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Bhopal News कल से खुलेंगा भोपाल के बाज़ार, नई गाइड लाइंस का करना होगा पालन


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Multapi Samachar

भोपाल। कोरोना संक्रमण (Corona Infection) की चेन तोड़ने के लिए भोपाल (Bhopal)nजिले में 10 दिन का टोटल लॉकडाउन (Total Lockdown) किया गया है।  जो 4 अगस्त की सुबह 5:00 बजे खत्म हो रहा है। लॉकडाउन खत्म होते ही कंटेनमेंट (Containment) को छोड़कर बाजार (Market) पूरी तरह खुल जाएंगे, लेकिन सिनेमा हॉल (Cinema Hall) और जिन (Gym) पर रोक जारी रहेगी। बाजार को लेकर गाइडलाइन (Guidelines) सोमवार को जारी की जाएगी। 

दरअसल कोरोनावायरस के मामलों को देखते हुए 24 जुलाई की रात से ही लॉक डाउन कर दिया गया था। इस दौरान बाजार पूरी तरह बंद कर दिए गए थे सिर्फ सांची डेयरी और मेडिकल को ही छूट दी गई थी। लॉकडाउन की अवधि 4 अगस्त को सुबह 5:00 बजे से खत्म हो जाएगी, इसके बाद बाजार खुल जाएंगे। लेकिन संक्रमण को देखते हुए प्रशासन नए स्तर से गाइडलाइन पर काम कर रहा है। बताया जा रहा है कि पूर्व की तरह मास्क पूरी तरह अनिवार्य रहेगा। इसके साथ ही दुकान में व्यापारियों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। ऐसा नहीं करने पर दुकान को सील किया जाएगा। इसके अलावा कंटेनमेंट में किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। टैक्सी को छूट रहेगी लेकिन बसों को लेकर कल होने वाली बैठक में ही निर्णय लिया जाएगा। होटल रेस्टोरेंट खुल सकेंगे। इसके अलावा उद्योग और निजी कार्यालयों को भी 50 स्टाफ के साथ खोलने की अनुमति दी जा सकती है। सिनेमा जिम और स्विमिंग पूल पर पहले की तरह रोक।

मध्यप्रदेश में 20 विधायकों को कैबिनेट मंत्री और 8 विधायकों को राज्यमंत्री बनाया गया


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश शासन

कैबिनेट मंत्री मध्यप्रदेश

  1. गोपाल भार्गव
  2. विजय शाह
  3. जगदीश देवड़ा
  4. बिसाहू लाल सिंह
  5. यशोधरा राजे सिंधिया
  6. भूपेंद्र सिंह
  7. ऐंदल सिंह कसाना
  8. बृजेंद्र प्रताप सिंह
  9. विश्वास सारंग
  10. इमरती देवी
  11. डॉ. प्रभुराम चौधरी
  12. महेन्द्र सिंह सिसोदिया
  13. प्रद्युम्न सिंह तोमर
  14. प्रेम सिंह पटेल
  15. ओमप्रकाश सखलेचा
  16. ऊषा ठाकुर
  17. अरविंद सिंह भदौरिया
  18. डॉ. मोहन यादव
  19. हरदीप सिंह डंग
  20. राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव

राज्य मंत्री

  1. भारत सिंह कुशवाह
  2. इंदर सिंह परमार
  3. रामखेलावन पटेल
  4. रामकिशोर कांवरे
  5. बृजेंद्र सिंह यादव
  6. गिरीराज दंडोतिया
  7. सुरेश धाकड़
  8. ओपीएस भदौरिया

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल 9584390839

भाजपा ने घोषित किए 24 जिलाध्यक्षों के नाम, बैतूल में आदित्य शुक्ला बने जिलाध्यक्ष


