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श्रीमद् भागवत कथा प्रारंभ रोंढा में उमड़ रहा धर्म प्रेमियों का सैलाब


मुलतापी समाचार बैतूल – बैतूल मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ग्राम रोंढा में स्व. श्री सुजल मालवी की स्मृति में मालवी परिवार द्वारा संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है जिसका प्रारंभ 14 मार्च शनिवार रंगों के त्यौहार रंगपंचमी के दिन से होने जा रहा है। ग्राम रोंढा की पावन धरा में कथावाचक परम पूज्य पंडित श्री मयंक कृष्ण जी महाराज श्री धाम वृंदावन उत्तर प्रदेश के मुखारबिंद से होने जा रहा है। जिसे सुनने के लिए ग्राम के धर्मप्रेमी भक्तजनों का सैलाब उमड़ रहा है।

पहले दिन ग्राम की धरा में मंगल कलश यात्रा निकाली गई जिसमें सैकड़ों स्थानों पर धर्मप्रेमी बंधुओं द्वारा श्रीमद्भागवत पुराण का पूजन किया गया, फिर मंगल कलश यात्रा कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। जहां श्रीमद् भागवत कथा का आगाज हुआ।

कथा शिव मंदिर प्रांगण में प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संस्कृत पाठ और दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। जिसका समापन 20 मार्च 2020 दिन शुक्रवार को होगा। आयोजक यजमान मालवी परिवार ने ग्राम के अधिक से अधिक धर्म प्रेमी बंधुओं से भागवत कथा में पहुंचने का आग्रह किया है।

मंगल कलश यात्रा YouTube पर देखे। Link— https://youtu.be/L0ookNihYI4

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल

आज भी जीवित है वर्षों पुरानी परम्परा



रोंढा बैतूल – होली का त्यौहार अपने अंदर अनेक विविधताओं को समेटे हुए हैं। भारत के हर प्रदेश, क्षेत्र व स्थान पर होली के त्यौहार की एक अलग परंपरा है। वही जिला बैतूल मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम रोंढा में होलिका दहन के तीसरे दिन यानी चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की तीज के दिन धुरेड़ी खेली जाती है जिसमें रंग और गुलाल लगाकर होली का त्यौहार मनाने की परम्परा है।

कुछ स्थानों पर होली के पांच दिन बाद पंचमी को रंगपंचमी खेलने की परंपरा भी है। धुरेड़ी पर गुलाल लगाकर होली खेली जाती है तो रंगपंचमी पर रंग लगाया जाता है। खासतौर पर इस दिन बच्चों, महिलाओं और युवकों की टोलियां गाँव की गलियों से निकलती है और रंग,गुलाल लगाकर खुशियों का इजहार करती है। रंगपंचमी होली का अंतिम दिन होता है और इस दिन होली पर्व का समापन हो जाता है।

इसी दिन गांव में दोपहर 12 बजे के बाद मेला भी लगता है जिसमें आसपास के दर्जनों गांवों के लोग सम्मिलित होते है। मेले में “जेरी तोड़ने” की भी परम्परा है। जेरी की लम्बाई लगभग 50 फीट है, जिस पर एक व्यक्ति जेरी के ऊपर चड़कर जेरी के शिखर पर रखे नारियल और पैसे की गठरी लाता है और नारियल को भगवान के चरणों में अर्पित करता है एवं पैसे उपहार के तौर पर स्वयं रखता है। इसके बाद मेले के समापन की घोषणा भी हो जाती है।

पुरानी परम्परा के अनुसार यदि जेरी नही टुटती है तो जतरा समाप्त नही होती है और अगले दिन भी जतरा लगी रहती है या पंचायत के आदेशानुसार समाप्त भी की जा सकती है। जतरा में आदिवासी समुदाय की महिलाएँ और पुरुषों के द्वारा ढोलक, मंजीरा और अन्य वाद्ययंत्रों को बजाते हुए, नाचना एवं फाग गीत गाया एवं फाग माँगने की अनुठी परम्परा है।

