवरात्रि पर घरों में दीपक प्रज्वलित किये, देश मे  लॉकडाउन समय सेवाकर्मीयों का धन्यवाद किया


रामनवमी के पावन अवसर पर घर के बाहर दीपक से सजाया

बैतूल -रामनवमी पर्व पर लोगो ने लॉक डाउन का पालन कर अपने घरों के सामने दीप जला कर मनाई । जब भगवान श्रीराम चन्द्र जी का जन्म हुआ तब पूरी अयोध्या नगरी में घर-घर दीप प्रज्ज्वलित कर खुशियाँ मनाई गई थी और जब प्रभु श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करके अयोध्या में लौटे थे तब भी घर-घर दीप प्रज्वलित कर उनका भव्य स्वागत किया गया था । आज श्रीराम नवमी के शुभ अवसर पर बैतूल जिले के गंज स्थित टैगोर वार्ड में भी घर-घर दीप प्रज्ज्वलित कर भारत को विश्वगुरु बनाने की मंगल कामना के साथ सभी के उत्तम स्वास्थ्य व आयु में वृद्धि  हेतु प्रभु श्रीराम जी से प्रार्थना की गई। युवा सेवा संघ बैतूल के जिलाध्यक्ष व समाजसेवी राजेश मदान ने बताया कि देश भर में सोशल मीडिया के माध्यम से सभी से श्रीराम नवमी की शाम को अपने अपने घर मे अपने परिजनों के ही साथ श्रीरामनवमी का पर्व हर्सोल्लास से मनाने व सभी की खुशहाली हेतु शाम को घर-घर दीप प्रज्ज्वलित करने की अपील की गई थी।

रामनवमी के पावन पर्व पर बच्चों ने दीपक जलाएं

संजय पवार ने बताया

सारनी। भगवान् राम जी और नवरात्रि नवमी के दिन दीपकों को प्रज्वलित कर महामारी का अंत और मानव जाति जीव जंतु पशु पक्षियों की वातावरण पर्यावरण संरक्षण व मानव संसाधन की रक्षा प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रार्थना करते हुए वर्तमान कोरोना वाईरस कोविड19 जैसी घातक बीमारी से पीड़ित इंसानों के सुधार और आगे यह महामारी न फैले जगत जननी भुवनेश्वरी मां दुर्गा और भगवान् विष्णु के अवतार राम भगवान् से प्रार्थना करते हुए संसार के प्राणियों की रक्षा के लिए और हमारे भारत देश की रक्षा के लिए समर्पित होकर दीपों की ज्योत जलाकर प्रार्थना की ।

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की विधि-विधान क्या है?


मुलतापी समाचार

सनातन धर्मियों नीति

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की विधि-विधान क्या है?

सावन का महीना आते ही श्रद्धालु महादेव शंकर को प्रसन्न करने का कोशिश में जुट जाते हैं, शिवलिंग पर गंगाजल और साथ साथ बेलपत्र भी चढ़ाने का विधान है।

फुल तोड़ने के नियम

चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि को संक्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र न तोड़ें।

बेलपत्र भगवान शंकर को बहुत प्रिय है, इस लिए इन तिथियों या वार से पहले तोड़ा गया पत्र चढ़ाना चाहिए।

शास्त्रों में कहा गया है कि अगर नया बेलपत्र न मिल सके तो किसी दूसरे के चढ़ाएं हुए बेलपत्र को भी धोकर कोई वार इस्तेमाल किया जा सकता।

अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यादि पुनः पुनः शंकरायार्पणीयानि न नवानि यादि क्वचित।।

टहनी से चुन-चुनकर सिर्फ बेलपत्र ही तोड़ना चाहिए, कभी भी पुरी टहनी नहीं तोड़ना चाहिए पत्र इतनी सावधानी से तोड़ना चाहिए कि वृक्ष का कोई नुक्सान ना पहुंचे।

बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में वृक्षों को मन ही मन प्रणाम कर लेना चाहिए।