भोपाल. भाजपा ने एक साल पहले बने जिलाध्यक्ष विकास वीरानी को हटाकर सुमित पचौरी को भोपाल शहर भाजपा की कमान दे दी है। भाजपा ने 24 जिलाध्यक्षों की घोषणा की है, इसमें 22 को बदल दिया गया है। सिर्फ सतना में नरेंद्र त्रिपाठी और नरसिंहपुर में अभिलाष मिश्रा को रिपीट किया गया है। इस सूची में युवा मोर्चा में रहे नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इसमें गौरव रणदिवे, दिलीप पांडे, राजू यादव, गौरव सिरोठिया समेत कुछ नेता शामिल हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इन नियुक्तियों में युवाओं को मौका दिया है। ज्यादातर लोगों की उम्र 40 से 50 के बीच है।


सूची इस प्रकार है   

ग्वालियर शहर में कमल माखीजानी व ग्रामीण में कौशल शर्मा, सागर में गौरव सिरोठिया, टीकमगढ़ में अमित नूना, दमोह में प्रीतम लोधी, रीवा में डाॅ. अजय सिंह पटेल, सतना में नरेंद्र त्रिपाठी, शहडोल में कमल प्रताप सिंह,  उमरिया मेें दिलीप पांडे, सिवनी  में आलोक दुबे, नरसिंहपुर में अभिलाष मिश्रा, भोपाल नगर में सुमित पचौरी, होशंगाबाद में माधव अग्रवाल, बैतूल में आदित्य शुक्ला, रायसेन में जयप्रकाश किरार, इंदौर नगर में गौरव रणदिवे व ग्रामीण में राजेश सोनकर, बुरहानपुर में मनोज लदवे, झाबुआ में लक्ष्मण नायक, धार में राजू यादव, आगर में गोविंद सिंह बरखेड़ी, देवास में राजीव खंडेलवाल, मंदसौर में नानालाल अठौलिया और नीमच में पवन पाटीदार को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल

जनता के दुःख में आँसू बहता है पत्रकार, तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की बात भी उठता है पत्रकार


हमने ये कैसी तरक़्क़ी की है ? दिख रहा है पर मदद नही कर पा रहे है

बिना स्वार्थ और लाभ के, जीवन दाँव पर लगा, जनता के आँसुओं को पोंछता और दर्द को बाँटता पत्रकार

गरीब ने बोला, फ़िल्म में बोला जाता तो करोड़ों कमा लेती

Multapi Samachar

नई दिल्ली/भोपाल/इंदौर/ (गजेन्द्रसिंह सोलंकी )

कोरोना के चलते दिल्ली से लोगों के पलायन का कवरेज करते एबीपी न्यूज का पत्रकार, खुद अपने आँसू नही रोक पाया, इससे समझा जा सकता है कि, हज़ारों परिवार के बच्चे, महिलाएँ और पुरुष किस स्थिति से गुज़र रहे होंगे ….जिसकी कल्पना करने से ही रूह काँप जाती है ….,भाषणों से जनता का पेट भरने वाले नेता गायब, पत्रकार और अफसर जान दाँव पर लगा, जनता को बचाने के प्रयास में लगे है…

