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ग्राम घोटाला- चौपाल निर्माण शौचालयों के अधूरे काम को पूरा बताकर राशि खाने वाला सचिव निलंबित


मुलतापी समाचार

ग्राम प्रधान, सचिव से राशि वसूली के लिए धारा 92 के तहत प्रकरण दर्ज

मुलताई तहसील की ग्राम पंचायत कान्हाखापा में निर्मित सीमेंट कांक्रीट रोड का घटिया निर्माण करने,चौपाल निर्माण कार्य और शौचालयों के अधूरे निर्माण कार्य को पूर्ण दर्शा कर राशि डकार ने वाले तत्कालीन पंचायत सचिव दिनेश दाबड़े (वर्तमान सचिव ग्राम पंचायत पोहर) को जिला पंचायत सीईओ ने निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। 
 ग्राम पंचायत कान्हाखापा के ग्रामीणों ने पंचायत में घटिया सीमेंट रोडो का निर्माण करने, ग्राम कान्हाखापा और ग्राम सोनखेड़ी में चौपाल निर्माण का कार्य आधा अधूरा करने और हितग्राहियों के निवास पर बनाए गए शौचालयों का आधा अधूरा निर्माण कर सचिव और ग्राम प्रधान द्वारा स्वीकृत राशि आहरित करने की शिकायत जनपद पंचायत सीईओ से की थी।

शिकायत पर सीईओ मनीष शेंडे ने दल गठित कर पंचायत में हुए निर्माण कार्यों की जांच कराई। जांच में सीमेंट रोड का घटिया निर्माण कार्य होने की पुष्टि हुई। वही चौपाल निर्माण कार्य आधा अधूरा होने और 5 हितग्राहियों के घर शौचालयों का आधा अधूरा निर्माण काम होने के बावजूद निर्माण कार्य पूर्ण बता कर फर्जी तरीके से स्वीकृत राशि आहरण करने का भी खुलासा जांच में हुआ था।

जांच दल ने ग्राम प्रधान( सरपंच) राधिका धोटे और तत्कालीन पंचायत सचिव दिनेश दाबडे  द्वारा 4 लाख 20 हजार 200 रुपए की वित्तीय अनियमितता और गबन करने का उल्लेख करते हुए जांच प्रतिवेदन सीईओ को सौंपकर ग्राम प्रधान और सचिव से राशि वसूलने की अनुशंसा की थी। जांच दल द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर सीईओ श्रीशेंडे ने जिला पंचायत सीईओ को पत्र लिखकर ग्राम प्रधान और तत्कालीन सचिव से राशि वसूलने के लिए पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 के तहत प्रकरण दर्ज करने और सचिव दिनेश दाबड़े के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। जिला पंचायत सीईओ ने जनपद पंचायत सीईओ के पत्र और जांच प्रतिवेदन के आधार पर पंचायत सचिव दिनेश दाबडे को कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही बरतने और वित्तीय अनियमितता किए जाने के चलते निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। निलंबन अवधि में दिनेश दाबड़े का मुख्यालय जनपद पंचायत कार्यालय मुलताई नियत किया गया है।

ग्राम पंचायत में महात्मा गांधी ग्राम सेवा केंद्र का हुआ शुभारंभ


दिव्यांग हितग्राही बाबुल राय को डिसेबिलिटी कार्ड प्रदाय करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी दानिश अहमद खान

मुलतापी समाचार

ग्राम पंचायत हीरापुर में महात्मा गांधी ग्राम सेवा केंद्र का शुभारंभ हुआ जिसमें मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी दानिश अहमद खान ,सरपंच श्रीमती रुकमणी यूइके ,भाजपा मंडल अध्यक्ष विजयपाल एवं भाजपा नेता विकास बोस ने फीता काटकर केंद्र का उद्घाटन किया

इस दौरान दिव्यांग हितग्राही बाबुल राय को डिसेबिलिटी कार्ड प्रदाय किया गया मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी दानिश अहमद खान ने उपस्थित ग्रामीणों को महात्मा गांधी ग्राम सेवा केंद्र के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह केंद्र के संचालित होने से लोगो को काफी राहत मिलेगी ।

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के प्रभारी सचिव नारायण सिसोदिया, केंद्र संचालक विक्रम बोस, पंच निर्मल मजूमदार, श्रीमती प्रभाती, नेहरू परते , बलहरी विश्वास , केशव सरकार , नंदू साना , सहित अनेकों गणमान्य लोग उपस्थित थे।

ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को ठेके पर लेने नगर पंचायत बनाने पर तुले हुए कुछ लोग?