बेलपत्र कैसे चढ़ने चाहिए

महादेव को बेलपत्र हमेशा उल्टा उर्पित करना चाहिए यानी पत्र का चिकना भाग शिवलिंग के उपर रहना चाहिए।

बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए।

बेलपत्र 3 से लेकर 11 दलों तक के होते हैं, ये जितने अधिक पत्र हो उतने ही उत्तम मानी जाता है।

अगर बेलपत्र उपलब्ध न हो तो बेल के वृक्ष के दर्शन ही कर लेना चाहिए। उससे भी पाप ताप नष्ट हो जाता है।

शिवलिंग पर दुसरे के चढ़ाएं बेलपत्र की उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए।

सुभाष चंद्र बाला

आज भी जीवित है वर्षों पुरानी परम्परा



रोंढा बैतूल – होली का त्यौहार अपने अंदर अनेक विविधताओं को समेटे हुए हैं। भारत के हर प्रदेश, क्षेत्र व स्थान पर होली के त्यौहार की एक अलग परंपरा है। वही जिला बैतूल मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम रोंढा में होलिका दहन के तीसरे दिन यानी चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की तीज के दिन धुरेड़ी खेली जाती है जिसमें रंग और गुलाल लगाकर होली का त्यौहार मनाने की परम्परा है।

कुछ स्थानों पर होली के पांच दिन बाद पंचमी को रंगपंचमी खेलने की परंपरा भी है। धुरेड़ी पर गुलाल लगाकर होली खेली जाती है तो रंगपंचमी पर रंग लगाया जाता है। खासतौर पर इस दिन बच्चों, महिलाओं और युवकों की टोलियां गाँव की गलियों से निकलती है और रंग,गुलाल लगाकर खुशियों का इजहार करती है। रंगपंचमी होली का अंतिम दिन होता है और इस दिन होली पर्व का समापन हो जाता है।

इसी दिन गांव में दोपहर 12 बजे के बाद मेला भी लगता है जिसमें आसपास के दर्जनों गांवों के लोग सम्मिलित होते है। मेले में “जेरी तोड़ने” की भी परम्परा है। जेरी की लम्बाई लगभग 50 फीट है, जिस पर एक व्यक्ति जेरी के ऊपर चड़कर जेरी के शिखर पर रखे नारियल और पैसे की गठरी लाता है और नारियल को भगवान के चरणों में अर्पित करता है एवं पैसे उपहार के तौर पर स्वयं रखता है। इसके बाद मेले के समापन की घोषणा भी हो जाती है।

पुरानी परम्परा के अनुसार यदि जेरी नही टुटती है तो जतरा समाप्त नही होती है और अगले दिन भी जतरा लगी रहती है या पंचायत के आदेशानुसार समाप्त भी की जा सकती है। जतरा में आदिवासी समुदाय की महिलाएँ और पुरुषों के द्वारा ढोलक, मंजीरा और अन्य वाद्ययंत्रों को बजाते हुए, नाचना एवं फाग गीत गाया एवं फाग माँगने की अनुठी परम्परा है।

जिसे गाँव के लोग अपने गांव की भाषा में “जतरा” कहते है। और जतरा में संतरा, अंगुर, गाठी, नड्डा, फुटाना, खेल-खिलौने, आईस्क्रीम, गुब्बारे,झूलाघर सहित अन्य बच्चों के लिए सामान, महिलाओं के लिए चूडिय़ां, कंगन, अन्य जेवरात, चप्पल-जुते, घरेलु सामान जिसमें किचन सामग्री मुख्य रूप से होती है। पान-गुटखा, चाय का ठेला, गुपचुप के ठेले, समोसे, बड़े, जलेबी, नमकीन और विभिन्न रंगों की मिठाई की दुकानें लगती है जिससे जतरा की शोभा चौगुनी बड़ जाती है।

प्रदीप डिगरसे बैतूल मुलतापी समाचार