अफसरों को तनख्वाह और साधन, सुविधाएँ मिलती है, पत्रकार जेब से लगा कर करता है जनसेवा । कई बार तो पुलिस के डंडे और नकचढ़े अफसरों की बदसलूकी भी झेलता है, फिर भी पीड़ित जनता की आवाज उठा कर, उन कानो तक पहुँचता है, जिनकी स्वयं ज़िम्मेदारी है, जनता की बात सुनने की। कोरोना (कोविड-19) के चलते अफसरों को तो मास्क, ग्लोबज, सेनेटाईज़र सहित कई सरकारी सुविधाएँ मिल रही है, या शासकीय व्यय से मिल जाती है, किन्तु पत्रकार अपने स्वयं के वाहनो से, स्वयं के व्यय से, जनता को जागरूक करने के लिए और उनके बचाव के लिए, सैनिकों की तरह अपनी जान को जोखिम में डाल कर डटा हुए है । दिल्ली, यु.पी. में उमड़ी भीड़ के बीच, पेदल अपने गाँवों की तरफ जाते ग्रामीणों के बीच नेता नही, पत्रकार पहुँच रहे है । अगर यह सवाल उठाया जाए क्या सरकार ने पत्रकारों को कोई सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध करवाई है ? तो जवाब मिलेगा नही ! यहाँ हालात ये है कि जिनके ऊपर सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है, वो खुद सुरक्षा कर्मी लेकर घूमते है । जिन ठेकेदारों, उधोगपतियों और आलीशान बिल्डिंगों का निर्माण करने वालों ने गाँव से बुला कर गरीब मजदूरों को उनके हाल पर भूखा-प्यासा छोड़ दिया उनके खिलाफ सरकार ने कार्यवाही क्यों नही की ? क्या शहरों के विकास और निर्माण के लिए गाँवों से शहरो में आए, गरीब मजदूर के वोट, उन शहरों में नही होने के कारण, सरकारों ने उनकी सुध नही ली ? क्या गरीब मजदूर इस बात को समझते है, इसीलिए उन्होंने शहरों से सामूहिक पलायन करके, अपनी जान कोरोना के हवाले कर दी ? पत्रकार अपने दम पर इन मज़दूरों की आवाज बन रहे है, वर्ना शायद प्रशासन डंडे के जौर पर इन्हें कब का तितर-बितर कर देता…! जिन शासकीय कार्यालयों में लॉक डाउन के दौरान काम बंद है, उन शासकीय कार्यालयों के, फेक्ट्री के, ठेकेदारों के वाहनों से गरीबों को उनके गाँवों तक पहुचाने की और उन तक भोजन पहुचाने की सत् बुद्धि नेताओं और अगसरों को क्यों नही आई ? यह कई बार साबित हुआ है कि, पत्रकार वास्तव में सच्चा देश भक्त और समाजसेवी है, जो अपने दम पर, बिना शासकीय सुविधाओं को प्राप्त किए, जनसेवा करता है….सैनिकों की तरह देश की सीमा के अंदर अपनी जान की बाजी लगाता है, कोरोना जैसी महामारी में भी यही कर रहा है, नेता और अफसर इंटरव्यु देते हुए पत्रकारों को अपना ख़्याल रखने का तो कहते है, पर बचाव के साधन और सुविधाएँ नही देते है….

खास बात –

  • जनता के दुःख में आँसू बहता है पत्रकार, तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की बात भी उठता है पत्रकार –

सायकिल पर सोते हुए अपने छोटे से बच्चे को बैठा कर (बच्चा गिर न जाए इसलिए सायकिल के हेंडल से बाँध कर) दिल्ली से 500 किलो मीटर दूर, अपने गाँव की तरफ निकले मजदूर की स्टोरी दिखाते-दिखाते ABP न्यूज के रिपोर्ट की आँखे भर आई, इससे समझा जा सकता है पत्रकार भावनात्मक रूप से भी जनता के दर्द को झेलते और सहते है । पत्रकारों के लिए उनका पेशा सिर्फ वही तक सीमित नही है कि दिखाया, लिखा और भूल जाओ या आगे बढ़ जाओ, पत्रकार कई बार जनता के लिए, उसके हक की लड़ाई, हक दिलाने तक कलम और माईक थामे लड़ता है । बदले में पत्रकार को भ्रष्ट अफसरों, नेताओं, अपराधिधियों के गठजौड़ से कई बार धमकियाँ मिलती है, किन्तु झूठ के आगे पीड़ित जनता दुआ उसकी रक्षा करती है । यही कारण है कि सबसे ताकतवर समझी जाने वाली सर्वोच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों को भी अपनी पीढ़ा और माँग को लेकर मीडिया की शरण में आना पड़ा था, उनमें से एक भारत की सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बन कर रिटायर्ड हुए और अब राज्यसभा के सदस्य है ।

खास बात –

सैनिकों की तरह देश की सीमा के अंदर अपनी जान की बाजी लगाता है, कोरोना जैसी महामारी में भी यही कर रहा है, नेता और अफसर इंटरव्यु देते हुए पत्रकारों को अपना ख़्याल रखने का तो कहते है, पर बचाव के साधन और सुविधाएँ नही देते है….