नगर पंचायत को लेकर गूंजने लगे विरोध के स्वर

बैतूल जाकर किया विरोध प्रदर्शन

बैतूल । बैतूल जिला आदिवासी बहुल जिला होने के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में कई जगह अत्यधिक पिछड़ा हुआ भी है जो शहरी आजीविका एवं नगर पालिका नगर पंचायत आदि के खर्चों को वहन करने में नागरिक असक्षम है वाबजूद इसके कुछ लोग अपना निजी हितो को साधने घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत को पेसा एक्ट का उल्लंघन कर नगर पंचायत बनाने में लगे हैं वही घोड़ाडोंगरी को नगर पंचायत बनाने को लेकर घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत क्षेत्र में ही विरोध के स्वर भी गूंजने लगे हैं।

घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत क्षेत्र के बासन्या, बेहड़ीढाना, बाजारढाना के ग्रामीणों ने घोड़ाडोंगरी को नगर पंचायत बनाने को लेकर बैतूल जाकर विरोध दर्ज कराया है ।

रिटायर्ड फौजी संतोष उइके के नेतृत्व में घोड़ाडोंगरी के लोग बैतूल पहुंचे और उन्होंने कलेक्टर कार्यालय में राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर अपना विरोध दर्ज कराया।

श्री संतोष उइके ने बताया कि ग्राम पंचायत घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में अधिकांश आदिवासी वर्ग के लोग रहते हैं और नगर पंचायत बनाने से अनुसूचित क्षेत्रों को और अनुसूचित समाज के लोगों को दिए गए विशेष अधिकारों का हनन होगा ।

शासन द्वारा पेसा एक्ट के तहत अनुसूचित क्षेत्रों के लोगों को कई तरह के अधिकार दिए गए हैं नगर पंचायत बन जाने से यह अधिकार छिन जाएंगे।

उन्होंने बताया कि नगर पंचायत बनाने के लिए 20 हजार की जनसंख्या के प्रावधानों को भी नजरअंदाज किया गया है।

2011 की जनगणना के अनुसार घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत क्षेत्र की जनसंख्या 8632 है ।

लेकिन 20 हजार मानकर नगर पंचायत बना दी गई है ,जो गलत है हम सभी इसका विरोध करते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि घोड़ाडोंगरी को नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव जब ग्राम सभा में लिया गया था तो कोरम पूरा नहीं था और उसके बावजूद प्रस्ताव ले लिया गया।

घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाने से आदिवासी समाज के हितों पर कुठाराघात होगा।

ग्रामीण मजदूरों को रोजगार देने वाली योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना बंद हो जाएगी ।

ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को ठेके पर लेने के लिए कुछ लोग नगर पंचायत बनाने पर तुले हुए हैं ।

लेकिन यह गरीब आदिवासी मजदूरों के साथ अन्याय होगा।

इसलिए हम इसका विरोध करते हैं ।

ग्राम सभा में भी किया था विरोध

महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर आयोजित ग्राम सभा में बासन्या, ओर बाजारढाना के लोगों ने अपने ग्राम सभा क्षेत्र को घोड़ाडोंगरी नगर पंचायत से अलग रखने को लेकर प्रस्ताव भी पारित किया था। बेहड़ीढाना के लोगों ने भी बेहड़ीढाना को घोड़ाडोंगरी नगर पंचायत में शामिल नहीं करने को लेकर ग्राम पंचायत सचिव को आवेदन भी दिया था ।