जिसे गाँव के लोग अपने गांव की भाषा में “जतरा” कहते है। और जतरा में संतरा, अंगुर, गाठी, नड्डा, फुटाना, खेल-खिलौने, आईस्क्रीम, गुब्बारे,झूलाघर सहित अन्य बच्चों के लिए सामान, महिलाओं के लिए चूडिय़ां, कंगन, अन्य जेवरात, चप्पल-जुते, घरेलु सामान जिसमें किचन सामग्री मुख्य रूप से होती है। पान-गुटखा, चाय का ठेला, गुपचुप के ठेले, समोसे, बड़े, जलेबी, नमकीन और विभिन्न रंगों की मिठाई की दुकानें लगती है जिससे जतरा की शोभा चौगुनी बड़ जाती है।

प्रदीप डिगरसे बैतूल मुलतापी समाचार

महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया गया


डिगरसे परिवार सैकड़ों वर्षों से एक साथ मनाता आ रहा है महाशिवरात्रि का त्यौहार

हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है “महाशिवरात्रि” । महाशिवरात्रि का पावन त्यौहार हिन्दू धर्म के सभी परिवारों द्वारा मनाया जाता है परन्तु रोंढा में बसे डिगरसे, अपने आधा सैकड़ा परिवार के साथ महाशिवरात्रि के त्यौहार को मनाने में अपनी अलग ही पहचान बनाए है। महाशिवरात्रि के इस पावन त्यौहार को सैकड़ों वर्षों पहले बनाई गई पुरानी रितिवाज के अनुसार आज भी मनाई जा रही है।

इस त्यौहार को मनाने के लिए पूरे गांव से डिगरसे परिवार का प्रत्येक सदस्य चाहे वह बच्चे, महिला, पुरुष हो चाहे वह बुजुर्ग हो सभी इस त्यौहार को मनाने के लिए रोंढा में स्व. श्री गोविन्दराव डिगरसे के अनुज पुत्र जशवंत डिगरसे के निवास पर एकत्रित होते है। सभी सदस्यों द्वारा भगवान भोलेनाथ और पित्र देव को साक्ष्य मानकर पूजन किया जाता है, और ” हर बोला हर-हर महादेव ” के स्वरों से आसपास का वातावरण प्रफुल्लित हो जाता है।

इसी त्यौहार पर एक वर्ष के भीतर जन्में बच्चों की चोटी उतारने का कार्य भी समपन्न कराया जाता है। इस कार्य को डिगरसे परिवार के पुजारी जशवंत डिगरसे और उनकी धर्मपत्नी शिवकली बाई डिगरसे द्वारा कराया जाता है।

इसके बाद पूजन अंतिम चरण में होता है और सभी परिवार के छोटे सदस्यों द्वारा बड़ें सदस्यों का आशिर्वाद प्राप्त करते है अंत में नारियल, गुड और मिठाई का प्रसाद बाटँकर सभी परिवार के सदस्य अपने घर के लिए चले जाते है।

यह पावन त्यौहार अपनी तिथि के दो दिन पूर्व मनाने का कारण भी प्राचीन है क्योंकि प्राचीन समय में भगवान भोलेनाथ के दरबार यानी छोटा महादेव भोपाली या बड़े महादेव पचमढ़ी जाने के लिए बैलगाड़ी का प्रयोग किया जाता था। जहाँ पर पहुँचने के लिए लगभग एक-दो दिन का ही समय लगता था, और ऐसे में परिवार के साथ महाशिवरात्रि का त्यौहार नही मना सकते थे इसी कारण इस त्यौहार को दो दिन पहले ही मना लिया जाता है ताकि छोटा महादेव भोपाली या बड़े महादेव पचमढ़ी सही समय पर पहुँचा जा सके।

मुलतापी समाचार

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन अन्तर्गत प्रशिक्षण का हुआ आयोजन


कृषि विभाग की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत प्रशिक्षण का आयोजन ग्राम पंचायत रोंढा में किया गया, जिसमें कार्यालय उपसंचालक कृषि किसान कल्याण तथा कृषि विकास बैतूल के तकनीकी सहायक प्रकाश खातरकर ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं से किसान साथियों को अवगत कराया जिसमें मुख्य रूप से स्प्रिंकलर, पाईप लाईन, ड्रिप, बायोगैस, सीडड्रिल, रोटावेटर एवं अन्य कृषि यंत्रों पर अनुदान संबंधी जानकारी साक्षा की। जिसमें ग्राम के कृषि विभाग अधिकारी के. एस. चौहान, सरपंच, पटवारीे, सचिव, रोजगार सहायक सहित किसान भाई उपस्थित थे।