खास बात –

“ हमने ये कैसी तरक़्क़ी की है ? दिख रहा है पर मदद नही कर पा रहे है “

ऐसी में अगर यह कल्पना की जाए की आप और हम आर्थिक रूप से सक्षम नही है और पलायन करती भीड़ में अपने बच्चों के साथ फँसे है, न घर तक पहुचने का साधन है, न बच्चों को खिलाने के लिए खाना है, न पिलाने के लिए पानी। इस स्थिति में यह भी सोचना मत भूलना की हम और हमारी सरकारें ये सब देख रही है, पर ये कैसी तरक़्क़ी की है कि उन तक खाना, पानी तक नही पहुँचा पा रहे है, जबकि अभी तो वो भारत की राजधानी दिल्ली जैसे शहर की सीमा में ही है या उसके आस-पास है

गरीब ने बोला, फ़िल्म में बोला जाता तो करोड़ों कमा लेती –

जब पलायन कर रहे एक मज़दूर से यह पूछा गया की इतनी भीड़ में हो, कोरोना हो गया तो, उस ग़रीब का जवाब सुन कर घर बैठे आँसू आ गए उसने बड़ी मासूमियत से पत्रकार की कहा साहब यहाँ भूख से मर जाएँगे, गाँव पहुँच कर जीवन की उम्मीद तो है…, अगर यही बात किसी फ़िल्म में हीरों या हीरोईन कहती तो करोड़ों कमा लेती और ये बात उसे जीवन भर पहचान देती, पर यहाँ जीवन का सवाल था !

मुलतापी समाचार

मंत्री पी सी शर्मा का बयान…


कोंग्रेस बहुमत में है।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर बोला हमला की चोर कह रहे है कि हम पर हमला हो जाएगा।

हॉर्स ट्रेडिंग कर रही है बी जे पी और राज्यपाल पर दबाब बना रही है।की जल्दी फ्लोर टेस्ट कराओ।

बंगलुरु मे विधायको की पत्रकार वार्ता पर बोले कि बंदूक की नोक पर उनसे बुलवाया जा रहा है। पत्रकार वार्ता करनी है तो भोपाल आकर करे।

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भोपाल में धारा 144 लागू विधानसभा सत्र तक


धरना, जुलूस, पुतलादहन व आंदोलन पर रहेगा प्रतिबंध-

भोपाल : मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार दिनांक 16 मार्च 2020 से प्रारंभ होकर सोमवार दिनांक 13 अप्रैल 2020 तक चलेगा। उक्त अवधि के दौरान सार्वजनिक शांति व कानून व्यवस्था के मद्देनजर कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट भोपाल श्री तरुण कुमार पिथोड़े द्वारा विधानसभा भवन के आसपास दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 को लागू कर दिया गया है। उल्लेखित क्षेत्रों में किसी भी सार्वजनिक स्थान पर 5 या इससे अधिक व्यक्ति एकत्रित नहीं होंगे। इस प्रकार एकत्रित भीड़ को गैरकानूनी समझी जाएगी एवं उक्त आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