वही अभी घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत नगर पंचायत घोषित हो चुकी है शासन द्वारा अपवर्जन की कार्यवाही भी प्रारंभ कर दी गई है।

नगर पंचायत चुनाव के पहले ही घोड़ाडोंगरी में नगर पंचायत को लेकर विरोध के स्वर फूटने से क्षेत्र की राजनीति गरमा गई है।

जाच के इंतजार में सलैया छतरपुर वासी


बडा खुलासा

ग्राम पंचायत सूचना के अधिकार के अधिकारियों को बना रखा है बाबूजी

क्या पंचायती राज में कार्यवाही मौखिक की जाती है

क्या छूट भईय्ये नेताओं के इशारों पर चलते हैं पंचायती राज के कार्य

एक कदम सतर्कता एवं स्वच्छता की ओर

चला रहे ग्रामीण सहायक रोजगार दो– दो पंचायतों को l

ऐसी क्या विडंबना है पंचायती राज की

।।। जहां सक्षम सूचना के अधिकार के अधिकारी होने के बावजूद दिया गया ग्रामीण सहायक रोजगार को प्रभार ? ।।।

Multapi Samachar

घोड़ाडोंगरी । मध्यप्रदेश के बैतूल जिला घोड़ाडोंगरी विकासखंड में आए दिन नए-नए कारनामे होते रहते हैं। कोई रोड का रोड हजम कर जाता है तो कोई चौपाल। कहीं रिकवरी निकलती है चौपाल की तो सिर्फ मात्र 30,000 देखने में यह भी आया है कि पंचायती राज के कई कर्मचारी नालियों को तो पूरी तरह से हजम कर चुके हैं। तो कहीं खेत तालाब के नाम पर किस्तों में पूरी राशि हजम कर ली जाती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पंचायतों में आजकल एक दौर चल पड़ा है शासकीय फंड को किस तरह से हजम किया जाए। खेत तालाब के नाम पर निकाला जा रहा हैं फंड।
हमने भाग 1 में दर्शाया था आर ई एस तालाबों की एक बाढ़ सी आई। जिसको पाने के लिए क्षेत्र के छूट भैय्ये नेताओं में एक होड़ सी लगी हुई थी। हर कोई अपने अपने छूट भैय्ये साथियों को साथ लेकर आर ई एस के कार्यालय में अपनी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हुए किसी ने जिले से तो किसी ने प्रदेश से जुगाड़ लगाया। आर ई एस तालाब निर्माण कार्यों को अपने हाथों या अपने साथियों के हाथ में लेने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते हुए कुछ छूट भैय्ये नेताओं ने आर् ई एस के तालाबों पर अपना कब्जा जमा लिया। नतीजा यह हुआ क्षेत्र के कई तालाबो की हल्की सी बारिश ने पंचायती राज के अधिकारियों के साथ ही साथ पंचायत के यंत्री हो या आर ई एस के उपयंत्री की पोल खोलते हुए करप्शन किस तरह किया गया प्रशासन को सच का आइना दिखाया। क्षेत्र वासियों में आक्रोश देखने को मिल रहा है पंचायती राज के प्रति। वरिष्ठ सूचना के अधिकार के अधिकारियों की जिसे पंचायती राज में सचिव के नाम से जाना जाता है कद्र नहीं करते हुए ग्रामीण सहायक रोजगार को दिए जा रहे हैं दो-दो ग्राम पंचायते। जिस तरह से ग्राम पंचायत सलैया एवं छतरपुर में सक्षम अधिकारी होते हुए ग्रामीण सहायक रोजगार को दिए गए प्रभार।

सच को सच झूठ को झूठ लिखता हूं इसलिए लोगों को मैं बुरा लगता हूं

विगत 5 वर्षों की ग्राम पंचायत सलैया एवं छतरपुर की जांच की जाए तो कहीं तरह के बड़े मामले सामने आ सकते हैं। जिसे बड़े पैमाने पर पंचायती राज के फंड को किस तरह से हजम किया गया।

डॉ जाकिर शेख एडिटर मध्य प्रदेश