निम्न स्थानों पर धारा 144 प्रभावशील रहेगी :-

1- लिली टॉकीज से रोशनपुरा पहुंचने वाला मार्ग।
2- बाणगंगा से राजभवन एवं जनसंपर्क कार्यालय की ओर प्रवेश करने वाला मार्ग।
3- पुराना पुलिस अधीक्षक कार्यालय से शब्बन चौराहा होते हुए पुरानी जेल मार्ग।
4- स्लाटर हाउस रोड बोर्ड ऑफिस चौराहा।
5- झरनेश्वर मंदिर चौराहा से ठंडी सड़क से 74 बंगले के सबसे ऊपर वाली सड़क से होते हुए रोशनपुरा चौराहा।
6- नवीन विधानसभा क्षेत्र से राजभवन क्षेत्र रोशनपुरा चौराहा से पत्रकार भवन एवं राजभवन की ओर जाने वाले समस्त मार्ग, विधायक विश्रामगृह के सामने वाला रोड, पुराना पुलिस अधीक्षक कार्यालय चौराहे से शब्बन चौराहे से पुरानी जेल का क्षेत्र का समस्त क्षेत्र।
7- मैदा मिल सड़क के ऊपर का समस्त क्षेत्र बोर्ड ऑफिस चौराहा, झरनेश्वर मंदिर गुलाब उद्यान 74 बंगला एवं पत्रकार भवन के नवीन विधानसभा की ओर पहुंचने वाली सड़क विंध्याचल भवन, सतपुड़ा भवन, वल्लभ भवन एवं अरेरा एक्सचेंज का क्षेत्र, ओम नगर, वल्लभ नगर का समस्त झुग्गी क्षेत्र।

इस आदेश के प्रभावशील रहने की अवधि के दौरान कोई भी व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्रों में पुतला दहन, धरना प्रदर्शन, आंदोलन नहीं करेगा। यह आदेश विवाह समारोह, बारात तथा शव यात्रा पर प्रभावसशील नहीं रहेगा। इस आदेश का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति को भादवि की धारा 188 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय गृहमंत्री को लिखा पत्र


मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लिखा पत्र–

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मप्र बीजेपी द्वारा की जा रही विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त की विस्तृत जानकारी दी व बंधक विधायकों की रिहाई कराने का अनुरोध किया।

ताकि लोकतंत्र की रक्षा सुनिश्चित हो।

भाजपा ने राज्यपाल से फ्लोर टेस्ट  मांग की


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कमलनाथ सरकार को बने रहने का संवैधानिक अधिकार नहीं, सबसे पहले फ्लोर टेस्ट कराया जाए

                भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्यपाल महोदय से आने वाले विधानसभा सत्र में सबसे पहले फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है ।प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यह सरकार पूरी तरह विश्वास मत खो चुकी है इसलिए इसे बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह  चौहान नेता प्रतिपक्ष श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचेतक डॉ नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह एवं श्री रामपाल सिंह शामिल थे।

                राजपाल महोदय को दिए ज्ञापन में कहा गया है कि विधानसभा के 22 सदस्यों ने अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। इन सभी 22 विधायकों ने राष्ट्रीय मीडिया में आकर भी इस तथ्य की पुष्टि की है। यह बात आज सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हो चुकी है कि श्री कमलनाथ जी के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस सरकार ने विधानसभा का विश्वास खो दिया है तथा अब उनके लिए राज्य में संवैधानिक तरीके से सरकार चलाना संभव नहीं है।

                मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र 16 मार्च से बुलाया है। उपरोक्त तथ्यों एवं संवैधानिक प्रणाली व प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, यह वर्तमान सरकार का संवैधानिक एवं प्राथमिक कर्तव्य है.कि वह सत्र में सबसे पहले अन्य कोई भी विषय ना लेते हुए अपना बहुमत साबित करने के लिए अपना फ्लोर टेस्ट करवाए। इसके अतिरिक्त विधानसभा में अन्य किसी भी विषय पर कार्रवाई करना या वर्तमान सरकार का बने रहना पूर्णतः असंवैधानिक एवं अलोकतांत्रिक होगा। यह बात सार्वजनिक हो चुकी है कि मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी द्वारा सिर्फ उपरोक्त 22 विधायकों को ही नहीं, बल्कि अन्य विधायकों को भी दबाव में लाने की या लालच देने की निरंतर कोशिश की जा रही है।

                ज्ञापन में राज्यपाल महोदय से  निवेदन किया गया है कि आप में निहित संविधान के अनुच्छेद 175 (2) और अन्य प्रावधानों से मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश एवं निर्देश जारी करने की कृपा करें कि मध्यप्रदेश में अल्पमत में चल रही श्री कमलनाथ जी के नेतृत्व वाली सरकार तुरंत अपना विश्वास सिद्ध करें। तथा इसके लिए निर्धारित की गई तिथि 16 मार्च से पहले ही विधानसभा का सत्र बुलाया जाए। जिसमें केवल विश्वास मत साबित करने के अतिरिक्त और कोई भी विषय ना लिया जाए।

                ज्ञापन में यह अनुरोध भी किया गया कि विश्वास मत पर मतदान ध्वनि मत से ना होकर डिवीजन एवं बटन दबाकर किया जाए तथा सदन की सारी कार्यवाही की आप द्वारा अधिकृत व्यक्ति द्वारा वीडियोग्राफी की जाए।संविधान एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिए हम आपसे आग्रह करते हैं कि संविधान के संरक्षक होने के नाते आप तुरंत विश्वास मत साबित करने के निर्देश जारी करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी प्रकार के बहाने बनाकर सरकार इस सत्र की तिथि को स्थगित ना कर सके, ना विश्वास मत प्राप्त करने की तिथि को आगे बढ़ाए जाना चाहिए।

कोरोना का “कहर”


भोपाल — कोरोना वायरस के कहर को देखते हुए मध्यप्रदेश के सभी स्कूलों, कॉलेज में अस्थायी रूप से अगले आदेश तक छुट्टी की घोषणा कर दी गई है।

राज्य शासन ने नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) एवं उससे जनित बीमारी से बचाव के लिये प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी स्कूलों में अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक अवकाश घोषित किया है।

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने सभी स्कूलों को इस बारे में निर्देश जारी किये हैं। निर्देश में कहा गया है कि कक्षा पाँचवी और आठवीं की परीक्षाएँ पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार आयोजित की जायेंगी। कक्षा 10वीं और 12वीं की वार्षिक परीक्षाओं (चाहे वे किसी भी सक्षम बोर्ड/प्रबंधन के तत्वावधान में आयोजित की जा रही हों) का आयोजन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार किया जायेगा।

अवकाश अवधि में समस्त शासकीय विद्यालयों में समस्त शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय स्टाफ विद्यालय में उपस्थित रहकर शासकीय और अकादमिक कार्य संपादित करेंगे। निजी विद्यालय शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय स्टाफ की विद्यालय में उपस्थिति के संबंध में अपने स्तर पर स्वविवेक से निर्णय ले सकेंगे।

जनसम्पर्क विभाग स्कूल शिक्षा विभाग भोपाल

मुख्यमंत्री कमलनाथ पहुंचे राजभवन, राज्यपाल से की मुलाकात


भोपाल — मुख्यमंत्री कमलनाथ राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने के लिए राजभवन पहुंचे। राजभवन की ओर जाते हुए मुख्यमंत्री ने विक्टरी का साइन दिखाया, मुस्कान से भरे चेहरे से ऐसा लग रहा था कि अभी कांग्रेस की सरकार को कोई खतरा नहीं है।

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मुलाकात में सबसे पहले होली की शुभकामनाएं और बधाई दी। और राज्य में चल रहे सियासी संग्राम की जानकारी दी और विधायकों को वापस बुलाया जाए की बात कही।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि मैं अभी 10 साल तक मुख्यमंत्री रहूँगा और हमारी सरकार को कोई खतरा नही है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी पर खरीद फरोख्त कर सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया।